राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन के सहयोग से प्रेमी युगल की हुई शादी

बालीडीह के छतनीटांड के रहने वाले सीताराम घटवार के पुत्र सूरज घटवार तथा गोडाबालीडीह निवासी अंजू कुमारी के बीच करीब चार वर्षो से चल रहे प्रेम को विवाह में परिणित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सूरज और अंजू के परिवार वाले स्वजातीय होते हुए भी इस शादी के, विवाह-पूर्व प्रेम के कारण नाराज चल रहे थे. राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियन्त्रण संगठन के सक्रिय सदस्य परमानन्द सिंह एवं प्रभात सिन्हा  ने इस बात की जानकारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपक तिवारी को दी तथा उनसे प्रेमी युगल की मदद करने को कहा. इस बात पर दीपक तिवारी ने त्वरित कार्यवाई करते हुए दोनों परिवारों को सूचित किया और उन्हें दो दिन का समय दिया कि वे इसके लिए राजी हो जाएँ और बालीडीह थाना में उपस्थित हों ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके.

बालीडीह थाना में इंस्पेक्टर कमल किशोर तथा अजय कुमार, संजय सिंह व एन.के.सिंह आदि के सहयोग से दोनों परिवारों को बुलाया गया और मानवाधिकार संगठन के लोगों की उपस्थिति में यह बात खुलकर सामने आई कि लड़की के माता पिता इस बात के पता चलने पर तुरंत शादी के लिए जोर दे रहे थे, जबकि लडके के माता पिता कुछ दिन रुक कर शादी के लिए कह रहे थे. सामाजिक परम्परा का निर्वहन करने हेतु त्वरित शादी के लिए दोनों परिवारों को आखिरकार राजी कर लिया गया, और थाने में ही दोनों को शादी करा दी गई.

मानवाधिकार संगठन द्वारा इस प्रकार के सामाजिक हस्तक्षेप की सराहना की जा रही है. समाज में इस प्रकार की भूमिका की अपेक्षा सदैव ही ऐसे सगठनों से की जाती रही है, समय समय पर इनके द्वारा किये जाने वाले प्रयासों से जन जागरूकता एवं जन कल्याण के कार्य निष्पादित होते रहे हैं. इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य निशा हेम्ब्रम, मुखिया गणेश ठाकुर आदि उपस्थित थे.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद बेरमो ईकाई द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती-“युवा दिवस” का आयोजन

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद बेरमो ईकाई के बैनर तले बेरमो के करगली फुटबाॅल ग्राउण्ड में आज स्वामी विवेकानंद जी की जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि गिरिडीह के लोकप्रिय सांसद श्री रवीन्द्र कुमार पाण्डेय ने कार्यक्रम में सम्मिलित होकर द्वीप प्रज्जवलित करते हुए कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जी का जन्म आज के ही दिन 1863 ई0 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। उन्होंने अपने गुरू एवं शिक्षक राम कृष्ण परमहंस से शिक्षा ग्रहण की थी और अपना जीवन उन्हें सर्मिपत कर चुके थे। स्वामी विवेकानन्द जी वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने कहा कि स्वयं के भोजन के चिंता किये बिना वे गुरू सेवा में सतत संलग्न रहे, विवेकानन्द जी बड़े स्वप्न द्रष्टा थे। उन्होंने एक नये समाज की कल्पना की थी, वह समाज जिसमें धर्म या जाति के आधार पर मनुष्य में कोई भेद-भाव नहीं रहे।

विवेकानन्द को युवकों से बड़ी आशाएं थी। आज की युवकों के लिए इस सन्यासी के जीवन को आत्मसात करने की आवश्कता हैं। उन्होंने शिक्षक के रूप में कार्य किया। उनका शिक्षा पर अधिक बल रहता था। सांसद श्री पाण्डेय ने कार्यक्रम के अंतिम क्षण में कहा कि उनकी सोच थी कि शिक्षा प्रणाली ऐसी हो जिससे बालक का शारीरिक, मानसिक एवं आत्मीक विकास हो। जिससे बालक के चरित्र का निर्माण हो, मन का विकास हो, बुद्धि विकसित हो और बालक आल्मनिर्भर बने। उनकी सोच थी कि बालक एवं बालिकाओं को समान शिक्षा मिलें। उनका कहना था कि देश के आर्थिक प्रगति के लिए तकनिकी शिक्षा की व्यवस्था अत्यंत जरूरी है। स्वामी विवेकानन्द जी के वाणी से निकला हर एक शब्द अमृत के समान हैं। स्वामी विवेकानंद जी हमेशा से युवाओं को प्रेरित करते थे वो कहा करते थे ‘‘उठो, जागो और तब तक नहीं रूकों जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये।”

