आज का विचार मंथन : रविन्द्र कुमार “रवि”

मित्रों!इस लेख से पहले, मै यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ, कि मैं किसी की भी भावनाओं को ग्रसित कर, उसे आहत करने का उद्देश्य नही रखता । मै सिर्फ एक साहित्यकार के धर्म का निर्वहन करने का लघु-प्रयास कर रहा हूँ । अपने इस लेख के माध्यम से आज के डरे, सहमे, भीरू महापुरुषों को आइना दिखाने की कोशिश मात्र है ।

विगत कुछ दिनों से ये ड्रामा ज़ोर शोर से चल रहा है, धर्म-निरपेक्षता व धर्मांधता का —सुपर हिट, थ्री डी ड्रामा, जिसे देखने के लिए, एक ख़ास प्रकार के राजनैतिक चश्मे की आवश्यकता पड़ती है । मुम्बई-प्रवास के दौरान, जब मै संघर्ष के दौर से गुजर रहा था,मेरे मुस्लिम-मित्र, जो मेरे शुभ चिंतक थें, वहाँ के कुछ खास इलाकों मे ले जाने से बचते थें और सतर्क भी करते रहते थें । थोड़ा होशियार रहना भाई!यह मिनी पाकिस्तान है,यहाँ बहुत खतरा है,यहाँ कट्टर-पंथियो का झुंड है,कोई पुछे तो,मुस्लिम नाम बताना ।
बेचारे मित्र थें, मेरी सुरक्षा की चिंता स्वाभाविक थी ।

कलकत्ता-प्रवास के दौरान भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही । अब समझ मे नही आता ,जब तथाकथित इन मिनी पाकिस्तान वालों का इतना ही ख़ौफ़ था ,तो तब किसी हिन्दू ने अपने डर का इतने ज़ोर शोर से प्रचार, प्रसार क्यों नहीं किया, ना किसी ने टी0वी0 पर बैठ कर डिबेट की,ना किसी तथाकथित बुद्धिजीवी ने अवार्ड लौटाया और ना ही किसी राज नेता को कोई दर्द हुआ । कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा पर भी किसी को कभी तरस नही आयी । देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों में ऐसे अनेक घटनाएं होती रही हैं, जहाँ अपने हीं देश मे डर के साए मे लोग जीते आ रहे थें । तब किसी मीडिया, राजनेता, या इन प्रबुद्ध जनों की तंद्रा भंग नही हुई । है ना कमाल की बात?

मित्रों! हर तबके मे कुछ प्रबुद्ध वर्ग हैं, बस! उन्हें पहचाने और राष्ट्र तथा समाज के हित मे अपनी सोच को समृद्ध करते हुए, इन राजनैतिक, देश, समाज द्रोही षड्यंत्रकारियों के सता-लोलुप्तता के फन को कुचल कर इस राष्ट्र को सुरक्षित रखने मे अपना बहुमूल्य योगदान दें,क्योंकि यह देश हम सब का है ।

जय हिंद ।

गिरिडीह सांसद पर लगे आरोप की निंदा करता हूँ : अनिल झा (संस्थापक कौटिल्य महापरिवार)

कौटिल्य महापरिवार के संस्थापक श्री अनिल झा जो कस्तूरबा श्री विद्या निकेतन में कार्यालय अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं उन्होंने गिरिडीह सांसद श्री रवीन्द्र कुमार पाण्डेय पर बाघमारा विधायक ढुलु महतो द्वारा लगाये गए आरोप की कड़े शब्दों में निंदा की है और आरोप को सरासर बेबुनियाद बताया | अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए अनिल झा ने कहा कि माननीय गिरिडीह सांसद का लगभग २५ वर्षो के राजनितिक जीवन-काल में कभी भी सांसद के चरित्र पर दाग नहीं लगा है |

फुसरो सिटी ई-पत्रिका को दिए गए अपने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू श्री झा ने बताया कि समस्त गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में माननीय सांसद की एक पारिवारिक पहचान है | इनको पूरे झारखण्ड में विकास पुरुष के नाम से जाना जाता है |

जातिगत एवं भेदभाव की राजनीति से दूर माननीय सांसद पूरे संसदीय क्षेत्र के लोगो के ह्रदय सम्राट हैं यह इनकी इसी छवि को धूमिल करने का प्रयास मात्र है | कुछ लोग राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से उनपर गलत आरोप लगा रहे हैं |

