सोच की आजादी

हमारा सम्पूर्ण जीवन हमारे विचारों के द्वारा नियंत्रित होता है | हमारे जैसे विचार होते हैं , हमारी जैसी सोच होती है ; हमारी जैसी चिंतन धारा होती है ; वैसी ही हमारी प्रवृति होती है | जैसी प्रवृति होगी व्यवहार ठीक उसी के अनुकूल होगा ;व्यवहार के अनुरूप ही हमारे जीवन का निर्माण होता है | निष्कर्षतः मनुष्य का समग्र जीवन उसकी सोच व विचारधाराओं के गीर्द ही घूमती है | अब देखने की जरूरत यह है कि व्यक्ति की विचारधारा कैसी है ? यदि व्यक्ति सकारात्मक विचारों का स्वामी है तो उसके जीवन में पवित्रता स्थाई रूप से रहेगी | विचारधार दूषित है तो जीवन भी दूषित हो जाता है | नदी किनारे एक कुंभकार मिट्टी को आकार दे रहा था | वह मिट्टी से चिलम बना रहा था | अचानक उसके विचार बदले और उसने चिलम की जगह घड़ा बनाना शुरू कर दिया | पास बैठी कुम्हारिन ने पूछा मिट्टी का आकार क्यों बदल गया ? कुम्हार ने कहा कि बस यूँ ही मेरा विचार बदल गया | माटी ने तत्तक्षण कहा तुम्हारे विचार क्या बदले मेरा तो संसार ही बदल गया |

वस्तुतः किसी व्यक्ति के जीवन की ऊँचाई उसके नजरिये की ऊँचाई पर निर्भर करती है | यदि सोच स्वस्थ है तो व्यक्ति का जीवन मानवता का आदर्श बन जाता है और सोच यदि नकारात्मक है तो पूरी मानव जाति के लिए कलंक बन जाता है हम चाहें तो अच्छे नजरिये के बल पर अपने भीतर सकारात्मकता को प्रकट कर अपने जीवन में अहोभाव का अलग आनंद उत्पन्न कर अभिनव उल्लास की अभिव्यक्ति कर सकते हैं |

सोच तीन प्रकार की मानी गई है – भौतिक सोच व्यवहारिक सोच व  आध्यात्मिक सोच |

भौतिक सोच वाले व्यक्ति भोगवादी मनोवृति से ग्रसित होने के कारण इनके जीवन में दुखों का अम्बार लग जाता है | भौतिक सोच मनुष्य की चिंतनधारा को संकीर्ण बना देती है | ऐसे लोग स्वार्थी मनोवृति के धारक बन जाते हैं,

व्यावहारिक सोच में जीने वाले लोग इस बात के प्रति सजग रहते हैं कि उनके किसी बर्ताव से सामने वाला आहत न हो बल्कि विशेष रूप से प्रभावित हो |

सर्वश्रेष्ठ सोच अध्यात्मिक सोच को माना गया है | अध्यात्मिक सोच से प्रभावित व्यक्ति बुराई में भी अच्छाई ढूँढ लेता है | वह दूसरों पर दोषारोपण की जगह स्वयं को उस हालात में स्थापित कर सूक्ष्मता से विचार करता है | राम और रावण के अंतर का कारण क्या था राम अध्यात्मिक सोच से भरे थे , उनका त्यागमय और मार्यादित जीवन ही उन्हें ईश्वरत्व की महिमा से मंडित कर दिया | जबकि रावण की भौतिक सोच ही उसे संसार में घृणा का पात्र बना दिया | यह अतीत में राम और रावण की घटना ही नहीं आज भी एसा ही होता है |

सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति अपनी चिंतनधारा व प्रर्वृति के बल पर अपने जीवन का उत्कर्ष कर लेता है और जीवन को मंदिर बना लेता है |

प्रभावशाली व ऐतिहासिक व्यक्ति वही माना गया है जिसकी सोच स्वतंत्र रही है | जो किसी की थोपी गई विचारधारा को अपने जीवन का मार्ग नहीं बनाता बल्कि अपने जीवन की इमारत की भव्यता स्वयं गढ़ता है और अखंड विश्वास के साथ लक्ष्य को प्राप्त कर इतिहास रचता है | कहा भी गया है सुने सबकी, करें वही, जिसकी अनुमति आपकी आत्मा देती हो | आत्मा की आवाज सुन कर अपने जीवन को गति देनें वाला प्राणी कभी भी असफलता का न तो मुख देखता है न ही हताशा, निराशा व अवसाद का शिकार होता है , प्रारब्ध को ही अपने जीवन का श्रेष्ठ परिणाम समझ प्रफुल्लित मन से स्वीकार कर लेता है | हाँ , जीवन पथ संघर्ष व चुनौतियों भरे अवश्य होंगे किन्तु आजाद चिंतन वाले व्यक्ति कभी विचलित नहीं होते | स्वतंत्र चिंतन, मनन मंथन ही श्रेष्ठ व सत्य मार्ग दिखलाने का कार्य करता है | स्वतंत्र व सम्यक चिंतन से जुड़ने की कोशिश हमारे जीवन में सार्थक उपलब्धियाँ अर्जित कराता है हमारे सफल संतुष्ट जीवन का मूलाधार हमारी सोच की धुरी पर केन्द्रित है |