कार्यक्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के श्री भरत वर्मा, विवेक पाठक एवं सभी सदस्यगण, श्री योगेश्वर महतो (बाटुल), श्री जगरनाथ राम बोकारो जिलाध्यक्ष (भाजपा), श्री राकेश वर्मा वरिष्ठ पत्रकार प्रभात खबर, श्री रवीन्द्र मिश्रा (भा.म.स.), श्री देवतानन्द दूबे सहित भारी संख्या में विद्यार्थी एवं युवा शामिल थे।

​संतोष कुमार मिश्रा 
सांसद आवासीय कार्यालय
गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र
कैम्प-बेरमो, फुसरो
जिला-बोकारो (झारखण्ड) ​

राष्ट्रीय कवि संगम बोकारो इकाई ने किया कवि गोष्ठी का आयोजन

दिनांक 07-01-2018 को संध्या 07:00 बजे राष्ट्रीय कवि संगम के बोकारो इकाई द्वारा कवि गोष्ठी का आयोजन सुनील सिंह के गांधीनगर स्थित आवास पर किया गया. इस आयोजन में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 21 जनवरी 2018 को धनबाद में होने वाले राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा आयोजित कवि सम्मलेन में सभी लोग भाग लेंगे जो आज की बैठक में सम्मिलित हैं. कवि संगठन का एक वेबसाइट तैयार हो जिसमे सभी कवियों का प्रोफाइल उनकी उपलब्धियों आदि का विस्तृत विवरण हो तथा अपनी गतिविधि और संलग्नता को समय समय पर अद्यतन किया जाता रहे. शिशु विकास सह बुद्ध अम्बेडकर उच्च विद्यालय सन्डेबाजार में 30 जनवरी को शहीद दिवस के अवसर पर कवि सम्मलेन का आयोजन करना है.

आयोजन के बीच सर्वसम्मति से सुनिल कुमार सिंह कोषाध्यक्ष, विद्या भूषण मिश्र संगठन मंत्री, टी.डी.नायक सचिव, ममता सिंह उपाध्यक्षा, लाखन सिंह संरक्षक, नरेंद्र प्रताप सिंह ‘तृष्णान्त’ उपाध्यक्ष, भगवन तिवारी संरक्षक चुने गए तथा अनिल कुमार पाठक को प्रिंट मीडिया स्वतंत्र प्रभार तथा नीरज कुमार पाठक को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया स्वतंत्र प्रभार दिया गया.

उपस्थित सभी कवि सदस्यों ने अपनी-सबकी रचनाओं का पठन-श्रवण किया और एक दुसरे के प्रति आभार प्रकट किया साथ ही साथ समालोचनाओं का भी दौर जारी रहा. गोष्ठी में उपस्थित एक मात्र महिला सदस्य ममता सिंह (प्राचार्या, कृष्ण सुदर्शन स्कूल) ने अपनी सटीक व संवेदनशील कविताओं से सभी को बखूबी प्रभावित किया.

इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ श्याम कुमार भारती ने उपस्थित सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से हम और भी अधिक लोगों को जोड़ सकते हैं जो काव्य अथवा समतुल्य साहित्यिक रचनाओं के सृजन से सम्बन्ध रखते हैं ताकि हमारा संगठन और मजबूत हो और हम राष्ट्र हित में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें.

सभा के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सुनील सिंह एवं संरक्षक महोदय लाखन सिंह ने कहा कि इस संगठन में न सिर्फ हिंदी रचनाओं के प्रणेताओं को स्थान मिलना चाहिए अपितु भोजपुरी व अन्य क्षेत्रीय भाषाओं यथा खोरठा आदि को भी प्रश्रय मिलना चाहिए ताकि अनेक भाषाओँ में रचित अलग-अलग प्रकार के भावाभिव्यक्तियों की पहुंच हम सभी तक हो सके.

हो जायें सावधान, जब बच्चा बोले, बस एक मिनट और!

आजकल घरों में प्रायः ही यह देखने को मिल जाता है कि जब आप अपने बच्चों को कोई काम कहें तो आपको उत्तर मिलता है- “बस एक मिनट और!” मतलब स्त्पष्ट है कि आपका बच्चा बहुत ही व्यस्त है, और उसकी यही व्यस्तता इस प्रकार के उत्तर का कारण भी. याद कीजिये अपना बचपन, जब आप पिताजी के बुलाने पर कहते थे “जी, पिताजी अभी आया”.