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि “मैं कौटिल्य महापरिवार,बेरमो की और से और निजी तौर पर इसकी भर्त्सना करता हूँ |”

टेलकॉम उपभोक्ता मामले से सम्बंधित शिकायतों के लिए मुझसे संपर्क करें : डॉ.एस.के.भारती

दिनांक 21 नवम्बर 2018 को Trai Govt of India द्वारा आयोजित उपभोक्ता जागरूकता COP जो होटल हंस रिजेंसी बोकारो मे उपायुक श्री बर्णवाल बोकारो की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ, जिसमें डॉ.श्याम कुवर भारती ने भी CAG मेम्बर झारखंड जोन TRAI (JHARKHAND) के रूप में भाग लिया और अपने सुझाव दिये।

इस अवसर पर झारखण्ड बिहार के सभी मोबाइल TSP टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स, उपभोकाओ और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियो और TRAI के अधिकारियो ने भाग लिया ।

कार्यशाला में उपभोकाओ को टेलिकॉम से सम्बंधित सुविधाओ और सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई। गैर सरकारी संगठन प्रतिनिधि के रूप में विजय कुमार, गौतम सागर, आरती जायसवाल, सुमन कुमारी और वासुदेव शर्मा आदि ने भी भाग लिया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के उपरांत फुसरो सिटी ई पत्रिका को अपने दिए गए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में डॉ. एस.के. भारती ने बताया कि झारखंड के मोबाइल उपभोक्ता किसी भी तरह की समस्या के लिये CAG Member होने के नाते मुझसे सम्पर्क कर सकते है।

कैंडल मार्च – सामाजिक संवेदना एवं शांतिपूर्ण विरोध का पर्याय

आज मंदसौर में दिव्या के साथ हुई दुर्घटना और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और दिव्या के जल्दी स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना के साथ फुसरो बाजार में बरनवाल महिला समिति के द्वारा शांति पूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया जो ब्लाक परिसर स्थित बजरंगबली मंदिर से शुरू होकर भूत बंगला बजरंगबली मंदिर तक गया और वहां से वापस बाजार का भ्रमण करते हुए बजरंगबली मंदिर, बेरमो थाना में आकर समाप्त हुआ। जिसमें दो सौ से ऊपर महिलाओं की सहभागिता हुई। और यह एक अत्यंत सफल कार्यक्रम हुआ। और इसमें हमारे वार्ड पार्षद श्री नीरज पाठक जी भी साथ में थे और व्यवसाई संघ के सचिव प्रत्याशी ओमप्रकाशजी उर्फ राजा साथ चल रहे थे।

बेटियों के समर्थन में और उनके शोषण के विरुध्द शांति पूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन तथा जमकर नारेबाजी की गई, बेटी बचाओ, देश बचाओ, मंदसौर के अपराधियों को फांसी दो, फांसी दो. इस कैंडल मार्च में लड़कियों एवं महिलाओं ने भरी संख्या में भाग लिया. मौके पर कई सम्मानित महिलाओं एवं बच्चियों ने अपने-अपने विचार प्रकट किये, प्रियंका ने कहा – “हमें हर हाल में ऐसी बातों का सामना करना होगा और अपनी आवाज को समाज में उठाना होगा”

हमें प्रशासन के द्वारा भी पूरा सहयोग मिला। बेरमो थाना से एक पीसीआर वैन और सारे लोग हमारे साथ चल रहे थे। इस कार्यक्रम से समाज की सभी क्षेत्र के लोगों ने इस संदेश को जाना और इस घटना से वाकिफ़ हुए। मैं महिला समिति की सदस्यों का विशेषकर बरनवाल महिला समिति की नेत्री त्रय : श्रीमती मंजुरानी बरनवाल, श्रीमती अर्चना बरनवाल और श्रीमती पुष्प बरनवाल (सभी बरनवाल महिला समिति, फुसरो) और विशेष सहयोगी के रूप में बरनवाल समाज फुसरो के चमकते सितारे श्री विनय कुमार बरनवाल जी एवं श्री प्रदीप भारती जी को विशेष आभार व्यक्त करता हूँ। साथ ही बरनवाल युवक संघ, फुसरो की स्थानीय इकाई के सदस्यों को भी, जिन्होंने इस सफल कार्यक्रम का आयोजन किया बहुत-बहुत बधाई देता हूं। धन्यवाद देता हूं। – नीरज बरनवाल, आम्रपाली स्टूडियो, मेन रोड फुसरो.