कुछ नया करने का साहस और जुनून आजाद ख्याल की टोलियों में पाए जाने वाले कुछ चुनिंदे लोगों में ही होते हैं , ऐसे लोग न आग से खेलने में घबराते हैं न ही झुलस जाने के परिणाम की चिंता करते हैं | निश्कर्षतः ऐसे व्यक्ति जमाने की परवाह किए बिना एक ऐसी लकीर खींच डालते हैं जिसे भावी पीढ़ी मिटा तो नहीं पाती बल्कि उस पथ की अनुगामिनी अवश्य हो जाती है | ऐसे ही विरले लोग खुले आसमान में ऊँची उड़ान तय करते हैं , सपनों में मनचाहा रंग भरते हैं और धरती को एक चमत्कार भेंट स्वरूप सौंप देते हैं | हमारी धरती के जितने भी आविष्कर्ता हुए जिनकी खोजों की बदौलत मानव सम्यता ने सुई से लेकर चाँद तक के सफर की यात्रा तय की है , निःसंदेह उनके मन की उड़ान , आसमान को छूने के लिए फड़फडाते पंखों ने कभी विश्राम नहीं लिया होगा , ऐसे ही आजाद लोग दुनिया की तस्वीर बदलने का ज़ज्बा रखते हैं |

अंततः विलक्षण व्यक्ति सत चिंतन व स्वतंत्र सोंच की बुनियाद पर ही अपने जीवन के साथ संसार में भी व्यापक परिवर्तन का निमित माना गया है | कहते हैं कि सोच तेरी बदली तो नजारा बदल गया, किश्ती ने बदला रूप तो किनारा बदल गया |

ओम प्रकाश यादव

 

 

 

 

 

लेखक डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल
झुमरीतिलैया, कोडरमा, के प्राचार्य हैं.

गम न करें – १७

बे-मौके सब शरीफ

मतलब यह नहीं कि यह सीधे तौर पर आपके बारे में हैं. मतलब यह है कि यह उन सभी के बारे में है जो मौके पर शरीफ बनने का ढोंग रचते हैं और समय आने पर दूसरों को आगे कर खुद उनका समर्थन अथवा उनके साथ अथवा उनके पीछे चलने को तुरंत तैयार हो जाते हैं. इसलिए बे-मौके सब शरीफ से हमारा तात्पर्य यह है कि मौका आने पर अपनी शराफत दिखाने से कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता, पर यह कि सिर्फ ख़बरों में आने के लिए या कि सिर्फ दिखावे के लिए.

आप कथनी और करनी में जितना कम अंतर रख पाते हैं उतने ही आप चरित्रवान होते हैं, यह नहीं कि आप चरित्रवान तो हों पर अवसर आने पर आप खिसक लें. यहाँ मेरा यह सब लिखना आप में से बहुतों को खल रहा होगा पर क्या करें तारीफ बनती भी होगी तो आप इसे मेरा दंभ न समझ ले इसलिए यह साफ करना जरुरी है कि मै इस लेख के माध्यम से आप सब को कुंठित नहीं करना चाहता हूँ. मेरा उद्देश्य बस इतना है कि हम अपने चरित्र के स्तर को उस ऊँचाई तक ले जा सकें जहाँ हम सचमुच ही अपने कथनी और करनी अंतर नहीं कर सकें अर्थात जैसा भी हम सोचें अथवा कहें उसपर चल भी सकें.

थोड़ी देर के लिए यह लेख आपको गप्पबाजी लग सकती है पर आप जरा ध्यान देकर इन बातों को सोचेंगे तो यही पाएंगे कि हम में से कितने ही अवसर आने पर किसी जन-कल्याणकारी कार्यों के लिए समय निकल पाते हैं? अधिकतर का उत्तर यही होगा कि अपने काम से फुर्सत मिले तभी ना. सही भी है, पर यह तभी संभव हो पाता है जब आप समय निकालना चाहें. क्या आप अपने परिवार के लिए समय नहीं निकाल पाते, क्या आप अपने किसी निजी कार्य के लिए समय नहीं निकाल पाते यदि आपका उत्तर हाँ है तो समस्या यह है कि समय आपको निकालना होता है इससे पहले कि समय आपको निकाल दे.

महत्वपूर्ण यह नहीं कि आप किन बातों अथवा कार्यों के लिए समय निकाल पाते हैं अपितु यह कि आप किन बातों अथवा कार्यों के लिए स्वयं को अनुकूल पाते हैं. यदि नहीं तो फिर आप चाहें कि उक्त कार्यों के लिए भी आप समय निकालें. क्योंकि यह आपके ही हाथों में होता है पूर्णरुपेण. आप टालमटोल के शिकार महसूस होते हैं यदि आप चाह कर भी समय प्रबंधन नहीं कर पाते और इसका ठीकरा दूसरों के सर फोड़ने को उद्दत रहते हैं.