कुछ लोग कहेंगे, साहब! वह जमाना और था आज के ज़माने में कहाँ ये सब. ऐसे विचार रखने वालों से स्पष्ट रूप से कहा जाना चाहिए कि मात्र संस्कारों का वहन ही पर्याप्त नहीं है अपितु उसका संवहन भी अति आवश्यक है. अर्थात आपका संस्कारी होना ही काफी नहीं, बल्कि आप अपने संस्कार आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुंचाते हैं इस पर विचार करना भी बहुत जरुरी है.

आईये, अब उन उत्तरदायी कारणों को पुनः एक बार समझने का प्रयास करते हैं जो इनसे सम्बंधित हो सकते हैं. पुनः एक बार से हमारा आशय स्पष्ट है कि, उन कारणों से हम भलीभांति परिचित होते हुए भी उन्हें नकारने का हर संभव प्रयास करते रहे हैं.

  1. गेम- आज के तकनीकी युग में सबसे अधिक प्रचलन में कंप्यूटर पर खेले जा सकने वाले गेम्स एक प्रमुख कारण है जो बच्चों को उनके मूल कर्म अर्थात अध्ययन से विमुख करता है. उनके सोचने समझने एवं निर्णय क्षमता पर सीधा प्रभाव डालता है. “ब्लू-व्हेल” नामक गेम के दुष्परिणाम से आप भली प्रकार परिचित हैं. माना कि आपका बच्चा वह गेम नहीं खेलता होगा, परन्तु यह कि जहाँ शारीरिक क्षमता विकसित करने के लिए हल्के-फुल्के दौड़-धूप वाले गेम खेलने के बजाय लम्बे समय तक कंप्यूटर पर आँखे गड़ाए रहना कितना हानिकारक हो सकता है, क्या यह आप सबसे से छिपा है?
  2. चैटिंग- सोशल मिडिया पर अधिक समय बिताना भी एक प्रमुख कारण है, जिससे की बच्चों की मानसिक दशा पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है. विशेषकर ऐसे लोगों से चैटिंग के माध्यम से जुड़ना जिन्हें वे जानते तक नहीं कि दूसरी तरफ कौन व किस उम्र का व्यक्ति उनसे चैटिंग कर रहा है. चैटिंग, में कई बार लोग ज्यादा ही खुल कर अपने विचारों को रख जाते हैं जिन्हें सीधे बोलने में शायद हिचक होती हो. ऐसी स्थिति आपके बच्चों की मनोदशा पर विपरीत प्रभाव छोड़ सकती हैं.
  3. मोबाइल- मोबाइल एक सूचना साझा करने का सबसे बेहतर उपकरण मात्र हो सकता है. पर यह कि सदैव उसके साथ ही समय बिताना आपकी कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल जाता है. यह आपको तब पता चलता है जब आपके बच्चे ऐसा करते हैं. सोचें, और ध्यान रखें कि आपके मोबाइल में कोई ऐसी सामग्री न हो, गलती से भी, कि जिसे बच्चे देख ले तो उनकी मनःस्थिति असंतुलित हो जाय.
  4. अन्य कारण- उपरोक्त कारणों के चलते असमय खाना-पीना, देर रात तक जागना, सुबह स्कूल जाने को समय पर तैयार न हो पाना, होमवर्क जैसे तैसे किसी की सहायता से या नक़ल कर पूरा करना आदि ऐसे व्यवहार के पीछे उत्तरदायी हो सकते हैं, पर जरा ध्यान दें कि इनके पीछे भी वही कारण हैं जो इस प्रकार के व्यवहार के कारक हैं.

इनके अतिरिक्त और भी कई कारण हैं जिन्हें हम भलीभांति समझ लेते हैं पर उनके निवारण के लिए कोई उपयुक्त व ठोस कदम नहीं उठा पाते. हमें इसके लिए सुनियोजित तरीके को अपनाना होगा, जहाँ तक संभव हो सके अपने आप को एक उच्चतम स्तर पर आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना होगा जिससे कि उन्हें प्रेरणा मिले और वह अनुकूल वातावरण में स्वयं को ढाल पायें, तथा एक सभ्य नागरिक बनने की दिशा में अग्रसर हो सकें, भले ही यह गति धीमी हो, यदि रास्ता सही होगा तो देर से ही सही, लक्ष्य अवश्य प्राप्त किया जा सकेगा.

