डी.ए.वी. ढोरी में मनाई गयी महात्मा एन. डी. ग्रोवर की पुण्य तिथि

डी. ए. वी. पब्लिक स्कूल, ढोरी में मंगलवार को महात्मा एन. डी. ग्रोवर की पुण्य तिथि मनायी गयी। उक्त अवसर पर वैदिक हवन का आयोजन किया गया। तत्पश्चात स्व. ग्रोवर साहब की तस्वीर पर विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक- शिक्षिकाओं तथा छात्र प्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित की। डा. आर. सी. झा ने उनके व्यक्तित्व एवं सुकृत्यों पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने झारखण्ड सहित 8 राज्यों में लगभग 200 विद्यालयों की स्थापना की।

शिक्षा का अलख जगाने के साथ-साथ आर्यसमाज का विस्तार, प्रचार व प्रसार भी किया। वे गरीबों के मसीहा के रूप में जाने जाते हैं। प्रचार्य श्री एस. कुमार ने बताया कि आर्य समाज की प्रखर विभूति, स्वतंत्रता सेनानी, रसायन शास्त्र के प्रकांड ज्ञाता, तथा जीवट प्रतिभा, कर्मठ व अनुशासित व्यक्तित्व के स्वामी थे स्व. ग्रोवर। 15 नवंबर, 1923 में इशाखेल (पाकिस्तान) पंजाब प्रांत में जन्मे ग्रोवर साहब ने 1957 से आर्य समाज को अपनी सेवाएँ दी। वे हिसार व पंजाब में डी. ए. वी. पब्लिक स्कूल के प्राचार्य रहे। तदन्तर राँची, पटना जोन के क्षेत्रीय निदेशक तथा डी. ए. वी. काॅलेज मैनेजिंग कमिटी के उपाध्यक्ष बने।

उन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी समाज के शोषित दलित और उपेक्षित वर्ग की सेवा में लगा दी। ऐसे महामानव ने असंख्य विद्यालय खोलकर समाज में शिक्षा के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने का कार्य किया। अंततः उन्होंने 6 फरवरी 2008 को अंतिम साँस लेकर इस मायावी संसार से विदा हो गये। उनके पद्चिह्नों पर चलना हम सबके लिये एक प्रेरणा स्त्रोत है। कार्यक्रम की उद्घोषणा श्री अशोक पाल ने किया। कार्यक्रम की सफलता में श्री एस. के. शर्मा, श्री राकेश कुमार, सुश्री श्वेता, श्री पंकज यादव तथा श्रीमती मौसमी गुप्ता का सराहनीय योगदान रहा।

छाया / सूत्र : बेरमो आवाज

कांग्रेस पार्टी का झंडा लगाओ अभियान

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के निर्देशानुसार फुसरो नगर परिषद् क्षेत्र, वार्ड नंबर 25, 26 (फुसरो डॉ कस्तुरी मुखर्जी अस्पताल मुहल्ला, बेरमो प्रखण्ड रोड़ मुहल्ला, फुसरो मेन रोड बंगाली मुहल्ला,अवध सिनेमा रोड) में कांग्रेस जनों के आवासों व दुकानों पर कांग्रेस पार्टी का झंडा लगाने का कार्यक्रम किया गया।

प्रभारी सच्चिन्द सिंह के द्वारा संचालित किया गया था।कांग्रेस के वरीय नेता महारुद्र नारायण सिंह ने कहा कि कार्यकत्ता ही पार्टी के रीढ़ है, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रति विश्वास बढ़ रहा है कहा कि कार्यकत्ता ही पार्टी के रीढ़ है, उनके बदौलत ही चुनाव जीता जा सकता है।

मौके पर बेरमो प्रखण्ड अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह, उत्तम सिंह, परवेज अख्तर, आबिद हुसैन, छेदी नोनिया, जसिम रजा, कृष्ण कुमार चाण्डक, केदार सिंह, रामवली चैहान, ब्रिजेश सिंह, बृजमोहन, शम्भु यादव, मनोज शर्मा, मो.नसीम, बिनोद चैरासिया, शंकर पासवान, दीपक कुमार सिंह,रामाशीष महतो, अखिलेश सिंह, गोपाल गुप्ता, मो. साकिर हुसैन, सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

सूत्र / छाया : बेरमो आवाज

फुसरो ओवरब्रिज पर हो सकता था बड़ा हादसा, पलटा ट्रक

राकेश मिश्रा की स्पेशल रिपोर्ट :

बीते देर रात निर्मल महतो चौक से होते हुए डुमरी की ओर जाने के क्रम के 2mm टी.एम.टी. से लदा एक अशोक लीलैंड ट्रक (नंबर RJ-19-GF-2087) जैसे ही ओवरब्रिज पर चढ़ा और चढ़ते ही मुड़ा, वह पलट गया और सरिया के कुछ छल्ले हाई मास्ट लाइट के पास जा गिरे, ट्रक तो लटक गया पर नीचे भीड़ नहीं थी इसलिए बस एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया.