आईये इस उधेड़बुन से निकालें जीवन बहुत खुबसूरत है, इसका आनंद लीजिये, नहीं समझ आ रहा हो तो किसी मनोवैज्ञानिक से जरुर मिलें, आप पागल नहीं हैं पर इस स्थिति में अधिक देर रहना आपको जल्द ही उस श्रेणी में ला खड़ा कर सकता है, इसलिए कि कही और अधिक देर न हो जाये, अपने आपको, अपने लिए कुछ ऐसा करें जिससे आपके मन, आत्मा और चित्त को प्रसन्नता होती हो, साथ ही दूसरों की प्रसन्नता का कारण हो ऐसे कृत्यों में स्वयं को उलझाएँ.

इसलिए गम न करें खुश रहें.

राष्ट्र भक्ति और हम

शीर्षक के माध्यम से अपनी बात कहने की आजादी चाहता हूँ। राष्ट्र और राष्ट्र भक्ति को हम में से हर एक के जीवन में प्रथम स्थान प्राप्त है, इसमें कोई संदेह नहीं है। पर इसे प्रर्दशित करने के अपने-अपने तरीके हैं। जिस तरह एक सैनिक सीमा पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपनी राष्ट्र भक्ति प्रर्दशित करता है ठीक उसी तरह एक कवि अपनी कविताओं के माध्यम से, लेखक अपने लेखों के माध्यम से, कलाकार, साहित्यकार व इन जैसे ही सभी अपनी-अपनी विधाओं के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपनी सच्ची कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

इनमें से किसी के बारे यह आकलन किया जाना कि कौन अपने देश के लिए ज्यादा वफादार अथवा समर्पित है, कौन नहीं, सर्वथा अनुचित है। कौन राष्ट्र भक्ति की दौड़ का स्वर्ण पदक विजेता है, इसके निर्णय की कौन से सर्वमान्य सिद्धांत है, पता नहीं। हमारे देश की भी अजीब विडंबना है। बहुत कम ही ऐसे मौके आते हैं जब एक सही विषय के पक्ष में अथवा सही विषय के लिए लोग आंदोलन करते हैं। समय समय पर कुछ स्व्यंभू कबिलाई किस्म के नेता उभरते हैं और हमारी सोच और विचार की सांझी विरासत के साथ जम कर खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं। इनके आयोजित तमाशे में कुछ भीड़ भी होती है जो इनके अनुसार समर्थक होते हैं। इन्हीं तथाकथित समर्थकों की भीड़ इनके आयोजन की सफलता अथवा असफलता की कहानी बयां करती है।

यह बात जब मैंने अपने एक मुसलमान दोस्त से पूछी तो उसने बेबाकी से अपनी बात कही। उसने कहा कि बंटवारे के समय जब हम में से हर एक के पास यह विकल्प मौजूद था कि हम कहां जाएं, हमने इसी माटी में दफ़न होने का विकल्प चुना। वह भी इसलिए कि हमें अपने भाईयों पर जो हिन्दू थे, खुद से ज्यादा भरोसा था। मुझे उसके कथन में सच्चाई की झलक दिखाई दी। लोग चाहे जितना जोर लगा दें, चंद फिरकापरस्त लोगों की नापाक कोशिश हमारे विश्वास की डोर टूटने नहीं देगी।

गम न करें – १४

दायें बाएं देखिये हर तरफ मुसीबत जदा दिखाई देंगे. हर घर में हंगामा बरपा है. हर रुखसार पर आंसू है. हर वादी में मातम है. आप देखेंगे मुसीबत जदा आप तनहा नहीं. दूसरों के मुसीबत के मुकाबले में आपकी मुसीबत कम है. कितने ही मरीज हैं जो सालो साल से बिस्तर पर करवटें बदल रहे हैं. दर्द से कराहते रहते हैं. कितने जेलों में बंद हैं. सालों से इन्होने सूरज की रौशनी नहीं देखीं. कितनी औरतें हैं जिनके जिगर के टुकड़े नौजवानी में ही छीन लिए गए. कितने हैं जो परेशान हैं, कर्जदार हैं, मुसीबत में हैं. आप इनके जरिये तसल्ली हासिल करें. और अपने आप को मुसीबत का सामना करने का ऐसा आदी बनायें जैसे ऊंट सेहरा में चलने का आदी हो जाता है. जिंदगी के सफ़र में तवाज्जन (संतुलन) बरक़रार रखिये. अपने इर्द-गिर्द और पहले के लोगों के नमूने सामने रखिये, और इनके बीच अपना मुआज्जना (अंदाज) लगाईये तो पता चलेगा, आप इनसे बहुत ज्यादा बेहतर हैं.

आपको हल्का सा झटका लगा है. इस पर अल्लाह (भगवान) का शुक्र अदा करें. जो उसने ले लिया उसपर शबाब की उम्मीद रखिये. और अपने माहौल के लोगों को देख कर तसल्ली हासिल कीजिये. इस सिलसिले में आखिरी नबी हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम अच्छी मिसाल हैं, के आपके सर पर ऊंट का ओझरी रखा गया, कदम जख्मी हुए, चेहरे पर चोटें आयीं, घाटी में बंद किया गया, दरख्तों के पत्ते खाने पड़े, अपना प्यारा शहर मक्का छोड़ना पड़ा, आपका बेटा और अक्सर बेटियां आपके जिंदगी में ही इंतकाल कर गयीं. हजरत मूसा अल्लैहिस्सल्लाम को तकलीफ दी गयी, हजरत ईसा अल्लैहिस्सल्लाम को सूली पर लटकाया गया. श्रीराम जी को बनवास जाना पड़ा, सीता जी को अग्नि परीक्षा देनी पड़ी. इसीलिए ऋषियों ने इस संसार को दुखालय कहा है. दूसरों के मुकाबले हमारा गम कितना कम हैं, फिर भी हम गमगीन हैं?