  1. समय- सिर्फ पैसे कमाना ही आपका कर्तव्य नहीं, अपनी संतान को बेहतर जीवन देने की दिशा में आपका उसको दिया जाने वाला समय भी परमावश्यक है. सुनियोजित हो कर उन्हें समय, थोड़ा ही सही पर जरुर दें, किसी भी बहाने से, कभी पूछ ही लिया करें, कहाँ गए थे. क्या खाया? क्या पिया? होमवर्क बनाया लिया क्या? ताकि उन्हें भी लगे कि हाँ, पिताजी पूछते हैं. वे भी आपके प्रति उत्तरदायी होंगे. उनके साथ थोड़ा समय व्यतीत करें. आप बहुत काम करते हैं, थक जाना स्वाभाविक है. पर आपको चाहिए अपना मनोरंजन उनके बीच खोजें, उनसे ही अपना मन बहलायें. उनसे अपनी कोई बात साझा करें, प्रेरणास्पद घटनाओं के बारे में बताएं, महापुरुषों की जीवनी के बारे में बताएं, जिससे की उनका मनोबल ऊँचा हो सके.
  2. पैसा- उन्हें उम्र के मुताबिक खर्चने को पैसे भी दें, साथ ही उसका हिसाब भी लें, जिससे की वे अर्थव्यवस्था को समझें, कि पैसे की अहमियत क्या होती है, जब हो और जब किसी के पास न हों इसके बीच का अंतर भी, और पैसा लाने में कितना परिश्रम लगता है आदि.
  3. उपहार- छोटे-छोटे ही सही पर कभी-कभी कुछ उपहार भी दिया करें, पर उन उपहारों के कारणों को सटीकता से ढूंढें, जैसे तुमने अपना फलां काम बेहतर किया इसलिए तुम्हें दिया जा रहा है, अगली बार और बेहतर कर पाओ ऐसी आशा है. पूरी तरह से बेफिक्रे न हों. बच्चों को पता चलना ही चाहिए कि आप कौन हैं, उनसे आपकी क्या अपेक्षा है, और आप उनके लिए क्या कर रहे हैं.
  4. व्यवहार- सबसे महत्वपूर्ण है आपका उनके सामने प्रस्तुत होना कि आप किस रूप और हालत में उनके सामने जाते हैं अथवा उनका सामना कैसे करते हैं. आप तात्पर्य भली प्रकार समझ गए होंगे, परन्तु फिर भी जिक्र करना आवश्यक प्रतीत हो रहा है तो, यह कि यदि आप कोई व्यसन करते हैं तो उनके सामने करने से बचें, भले ही वो जानते हों पर फिर भी भूले से भी उनके सामने ऐसा न करें और हो सके तो स्वयं को व्यसनों से दूर रखें.

जब हम गर्भवती महिलाओं को व्यसनों से दूर रखने अथवा रहने की बात करते हैं तो ध्यान देना चाहिए कि संतान उत्पति के बाद पुरुषों को भी व्यसनों से दूर रहना चाहिए. एक बेहतर संतान की अपेक्षा सभी रखते हैं पर उसके लिए आदर्श वातावरण के निर्माण में अपनी भूमिका भूल जाते हैं.

उपरोक्त बातें चाहे कितनी भी बार आपने अलग-अलग माध्यमो से सुनी, पढ़ी अथवा देखी होंगी, पर इसके अनुपालन में हम ही पिछड़ रहे हैं, अपने बच्चों के प्रति चिन्तित होना, और इस हेतु कुछ कर न पाना, इस विडंबना से हमें बाहर आना ही होगा क्योंकि, आपके हमारे भविष्य की डोर हमारे आपके ही हाथों में है

ओमप्रकाश बने करणी सेना के जिला संयोजक : मुख्यमंत्री को सौपेंगे मांगपत्र

‘पद्मावती’ फिल्म का शुरू से ही विरोध कर रही करणी सेना ने फिर से चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर फिल्म को प्रदर्शित किया गया तो वह पूरे देश में धरने-प्रदर्शन करेगी. करणी सेना ने फिल्म में लगे पैसे की भी जांच कराने की मांग की है. करणी सेना ने आज शु्क्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मोदी सरकार ने हमें आश्वासन दिया था लेकिन फिर भी किसके दबाव में फ़िल्म को हरी झंडी दे दी गई. सेना ने कहा है कि पूरा देश जलेगा अगर पद्मावती रिलीज़ हुई, हम हिंसा नहीं चाहते हैं पर हमें मजबूर न किया जाए.

