भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए किस अवसर की तलाश है आपको?

छाया : बेरमो आवाज

मकोली स्थित उत्क्रमित विद्यालय के पास बी.आर.सी. भवन से रविवार की सुबह एंटी करप्शन ब्यूरो की धनबाद टीम ने बेरमो प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी महेन्द्र सिंह (फाइल फोटो) को 40 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर अपने साथ धनबाद ले गई। एसीबी की टीम ने यह कार्रवाई मनबहादुर थापा नामक एक ठेकेदार के शिकायत पर की है। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार बिल पास करने के एवज में बीईईओ सिंह ने ठेकेदार थापा से डेढ़ लाख रुपए की मांग की थी। पर थापा ने 40 हजार फ़िलहाल देने की बात कही और जिसकी शिकायत थापा ने एसीबी धनबाद की टीम से किया। जिसके बाद एसीबी की टीम रविवार की सुबह मकोली पहुंची, इधर पूर्व निर्धारित समय पर रकम लेकर ठेकेदार थापा भी पहुंचे और जैसे ही  मकोली स्थित बीआरसी भवन में उक्त राशि  बीईईओ महेन्द्र सिंह को दिया, वहीं सादे लिबास में पहले से बैठे एसीबी की टीम ने धर दबोचा। गिरफ्तार महेन्द्र सिंह बेरमो (वन) के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हैं तथा इसके पहले नावाडीह में पदस्थापित थे.

कहा जाता है कि दान जितना गुप्त होता है दानी को उतना ही पुण्य प्राप्त होता है और दान जो दिखावे के साथ होता है वह आडम्बर होता है. अब तर्क यह है कि गुप्त दान करने वाले यदि फल की इच्छा और पुण्य मात्र की प्राप्ति से उत्साहित हो कर दान करते हैं तो वह भी लालसा की श्रेणी में आ जाता है और निष्फल हो जाता है. सार यह है कि दान भी एक कर्म है जिस प्रकार आप अन्य कर्मो का साधन करते हैं. यह एक प्रक्रिया है जो आपके सामाजिक उत्तरदायित्व को एक स्थान प्रदान करती है समाज में.

कर्म को प्रधानता उसके नैतिक व आदर्श मूल्य के स्तर पर दिया  जाना चाहिए और इच्छा से व्युत्पन्न अवसाद से स्वयं को दूर रखना चाहिए. इच्छा का होना महत्वपूर्ण न होकर कैसी इच्छा है यह अधिक विचारनीय होना चाहिए. इच्छा कर्म को प्रेरित करती है, सत्कर्म आपके व्यक्तित्व का निर्माण करती है. अवसर आपकी निष्ठा की परीक्षा लेती है, यह नहीं कि अवसर मिला तो आप ईमानदारी का बिगुल बजा रहे और अवसर मिला तो अपना उल्लू भी सीधा करने से नहीं चूके.

यूँ तो अवसर की तलाश सबों को होती है, परन्तु यह कि अवसर प्राप्त होने पर उसको उपयुक्तता के साथ प्रयुक्त भी कर सकें, क्षमता किन्ही विशिष्ट आत्माओं में ही होती है. अवसर का होना किसी विशेष कर्म के निष्पादन के लिए उपयुक्त है अथवा नहीं यह पूर्ण रूप से उसके एकाधिक लाभुकों के संख्या बल से निर्धारित होना चाहिए न कि अपनी क्षमता का अनुचित लाभ लेकर स्वहित साधन कर अनैतिक रूप से प्रयुक्त किया जाये.

आप अफसर थे, आपके स्वयं को सौंपे गए कार्य के प्रति उत्तदायी बना कर पदस्थापित किया गया. उसके बदले में सरकार वह हर लाभ दे रही है जिसके आप पदानुकुल अधिकारी थे. आपने गलत को सही करने के लिए पैसे लेने शुरू किये तो सही लोगों को लगा आप गलत कर रहे हैं. जब आपने सही लोगों को भी पैसे देने के लिए विवश किया तो एक बार फिर उनको लगा कि आप गलत कर रहे हैं. जब कभी शायद आपको विवश किया गया हो गलत करने के लिए तो आप नहीं रुके और न ही रोका अपितु आप अवसर का लाभ प्राप्त करते चले गए. अब ऐसे में यह दिन देखने के लिए तैयार होंगे आप शायद, परन्तु इस घटना से एक बात तो स्पष्ट है कि लोग अब विरोध तो करेंगे.