जारी….

गम न करें – १३

नरमी जिस चीज में होगी, उसे जीनत देगी. जिस चीज से निकाल ली जायगी, उसमे ऐब पैदा होगा. बातचीत में नरमी, चेहरे पर मुस्कूराहट, गुफ्तगू के वक्त अच्छी बात, यह, वह बेहतरीन अवसाफ (गुण) हैं, जो खुशनसीबों के हिस्से में आते हैं. ये बेहतरीन इंसानों की शिफात है. इनकी मिसाल ऐसी है, जैसे शहद की मक्खी, पवित्र चीज खाकर पवित्र चीज बनाती है. वो फूल पर बैठती है, लेकिन इसे तोड़ती नहीं.

नरमी से अल्लाह (भगवान) वह चीज दे देता है, जो सख्ती से नहीं मिलती. नरम मिजाज वालों का लोग स्वागत करते हैं. निगाहें इन्हें देखती हैं, दिल मायल होता है. रूहें सलाम करती हैं. वजह ये है कि इनका मिजाज, बातचीत, लेनदेन, मेलजोल और खरीदना बेचना हर जगह इन्हें महबूब बना देता है. दोस्त बनाना एक फन है.

बुराई का जवाब भलाई से दो. इस सूरत में आपके और जिसके बीच अदावत है, वो ऐसा हो जायगा जैसे दिली दोस्त. सही इन्सान तो वो है, जिसके जुबान और हाथ से दूसरा इन्सान महफूज हो. अल्लाह ने मुझे हुक्म दिया है जो मुझसे कटे मैं उससे जुडु, जो मुझ पर जुल्म करे मैं उसे माफ़ कर दूं. अगर हम ये राह अपनाएंगे तो हमेशा खुश रहेंगे.

जारी…

हो जायें सावधान, जब बच्चा बोले, बस एक मिनट और!

आजकल घरों में प्रायः ही यह देखने को मिल जाता है कि जब आप अपने बच्चों को कोई काम कहें तो आपको उत्तर मिलता है- “बस एक मिनट और!” मतलब स्त्पष्ट है कि आपका बच्चा बहुत ही व्यस्त है, और उसकी यही व्यस्तता इस प्रकार के उत्तर का कारण भी. याद कीजिये अपना बचपन, जब आप पिताजी के बुलाने पर कहते थे “जी, पिताजी अभी आया”.

कुछ लोग कहेंगे, साहब! वह जमाना और था आज के ज़माने में कहाँ ये सब. ऐसे विचार रखने वालों से स्पष्ट रूप से कहा जाना चाहिए कि मात्र संस्कारों का वहन ही पर्याप्त नहीं है अपितु उसका संवहन भी अति आवश्यक है. अर्थात आपका संस्कारी होना ही काफी नहीं, बल्कि आप अपने संस्कार आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुंचाते हैं इस पर विचार करना भी बहुत जरुरी है.

आईये, अब उन उत्तरदायी कारणों को पुनः एक बार समझने का प्रयास करते हैं जो इनसे सम्बंधित हो सकते हैं. पुनः एक बार से हमारा आशय स्पष्ट है कि, उन कारणों से हम भलीभांति परिचित होते हुए भी उन्हें नकारने का हर संभव प्रयास करते रहे हैं.

  1. गेम- आज के तकनीकी युग में सबसे अधिक प्रचलन में कंप्यूटर पर खेले जा सकने वाले गेम्स एक प्रमुख कारण है जो बच्चों को उनके मूल कर्म अर्थात अध्ययन से विमुख करता है. उनके सोचने समझने एवं निर्णय क्षमता पर सीधा प्रभाव डालता है. “ब्लू-व्हेल” नामक गेम के दुष्परिणाम से आप भली प्रकार परिचित हैं. माना कि आपका बच्चा वह गेम नहीं खेलता होगा, परन्तु यह कि जहाँ शारीरिक क्षमता विकसित करने के लिए हल्के-फुल्के दौड़-धूप वाले गेम खेलने के बजाय लम्बे समय तक कंप्यूटर पर आँखे गड़ाए रहना कितना हानिकारक हो सकता है, क्या यह आप सबसे से छिपा है?
  2. चैटिंग- सोशल मिडिया पर अधिक समय बिताना भी एक प्रमुख कारण है, जिससे की बच्चों की मानसिक दशा पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है. विशेषकर ऐसे लोगों से चैटिंग के माध्यम से जुड़ना जिन्हें वे जानते तक नहीं कि दूसरी तरफ कौन व किस उम्र का व्यक्ति उनसे चैटिंग कर रहा है. चैटिंग, में कई बार लोग ज्यादा ही खुल कर अपने विचारों को रख जाते हैं जिन्हें सीधे बोलने में शायद हिचक होती हो. ऐसी स्थिति आपके बच्चों की मनोदशा पर विपरीत प्रभाव छोड़ सकती हैं.
  3. मोबाइल- मोबाइल एक सूचना साझा करने का सबसे बेहतर उपकरण मात्र हो सकता है. पर यह कि सदैव उसके साथ ही समय बिताना आपकी कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल जाता है. यह आपको तब पता चलता है जब आपके बच्चे ऐसा करते हैं. सोचें, और ध्यान रखें कि आपके मोबाइल में कोई ऐसी सामग्री न हो, गलती से भी, कि जिसे बच्चे देख ले तो उनकी मनःस्थिति असंतुलित हो जाय.
  4. अन्य कारण- उपरोक्त कारणों के चलते असमय खाना-पीना, देर रात तक जागना, सुबह स्कूल जाने को समय पर तैयार न हो पाना, होमवर्क जैसे तैसे किसी की सहायता से या नक़ल कर पूरा करना आदि ऐसे व्यवहार के पीछे उत्तरदायी हो सकते हैं, पर जरा ध्यान दें कि इनके पीछे भी वही कारण हैं जो इस प्रकार के व्यवहार के कारक हैं.