जिस प्रकार मोमबत्ती जलती जाती है, पिघलती जाती है और अपना प्रकाश पुंज बिखेरती जाती है, मानो एक प्रतीक हो अँधेरे से लड़ने के हौसले का, जैसा अँधेरा हमारे समाज के बीच रह रहे विकृत मानसिकता वालों के मन में भरा है जो आये दिन हमें ऐसी घटनाओं के समाचारों से दो चार होना पड़ता है, उस अँधेरे को दूर करने के लिए हमारी संवेदनाये मोमबत्ती के सामान जलती हैं. हम समाज के सामने आगे आकर अपना विरोध प्रदर्शित करते हैं, कम से कम इससे तो नहीं चूकते, यह अच्छी बात है.

हम उन हर बातों को जिन्हें हम अपनी व्यस्तता के कारण नजरअंदाज कर जाते हैं उसपर भी कभी वैचारिक मंथन के लिए ऐसे ही सामाजिक समितियों को आगे आना होगा और खास कर युवा वर्ग को जो क्या सोचते हैं आज के सामाजिक परिवेश में क्या बदलाव लाना चाहते हैं. उन्हें सोशल मीडिया पर बिताये गए समय और उर्जा का सही प्रयोग करना होगा. सामाजिक गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना होगा, तभी समाज को सही दिशा दिया जा सकेगा. हम क्यों नहीं खुली चर्चा में भाग लें? हम क्यों नहीं ऐसे बैठक और सभाओं का आयोजन करें जिससे कि सभी अपनी बातों को रख सकें और समाज और देश हित की बात कर एक निर्णायक भूमिका निभाएं.

निःशुल्क साइंस एवं मैथ क्लासेज के बच्चों ने जैक बोर्ड में लहराया परचम

अर्चना सिंह द्वारा चलाए जा रहे निशुल्क साइंस मैथ क्लासेज मैं दसवीं के जैक बोर्ड के बच्चों ने अपना परचम लहराया निशुल्क शिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में सबसे बड़ा योगदान श्री उपेंद्र पांडे जी का रहा जिन्होंने आज के इस व्यवसायीकरण के दौर में निशुल्क शिक्षा देकर समाज के गरीब तबके के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा काम किया है इस संबंध में श्री उपेंद्र पांडे जी का कहना है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती बशर्ते उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन मिले.

math science class मे मुख्य रूप से सोनू कुमार ने क्रमशः मैथ में 95% साइंस में 73 प्रतिशत अमित ने मैथ में 88 प्रतिशत साइंस में 59 प्रतिशत आरती ने मैथ में 55% साइंस में 59 प्रतिशत नंबर लाया यह सभी विद्यार्थी बहुत कमजोर तबके से आते हैं.

उनके अभिभावकों ने श्री उपेंद्र पांडे जी के प्रति अपना आभार जताया इस कार्यक्रम को चलाने में अब तक श्री योगेश तिवारी श्री अरुणेश और श्री सुजीत ठाकुर का बहुत सराहनीय योगदान रहा इन सभी ने विशेष रूप से श्री उपेंद्र पांडे जी को धन्यवाद दिया और कहा कि यह कार्यक्रम आगे भी इसी तरह जारी रहना चाहिए

सोच की आजादी

हमारा सम्पूर्ण जीवन हमारे विचारों के द्वारा नियंत्रित होता है | हमारे जैसे विचार होते हैं , हमारी जैसी सोच होती है ; हमारी जैसी चिंतन धारा होती है ; वैसी ही हमारी प्रवृति होती है | जैसी प्रवृति होगी व्यवहार ठीक उसी के अनुकूल होगा ;व्यवहार के अनुरूप ही हमारे जीवन का निर्माण होता है | निष्कर्षतः मनुष्य का समग्र जीवन उसकी सोच व विचारधाराओं के गीर्द ही घूमती है | अब देखने की जरूरत यह है कि व्यक्ति की विचारधारा कैसी है ? यदि व्यक्ति सकारात्मक विचारों का स्वामी है तो उसके जीवन में पवित्रता स्थाई रूप से रहेगी | विचारधार दूषित है तो जीवन भी दूषित हो जाता है | नदी किनारे एक कुंभकार मिट्टी को आकार दे रहा था | वह मिट्टी से चिलम बना रहा था | अचानक उसके विचार बदले और उसने चिलम की जगह घड़ा बनाना शुरू कर दिया | पास बैठी कुम्हारिन ने पूछा मिट्टी का आकार क्यों बदल गया ? कुम्हार ने कहा कि बस यूँ ही मेरा विचार बदल गया | माटी ने तत्तक्षण कहा तुम्हारे विचार क्या बदले मेरा तो संसार ही बदल गया |