समाचार लिखे जाने तक दामोदर नदी हिंदुस्तान पुल से लेकर पूरे नया रोड और उधर ओवरब्रिज पार चपरी तक भयंकर जाम की स्थिति बनी है प्रशासन की मुस्तैदी बनी है और एम्बुलेंस को रास्ता दिया जा रहा है. क्रेन की सहायता से एक-एक कर सरिया के छल्लों को नीचे किया जा रहा है, ट्रक को हटाने की कवायद जारी है, पर ट्राफिक खुलने कुछ वक्त लग सकता है.

हो सकता था बड़ा हादसा. फुसरो का यह इलाका काफी भीड़-भाड़ वाला होता है, प्रायः ही यहाँ से बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ और भारी वाहनों का आवागमन बदस्तूर जारी रहता है, ऐसे में कभी भी इस प्रकार का हादसा हो सकता है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है. चढ़ाई पर तेजी से बिना अपना पिकअप खोये चढ़ने के क्रम में और तेजी में मुड़ने के कारण हुआ यह हादसा.

शुरू से ही इस ओवरब्रिज की इंजीनियरिंग को लेकर सवाल उठते रहे हैं, कि इसकी ड्रापिंग सही नहीं है. पर हमारे कंस्ट्रक्शन करने वाली कंपनी को इससे क्या मतलब जैसे-तैसे मार्च तक कोटा पूरा करना था इसलिए आनन फानन में ओवरब्रिज पूरा कर डाला. भीड़-भाड़ होने से बड़ी गाड़ियों की रफ्तार काम ही रहती है तो अब तक आसानी से काम चलता आया. पर इन दिनों इस मार्ग पर आवाजाही बढ़ी है. यह सड़क N.H.-2 G.T. Road से जुड़ी रहने के कारण इस पर अवागमन बहुत ही ज्यादा है.

पत्रकार संगठन को मजबूती देने का प्रयास तेज, 3 फरवरी से सदस्यता अभियान शुरू

दिनांक 31-01-2018 को करगली स्थित अतिथिगृह में दी प्रेस क्लब बोकारो के प्रतिनिधियो के संग बेरमों क्षेत्र के विभिन्न अखबार व चैनल से जुडे प्रमुख प्रतिनिधियो की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार राकेश वर्मा ने की। यहां संगठन के निर्वाचन समिति के प्रमुख रामप्रवेश सिंह, शंभू पाठक और विल्सन फ्रांसिस ने उपस्थित पत्रकारो को जानकारी देते हुए बताया कि जिला में कलमकारों का एक सशक्त संगठन बने। इसको लेकर एक कारगर पहल अनुभवी और युवा वर्ग के प्रेस प्रतिनिधियो द्वारा किया जा रहा है। संगठन का बेरमो क्षेत्र के सदस्यता अभियान को लेकर विजय कुमार सिंह और मनोज शर्मा को सर्वसम्मति से प्रभारी नियुक्त किया गया है।

इस अवसर पर पत्रकार ज्ञानेंदू जयपुरियार ने कहा कि बेरमो कोयलांचल के पत्रकार साथियो का सदैव जिला के गठित किये जाने वाले विभिन्न प्रकार की पत्रकार समितियो में अहम भागीदारी रही है। दी प्रेस क्लब बोकारो की नवगठित किये गये समिति के सदस्यो का अनुरोध है कि पूर्व की तरह इसमें सकरात्मक भागीदारी हो। पत्रकार संजीव कुमार ने बोकारो में सभी कलमकारो को एक मंच में लाये जाने वाले प्रयासो से उपस्थित सदस्यो को अवगत कराया।

पत्रकार राकेश वर्मा ने कहा कि बोकारो जिला में पत्रकारो का एक मजबूत संगठन हो। यह सबकी आंतरिक इच्छा है। लेकिन दुखद परिस्थिति है कि सामूहिक रुप से एकता नहीं बन पा रहा है। उन्होने कहा कि 1 फरवरी को अन्य पक्ष के सदस्यो से बातचीत कर एकजुट करने का प्रयास करेगें। यहां सर्व सम्मति से निर्णय हुआ कि अगामी 3 फरवरी को अफसर्स क्लब कारगली में बेरमों अनुमंडल से जुडे पत्रकारो की सामूहिक बैठक कर सदस्यता अभियान की शुरुआत की जायेगी।