इनके अतिरिक्त और भी कई कारण हैं जिन्हें हम भलीभांति समझ लेते हैं पर उनके निवारण के लिए कोई उपयुक्त व ठोस कदम नहीं उठा पाते. हमें इसके लिए सुनियोजित तरीके को अपनाना होगा, जहाँ तक संभव हो सके अपने आप को एक उच्चतम स्तर पर आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना होगा जिससे कि उन्हें प्रेरणा मिले और वह अनुकूल वातावरण में स्वयं को ढाल पायें, तथा एक सभ्य नागरिक बनने की दिशा में अग्रसर हो सकें, भले ही यह गति धीमी हो, यदि रास्ता सही होगा तो देर से ही सही, लक्ष्य अवश्य प्राप्त किया जा सकेगा.

  1. समय- सिर्फ पैसे कमाना ही आपका कर्तव्य नहीं, अपनी संतान को बेहतर जीवन देने की दिशा में आपका उसको दिया जाने वाला समय भी परमावश्यक है. सुनियोजित हो कर उन्हें समय, थोड़ा ही सही पर जरुर दें, किसी भी बहाने से, कभी पूछ ही लिया करें, कहाँ गए थे. क्या खाया? क्या पिया? होमवर्क बनाया लिया क्या? ताकि उन्हें भी लगे कि हाँ, पिताजी पूछते हैं. वे भी आपके प्रति उत्तरदायी होंगे. उनके साथ थोड़ा समय व्यतीत करें. आप बहुत काम करते हैं, थक जाना स्वाभाविक है. पर आपको चाहिए अपना मनोरंजन उनके बीच खोजें, उनसे ही अपना मन बहलायें. उनसे अपनी कोई बात साझा करें, प्रेरणास्पद घटनाओं के बारे में बताएं, महापुरुषों की जीवनी के बारे में बताएं, जिससे की उनका मनोबल ऊँचा हो सके.
  2. पैसा- उन्हें उम्र के मुताबिक खर्चने को पैसे भी दें, साथ ही उसका हिसाब भी लें, जिससे की वे अर्थव्यवस्था को समझें, कि पैसे की अहमियत क्या होती है, जब हो और जब किसी के पास न हों इसके बीच का अंतर भी, और पैसा लाने में कितना परिश्रम लगता है आदि.
  3. उपहार- छोटे-छोटे ही सही पर कभी-कभी कुछ उपहार भी दिया करें, पर उन उपहारों के कारणों को सटीकता से ढूंढें, जैसे तुमने अपना फलां काम बेहतर किया इसलिए तुम्हें दिया जा रहा है, अगली बार और बेहतर कर पाओ ऐसी आशा है. पूरी तरह से बेफिक्रे न हों. बच्चों को पता चलना ही चाहिए कि आप कौन हैं, उनसे आपकी क्या अपेक्षा है, और आप उनके लिए क्या कर रहे हैं.
  4. व्यवहार- सबसे महत्वपूर्ण है आपका उनके सामने प्रस्तुत होना कि आप किस रूप और हालत में उनके सामने जाते हैं अथवा उनका सामना कैसे करते हैं. आप तात्पर्य भली प्रकार समझ गए होंगे, परन्तु फिर भी जिक्र करना आवश्यक प्रतीत हो रहा है तो, यह कि यदि आप कोई व्यसन करते हैं तो उनके सामने करने से बचें, भले ही वो जानते हों पर फिर भी भूले से भी उनके सामने ऐसा न करें और हो सके तो स्वयं को व्यसनों से दूर रखें.

जब हम गर्भवती महिलाओं को व्यसनों से दूर रखने अथवा रहने की बात करते हैं तो ध्यान देना चाहिए कि संतान उत्पति के बाद पुरुषों को भी व्यसनों से दूर रहना चाहिए. एक बेहतर संतान की अपेक्षा सभी रखते हैं पर उसके लिए आदर्श वातावरण के निर्माण में अपनी भूमिका भूल जाते हैं.