इसी क्रम में करणी सेना बोकारो जिला कमिटि गठन को लेकर शुक्रवार को करगली अतिथि भवन में विकाश कुमार की अध्यक्षता में एक बैठक संपन्न हुआ. इस बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मवीर सिंह कि उपस्थिति में ओमप्रकाश उर्फ टिनू सिंह को सर्वसम्मति से जिला संयोजक  नियुक्त किया गया है. बैठक में निर्णय लिया गया कि एक सप्ताह में कमिटि का विस्तार कर लिया जायेगा.

श्री सिंह ने कहा कि 9 जनवरी को पदमावती फिल्म को रिलिज किया जा रहा है. इसे रोकने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री रधुवर दास से पाँच सदस्य टीम मिलकर मांग प्रत्र सौपेगा. मौके पर जिला परिषद सदस्य नीतु सिंह, वार्ड पार्षद अर्चना सिंह, लाखन सिंह, सुमित कुमार सिंह, कृष्णा सत्येन्द्र सिंह सहित अन्य कई लोग उपस्थित थे.

छाया / सूत्र : राजेश ‘बेरमो आवाज’

तीन घरो का ताला तोड़ कर लाखो की चोरी

बेरमो थाना क्षेत्र के घुटियाटांड निवासी सी.सी.एल. कर्मी विजयकांत चैहान के क्वार्टर से बीती रात लगभग 42 हजार कि एल.ई.डी. टी.वी. चोरी हो गई. वही रेलवे कॉलोनी करगली स्थित मुन्ना सिंह के घर से आभूषण समेत, नगदी लगभग 2 लाख रुपये  की चोरी हो गई, जबकि रेस्ट हाउस काॅलोनी के सेवानिवृत हेड मास्टर जे.एल. दास गुप्ता के पिछले दरवाजे का ताला चोरों द्वारा तोड़ा दिया गया लेकिन चोरी करने का प्रयास विफल रहा.

चोरी की सुचना पाते ही बेरमो पुलिस पहुंची और जाँच में जुट गई. श्री चैहान ने बताया कि बुधवार को पडोसी के द्वारा फोन से सुचना मिली कि घर का ताला तोड़ कर टी.वी. कीचोरी हुई है. विरेन्द्र सिंह ने बताया कि मुन्ना सिंह कि घर में अलमीरा व बक्से का ताला टुटा हुआ पाया गया. कहा कि अलमीरा और बक्से में जेवरात व किमती समान लगभग 2 लाख चोरो ने चुरा लिया.

मुन्ना सिंह के पड़ोसियों ने बताया कि वे औरंगबाद अपने साला के श्राद्ध में गये हुए है. फोन में उन्हे चोरी की सूचना दे दी गई है. समाचार प्राप्त होने तक मुन्ना सिंह यहाँ के लिए चल चुके हैं. विजयकांत चैहान कारो परियोजना में ओवरमैन के पद पर कार्यरत है. चोरी से लोगो में भय व्याप्त है. सूचना पाकर वार्ड पार्षद रश्मि सिंह व अर्चना सिंह पहुंचे, और कहा कि दिन प्रतिदिन चोरी की घटना बढ़ रही है, और इसके जाँच में उपयुक्त परिणाम की आशा व्यक्त की.

संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि, किसी प्रकार चोरों को भनक लग गयी थी कि घर के लोग बाहर गए हुए हैं, घर पूरी तरह से असुरक्षित है, और घर पर माल मिलने की पूरी संभावना है. बीती रात ठंढ अधिक थी, लोग अपने घरों में रजाई में दुबके पड़े थे, बाहर का शोर सुन नहीं पाए और चोरों ने इसी हालात का फायदा उठाया और अपना हाथ साफ कर गये. यह घटना एक सबक है कि आप घर छोड़ कर ऐसे ही निकल नहीं सकते, कीमती सामान विशेष कर गहने और पैसे को किसी सुरक्षित हाथों में सौंप कर ही घर छोड़ कहीं निकलने की सोचें, क्योंकि आपके घर की रखवाली करने आपका पडोसी नहीं आयगा.

छाया / सूत्र : राजेश

बेरमो प्रखंड परिसर में प्रशासन की चेतवानी के बाद भी जारी है जुआ

फुसरो, शहीद निर्मल महतो चौक के पास, सुलभ शौचालय के पीछे, बेरमो प्रखंड कार्यालय के बगल में और बेरमो थाना के सामने प्रखंड कार्यालय के शौचालय के टंकी के ऊपर वर्षों से वहाँ खड़े करने वाले पिक-अप वैन के चालकों और कुछ स्थानीय लोगों द्वारा सरेआम जुआ खेला जाता है.

