कोई सुन रहा है इन बेजुबानों की… और आप?

बिजली के नंगे तारो पर अक्सर पंछियों की बैठक होती है, और इन खतरों से अनजान पंछी कभी कभी बिजली के झटके से घायल भी हो जाया करते हैं। जिन्दगी किसी की भी हो, अनमोल होती है, चाहे वो इंसान हो या फिर जानवर। ये कहना है पेशे से व्यवसायी फुसरो बाज़ार मेन रोड निवासी श्री अंक्ति मित्तल का.

घायल पक्षी के साथ अंकित मित्तल, मेन रोड फुसरो

अक्सर अंकित जब पंछियों को इस प्रकार से घायल होते देखते हैं तो इन नादान परिन्दो से कभी यह सोचकर मुंह नहीं फेरा कि ये बस परिन्दे है, न कोई नाम है इनका, न ही कोई पहचान है इनकी और न कोई पता ही। न कोई पूछताछ होगी इनके मृत् शरीर की। पर अपने कोमल हृदय की आवाज सुनकर आज तक 9 पंछियों को बचाया इन्होंने.

फुसरो सिटी को दिए गए एक्स्क्लूसिव इंटरव्यू में अंकित ने आगे बताया कि यहाँ कोई ऐसी संस्था नहीं जो इस प्रकार के जानवरों अथवा पक्षियों के लिए कोई काम करती हो। साथ ही उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनकी कोशिश है लोगों को इसके बारे में जागरूक बनाने की और कुछ समय बाद ही सही लोगों में जागरूकता आयेगी और यूं ही कोई जानवर और पक्षी नहीं मर जाया करेंगे. करते हे कि यह नेक कोशिश आप भी करे क्योंकि यह भी हमारे जीवन का एक अनमोल हिस्सा है.

सच है, इसे कहते हैं मानवता. जरुरी नहीं कि कल से आप भी सिर्फ पक्षियों को बचाने में ही लग जाएँ, पर जरुर आपको ऐसे ही किसी कार्य में स्वयं को सम्मिलित कर ही लेना चाहिए जिसका सामाजिक सरोकार और मानवता, देश-धर्म से सीधा सम्बन्ध हो. आप स्वयं को किसी भी पेशे अथवा परिवेश में पाते हों, अपनी प्राथमिकताओं को सुनिश्चित करें और समाज और देश हित में जो भी बन पड़े जरुर करें.