उपरोक्त बातें चाहे कितनी भी बार आपने अलग-अलग माध्यमो से सुनी, पढ़ी अथवा देखी होंगी, पर इसके अनुपालन में हम ही पिछड़ रहे हैं, अपने बच्चों के प्रति चिन्तित होना, और इस हेतु कुछ कर न पाना, इस विडंबना से हमें बाहर आना ही होगा क्योंकि, आपके हमारे भविष्य की डोर हमारे आपके ही हाथों में है

विशाल हिन्दू सम्मलेन, ऐतिहासिक भीड़, साध्वी सरस्वती के उद्घोष पर जयघोष

हिन्दू कल्याण मंच, बेरमो, जिला- बोकारो, झारखण्ड द्वारा आयोजित विशाल हिन्दू सम्मेलन में उमड़ी भीड़ ऐतिहासिक थी. कोयलांचल की धरती पर ऐसा जन सैलाब विरले ही देखने को मिला है. गौ-वध निषेध हो, विधर्मी हुए हिन्दुओं की घर-वापसी हो और कश्मीर सहित आतंकवाद के मुद्दे पर खुल कर बोलीं विश्व हिन्दू परिषद की राष्ट्रीय प्रवक्ता साध्वी सरस्वती. जय-जय श्रीराम के जयघोष से गूँज उठा पूरा कोयलांचल. हिन्दू कल्याण मंच के अध्यक्ष रामू दिगार को अपनी तलवार भेंट करते हुए उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र में वे हिंदुत्व के प्रति सक्रियता इसी भांति दिखाते रहें.

साध्वी सरस्वती ने कहा कि हिन्दू धर्म की सनातनी परंपरा सदियों से चली आ रही है. सनातन धर्म हमारी जननी है. सनातन परंपरा का रक्षण करना हम सभी का धर्म है.  धन का लोभ देकर लोग धर्मांतरण कराते है. झारखंड एवं बिहार में ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्म-परिवर्तन का काम किया जा रहा है जिसे रोका जाना नितांत आवश्यक है. पूरे भारत वर्ष में वर्षों से धर्म-परिवर्तन का कारोबार चला आ रहा है. इसके लिए ऐसी संस्थाओं को मुंहतोड़ जबाब देना है. जिसके लिए ऐसे ही युवाओं को आगे आना होगा.

विशाल हिन्दू सम्मलेन, ऐतिहासिक भीड़, साध्वी सरस्वती के उद्घोष पर जयघोष
विशाल हिन्दू सम्मलेन, ऐतिहासिक भीड़, साध्वी सरस्वती के उद्घोष पर जयघोष

गौ माता का दुश्मन कभी हमारा मित्र नहीं हो सकता. देश में गौ-हत्या पूर्ण रूप से बंद होना चाहिए. सभी हिन्दू अपने घरो में गौ-पालन करें. गाय में सभी देवों का वास होता है. हर घर में गौ-गीता-रामायण होनी ही चाहिए. “भारतीय संस्कृति किसी को नहीं छोड़ती, पूँछ में आग लगाओगे तो लंका जला डालेगें“, देश में हिन्दूत्व की भावना बढ़ रही है. भारत विभिन्न भाषा व त्योहारों का देश है. सभी एक साथ कार्य करते है तो हिन्दुत्व कहलाता है. सन्यास का काम भगवा पहनना नहीं है. देश के युवाओं का मार्ग दर्शन करना है.

इस सम्मलेन में युवाओं को भारतीय संस्कृति, सभ्यता व धर्म की रक्षा का संकल्प दिलाते हुए उन्होंने आगे कहा कि मुझे गर्व है कि मैं हिन्दू हूँ और हिन्दुओ से कहना चाहती हूँ, राम मंदिर को बनाने में आप आगे आईए. कहा कि हिन्दुओ की आस्था से राम मंदिर बनेगा. भारत में रहना है तो भारत को मां कहना पड़ेगा. कई वर्षों बाद भारत को अच्छा प्रधानमंत्री मिला है. महिलाओ के बल पर ही भारत विश्व गुरु बनेगा. हिन्दुओ को छेड़ने वाले को छोड़ेगे नहीं.

चित्रकूट से आये स्वामी श्री सीताराम शरण महाराज ने उपस्थित भीड़ से कहा कि “हाय-हेल्लो छोड़ीये और जयश्री राम कहिए”. अपनी शैली में बोलते हुए उन्होंने आगे कहा कि भारत अनादी काल से महापुरुषों संतो महात्माओ की भूमि रही है, जहाँ से अध्यात्मिक, सुमधुर वायु फैलाता रहा है. हमारा भारत पुनः विश्व गुरु के स्थान को प्राप्त कर सके, उसके लिए हम सब को प्रयास करना होगा.

इससे पूर्व बेरमो प्रखंड कार्यालय से विशाल जुलूस जय श्रीराम, जय-जय श्रीराम के जयघोष के साथ निकला जो फुसरो बाजार से पुराना बीडीओ आॅफिस होते हुए करगली फुटबाॅल मैदान, अपने निर्धारित सभा स्थल तक पहुंचा. कार्यक्रम में टी.राजा नहीं आ सके तो उनके इंतजार को विराम दे, सभा की शुरुआत की गयी. हजारों की संख्या में लोग भगवा ध्वज के साथ जयश्री राम का जयघोष करते चल रहे थे. यह दृश्य अदभुत था.

