वाह रे कैसी है सरकार

| | वाह रे कैसी है सरकार | |

रोज उखड़ती पटरी है

पर बुलेट ट्रेन तैयार,

वाह रे कैसी है सरकार,

डीजल-पेट्रोल लेने जाओ,

बढे दाम हर बार

वाह रे कैसी है सरकार,

घर से निकलो बाहर देखो

पता चलेगा यार,

वाह रे कैसी है सरकार,

मोदी को सोम को बुध कहे तो

कहते सभी बुधवार

वाह रे कैसी है सरकार,

अब विपक्ष कमजोर पड़ा है,

सुनु नहीं ललकार

वाह रे कैसी है सरकार,

रहे दवा पर मिले नहीं

सब दवा हुआ एक्सपायर

वाह रे कैसी है सरकार,

काम नहीं मिलता हो जब

तब उठा न ले हथियार

वाह रे कैसी है सरकार,

उचित दाम ना काम का मिलता

छोड़ रहा घर बार

वाह रे कैसी है सरकार,

कल नेता झोपड़ियों में थे

महल हुआ तैयार.

वाह रे कैसी है सरकार,

काम करे इक बार मगर

कहे उसे सौ बार

वाह रे कैसी है सरकार,

 

 

राजेश पाठक

राजेश कुमार पाठक,
राष्ट्रिय कवि-संगम,
(प्रदेश सचिव, झारखण्ड ईकाई),
प्रखण्ड साख्यिकी पर्यवेक्षक,
सदर प्रखंड, गिरिडीह,
सम्प्रति : दुमका प्रखण्ड, झारखंड

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