साथ ही नवगठित समिति में संपूर्ण क्षेत्र की  भागीदारी कैसे हो, इसके लिए सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया जायेगा। इस अवसर पर बोकारो से बसंत मधुकर, मनोज विशाल, मृत्युंजय कुमार, संजय कुमार, अजय कुमार सिंह, सिद्धार्थ कुमार, विनय कुमार सिंह, अनिल पाठक, रघुबीर प्रसाद, सुभाष ठाकुर, मोहित नंदन सहित कई पत्रकार बन्धु प्रमुख रुप से उपस्थित थे।

सूत्र / छाया : बेरमो आवाज

सी.सी.एल. से सेवानिवृत कर्मियों को दी गई विदाई

सी.सी.एल. बी.एंड के. प्रक्षेत्र के करगली आॅफिसर्स क्लब में बी.एंड के. प्रक्षेत्र से 37 व सी.सी.एल. ढोरी प्रक्षेत्र के ढोरी जी.एम. सभागार में 19 सेवानिवृत कर्मियों को सम्मान समारोह आयोजित कर विदाई दी गई। बी.एंड के. में ए.एफ.एम. ए.के. बह्मचारी ने सभी सेवानिवृत कर्मियों को माला पहनाकर एवं उपहार देकर सम्मानित करने के साथ-साथ सभी की उज्जवल भविष्य की कामना की।

उक्त अवसर पर एक ओर जहाँ बी. एंड के. प्रक्षेत्र के विदाई समारोह में एस.ओ.पी. प्रतुल कुमार, सी.एस.आर. अधिकारी निखिल अखोरी, यूनियन प्रतिनिधि गौरख प्रसाद सिंहा, गजेन्द्र प्रसाद सिंह, झब्बू पांडेय, जे.के. सिंह, नान्हू राम आदि मुख्य रुप से उपस्थित थे, वही दूसरी ओर ऐसे ही समारोह में ढोरी जी.एम. सभागार में एस.ओ.पी. विजय कुमार, ने सभी सेवानिवृत कर्मियों को माला पहनाकर व उपहार देकर सम्मानित किया. एवं कहा कि सभी सेवानिवृत कर्मी बेदाग व निरोग हैं, यह इनकी बड़ी उपलब्धी है। मौके पर प्रशासनिक पदाधिकारी एस.के. सिंह, संतोष मंडल, अरुण कुमार, बहादुर मुंडा, हरेन्द्र सिंह, आदि लोग उपस्थित थे।

सूत्र / छाया : बेरमो आवाज

डी.वी.सी. के पाॅवर प्लाटों को नहीं होगी कोयले की कमी

चंद्रपुरा मे बंद पुरानी इकाईयों के स्थान पर 500×2 मेगावाट की नई इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह और ऊर्जा सचिव अजय कुमार भल्ला से मिलकर दिया है। क्योंकि चंद्रपुरा मे कोयला, पानी, रेल लाइन, कालोनी आदि सभी बुनियादी सुविधा उपलब्ध है। इसलिए कम लागत मे नई इकाई स्थापित हो सकती है। नई इकाईयों की स्थापना से पुरानी बंद इकाईयों के छँटनीग्रस्त ठेका श्रमिकों को समायोजित करने का अवसर मिलेगा एवं फिक्सड काॅस्ट शेयर होने से सात व आठ नं. इकाई का उत्पादन लागत घटेगा तथा इस क्षेत्र के लोगों का समाजिक आर्थिक विकास जारी रहेगा। साथ ही डीवीसी के पावर प्लांट को पर्याप्त कोयला की आपूर्ति के लिए ऊर्जा सचिव का ध्यानाकर्षण कराया गया है।

उपरोक्त बातें गिरिडीह सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय ने डी.वी.सी. पेंशनर्स ऐसोसिएशन के द्वारा हिंदी साहित्य परिषद चंद्रपुरा मे आयोजित मिलन समारोह मे कहा। इस बाबत ऊर्जा सचिव अजय कुमार भल्ला ने सांसद के प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया है कि, नईं इकाईया स्थापित करने हेतू ऊर्जा मंत्रालय के उच्चाधिकारियों का दल यथाशिघ्र चंद्रपुरा का भ्रमण कर तमाम संभावनाओं पर विचार करेगा तथा कोयले की कमी नही होने दिया जायेगा। श्री पाण्डेय ने पेंशनरों को आश्वस्त किया कि उनके सभी समस्याओं का यथासंभव निदान कराया जायेगा।

