कविता
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|| वीर ||

नमन करो उन वीरों को जो लौट कभी ना आये |
आँखों में सपनों के आंसू ले कर दीप जलाएं ||

चलो फिर आज कहता हूँ, कहानी मैं जवानों की|
कहानी है यही इनकी, कहानी जो दीवानों की||
कहर बनकर के जा टूटे, जो इनपे वार करता है|
अगर दुश्मन झुकाए सर, तो उनसे प्यार करता है||

कहानी और भी इनकी सुनाने आज आया हूँ |
मेरे सीने में जो दिल है लुटाने आज आया हूँ ||
लुटाऊं आज मैं सब कुछ बढाऊं हौसले हरदम |
रहे जो फासले अबतक हुए वो फासले भी कम ||

दिखाई सरफरोशी दे तुम्हारी है यही दौलत |
दिखे दुश्मन तू देता है, नहीं थोरी सी भी मोहलत ||
तेरे अंदाज से दुश्मन को पानी भी नहीं मिलता |
हिला देते हमेशा तुम, हिलाए जो नहीं हिलता ||

अपने हाथ से ही अपनी तू तक़दीर लिख डालो |
कोई न गीत गता हो, अपना गीत खुद गा लो ||
कोई जब मांग बैठे तो, न अपना गीत लौटना |
छिड़े जब जंग दुश्मन से, हमेशा जीत कर आना ||

तुझे कहता है जो शीशा, उसे कहने दो तुम शीशा |
उसे मालूम ना है कि, तेरा शीशा भी है कैसा ||
तेरे दम से ही तो अब आज, सब गम दूर होता है |
चले शीशे पे जो पत्थर वो पत्थर चूर होता है ||

निशाँ कदमो के तेरे हों वहां तक दिख रहा भारत |
बढाओ आज क़दमों को, लिखो न आज कोई ख़त ||
मैं चाहूं नाप लो धरती, जो कब्जे में हैं दुश्मन के |
नहीं तो आज जा कह दो, रहें भारत के ही बनके ||

राजेश पाठक
प्रखण्ड सांख्यिकी पर्यवेक्षक
गिरिडीह सदर प्रखण्ड.

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  • Suresh Kumar

    Good poem

कविता
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क्षणिकाएं : ०४

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