वस्तुतः किसी व्यक्ति के जीवन की ऊँचाई उसके नजरिये की ऊँचाई पर निर्भर करती है | यदि सोच स्वस्थ है तो व्यक्ति का जीवन मानवता का आदर्श बन जाता है और सोच यदि नकारात्मक है तो पूरी मानव जाति के लिए कलंक बन जाता है हम चाहें तो अच्छे नजरिये के बल पर अपने भीतर सकारात्मकता को प्रकट कर अपने जीवन में अहोभाव का अलग आनंद उत्पन्न कर अभिनव उल्लास की अभिव्यक्ति कर सकते हैं |

सोच तीन प्रकार की मानी गई है – भौतिक सोच व्यवहारिक सोच व  आध्यात्मिक सोच |

भौतिक सोच वाले व्यक्ति भोगवादी मनोवृति से ग्रसित होने के कारण इनके जीवन में दुखों का अम्बार लग जाता है | भौतिक सोच मनुष्य की चिंतनधारा को संकीर्ण बना देती है | ऐसे लोग स्वार्थी मनोवृति के धारक बन जाते हैं,

व्यावहारिक सोच में जीने वाले लोग इस बात के प्रति सजग रहते हैं कि उनके किसी बर्ताव से सामने वाला आहत न हो बल्कि विशेष रूप से प्रभावित हो |

सर्वश्रेष्ठ सोच अध्यात्मिक सोच को माना गया है | अध्यात्मिक सोच से प्रभावित व्यक्ति बुराई में भी अच्छाई ढूँढ लेता है | वह दूसरों पर दोषारोपण की जगह स्वयं को उस हालात में स्थापित कर सूक्ष्मता से विचार करता है | राम और रावण के अंतर का कारण क्या था राम अध्यात्मिक सोच से भरे थे , उनका त्यागमय और मार्यादित जीवन ही उन्हें ईश्वरत्व की महिमा से मंडित कर दिया | जबकि रावण की भौतिक सोच ही उसे संसार में घृणा का पात्र बना दिया | यह अतीत में राम और रावण की घटना ही नहीं आज भी एसा ही होता है |

सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति अपनी चिंतनधारा व प्रर्वृति के बल पर अपने जीवन का उत्कर्ष कर लेता है और जीवन को मंदिर बना लेता है |

प्रभावशाली व ऐतिहासिक व्यक्ति वही माना गया है जिसकी सोच स्वतंत्र रही है | जो किसी की थोपी गई विचारधारा को अपने जीवन का मार्ग नहीं बनाता बल्कि अपने जीवन की इमारत की भव्यता स्वयं गढ़ता है और अखंड विश्वास के साथ लक्ष्य को प्राप्त कर इतिहास रचता है | कहा भी गया है सुने सबकी, करें वही, जिसकी अनुमति आपकी आत्मा देती हो | आत्मा की आवाज सुन कर अपने जीवन को गति देनें वाला प्राणी कभी भी असफलता का न तो मुख देखता है न ही हताशा, निराशा व अवसाद का शिकार होता है , प्रारब्ध को ही अपने जीवन का श्रेष्ठ परिणाम समझ प्रफुल्लित मन से स्वीकार कर लेता है | हाँ , जीवन पथ संघर्ष व चुनौतियों भरे अवश्य होंगे किन्तु आजाद चिंतन वाले व्यक्ति कभी विचलित नहीं होते | स्वतंत्र चिंतन, मनन मंथन ही श्रेष्ठ व सत्य मार्ग दिखलाने का कार्य करता है | स्वतंत्र व सम्यक चिंतन से जुड़ने की कोशिश हमारे जीवन में सार्थक उपलब्धियाँ अर्जित कराता है हमारे सफल संतुष्ट जीवन का मूलाधार हमारी सोच की धुरी पर केन्द्रित है |