डीवीसी के पेंशनरों के हित मे सांसद के प्रयासों से अवगत कराते हुए जिप सदस्य सह डीवीसी ठेका मजदूर संघ के महामंत्री भरत यादव ने कहा कि, डीवीसी के साथ साथ डीवीसी मे कार्यरत कर्मचारियों, ठेका श्रमिकों, व्यवसायियों, स्थानीय विस्थापितों आदि के हित में सांसद वगैर किसी भेदभाव के सदैव तत्पर रहे है। सांसद के प्रयास से यथाशिघ्र सप्लाई मजदूरों का वेतन पुनरीक्षण और पदोन्नति होगा। चंद्रपुरा मार्केट के दुकानों मे डीवीसी के द्वारा विधुत आपूर्ति के लिए व्यवस्था किया जा रहा है। इस अवसर पर पेंशनरों के द्वारा सामूहिक लिट्टी-चोखा पार्टी का आयोजन किया गया । मौके पर भाजपा नेता प्रवीण सिंह, संजय प्रसाद, सुनिल मिश्रा, बीएमएस के बीडी पाण्डेय, ललन शर्मा, रामानंद सिंह, आर बी मिश्रा, आर एन पाण्डेय, मनोज वर्मा, नरेश सिंह, एस एन पाठक, अनुग्रह सिंह सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

फुसरो में संत रैदास की जयंति मनायी गयी

फुसरो पुराना बीडीओ आफिस के राजा बंगला स्थित विवाह मंडप में बुधवार को अखिल भारतीय रविदास महासंघ के तत्वधान में गुरू रैदास की जयंति समारोह मनायी गयी। इस दौरान बेरमो प्रखंड मुख्यालय से गाजे बाजे के साथ विशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस में सैकडों महिला-पुरूष व बच्चों ने भाग लिया। समारोह की शुरूआत रैदास के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष गोवर्धन रविदास व संचालन सुधीर राम ने किया । यहां मुख्य अतिथि फुसरो नगर परिषद अध्यक्ष नीलकंठ रविदास ने कहा कि संत रैदास सिर्फ जाति-समाज के नहीं बल्कि मानव जगत के कल्याण की बातें समाज को बतायी। उन्होने अपने समय के ब्राहमणों को तर्क में पराजित कर संत की उपाधी प्राप्त की थी। इनके ज्ञान प्राप्त कर मीरा बाई कृश्ण की परम भक्त हो गयी। वक्ता ने कहा कि संत रैदास व बाबा भीमराव अंबेदकर के विचारों से ही समाज व देश का कल्याण है। मौके पर बालदेव रविदास, गोपाल रविदास, फुलचंद रविदास, हिरालाल रविदास, निर्मल रविदास, सुरज पासवान, राजेश राम, आदि मौजूद थे।

संत गुरु रविदास जी

रैदास नाम से विख्यात संत रविदास का जन्म सन् 1388 (इनका जन्म कुछ विद्वान 1398 में हुआ भी बताते हैं) को बनारस में हुआ था। रैदास कबीर के समकालीन हैं। रैदास की ख्याति से प्रभावित होकर सिकंदर लोदी ने इन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा था। मध्ययुगीन साधकों में रैदास का विशिष्ट स्थान है। कबीर की तरह रैदास भी संत कोटि के प्रमुख कवियों में विशिष्ट स्थान रखते हैं। कबीर ने ‘संतन में रविदास’ कहकर इन्हें मान्यता दी है। मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा जैसे दिखावों में रैदास का बिल्कुल भी विश्वास न था। वह व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं और आपसी भाईचारे को ही सच्चा धर्म मानते थे। रैदास ने अपनी काव्य-रचनाओं में सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्दों का भी मिश्रण है। रैदास को उपमा और रूपक अलंकार विशेष प्रिय रहे हैं। सीधे-सादे पदों में संत कवि ने हृदय के भाव बड़ी स़फाई से प्रकट किए हैं। इनका आत्मनिवेदन, दैन्य भाव और सहज भक्ति पाठक के हृदय को उद्वेलित करते हैं। रैदास के चालीस पद सिखों के पवित्र धर्मग्रंथ ‘गुरुग्रंथ साहब’ में भी सम्मिलित हैं। कहते हैं मीरा के गुरु रैदास ही थे।

 

रैदास के पद :
अब कैसे छूटे राम रट लागी।
प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी, जाकी अँग-अँग बास समानी॥
प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा॥
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती॥
प्रभु जी, तुम मोती, हम धागा जैसे सोनहिं मिलत सोहागा॥

रैदास के दोहे :
जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।

रैदास कनक और कंगन माहि जिमि अंतर कछु नाहिं।
तैसे ही अंतर नहीं हिन्दुअन तुरकन माहि।।

हिंदू तुरक नहीं कछु भेदा सभी मह एक रक्त और मासा।
दोऊ एकऊ दूजा नाहीं, पेख्यो सोइ रैदासा।।

रैदास की साखियाँ :
हरि सा हीरा छाड़ि कै, करै आन की आस ।
ते नर जमपुर जाहिँगे, सत भाषै रैदास ।। १ ।।