ऐसा नहीं है कि यह आज कल से खेला जा रहा है वर्षो पूर्व जब बाज़ार में सड़कों का चौडीकरण हुआ था और तब से ही ऑटो व पिक-अप वैन के चालकों ने बेरमो थाना एवं बेरमो प्रखंड के बीच सड़क के किनारे वाहनों को खड़ा करना शुरू किया. उस समय से ही ग्राहक की प्रतीक्षा में खड़े वाहनों के चालकों ने समय व्यतीत करने के लिए सबसे पहले लूडो खेलना शुरू किया. आगे जाकर वही लूडो का खेल शर्तों व रुपयों के खेल में परिणत हो गया जो की अब ताश की पत्तियों से सरेआम खेला जा रहा है.

आस पास लोग नजरें बचा कर गुजरते देखे जा सकते हैं. इस प्रकार खुले में यह खेल सामाजिक संस्कारों के विरुद्ध एक चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए. रोज कई बच्चे जो उस ओर से गुजरते हैं. इस प्रकार के परिवेश का क्या दुष्प्रभाव पड़ सकता है उनके जीवन में किसी को इस बात की चिंता नहीं है. हम समाज के इस रूप को कैसे सहन कर पाते हैं, यह एक विचारणीय विषय-वस्तु है. प्रशासन के नाक के नीचे चल रहे इस खेल को अब तक नहीं रोका जा सका है.

इसे रोकना इसलिए भी आवश्यक है कि जिस स्थान पर यह खेल खेला जाता है वह कोई मनोरंजन स्थल नहीं बल्कि रास्ता है जो कि प्रशासनिक क्षेत्र के परिसीमा में आता है. आने-जाने वालों को यह परिदृश्य कुप्रभावित करता है. यह खेल, खुले में शौच से भी बदतर है जो हमारी मानसिकता को प्रदूषित कर रहा है. ऐसे कृत्यों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाना चाहिए.

विगत दिनों किये गए प्रशासनिक हस्तक्षेप का भी कोई असर नहीं दिखाई दे रहा और खेल बदस्तूर जारी है. यह खेल दिन-ब-दिन जिस प्रकार से गंभीर होता जा रहा है कभी-कभी लड़ाई झगड़े के रूप में तो कभी पी-खाकर गाली-गलौज के रूप में कि उस ओर से किसी भी संभ्रांत का गुजरना मुश्किल हो जाता है. यह समस्या प्रशासन व समाज में मुंह पर मुहांसे के सामान है और एक प्रश्नचिन्ह है. यदि समय रहते इसका हल न निकाला गया तो वह दिन दूर नहीं जब इसका प्रभाव हमारे बाल-बच्चों पर दिखने लगे.

अपेक्षा है कि समाज व प्रशासन की ओर से कुछ आवश्यक कदम उठाये जायेंगे ताकि इस प्रकार की गतिविधियों पर लगाम लग सके.

नक्सलियों के बंद का सामान्य प्रभाव : सरकारी प्रतिष्ठान बंद, निजी रहे खुले.

भाकपा माओवादी के ऑपरेशन “ग्रीन हंट” तथा हमले में सेना के अस्त्र-शस्त्र के उपयोग के विरोध में एक दिवसीय बंद के आह्वान का सामान्य प्रभाव लगभग समस्त कोयलांचल पर देखने को मिला. आज पूरे बेरमो अनुमंडल में बंद का सामान्य देखा गया. सी.सी.एल. के कथारा तथा बी.एंड.के. व ढोरी में कोयले एवं छाई का ट्रांसर्पोटिंग ठप रहा. जबकि कोलियरियों में कोयले का उत्पादन होता रहा. वहीं कोयले के डिस्पैच पर प्रभाव पड़ा.

 

नक्सलियों के बंद का सामान्य प्रभाव : सरकारी प्रतिष्ठान बंद, निजी रहे खुले.
नक्सलियों के बंद का सामान्य प्रभाव : सरकारी प्रतिष्ठान बंद, निजी रहे खुले. (छाया/सूत्र : बेरमो आवाज)

सरकारी बैंक बंद रहे, रेलवे का परिचालन सामान्य रहा, फुसरो बस स्टैंड में बिहार, औरंगाबाद, नवादा, छपरा, दरभंगा, सिवान आदि जाने वाली बसें नहीं चलीं, जिसके कारण यात्रियों को काफी कठिनाई का समाना करना पड़ा. इस दौरान कई निजि स्कूल बंद रहे. जबकि सरकारी कई विद्यालय खुले रहे. फुसरो बाजार, करगली बाजार, जरीडीह बाजार, में कई दुकाने खुली रही. वही फुसरो बाजार में पेट्रोल पंप बंद रहने कारण दोपहिया वाहन मालिको को कठिनाई का समाना करना पड़ा.