इन सब बातों से एक और बात निकलती है कि क्या कभी आपने उनकी बातों का मान न रखा हो, और उन्होंने कसम उठा ली हो कि आपको सही जगह पहुंचा देंगे. या फिर वास्तव में वे आपसे और आपके रवैये से त्रस्त हो गए होंगे और आप अपने ही कर्म के जाल में फंस गए. जो भी हो इतना तो पक्का है कि उच्चाधिकारियों ने आपको पकड़ा है, वैसे लोगों ने जिन्होंने शपथ ली है ऐसे ही कर्मो को रोकने की तो आप अपनी शपथ क्यों भूल गए थे, जो आपके संस्थान ने आपको दिलाई हुई थी.

बाबा आम्टे नगरवासियों का ऐसे मना गणतंत्र दिवस

फुसरो नगर परिषद उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार ने अपने चिर-परिचित अंदाज में मनाया गणतंत्र दिवस. 26 जनवरी 2018 को झंडोत्तोलन के पश्चात वे अपने सहयोगियों साथ निकल पड़े उस बस्ती की ओर जहाँ सभी विभिन्न मौकों पर गरीबों को दान देने जाया करते हैं. जी हाँ, आपने सही समझा, बाबा आमटे नगर जिसे पूर्व में कुष्ठ बस्ती के नाम से भी जाना जाता था. वहां के निवासियों के बीच अन्न का वितरण करते हुए उन्होंने अपने गणतंत्र दिवस की शुरुआत की और निकल पड़े सुभाष नगर की ओर जहाँ और भी गरीबों को अन्न का दान किया गया.

हमारे सभ्य समाज में अभी भी एक ऐसा तबका है जो इन अवसरों पर प्रायः ही याद कर लिया जाया करता है. कचरे चुन कर और कभी-कभी भिक्षाटन कर जीवन यापन करने वाले ऐसे ही कुछ गरीबों की बस्ती है, जिसे नाम तो दे दिया गया बाबा आमटे नगर, पर उनके दैनिक जीवन के सर्वजनिक उपयोग की सरकारी महकमो से मिलने वाली सुविधाओं का सदा से अभाव ही रहा है. सी.सी.एल. के लगे बोर्ड पर वहां की जनसांख्यिकी को दर्शाने भर से उनका अपने सामाजिक दायित्व को पूरा समझना आखिर कहाँ की दूरदर्शिता है.

कृष्ण कुमार वहां के लोगों से मिले और उनकी समस्याओं से अवगत हुए और भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनके सभी समस्याओं के निवारण के उपाय होंगे. लोगों ने मिलकर सामूहिक रूप से पानी की समस्या से अवगत कराया और कहा कि एक जो पम्पसेट लगा भी है तो उससे पानी पूरा नहीं हो पाता है. वहां पहले से ही गड़े चापाकल पर मोटर लग जाने से पानी की सप्लाई को दुरुस्त किया जा सकता है, इसपर विचार कर जल्द ही इसे मूर्त रूप दिया जायगा जिसके लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे.

बताते चलें की अभी हाल ही में फुसरो नगर परिषद द्वारा ओ.डी.एफ. (Open Defection Free) अर्थात खुले में शौच से मुक्ति की दिशा में पहल हुई है, पर बड़े दुःख के साथ कहना पड़ता है कि इस बस्ती में अभी तक शौचालय नहीं बन पाया है और लोग अभी भी खुले में शौच के लिए विवश हैं. जो शौचालय है भी उसकी दशा बहुत ही दयनीय है. ऐसे में हमारा तंत्र कैसे गणतंत्र मना पाता है, यह एक विचारनीय तथ्य है.