अंतरगति रार्चैँ नहीं, बाहर कथैं उदास ।
ते नर जम पुर जाहिँगे, सत भाषै रैदास ।। २ ।।

रैदास कहें जाके ह्रदै, रहै रैन दिन राम ।
सो भगता भगवंत सम, क्रोध न ब्यापै काम ।। ३

समाजसेवी चन्द्रदेव सिंह की 9वीं पुण्य तिथि के अवसर पर कंबल वितरण और कवि सम्मेलन का आयोजन

फुसरो बाजार स्थित सब्जी मंडी के समीप समाजसेवी चन्द्रदेव सिंह की 9वीं पुण्य तिथि के अवसर पर कंबल वितरण और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम श्री सिंह के तस्वीर पर मल्यार्पण कर श्रद्धाजंली दी गई। बतौर मुख्य अतिथि सांसद रवीन्द्र कुमार पांडये ने कहा कि स्व0 सिंह ईमानदारी और सादगी के प्रतीक थे, वे अंतिम दिनो तक समाजिक कार्यो में बढ़चढ़ कर भूमिका निभाए थे। विशिष्ट अतिथि इंटक कांग्रेस नेता गिरजाशंकर पांडेय, मधूसूदन प्रसाद सिंह आदि उपस्थित थे।
युवा व्यवसायी संघ फुसरो के अध्यक्ष आर. उनेश ने कहा कि समाज उसी को याद करता है जो समाज के लिए कुछ किये हुए रहता है। उनके अच्छे कर्मो का फल है कि आज इतनी संख्या लोग यहा जुटे है। इस दौरान दर्जनो गरीबो और असहायो के बीच कंबल का वितरण किया गया। मौके पर संत सिंह, फुसरो नगर परिषद् अध्यक्ष नीकंठ रविदास, श्रीकांत मिश्रा, भोजपुरी सम्राट लाखन सिंह, विनोद सिंह, नागेन्द्र सिंह, सत्येन्द्र सिंह, भगवान सिंह, अतुल सिंह, अवधेष सिंह, कवि नितेश श्रीवास्तव ‘सागर’ आदि उपस्थित थे,

 सूत्र / छाया : बेरमो आवाज

सुपरमून, ब्लूमून, ब्लडमून और चंद्रग्रहण : क्या कहती हैं आधुनिक विज्ञान एवं ज्योतिषीय गणनाएं

31 जनवरी को भारत और दुनिया भर के लोगों को एक दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिलेगी. यह मौका है ‘ब्लडमून’, ‘सुपरमून’ और ‘ब्लूमून’ का. एक साथ ये तीनों घटनाएं भारत के लोग शाम 6.21 बजे से 7.37 बजे तक देख सकेंगे. इस दौरान चंद्रमा आम दिनों की तुलना में अधिक बड़ा और चमकदार दिखेगा. यह 2018 का पहला चंद्रग्रहण है और इस दौरान यह लाल भी दिखेगा.

नासा के अनुसार पूर्ण चंद्र ग्रहण का सबसे अच्छा नज़ारा भारत और ऑस्ट्रेलिया में दिखेगा. भारत में लोग 76 मिनट के लिए लोग बिना टेलीस्कोप या उपकरण की मदद के अपनी आंखों से सीधे इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देख सकेंगे.

कहीं आप भी तो नहीं डरते ग्रहण से? बर्फ़ जमा चांद देखा है कभी!

भारत के अलावा यह दुर्लभ नज़ारा समूचे उत्तर अमरीका, प्रशांत क्षेत्र, पूर्वी एशिया, रूस के पूर्वी भाग, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में भी दिखेगा. चलिए यह जानते हैं कि यह चंद्रग्रहण इतना महत्वपूर्ण क्यों है? वैज्ञानिकों के लिए यह महत्वपूर्ण कैसे है? आख़िर सुपरमून, ब्लूमून और ब्लडमून होता क्या है?

31 जनवरी का चंद्रग्रहण तीन कारणों से है खास:

सुपरमूनः यह लोगों के पास दो महीने के भीतर लगातार तीसरी बार सुपरमून देखने का मौका है. इससे पहले 3 दिसंबर और 1 जनवरी को भी सुपरमून दिखा था. सुपरमून वह खगोलीय घटना है जिसके दौरान चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है और 14 फ़ीसदी अधिक चमकीला भी. इसे पेरिगी मून भी कहते हैं. धरती से नजदीक वाली स्थिति को पेरिगी (3,56,500 किलोमीटर) और दूर वाली स्थिति को अपोगी (4,06,700 किलोमीटर) कहते हैं.

ब्लूमूनः यह महीने के दूसरे फुल मून यानी पूर्ण चंद्र का मौक़ा भी है. जब फुलमून महीने में दो बार होता है तो दूसरे वाले फुलमून को ब्लूमून कहते हैं.

