हाई टेक होली

पर्व त्योहारों को सामूहिक रूप से उल्लास पूर्वक मनाने की हमारी परंपरा रही है। इन दिनों हम अपने सगे-संबंधियों, पड़ोसियों से मिलने उपहार-मिठाई लेकर उनके घर जाया करते थे। छोटे-बड़े के बीच चरण-स्पर्श आशीर्वाद होता, बाकी लोग गले मिलकर बधाईयाँ देते। इस प्रकार सब आनंदित होते! जिनसे वो मिल न पाते, तो मन में दुख होता था। बाद में, मिलने पर शिकायतें हुआ करती थी। सबसे एक साथ जुड़े रहने का कोई साधन भी तो नहीं होता था! 😔 लोग पत्र और greeting cards का सहारा लेते थे।

फिर आया टेलीफोन!
दूर रहने वाले अपनों से सीधा या उनके पड़ोसी के सहयोग से बातें कर पाना संभव हुआ। अपनों से बात कर मन को शांति मिलती; भले इसके लिए पैसे लगते हों और कुछ समय भी लगता था। पर मिलने वाली खुशी अनमोल होती थी।

फिर मोबाइल का आगमन हुआ!
हर घर और फिर हर हाथ में “मोबाइल” आने पर मानों जैसे भौगोलिक दूरियाँ ही समाप्त होने को आईं! बातें करना महँगा होने के कारण सीमित बातें ही होती, पर होतीं जरूर थीं। हमारी खुशियाँ और बढ़ गईं। हम ये ध्यान देते कि किसी अपने से बात करना रह तो नहीं गया!

फिर सोशल मीडिया के समय आया। फेसबुक और ट्विटर पर अपनी बात एकसाथ सब लोगों तक पहुँचाने लगें। one-to-one बातचीत में कमी आई। WhatsApp messenger और इन जैसे कुछ और साधन के आने पर लोग एक-दूसरे से अब तथा कथित “online connected” रहने लगे! इसका लाभ मोबाइल कंपनियों को अधिक होने लगा।

Jio के आने पर हमें और सुविधा उपलब्ध हुई। डाटा सस्ता हुआ और बात करने के अलग से पैसे लगने बंद हो गए। इसके लाभ कुछ सीमित लोगों को ही हुआ। अधिकांश लोग आपस में हमेशा बतियाते रहते या आॅनलाईन वीडियो देखा करते। इसी में पूरा समय निकल जाता है।

अब किसी के पास समय नहीं है किसी अपने से मिलने की!!! 😟 साधन है पर इच्छा नहीं, किसी अपने से बात करने की!!! आम दिनों की तो छोड़ ही दीजिए, सुख-दुख, पर्व त्योहारों में भी एक एकाकीपन अपने पैर पसार रहा है। हमारे अपनों का दायरा, अब हमारे दिल में छोटा होता जा रहा है। अब हम उत्सव सबके साथ नहीं, अकेले ही मनाते हैं।

प्रार्थना है कि ये आपके जीवन का सत्य न हो।

होली की आनंदमयी अनेकानेक शुभकामनाएँ!