यह बस्ती हमारे सभ्य समाज के मखमल पर टाट का पैबंद नहीं बल्कि हमारे सामाजिक तंत्र पर एक ऐसा जंग लगा पुर्जा है जो कि सदा ही से ऐसा ही रहने के लिए बसाया गया है ताकि हम अपनी संवेदनाओं को ऐसे अवसरों पर सहलाते रहें और खुद को सामाजिक प्राणी कहलाने का दंभ पालते रहें. कहीं न कहीं कसूर उनका भी है जो यहाँ के निवासी हैं जिन्हें ऐसे ही जीवन यापन करने की विवशता अब सामान्य लगने लगी है.

फुसरो को स्वच्छ रखने में सभी सहयोग करें : अखिलेश कुमार

प्रखंड विकास पदाधिकारी, बेरमो सह प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद फुसरो अखिलेश कुमार व युवा व्यवसायी संघ के अध्यक्ष आर. उनेश ने संयुक्त रुप से फुसरो बाजार के बैंक मोड़ से लेकर पुराना बी.डी.ओ. आॅफिस तक के दुकानदारो के बीच 65 डस्टबीनों का दुकानदारों के बीच वितरण किया।

इस अवसर पर अखिलेश कुमार ने कहा कि फुसरो बाजार को स्वच्छ व सुन्दर बनाने के लिए सभी का सहयोग जरुरी है. इसी प्रयास को सफल बनाने के लिए बाजार के दुकानदारो को डस्टबीन दिया जा रहा है. आगे और भी दुकानदारो को प्राथमिकता के आधार पर डस्टबिन मुहैया कराया जायेगा. प्रतिदिन बाजार में सुबह और शाम झाड़ू लगाकर साफ सफाई की जा रही है.

मौके पर आर.एस. तिवारी, बालेश्वर पांडेय, मंजूर हुसैन उर्फ जिया, गुरुपद प्रजापति, ओमप्रकाश, लालमोहन महतो, भरत वर्मा, वैभव चैरसिया, शिवनाथ गुप्ता, मुकेश ठाकुर, महेन्द्र सिंह आदि मुख्य रुप उपस्थित थे।

छाया / सूत्र : राजेश ‘बेरमो आवाज’

सांसद मद से निर्मित तीसरे यूरिनल का हुआ शुभारम्भ

फुसरो बाजार सब्जी मंडी स्थित ओवरब्रीज के समीप आज दिनांक 30-12-2017 दिन शनिवार को सांसद मद से निर्मित तीसरे यूरिनल का गिरिडीह सांसद रविन्द्र कुमार पांडेय ने फीता काट कर उद्घाटन किया। साथ ही सब्जी मंडी पहुँच कर बाजार की भीड़-भाड़ जैसी समस्या के निदान के लिए लोगो से विचार विमर्श भी किया।

श्री पांडेय ने कहा कि युवा व्यवसायी संघ के आग्रह पर बाजार में आने वाले आम नागरिको की सुविधा के लिए पेशाब घर का निर्माण कराया गया। जरुरत पड़ने पर बाजार में और भी यूरिनल का निर्माण कराया जायेगा। युवा व्यवसायी संघ अध्यक्ष आर. उनेश ने कहा कि संघ की मांग पर यूरिनल का निर्माण सांसद मद द्वारा कराया गया है।

इस अवसर पर बेरमो प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार, 20 सूत्री अध्यक्ष कपिलदेव गाँधी, भा.म.स. नेता रविन्द्र मिश्रा, बालेश्वर पांडेय, अनिल गुप्ता, मो. मंजुर हुसैन उर्फ जिया, मो. इलियास, सुरेश बंसल, प्रकाश मोदी, आर.एस. तिवारी, गुरुपद प्रजापति, ओमप्रकाश, वैभव चैरसीया, संत सिंह, श्रीकांत मिश्रा, संतोष श्रीवास्तव आदि लोग उपस्थित थे.