ब्लडमूनः चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया की वजह से धरती से चांद काला दिखाई देता है. 31 तारीख को इसी चंद्रग्रहण के दौरान कुछ सेकेंड के लिए चांद पूरी तरह लाल भी दिखाई देगा. इसे ब्लड मून कहते हैं.

यह स्थिति तब आती है जब सूर्य की रोशनी छितराकर होकर चांद तक पहुंचती है. परावर्तन के नियम के अनुसार हमें कोई भी वस्तु उस रंग की दिखती है जिससे प्रकाश की किरणें टकरा कर हमारी आंखों तक पहुंचती है. चूंकि सबसे लंबी तरंग दैर्ध्य (वेवलेंथ) लाल रंग का होती है और सूर्य से सबसे पहले वो ही चांद तक पहुंचती है जिससे चंद्रमा लाल दिखता है. और इसे ही ब्लड मून कहते हैं.

कब लगता है चंद्रग्रहण?
सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच में इस तरह आ जाती है कि चांद धरती की छाया से छिप जाता है. यह तभी संभव है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अपनी कक्षा में एक दूसरे के बिल्कुल सीध में हों.

पूर्णिमा के दिन जब सूर्य और चंद्रमा की बीच पृथ्वी आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इससे चंद्रमा के छाया वाला भाग अंधकारमय रहता है. और इस स्थिति में जब हम धरती से चांद को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है. इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है.

खगोल वैज्ञानिकों के लिए मौका
33 साल से कम उम्र के लोगों के लिए यह पहला मौका होगा जब वो ब्लड मून देख सकते हैं. नासा के अनुसार पिछली बार ऐसा ग्रहण 1982 में लगा था और इसके बाद ऐसा मौका 2033 में यानी 25 साल के बाद आएगा. खगोल वैज्ञानिकों के लिए भी यह घटना बेहद महत्वूपर्ण मौका है. उन्हें इस दौरान यह देखने का मौका मिलेगा कि जब तेज़ी से चंद्रमा की सतह ठंडी होगी तो इसके क्या परिणाम होंगे.

ज्योतिषीय विश्लेषण :
पूर्णिमा की रात्रि को चंद्रमा पुर्णतः गोलाकार का दिखाई देता है, लेकिन कभी कभी किसी वजह से चंद्रमा के पूर्ण हिस्से पर धनुष या हंसिया के आकार की काली परछाई दिखने लगती है। जो कभी-कभी चाँद को पूरी तरह से ढक लेती है। पहली स्थिति को चन्द्र अंश ग्रहण या खंड-ग्रहण कहते है जबकि दूसरी स्थिति को पूर्ण चन्द्र ग्रहण या खग्रास कहते है।

ऐसा विशेषकर पूर्णिमा पर ही होता है। वर्ष 2018 का पहला चंद्रग्रहण भी पूर्णिमा के दिन ही दिखाई देगा। 31 जनवरी 2018 यानी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को वर्ष 2018 का पहला खग्रास चन्द्र ग्रहण होगा। इस दिन पुरे 12 घंटों तक भगवान के दर्शन करना अशुभ माना जाएगा, इसलिए इस समय मंदिरों के पट बंद रहेगे और किसी तरह की पूजा नहीं की जाएगी।

31 जनवरी 2018 को पड़ने वाला खग्रास चन्द्र ग्रहण विश्व के अन्य हिस्सों के साथ-साथ भारत में भी पूर्ण रूप से दिखाई देगा। चन्द्र ग्रहण की अवधि कुल 3 घंटे 23 मिनट की होगी। पूर्णिमा तिथि होने के कारण भगवान शिव और भगवान विष्णु की उपासना के लिए सुबह 8:28 तक का समय सही माना जा रहा है।

कौन कौन से देशों में दिखाई देगा 2018 का पहला पूर्ण चन्द्र ग्रहण :
भारत के साथ-साथ यह एशिया, ऑस्ट्रेलिया, रूस, मंगोलिया, जापान आदि के क्षेत्रों में चंद्रोदय के समय प्रारंभ होगा तथा उत्तरी अमेरिका, कनाडा तथा सुदूर पनामा क्षेत्र के कुछ भागों में चंद्रास्त के समय ग्रहण का मोक्ष दिखाई देगा। भारतीय मानक समयानुसार पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों (असम, बंगाल, झारखंड, बिहार) में खंड चन्द्र ग्रहण सायं 05:58 से रात्रि 08:41 तक होगा। खग्रास चन्द्र ग्रहण की कुल अवधि 1 घंटा 16 मिनट की होगी जबकि पुरे चंद्रग्रहण की अवधि 2 घंटे 43 मिनट 10 सेकंड की होगी। इसका ग्रासमान 1.316 है।