: निष्कर्ष

इस प्रकार के आयोजन से यह पता चलता है कि धर्म ने सभी को एकात्म किया है, क्योंकि इसमें सभी वर्गों के लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की. हमें धार्मिक होना ही चाहिए, पर इसका तात्पर्य हमारे द्वारा किये गए सत्कार्य से होना चाहिए. सभा में कितने ऐसे थे जिन्होंने शायद पहली बार जयश्री राम बोला हो. पर इस प्रकार के सम्मलेन ने उन्हें एक राह दिखाई है उनके झिझक को तोड़ा है. इस प्रकार के सम्मेलनों के अभाव से ही हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं. सेल्फी की धूम रही, फोटो से पूरा सोशल मिडिया भरा पड़ा है. रोड पर अनाथ विचरती गायों का ख्याल रखने वाला कोई नहीं, सभी हिन्दू गायों का दूध निकाल कर उन्हें सड़कों पर घूमने को छोड़ देते हैं फिर चाहे उनका जो भी हो और गौ रक्षा की बात करते हैं, और तो और जो हिन्दू ऐसा करते हैं उनको बोलने वाला कोई हिन्दू सामने क्यों नहीं आता. सिर्फ जय श्री राम कहने से आप हिन्दू नहीं हो जाते राम चरित्र को अपनाना भी पड़ता है. अपने सामाजिक उतरदायित्व को समझ कर जब आप कोई काम करते हैं जिससे किसी अन्य का भला होता हो तो वह होगा असली हिंदुत्व. 

जय-जय श्री राम.

सूक्तियाँ

  • सम्मान, संयम, अनुशासन, नियंत्रण, संतुलन आदि कुछ ऐसे शब्द हैं, जिनमें से किसी एक के भी अर्थ मात्र जान लेने से आपका जीवन सार्थक हो सकता है.

 

  • जिस प्रकार विक्षों से पटे वन में दौड़ना कठिन होता है, उसी प्रकार हे मनु! अनावश्यक कोलाहल से अटे मष्तिस्क से हमारा प्रतिउत्पन्नमतित्व भी प्रभावित होता है.

 

  • जल से भरे किसी पात्र में यदि आप गुड़ डालेंगे तो अतिरिक्त जल बहार आयगा ही, यदि सुविचारों को आप्त करना हो, तो अन्य विचारों को त्यागना ही होगा.

 

  • जीवन में कोई कार्य घृणित हो ही नहीं सकता, यदि उद्देश्य सार्थक व सार्वभौम हो, अर्थात किसी कार्य का उदेश्य अर्थपूर्ण हो एवं बहुतों के लिए लाभकारी हो, तो ही वह करने योग्य हो सकता है.

 

  • किसी के चिढाने से यदि आप चिढ जातें हैं, खिजाने से आप खीज जाते हैं, तो उसका उदेश्य सफल हो जाता है, परन्तु आप मुस्कुराकर उसे परास्त कर सकते हैं!

 

  • अपेक्षाओं, उपेक्षाओं, इक्षाओं, समीक्षाओं से प्रभावहीन होना ही आपको प्रभावशाली बनाता है.

 

  • ज्ञान अर्जित तो कई करते हैं परन्तु उसका वहां एवं संवहन कुछ ही कर पाते है.

 

  • वस्तुतः साधारण होना ही आपको असाधारण बनाता है, हाँ यदि आप विशिष्ट बनना चाहते हैं तो आपको प्रथमतः शिष्ट होना चाहिए.

 

  • वायु के प्रवाह से तो बहाव निश्चित है, आनंद तो तब है जब बिना वायु प्रवाह के इत्र विसरित होकर अपनी उपस्थिति का भान कराता है.

 

  • जिस प्रकार अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी एवं आकाश अपना गुणधर्म नहीं बदलते हमें भी बिना बदले अपने धर्म का निर्बहन करना चाहिए.

 

  • धर्म सार्वभौम एवं संप्रभु होता है, इसे किसी जाति विशेष से जोड़ना ठीक नहीं, पृथ्वी पर जितने भी जीव हैं उनका जीव धर्म ही वास्तविक धर्म है तथा इसी वास्तविकता का संबहन आपको धार्मिक बनाता है.

 

  • आपका प्रकृति के संकेतों का ज्ञान ही आपको भूत-वर्तमान का आकलन कर भविष्य दर्शन करा सकता है, यही विशिष्ट ज्ञान ही विज्ञान कहलाता रहा है. दुखद है यह अत्यंत ही की विरले ही ऐसे ज्ञानी के दर्शन हो पातें हैं या उन ज्ञानियों को दुर्लभ ही शिष्य मिल पाते हैं.

 

  • गुरु वह पारस पाषाण होता है जिसके स्पर्श मात्र से लोहा कुंदन बन सकता है. परन्तु इसके लिए शिष्य की तत्परता भी लोहे सी होनी चाहिए.