छाया / सूत्र : राजेश ‘बेरमो आवाज’

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदूषण रहित स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति पर गिरिडीह सांसद ने माँगा जवाब

गिरिडीह सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा लोकसभा में पेयजल की कमी को दूर करने हेतू दीर्घकालीन योजना बनाने एवं देश में स्वच्छ पेयजल से वंचित गांवो की संख्या एवं देश के समस्त गांवों में स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने हेतु निर्धारित लक्ष्यों के बारे में पूछे गये अतारांकित प्रश्न के उत्तर में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री एस0एस0 अहलूवालिया ने लिखित उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एन.आर.डी.डब्ल्यू.पी.) के अंतर्गत यह मंत्रालय ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने हेतु राज्यों को वित्तीय और तकनिकी सहायता उपलब्ध कराता है।

उन्होंने बताया कि पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने जल संरक्षण हेतु रूफ-टाॅप वर्षा जल संरक्षण, स्थायी ढांचों की स्थापना करना जैसे जल संरक्षण उपायों को अपनाने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में नए पेयजल पेयजल स्त्रोतों का पता लगाने के लिए हाइड्रो-जियो-माॅर्फोलाॅजिकल मानचित्रों का उपयोग किया जा रहा है। सरकार द्वारा बताया गया कि देश में स्वच्छ पेयजल से वंचित कुल 72,762 गांवों में से 2896 गांव झारखण्ड के है।

मंत्री श्री आहलूवालिया ने बताया कि मंत्रालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में नल जलापूर्ति उपलब्ध करने के लिए वर्ष 2011-22 तक की अवधि के लिए ग्रामीण पेयजल सेक्टर हेतु एक कार्यनीति योजना बनाई है। इसके अनुसार वर्ष  2022 तक यह लक्ष्य है कि कम से कम 90 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में नल जलापूर्ति उपलब्ध कराई जाए और कम से कम 80 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास घरेलू नल कनेक्षन सहित नल जलापूर्ति उपलब्ध हो।

उन्होंने बताया कि मंत्रालय तत्काल आधार पर संदूषण से प्रभावित बसावटों में पेयजल उपलब्ध कराने के दीर्घकालीन उपाय हेतु स्कीमें शुरू करने हेतु राज्यों को लिखा है। अल्पकालीन उपायों के रूप में राज्यों को निर्देश  दिया गया है कि तत्काल आधार पर सामुदायिक जल शुद्धिकरण संयंत्रों के माध्यम से आर्सेनिक और फ्लोराइड संदूशण से प्रभावित बसावटों में कम से कम 8-10 लीटर पीने योग्य जल उपलब्ध कराए।

: मृत्युंजय पाण्डेय
निजी सचिव,
सांसद, गिरिडीह

बजबजाती नालियाँ और सूअरों का आतंक

आज के इस दौर में जो नालियों की व्ययवस्था है अपने शहर में उससे बढ़िया तो कभी हड़प्पा सभ्यता में हुआ करती थी, उसपर सूअरों का जमावड़ा जो उन्हें जुहू बीच का अहसास देता है. अब लगता है हमें ही तय करना होगा कि हम सूअरों की बस्ती में ही रहते हैं या हमारी बस्ती सूअर. अब हमें दोनों ही में से कोई भी स्थिति बर्दाश्त नहीं, और होना भी नहीं चाहिए. पूरे देश में चल रहे स्वच्छता अभियान को धता बताने वाला यह परिदृश्य आज कल पूरे करगली बाज़ार, रीजनल हॉस्पिटल कॉलोनी करगली, आंबेडकर कॉलोनी  और नोनिया पट्टी सहित कई आस पास के इलाकों में बिना किसी परिश्रम के राह चलते देखा जा सकता है, जिस प्रकार यहाँ आदमी से ज्यादा सूअर रास्तों पर आवारा घूमते नजर आ जाया करते हैं उससे तो यही लगता है कि स्वच्छता अभियान सिर्फ फोटो निकालने भर के लिए रह गया हो.

चमचमाती सड़कों से जब आप नीचे मोहल्ले के सड़कों पर जाते हैं तो वार्ड संख्या 15, 16, 18, 21, और 24 में इन दिनों सूअरों का जो आतंक है यह आज कल से पनपा नहीं है, यह समस्या बहुत पुरानी है. पर अब जबकि यहाँ के इलाके नगर परिषद् के अंतर्गत आने से लोगों में एक उम्मीद जगी कि अब कुछ उपाय होगा और इस प्रकार की गन्दगी और समस्याओं से मुक्ति मिलेगी. पर बहुत दुःख के साथ बताना पड़ता है कि अब तक कई बार विभागीय नोटिस दिए जाने के बाद भी सूअर पालकों के कान पर जूँ न रेंगी.