मालूम हो कि भाकपा माओवादी द्वारा इस प्रकार एक दिवसीय बंद का आह्वान प्रायः ही होता रहता है. पांच वर्ष पूर्व सन 2012 में जून के महीने में 12 तारीख को फुसरो बाज़ार पर हुए हमले को कोई नहीं भूला है अब तक, जिसका मुख्य कारण उनके बंद के आह्वान को हल्के में लेना रहा था. उस समय से ही जब भी इस प्रकार का आह्वान होता है तो सरकारी तंत्र अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए कामकाज ठप्प कर ही देते हैं, चाहे बैंक हो या अन्य सरकारी दफ्तर सभी जरा सी भी भनक लगती है की माओवादियों ने बंद बुलाया है बस हो गयी छुट्टी.

किसी भी नेता अथवा बड़े आयोजन पर पूरा प्रशासन जमा हो जाता है तो ऐसे बंद के आह्वान के दिन क्यों कमी पड़ जाती है उनकी. क्या प्रशासन को अपने ही सहभागी पुलिस पर भरोसा नहीं, कि उनके सुरक्षा चक्र में भीतर अपने काम काज को सुचारू रख सकें. हमारे समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जो इस दिन का इन्तेजार भी करता है की कब बंद का आह्वान हो और छुट्टी मिले इस काम काज से. पर इन सबसे अलग बात करें कि क्यों नक्सलियों के मुख्यधारा में आने की सभी योजनाये कारगर सिद्ध नहीं हो पातीं. कहाँ कमी रह जाती है. क्यों ऑपरेशन ग्रीन हंट जैसी कार्रवाई के लिए सरकार विवश होती है. जिस प्रकार की मानसिकता वाले लोग नक्सलियों के बीच पाए जाते हैं उनसे निपटने के लिए क्यों नहीं कोई अहिंसक निति सरकार अपनाती है. ये कुछ ऐसे अनसुलझे प्रश्न हैं जो मन को विचलित कर जाते हैं….

 

अवैध शराब के विरुद्ध अभियान में आई तेजी, हुई छापेमारी : तीन गिरफ्तार

विगत दिनों समाचारों में आ रहे विभिन्न खबरों और शिकायतों पर कार्रवाई होती दिखनी शुरू हो गयी है. यह एक स्वस्थ समाज के लिए अच्छा संकेत है. प्रशासन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि यदि वे अपने पर आ गए तो किसी भी असामाजिक गतिविधि को रोक सकते हैं. इसी सिलसिले में अवैध शराब बिक्रेताओ के विरुद्ध छापेमारी, की गयी और भारी मात्रा में अवैध शराब की बरामदगी की गई, शराब की बोतल सील करने में प्रयुक्त होने वाली मशीन भी बरामद की गयी और साथ ही तीन गिरफ्तारियां भी हुईं.

जब्त की गयी शराब की बोतलें.
जब्त की गयी शराब की बोतलें.

बेरमो थाना के ए.एस.पी. सुभाषचन्द्र जाट के नेतृत्व में अवैध शराब बिक्रेताओ के विरुद्ध छापेमारी अभियान चलाया गया, जिसमे भारी मात्रा में अवैध अंग्रेजी शराब की बोतलें जब्त की गयी और तीन लोग गिरफ्तार किए गए. बी.टी.पी.एस. स्टेशन के पास राजा बाजार के नीचे टोला से शराब की करीब 100 बोतलें जब्त की गई दुकान का मालिक राजेश रजक फरार हो गया. वहीं स्टेशन के पास ही मोती मोबाइल दुकान से 34 बोतल शराब समेत संतोष कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया. जबकि कथारा स्थित झारखंड होटल से 70 बोतल शराब सहित दो बंडल स्टीकर, बोतल सील-बन्द करने के लिए लगभग 130 ढक्कन एवं खाली बोतल बरामद किया गया. उक्त दुकान से मुकेश भुइया को गिरफ्तार किया गया और मालिक फरार बताए जा रहा है. बोकारो थर्मल थाना प्रभारी सह इंसपेक्टर परमेश्वर लियांगी के उपस्थिति में  रविवार की देर रात्रि बोकारो थर्मल एवं कथारा में छापामारी अभियान चला कर यह बड़ी सफलता मिली.