चंद्रग्रहण 31 जनवरी 2018 की सम्पूर्ण जानकारी इस प्रकार है :-
चंद्रग्रहण का समय – शाम 05:58:00 से रात्रि 08:41:10 तक
चंद्रग्रहण की अवधि – 2 घंटे 43 मिनट 10 सेकंड
सूतक काल प्रारंभ – प्रातः 07:07:21 AM
सूतक काल की समाप्ति – रात्रि 08:41:10 PM

संवत् 2074, शक 1939, माघशुक्ल पूर्णिमा, बुधवार 31 जनवरी 2018 को खग्रास चन्द्र ग्रहण। कर्क राशि, पुष्य नक्षत्र। सूतक काल सुबह 10:18 AM से प्रारंभ हो जाएगा। ग्रहण का समय चंद्रोदय के साथ ही शुरू हो जाएगा।

ग्रहण के समय क्या ना करें?
ग्रहण के समय मूर्ति छूना, भोजन तथा नदी में स्नान करना वर्जित माना जाता है। सूतक काल के समय किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। भोजन ग्रहण करने और पकाने से दूर रहना अच्छा माना जाता है। देवी देवताओं और तुलसी आदि को स्पर्श नहीं करना चाहिए। सूतक के दौरान गर्भवती स्त्री का घर से बाहर निकलना और ग्रहण देखना वर्जित माना जाता है। ये शिशु की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि इससे उसके अंगों को नुकसान पहुँच सकता है।
इसके अलावा नाख़ून काटना, बात कटवाना, निद्रा मैथुन आदि जैसी गतिविधियों से भी ग्रहण व् सूतक काल के समय परहेज करना चाहिए। माना जाता है इस काल में स्त्री प्रसंग से बचना चाहिए अन्यथा आंखों से संबंधित बिमारियों के होने का खतरा बना रहता है।

ग्रहण समाप्त होने के पश्चात् पुरे घर को गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए और सूतक काल प्रारंभ होने से पूर्व दूध, जल, दही, अचार आदि खान-पान की सभी चीजों में कुशा या तुलसी के पत्ते दाल देने चाहिए। माना जाता है ग्रहण के दौरान खान पान की सभी चीजें बेकार हो जाती है और वे खाने लायक नहीं रहती। ऐसा करने से आप ग्रहण समाप्त होने के बाद इन्हें पुनः खा सकते है।

31 जनवरी 2018 के चंद्र ग्रहण का विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

मेष – इस राशि के जातकों को ग्रहण का शुभ फल मिलेगा। आजीविका से जुड़े सभी क्षेत्रों में लाभ की प्राप्ति होगी। स्वास्थ्य का ख़ास ध्यान रखें। क्या करें – ग्रहण के दौरान भगवान शिव की उपासना करें। ग्रहण समाप्त होने पर हरी वस्तुएं दान करें।

वृषभ – आपके लिए साल का यह पहला चन्द्र ग्रहण कई मामलों में अनुकूल रहेगा। करियर में बदलाव के योग हैं। नौकरी और व्यापार में उन्नति होगी। निर्णयों लेते समय खास सावधानी रखें। अचानक धन लाभ होने की संभावना है। क्या करें – आपके लिए भगवान कृष्ण की उपासना करना अच्छा रहेगा। गृहण समाप्ति के बाद लाल फलों का दान करें।

मिथुन – इस राशि के जातकों के लिए यह चंद्र ग्रहण शुभ परिणाम नहीं दे रहा है। आर्थिक मामलों में नुकसान होने की संभावना है। सेहत का खास ध्यान रखें। क्या करें–ग्रहण में हनुमान जी की आराधना करें। ग्रहण के बाद सफ़ेद चीजों का दान करें।

कर्क – दुर्घटना के योग है, वाहन सावधानी से चलाएं। शरीर का ध्यान रखें, स्वास्थ्य खराब हो सकता है। विवादों से बचने का प्रयास करें। क्या करें – ग्रहण के समय चंद्रमा के मंत्रो का जप करें। ग्रहण समाप्त होने पर काली वस्तुएं दान करें।

सिंह – इस राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण शुभ संकेत नहीं दे रहा है। धन हानि हो सकती है। आंखों का ध्यान रखें। गृह कलेश से बचें मानसिक चिंता परेशानी का कारण बन सकती है। क्या करें – ग्रहण के समय हनुमान चालीसा का पथ करें और समाप्त होने पर जुटे या छाते का दान करें।

कन्या – इनके लिए यह ग्रहण अनुकूल रहेगा। आकस्मिक धन लाभ के योग है। सुख सुविधा में वृद्धि हो सकती है। छोटी यात्रा की संभावना है। नौकरी सम्बन्धी निर्णयों में सावधानी बरतें। क्या करें – रामरक्षा स्त्रोत्र का पाठ करें। ग्रहण समाप्ति के बाद अन्न का दान करें।