वार्ड 24 के कुछ नौजवानों ने सामूहिक बैठक कर कई लोगों के हस्ताक्षर युक्त आवेदन भी दिए हैं अपने वार्ड पार्षद को जो कि विचाराधीन है अब तक. पूछे जाने पर कोई भी संतोष जनक उत्तर प्राप्त नहीं हो सका है. सूत्रों के हवाले से पता चला है कि इन सूअर पालकों ने सूअरों के पहचान के लिए उनके अंग-भेदन कर रखें हैं. किसी के कान तो किसी की पूंछ तो किसी को लोहे की सलाखों से दाग कर निशान आदि बनाकर अपनी पहचान दे दी गयी है. वे किसी भी मानदंड का अनुपालन करने के लिए स्वयं को बाध्य नहीं पाते और ऐसे ही मुक्त तरीके से सूअर का पालन करते हैं. एक-एक सूअर दो से तीन हजार तक में बिक जाते हैं.

ऐसा बिलकुल नहीं कि वह परिवार जो सूअर पालन से जुड़ा है, बिलकुल ही गरीब है या यह उनके परिवार के उपार्जन का एकमात्र साधन है. बकायदे सम्पन्न हैं और यह उनके ऊपरी आय का एक जरिया भर है, क्योंकि इसके पालन में न तो हिंग लगती है न फिटकरी और रंग आता है चोखा.

बजबजाती नालियों और सूअरों के बीच रहने को विवश लोग अपनी किस गलती की सजा भोग रहे हैं, यह समझ से परे है, पर अब लगता है कि लोगों ने ठान लिया है कि अब वह इसे सहन नहीं करेंगे. नगर परिषद् के कूड़ेदान में जमा कचरों को आये दिन सूअर बिखेर देते हैं. बहुत जगह पर नालियां अब भी कच्ची हैं और यह मानो सूअरों का हम्माम बना पड़ा है.

सूअरों से होने वाली बिमारियों से हम सभी भलीभांति परिचित हैं, एक अध्ययन के अनुसार स्वाईन-फ्लू का यह सबसे आसन जरिया होता है. एच१, एन१ वायरस का फैलना और उससे ग्रसित होना ऐसे वातावरण में बहुत ही आम बात है. वैसे भी इस प्रकार के वातावरण में बिमारियों का होना कोई नयी बात नहीं. जिस प्रकार के दृश्य देखने को आ रहे हैं उससे यही लगता है कि लोग आदि हो चुके हैं सूअरों के साथ रहने को, एक पल को पता ही नहीं चलता है कि लोग सूअर के घर में रह रहे हैं या सूअर इन लोगों के घरों में. स्थिति गंभीर है और दिन-ब-दिन और गंभीर होती जा रही है, पानी सर से ऊपर जाने को ही है पर पता नहीं लोग किस बात का इन्तेजार कर रहे हैं कि अब तो बस डूबना ही बाकी बचा है शायद.

अब रुख करते हैं प्रशासन का, तो उनकी ओर से ही कागजी कार्रवाई में  बस इतना ही है कि नोटिस जरूर मिला है उन सभी कथित पालकों को जिनके सूअर खुलेआम सड़कों पर पलते हैं, पर उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया है अब तक, इस बात का सबसे बड़ा कारण है की खुले में पालन होना, क्योंकि आप आसानी से यह नहीं बता सकते कि कौन सा सूअर किनका है तो आप कार्रवाई किस पर करेंगे, अव्वल तो आप साबित ही नहीं कर पाएंगे कि वे जिन्हें नोटिस मिला है सूअर पालन से जुड़े भी हैं या नहीं.

नगर परिषद् ने सक्रियता दिखाते हुए कई लोगों को नोटिस भेजा भी है, जिनमे मुख्य नाम हैं.