जहाँ एक ओर ए.एस.पी. श्री जाट ने कहा कि क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री पर पूर्णतः अंकुश लगाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर बी.टी.पी.एस. थाना प्रभारी परमेश्वर लियांगी ने बताया कि स्टेशन समीप नीचे टोला स्थित राजेश रजक के घर मे छापामारी के दौरान घर की महिलाओं ने काफी हो हंगामा मचाया जिसे देखते हुए  ए.एस.पी. ने बिना देर किये महिला सिपाही बल मंगवा कर छापेमारी अभियान को जारी रखा. इस अभियान में बोकारो थर्मल थाना प्रभारी सहित गोमिया थाना प्रभारी अनिल शर्मा, एस.आई. उमेश मण्डल, निरंजन पाण्डेय आदि पुलिस बल के जवानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही.

पुलिस की यह सक्रियता निःसंदेह रूप से जहाँ एक ओर प्रशंसनीय है वहीं दूसरी ओर उन सभी असामाजिक तत्वों के विरुद्ध एक सन्देश भी है कि प्रशासन की चुप्पी व सामान्य बर्ताव पर स्वयं को आजाद न समझे व ऐसे कारोबार और धंधों से दूर ही रहें क्योंकि सही मौके को पुलिस कभी नहीं चूकती.

दिव्यान्ग्जनों के हितार्थ पाताल तक पहुंची ‘आस्था’

पाताल, जी हाँ सही सुना आपने, यह एक बहुत कम सुविधा सम्पन्न गाँव है जो झारखण्ड के हजारीबाग जिले में आता है, यह अपने जिले से लगभग 80-85 किलोमीटर, रांची से 80 और चतरा से 85 दूर अवस्थित है. पाताल नाम के गाँव तक पहुँचने का एक मात्र साधन रेलवे ही है, कोई पक्की सड़क नहीं है. यहाँ के मुख्य नजदीकी स्टेशन में कोले और हिन्देगिर आते हैं.

इस गाँव में दिव्यांगजनों की संख्या लगभग 80 है, यह जानकारी गाँव के मुखिया श्री इशाक एक्का ने हमें दी. सी.सी.एल. के पिपरवार क्षेत्र से नजदीक होने के कारण और मुखिया श्री इशाक एक्का ने दिव्यांग जनों की समस्या से अवगत कराया जिससे प्रभावित होकर आस्था पुनर्वास केंद्र के डॉ. शशि कान्त सिंह द्वारा सी.सी.एल.पिपरवार क्षेत्र के सहयोग से दिव्यांग जाँच शिविर में दिव्यांगों की जांच की गयी तथा जरुरतमंद दिव्यांग को सूचीबद्ध/चिन्हित किया गया.

श्री सिंह आस्था पुनर्वास केंद्र, फुसरो में बतौर मुख्य फिजिओथेरेपिस्ट विगत 10 वर्षों से कार्यरत हैं और अपने क्षेत्र में सिद्धहस्त होने के कारण इनके मेन रोड फुसरो, रहीमगंज स्थित क्लिनिक में दूर-दूर से लोग अपना इलाज करने आते रहे हैं. समय-समय पर कई जरुरत मंदों का इन्होने सामाजिक सहयोग और अपनी ओर से आर्थिक मदद द्वारा इलाज व अन्य सहायक उपकरण भी प्रदान किये हैं.

इसी क्रम में सी.सी.एल. पिपरवार क्षेत्र में आस्था द्वारा ही संचालित दिव्यांग निकेतन में अपनी सेवाएँ देने प्रायः ही जाया करते रहे हैं. इसकी जानकारी वहां के मुखिया श्री इशाक एक्का को होने पर उन्होंने सी.सी.एल. से इनकी मदद लेने की इच्छा जताई तथा सी.सी.एल. के आग्रह पर इन्होने ‘पाताल’ गाँव जाकर अपनी ओर से शिविर में भाग लिया और अपनी सेवाएँ दी.

बताया गया कि, चिन्हित दिव्यांग लोगों को जल्द ही समुचित उपकरण की सुविधा प्रदान की जायगी, जिन दिव्यांग जनों को जिस प्रकार के सहायक उपकरण की आवश्यकता है वैसी सूची तैयार कर ली गयी है, और 21 दिसम्बर 2017 को उनके बीच सहायक उपकरणों का वितरण किया जायगा, इस बावत उक्त क्षेत्र के अन्य जन पर्तिनिधियों को भी सूचित किया गया है.