अथ यू.पी.-बिहार उपचुनाव कथा भाषा टीका

मैं घोषित राष्ट्रवादी हूँ। और भाजपा मेरी आशाओं के केंद्र में है जिसका फिलहाल मेरे पास कोई विकल्प उपलब्ध नही है। समान नागरिक संहिता, धारा 370 का निर्मूलन, राम मंदिर निर्माण, हिंदुत्व के पक्ष में खड़े होने का दमखम, छद्म पंथनिरपेक्षता के नाटक से दूरी, लम्बी अवधि की राष्ट्रहित की योजनाओं पर चिंतन और उनका कार्यान्वयन, सुरक्षित सीमाएं, देश के दुश्मनों को मुँहतोड़ जवाब एवं जबरन देश में घुस आये घुसपैठियों की वापसी का प्रयास आदि आदि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें देर-सबेर भाजपा द्वारा ही अंजाम तक पहुंचाना मुमकिन है। शेष से तो उम्मीद करना ही व्यर्थ है।

अतः गोरखपुर में भाजपा की हार से आहत तो हूँ परन्तु विक्षिप्त नही हूँ कि संगठन को अनाप-शनाप बकूँ। यहाँ जातिवादिता ने हिंदुओं को दो फांड़ में बांट दिया है। अन्यथा शेष सब यथावत है। नेतृत्व अवश्य मंथन कर रहा होगा। मुझे उन पर विश्वास है। अपनी आप जानें। मेरा उत्साह और धैर्य यथावत है।उस पर रत्ती भर भी फ़र्क़ नही पड़ा है। 2019 के बड़े युद्ध सेे पहले सम्भवतः यह झटका भी जरूरी ही था। हम फिर लड़ेंगे और जीतेंगे।

एक बात और पढिये, बोलिये और गुनिये भी, एक मशहूर किस्सा है। एक बार किसी राज्य के राजा ने एक भिखारिन से शादी कर ली। राजा भिखारिन से अत्यंत प्रेम करता था। उसने उसके लिए दासियों की फौज खड़ी कर दी। खाने के लिए रोज 56 पकवान परोसे जाने लगे। सोने के लिए शाही बिछौना लगाया गया। गद्देदार पलँग। हर सुख सुविधा।

लेकिन कुछ दिनों में रानी साहिबा बीमार पड़ने लगी। शरीर से दुबली होने लगी। धीरे धीरे रानी साहिबा ऐसी बीमार पड़ी की बिस्तर पकड़ लिया। राजा ने चिंतित होकर एक से बढ़कर एक वैद्य बुलाए, लेकिन रानी की तबियत ठीक न हो सकी। थक हारकर राजा ने एलान कर दिया जो रानी को ठीक करेगा, उसे मुँह मांगा पुरुस्कार दिया जाएगा। एलान सुनते ही एक बूढ़ा राजा के पास इलाज हेतु पहुंचा। पूरी बात सुनने के बाद बूढ़े ने कहा- महाराज रानी साहिबा का शाही बिछौना हटाकर जमीन पर चटाई लगाई जाए। दासियों को तुरन्त हटा दिया जाए। रानी साहिबा को बासी और बचा खुचा खाना दिया जाए। 7 दिनों बाद में फिर आऊँगा। राजा को बूढ़े की बात सुन बड़ा अचरज़ हुआ। किंतु वैसा ही किआ गया।  7 दिनों के अंदर ही रानी साहिबा टनटनाट होकर , पूर्ण स्वस्थ्य हो गई।

मित्रो फूलपुर, गोरखपुर में भी यही हुआ। योगी ने ताबड़तोड़ काम शुरु किए। भृष्टाचार कम कर दिया। बोर्ड परीक्षा की नकल रोक दी। 80 % सड़को के गड्ढे भर दिए। 14 सालो बाद मोहर्रम बिना हिंसा के बना। होली बिना डर के साये में धूमधाम से मनी। दिवाली पर पहली बार अयोध्या जगमगाया। जंगलराज से मुक्ति मिली। अपराधी बिलो में छुप गए। कैराना में हिन्दू वापसी हुई। योगी जी ने सिर्फ 1 साल में बहुत कुछ दे दिया।बस यही योगी जी आपने गलती कर दी। जिस जनता को 14 साल से भृष्टाचार की आदत पड़ी हो। बच्चों को नकल से पास कराकर भविष्य बनाने की आदत हो। सड़क के गड्डो पर उछलने की आदत लगी हो। जिन्हें मोहर्रम पर हिंसा में अपने घर जलवाने, दुकान तुड़वाने में चैन मिलता हो। डर के साए में दुर्गा विसर्जन, होली की आदत हो। दिवाली पर 14 सालो से सूनी अयोध्या देखने की आदत पड़ी हो। और सबसे बढ़कर योगी जी जिन लोगो को जातियों में बंटकर खुद का, धर्म का, देश का बंटाधार करने की चुल पड़ गई हो। वे लोग तो आपके कामो के बाद बीमार पड़ेंगे ही। नतीजा वोट डालने घरों से ही न निकले। और जो निकले वो अपनी ही बर्बादी की बटन दबा आए। अतः योगी जी राजनीति का लंबा अनुभव होने के नाते, आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है, ये राजनीति है। धीरे धीरे बदलाव लाइये। यहां हिन्दुओ को एकदम से ‘घी’ हजम नही होता। उड़ेल दिया फूलपुर, गोरखपुर में। बाकी हम राष्ट्रवादी हमेशा की तरह आपके साथ है।

नीरज कुमार बरनवाल

नीरज कुमार बरनवाल, स्टूडियो आम्रपाली, मेन रोड फुसरो बाज़ार, बोकारो ८२९१४४ झारखण्ड

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