  1. श्री लखन राम पिता स्व.बलि राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला
  2. श्री गडी पासी पिता श्री शम्भू पासी, ढोरी पंचायत
  3. श्री सिकंदर राम, पिता श्री दुर्बल राम, आंबेडकर कॉलोनी
  4. श्री नंदकिशोर राम, पिता स्व.बाढो राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला
  5. श्री मनोज राम, पिता श्री प्रसादी राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला
  6. श्री अजय पासी, पिता श्री तोलन पासी, ढोरी पंचायत
  7. श्री नवल राम, पिता श्री लालू राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला

सूची बहुत लम्बी है, इससे एक बात तो साबित है कि इस प्रकार के व्यवसाय से जुड़े लोगों के पास किसी भी प्रकार का कोई भी पशुपालन से सम्बंधित अनुक्रमणिका नहीं है और न ही जो कुछ अगर हो भी तो उसका अनुपालन ही किया जा रहा है. विभाग से की गयी बातचीत में यह भरोसा दिलाया गया कि बहुत जल्द ही आवारा पशुओं खास कर सूअरों की धरा-पकड़ी शुरू होगी और उन्हें दूर किसी अज्ञात स्थान पर रिहायशी इलाके से दूर छोड़ दिया जायगा अथवा अन्य किसी ऐसे पालक के सुपुर्द कर दिया जायगा जो उक्त पशु के पालन की समुचित व्यवस्था और तरीके का अनुपालन करते हों. आशा है कि विभाग जल्द ही कोई कार्रवाई करेगा और इनके आतंक से शहर वासियों को मुक्त कर पायेगा.

अँधेरी रातों में!

अँधेरी रातों में,
सुनसान राहों की,
गन्दगी साफ़ करने को,
कुछ लोग निकलते हैं…

जी हाँ, उन्हें हम नगर परिषद् फुसरो के सफाई कर्मचारी कहते हैं.

नगर परिषद् फुसरो की ओर से पूरे शहर की सफाई इन दिनों जोर पर है. सड़क के दोनों ओर लगे तट संकेतक की जगमगाती लाल रोशनी से पूरे सड़क की खूबसूरती देखने लायक होती है. अभी हाल ही में सड़क विभाजक के छोर पर काली-पिली पट्टियों वाले स्तम्भ लगाये गए गए हैं. जिससे आवाजाही कर रहे वाहनों को विभाजक से टकराहट की संभावना कम हो सके. विगत दिनों कई वाहन, विशेष तौर पर शहर से बाहर के वाहन विभाजक से टकरा गए थे.

विगत दिनों उक्त सड़क तट संकेतकों के दोनों ओर जमा मिट्टी व धूल के कारण उनकी दृश्यता में कमी आ गयी थी जिससे आवाजाही में लोगों को परेशानी हो रही थी.   उपरोक्त के सन्दर्भ में कई सामाजिक संगठनों ने नगर परिषद् फुसरो का ध्यानाकर्षण करवाया था जिनमे कौटिल्य महापरिवार एवं युवा व्यवसायी संघ प्रमुख थे. उनके सुझाव पर अब फुसरो नगर परिषद् के कर्मचारियों ने शहर की सफाई का काम आरंभ कर दिया है.

फुसरो बाज़ार के मुख्य सड़क के दोनों ओर बसे फूटपाथ पर अपनी दुकान लगाने वाले वैसे छोटे व्यवसायी जो सुबह-सुबह अपनी दुकान सजाते थे और जहाँ कहीं भी अन्य दुकानदर अपना सामान नित्य अपनी दुकान के सामने लगाते थे वैसे व्यवसायियो को दिन के समय होने वाली साफ-सफाई पसंद नहीं आने लगी. जिस कारण समय के साथ-साथ इस काम की सफलता पर संदेह किया जाने लगा.

दरअसल दिन के समय फुसरो बाज़ार के नीचे बाज़ार से बैंक मोड़ होते हुए पुराना बी.डी.ओ. ऑफिस तक की मुख्य सड़क पर लोगों की आवाजाही बहुत होती है, यह इलाका ही सबसे सघन होता है, क्योंकि सभी मुख्य प्रतिष्ठान शहर के इसी हिस्से में अवस्थित हैं. धूल का उड़ना तथा ट्रैफिक की अधिकता व भीड़-भाड़ के चलते दिन के समय सफाई में कठिनाई होने लगी, जिसकी शिकायत बहुत से व्यवसायियो ने की.