तुला – इस राशि के जातको को चंद्रग्रहण से शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। किसी बात का भय बना रहेगा। परिवार में समस्याएँ हो सकती है। किसी दुर्घटना के शिकार हो सकते है। क्या करें – ग्रहण में दुर्गा कवच का पाठ करें और समाप्ति पर काली वस्तुएं दान दें।

वृश्चिक – प्रेम संबंधों में समस्याएं हो सकती है। क्योंकि यह चंद्रग्रहण आपके लिए अनुकूल नहीं है। कोई विशेष बात परेशानी का कारण बन सकती है। सन्तान को कष्ट की संभावना है। क्या करें – हनुमान चालीसा का पाठ करें। ग्रहण समाप्त होने पर फलों का दान करें।

धनु – यह आपके लिए मिलाजुला परिणाम लेकर आएगा। धन लाभ तो होगा परन्तु खर्चे भी होंगे। नौकरी और करियर में परेशानी हो सकती है। क़ानूनी मामलों में परेशानी के योग है। वाहन ध्यान से चलायें। क्या करें – ग्रहण में चंद्रमा के मन्त्रों का उच्चारण करते रहे और बाद में सफ़ेद वस्तुओं का दान करें।

मकर – परिवार के लिए यह ग्रहण अच्छा नहीं है। जीवनसाथी से रिश्ते बिगड़ने के आसार है। व्यापार में धन की हानि हो सकती है ध्यान रखें। सेहत को लेकर परेशानी हो सकती है। क्या करें – ग्रहण में हनुमान बाहुक का पाठ करें और बाद में लाल फल का दान करें।

कुंभ – सेहत के प्रति ध्यान देने की आवश्यकता है। करियर में सफलता मिल सकती है। कोई बात चिंता ला सकती है। सफलता पाने के लिए संघर्ष करना होगा। क्या करें – ग्रहण में शिव जी का ध्यान करें और ग्रहण समाप्त होने पर निर्धनों को भोजन कराएँ।

मीन – यह चंद्रग्रहण आपको शिक्षा के क्षेत्र में परेशानी दे सकता है। पेट से संबंधी समस्या हो सकती है। गर्भवती महिलाएं खास ख्याल रखें। सन्तान पक्ष को लेकर परेशानी हो सकती है। क्या करें – ग्रहण में श्रीकृष्ण की उपासना करें और बाद में केले का दान करें।

सौजन्य : बी.बी.सी.हिंदी एवं शुभ तिथि

कोल इंडिया को करारा जवाब देने की जरूरत है : लखनलाल महतो

श्रम कानून में बदलाव सहित कोयला मजदूरों पर हो रहे हमले के विरोध में मंगलवार को संयुक्त श्रमिक संगठन की तत्वाधन में चार नम्बर जरीडीह मोड़ में एक सत्याग्रह स्वरुप आंदोलन किया गया। श्रमिक संगठन एटक से संबद्ध यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन (यू.सी.डब्लू.यू)  के राष्ट्रीय महामंत्री लखनलाल महतो ने कहा कि जिस तरह तेजी से केंद्र सरकार व कोल इंडिया द्वारा श्रम कानून में बदलाव की जा रही है उससे कोयला मजदूर ठेका मजदूर के सामने आने वाला समय मे बड़ी समस्या उत्पन हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मजदूरों के समस्या पर सभी श्रमिक संगठन को एकजुटता का परिचय देकर सरकार व कोल इंडिया को करारा जवाब देने की जरूरत है, और आवश्यकता पड़ने पर इस आन्दोलन को देशव्यापी आन्दोलन का रूप दिया जायगा ताकि श्रमिकों के हितों की रक्षा की जा सके।

एटक के वरिष्ठ नेता अफताब आलम खान ने कहा कि कोयला श्रमिको पर हो रहे हमले पर संगठन के नेताओ को आगे बढ़कर विरोध करने की आवश्यकता आन पड़ी है। जिसके लिए सभी का एक पटल पर आकर एक जुट होकर इस दिशा में पहल करने की जरुरत है, यदि  ऐसे श्रमिक विरोधी गतिविधियों को समय रहते नहीं रोका गया तो आने वाले समय में कोयला मजदूरों को उनका हक व अधिकार नहीं मिल पायेगा। मौके पर सुजीत घोष, विजय भोई, गणेश महतो, फुसरो नगर परिषद् अध्यक्ष नीलकंठ रविदास, जवाहरलाल यादव आदि मजदूर प्रेमी व्यक्ति उपस्थित थे।

छाया/सूत्र : बेरमो आवाज