 

  • आपकी सत्यवादिता की पराकाष्ठा उस क्षण प्रमाणिक हो पाती है जिस क्षण आपको पूर्ण अवसर तो प्राप्त होता है की अत्यंत सरलता से आप उस असत्यता को स्वीकार कर सकें, परन्तु आप ऐसे अवसर को दृढ़ता के साथ अस्वीकार कर पाते हैं.

 

  • हम सभी प्रतिदिन स्वयं को सज्ज होते हुए दर्पण अवश्य ही देखते हैं. हम यह नहीं देख पाते की दर्पण के अन्तः से स्वयं का प्रतिबिम्ब भी हमें देख रहा होता है. दर्पण में स्वयं को कुछ क्षण के लिए देखना आत्मदर्शन का प्रथम प्रयास होगा.

 

  • लक्ष्य साधना अथवा लक्ष्य की साधना तो सरल हो सकती है, परन्तु तब क्या जब आप अपना लक्ष्य स्वयं हो?

 

  • विचार भले जैसे हों, भाव का स्पष्ट होना अतिआवश्यक है. विचार व भाव लाभकारी व हितकारी हों तो वह सुविचार बन जाते हैं.

 

  • संसार में सभी प्रकार के कार्य हेतु स्थान एवं काल सुनिश्चित है, तथा उसी स्थान एवं काल में किया गया कार्य प्रशंसनीय व शोभनीय होता है. आप जिस क्षण इनमे से एक का भी विचार नहीं करते, असहज हो जाते हैं.

 

  • आप अपने जीवन में जितना समय बोलने में व्यतीत करते हैं उसके आधे के आधे के भी आधे सुनने में लगायें तो आप कई भूल सुधार सकते हैं. यह बात कदाचित आप समझ पायें यदि इतने भी के लिए आप तैयार हों.

 

  • सुविचार रुपी व्यंजनों का स्वाद भी आपको तभी आ सकता है जब आपकी जिह्वा पर अन्यर्थ का गुड़ न लगा हो.

 

  • आपका अत्यधिक कार्यवान होना, आपको अधिकार होना कुछ कर पाने का अथवा आपका अधिकारी होना, उन अधिकारों के बारे में बातें करना एवं उनके उपयोग की इच्छा को धारण करना सभी व्यर्थ हो जाते हैं जब आप उनका उपयोग नहीं करते तथा न कर पाने के दुःख को बढ़ी गरिमा से प्रकट करते हैं.

 

  • जब आप अपने अधिकारों के उपयोग में स्वयं को असमर्थ पाते हैं तब आपको यह मान लेना चाहिए की आप किसी के वश में हैं, चाहे वह परिस्थितियां ही सही परन्तु उसके जन्म का श्रेय भी आपको ही जाता है भले ही आपको यह भान होता रहे की वह तो परजन्य हैं.

 

  • कार्य का साध्य अथवा असाध्य प्रतीत होना उसके किये जाने के स्वयं की इक्षा पर निर्भर होता है. अन्य कारक सहायक हो भी सकते हैं अथवा नहीं.

 

  • संबंधों की व्यापकता आपके सामाजिक उपादेयता पर निर्भर होती है, होने को कुटुंब तो समस्त वसुधा भी होती है.

|| हमारे यू-ट्यूब चैनल से जुड़ें ||


Quotes

Motivational and Inspirational quotes!

Being optimistic

Don’t be upset of what you can’t do,do what you do best live as carefree and optimistic because some aren’t able to that too….Because its the pessimist who sees difficulty in every opportunity,and its the optimistic who sees opportunity in every difficulty.

Friendship

I know every thing, what is going inside you or what is not, because some of your hearts part is with me and mine is with you so i think this is the only reason that i am dying to have a friend like you.

Powers

Your powers are not meant for destruction, they are here to protect the world, one can guarantee this if you will use it for protection instead for destruction.

Roar

If roaring is the only way, then just roar, because when you will, all the wolves in your way will get away,

You yourself

I really can’t understand why do people usually say that I am weird when they  ask that “who is your best friend?”and I reply “no one, or I myself is my best friend.”- one should never forget that no one knows  more about you than you know about yourself.

Intentions

Nothing in this world happens randomly, no one in this world  is kind enough to do any thing without any gain because behind every thing there lies an intention. And this rule works at every aspects, even if it is the relation of blood,or of love.

Fume of hate and lie

If you think that you were the only one who cried, then you are wrong, because others also cried, more than you but, you weren’t able to see it just because of the fume of hate and lie you bear within

Be good and incredible

World is full of good and incredible people, but the fact is that, we can’t find one, no professional blame, we will be one.

Love-Work

Stay cool, keep calm, be awesome, and love your work and love what you do.

Be you

No matter how badly or cruelly this world treats you, stay calm and be who you are you.

Be aware

Often in this world we got to be aware from everyone,  even from the Sunshine to Sunrise from Highlands to Islands because no one knows that when they will turn in stormy wind or in deep creator.

Do what your soul says

Don’t think about what others say. Do what you want to. Because speakers will keep on saying. And! Its not bad to do something new. Do what your soul says.

you can

The time you think that you want to be happy, you can
The time you think you will, you can
The time you think you can, you can.