कई गणमान्य लोगों के तथा युवा व्यवसायी संघ तथा नगर परिषद् फुसरो के बीच आपसे बातचित से इस समस्या का हल निकला गया और अब दिन की जगह रात में जब सभी दुकाने और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान लगभग बंद हो जाते हैं तो नगर परिषद फुसरो के सफाई कर्मचारी अपने दल-बल और साजो सामान के साथ शहर का चप्पा चप्पा चमकाने निकल पड़ते हैं.

इन दिनों जब आप सड़क पर पैदल अथवा वाहन से चलते हैं तो सड़क के दोनों ओर लगे तट संकेतकों की चमक अपने शहर की स्वच्छता का भान सीधे ही करा जाते हैं. उस पर अचानक नीली व लाल बत्तियां चमकाती पुलिस पेट्रोल की गाड़ी जब गुजरती है तो नजारा देखने लायक होता है. लगता है मानो कोई हॉलीवुड की मूवी के अन्दर हम भी एक किरदार हैं.

अभी पिछले महीने की बात है नगर परिषद् फुसरो के कार्यालय प्रांगण में ही सभी व्यवसायियो को एक बैठक आयोजित कर स्वच्छता के सन्दर्भ में शिकायत व उसके निपटारे से सम्बंधित स्वच्छता अनुप्रयोग (Mobile App) के बारे में जानकारी दी गयी, जिस app का प्रयोग कर लोग अपनी शिकायतों को उसमे पोस्ट कर सम्बद्ध विभाग को तुरंत प्रेषित कर सकते हैं, और जल्द ही उसके निपटारे की प्रक्रिया सम्बद्ध विभाग से आरंभ कर दी जायगी.

हमें भी एक स्वच्छ मानसिकता के साथ इस प्रयास में सहभागी बनना चाहिए और अपने शहर को स्वच्छ बनाने में सम्बद्ध विभाग की मदद करनी चाहिए. अभी सड़क के दोनों ओर उचित स्थान के कमी के कारण स्थायी कचरा-पात्र नहीं लगाया जा सका है, जिस कारण विभाग द्वारा चलंत कचरा निष्पादन के लिए वाहन का प्रयोग हो रहा है जिसके माध्यम से जगह-जगह जा कर कचरा उठा कर उसको निष्पादित किया जा रहा है, तो कहा जा सकता है कि शहर के शहंशाह यही हैं.

हम इस शुभ कार्य को निर्बाध रूप से चलते रहने की कामना करते हैं और नगर परिषद् फुसरो को उनके द्वारा किये जा रहे इस कार्य हेतु शुभकामनाएँ देते हैं.

संपादक
फुसरो ई-पत्रिका.

गिरिडीह सांसद ने किया विभिन्न पंचायतों का दौरा

माननीय सांसद गिरिडीह श्री रवीन्द्र कुमार पाण्डेय जी ने 15 नवम्बर 2017 को बोकारो जिला के नावाडीह प्रखण्ड के उपरघाट में विभिन्न पंचायतों जैसे पेंक, गोनियाटो, कांछो, कंजकिरो, पलामू, नारायणपुर, पिलपिलो, पोखरिया एवं बरई में भ्रमण के दौरान वहां के लोगों के बीच मच्छरदानी का वितरण किया। उन्होंने कहा कि मच्छरदानी उपयोग से ग्रामीण को मलेरिया एवं डेंगू बिमारी से निजात मिलेंगी तथा लोगों में इस रोग के मच्छरों के कारण फैलने में कमी आएगी जो कि इस तरह के रोगों से बचने का सबसे अच्छा एवं सरल उपाय है।

इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत बनने वाली 25 लाभुंको को गृह प्रवेश कराया। लोगों से अपनी मुलाकात के दौरान उन्होंने बताया कि केन्द्र व राज्य सरकार हर संभव प्रयासरत है कि हर गरीब को पक्का मकान, महिलाओं को उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस चूल्हा एवं स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत शौचालय निर्माण करवा कर मदद कर रही हैं।

इसके अलावा उपरघाट में फुटबाॅल मैच में भी खिलाडियों को प्रोत्साहन देने पहुॅचे। जिससे खिलाड़ियों में हर्ष का माहौल था। मौके पर सांसद प्रतिनिधि श्री तारकेश्वर महतो सहित भाजपा के कार्यकर्ता एवं ग्रामीण मौजूद थे।

संतोष  मिश्रा ‘‘गौतम’’
सांसद आवासीय कार्यालय
गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र
कैम्प-फुसरो, बेरमो
जिला-बोकारो (झारखण्ड)

मारवाड़ी युवा मंच ने शुरू किया स्वच्छ ड्राइव

दिनांक 28 अक्टुबर 2017 को मारवाड़ी युवा मंच रांची शाखा द्वारा स्वच्छ्ता ड्राइव निकली गई, यह स्वच्छता ड्राइव कुल सात (7) जिलों की 17 शाखाओं का भ्रमण करते हुए करीब 700 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर रांची पहुंचेगी. अपनी इसी यात्रा के क्रम में यह रैली फुसरो में भी रुकी जिसमे हमारे लोकप्रिय सांसद श्री रविन्द्र कुमार पांडेय जी तथा फुसरो नगर परिषद के उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार सम्मिलित हुए. मारवाड़ी युवा मंच के द्वारा फुसरो बाजार में थैला वितरित करके लोगो से पॉलीथिन की थैलियों का उपयोग न करने की अपील की गयी, साथ ही अलग-अलग प्रकार के कचरों के निष्पादन से सम्बंधित जानकारियों को भी लोगों के बीच साझा किया गया.

स्वच्छ भारत एवं स्वच्छता अभियान में अपना योगदान तथा लोगों के बीच इसकी जागरूकता को बढ़ावा देने के क्रम में यह एक अनोखी पहल है. स्वच्छ भारत अभियान में ऐसे ही कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन कर तथा अपना योगदान देकर कई संस्थाओं ने भारत सरकार के स्वच्छता अभियान से सम्बंधित वेबसाइट पर अपनी जगह बनाई है. स्वच्छता को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा, अवधि, जनसहयोग और विधियों के बारे में वहां विस्तृत रूप से बताया गया है. यदि आप में भी यह अभिरुचि है तो भारत सरकार आपको भी प्रोत्साहित कर सकती है.

इस स्वच्छता ड्राइव के अपने फुसरो पड़ाव के समय कार्यक्रम में मारवाड़ी युवा मंच बेरमो शाखा के अध्यक्ष भवानी शंकर अग्रवाल, सचिव पंकज मित्तल, कोषाध्यक्ष रोहित मित्तल, सहित दिलीप गोयल, पिंटू राइका, श्रवण अग्रवाल, अरुण अग्रवाल, विश्व्नाथ अग्रवाल, आदि प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे।

स्वच्छता ड्राइव के कुछ यादगार चित्र जो स्टूडियो कैलाश एवं पिंटू राइका के सौजन्य से प्राप्त हुआ.

स्वच्छता एप्प- त्वरित समाधान का नया माध्यम

स्वच्छ भारत अभियान के तहत भारत सरकर द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 किया जाना है, जिसमे स्वच्छता के मापदंड पर शहर की रेकिंग की जाती है. इसमे नागरिको की जागरुकता पर भी अंक दिया जाएगा.

अतः आप सभी से अनुरोध है कि Google Play Store से अपने Android आधारित स्मार्ट फ़ोन में “Swachhta-MoHUA” download करे एवं अपने फुसरो को स्वच्छ बनाने मे अपना योगदान दे.

प्रति एक download कर अपने मोबाइल न. को register करने से फुसरो शहर को 2 अंक प्रप्त होगा. गंदगी की जानकारी देने पर 2 अंक एवं नगर परिषद द्वारा साफ़ किये जने पर 2 अंक प्रप्त होगा.

आप लोगों से अपील है कि ज्यादा से ज्यादा है ऐप डाउनलोड कराएं फुसरो को दूसरों को स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में एक नंबर पर लाएं.

:आपकी सेवा, हमारा कर्तव्य. फुसरो नगरपरिषद, आपकी सेवा में!