कुछ नया करने का साहस और जुनून आजाद ख्याल की टोलियों में पाए जाने वाले कुछ चुनिंदे लोगों में ही होते हैं , ऐसे लोग न आग से खेलने में घबराते हैं न ही झुलस जाने के परिणाम की चिंता करते हैं | निश्कर्षतः ऐसे व्यक्ति जमाने की परवाह किए बिना एक ऐसी लकीर खींच डालते हैं जिसे भावी पीढ़ी मिटा तो नहीं पाती बल्कि उस पथ की अनुगामिनी अवश्य हो जाती है | ऐसे ही विरले लोग खुले आसमान में ऊँची उड़ान तय करते हैं , सपनों में मनचाहा रंग भरते हैं और धरती को एक चमत्कार भेंट स्वरूप सौंप देते हैं | हमारी धरती के जितने भी आविष्कर्ता हुए जिनकी खोजों की बदौलत मानव सम्यता ने सुई से लेकर चाँद तक के सफर की यात्रा तय की है , निःसंदेह उनके मन की उड़ान , आसमान को छूने के लिए फड़फडाते पंखों ने कभी विश्राम नहीं लिया होगा , ऐसे ही आजाद लोग दुनिया की तस्वीर बदलने का ज़ज्बा रखते हैं |

अंततः विलक्षण व्यक्ति सत चिंतन व स्वतंत्र सोंच की बुनियाद पर ही अपने जीवन के साथ संसार में भी व्यापक परिवर्तन का निमित माना गया है | कहते हैं कि सोच तेरी बदली तो नजारा बदल गया, किश्ती ने बदला रूप तो किनारा बदल गया |

ओम प्रकाश यादव

 

 

 

 

 

लेखक डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल
झुमरीतिलैया, कोडरमा, के प्राचार्य हैं.

भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए किस अवसर की तलाश है आपको?

छाया : बेरमो आवाज

मकोली स्थित उत्क्रमित विद्यालय के पास बी.आर.सी. भवन से रविवार की सुबह एंटी करप्शन ब्यूरो की धनबाद टीम ने बेरमो प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी महेन्द्र सिंह (फाइल फोटो) को 40 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर अपने साथ धनबाद ले गई। एसीबी की टीम ने यह कार्रवाई मनबहादुर थापा नामक एक ठेकेदार के शिकायत पर की है। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार बिल पास करने के एवज में बीईईओ सिंह ने ठेकेदार थापा से डेढ़ लाख रुपए की मांग की थी। पर थापा ने 40 हजार फ़िलहाल देने की बात कही और जिसकी शिकायत थापा ने एसीबी धनबाद की टीम से किया। जिसके बाद एसीबी की टीम रविवार की सुबह मकोली पहुंची, इधर पूर्व निर्धारित समय पर रकम लेकर ठेकेदार थापा भी पहुंचे और जैसे ही  मकोली स्थित बीआरसी भवन में उक्त राशि  बीईईओ महेन्द्र सिंह को दिया, वहीं सादे लिबास में पहले से बैठे एसीबी की टीम ने धर दबोचा। गिरफ्तार महेन्द्र सिंह बेरमो (वन) के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हैं तथा इसके पहले नावाडीह में पदस्थापित थे.

कहा जाता है कि दान जितना गुप्त होता है दानी को उतना ही पुण्य प्राप्त होता है और दान जो दिखावे के साथ होता है वह आडम्बर होता है. अब तर्क यह है कि गुप्त दान करने वाले यदि फल की इच्छा और पुण्य मात्र की प्राप्ति से उत्साहित हो कर दान करते हैं तो वह भी लालसा की श्रेणी में आ जाता है और निष्फल हो जाता है. सार यह है कि दान भी एक कर्म है जिस प्रकार आप अन्य कर्मो का साधन करते हैं. यह एक प्रक्रिया है जो आपके सामाजिक उत्तरदायित्व को एक स्थान प्रदान करती है समाज में.

कर्म को प्रधानता उसके नैतिक व आदर्श मूल्य के स्तर पर दिया  जाना चाहिए और इच्छा से व्युत्पन्न अवसाद से स्वयं को दूर रखना चाहिए. इच्छा का होना महत्वपूर्ण न होकर कैसी इच्छा है यह अधिक विचारनीय होना चाहिए. इच्छा कर्म को प्रेरित करती है, सत्कर्म आपके व्यक्तित्व का निर्माण करती है. अवसर आपकी निष्ठा की परीक्षा लेती है, यह नहीं कि अवसर मिला तो आप ईमानदारी का बिगुल बजा रहे और अवसर मिला तो अपना उल्लू भी सीधा करने से नहीं चूके.

यूँ तो अवसर की तलाश सबों को होती है, परन्तु यह कि अवसर प्राप्त होने पर उसको उपयुक्तता के साथ प्रयुक्त भी कर सकें, क्षमता किन्ही विशिष्ट आत्माओं में ही होती है. अवसर का होना किसी विशेष कर्म के निष्पादन के लिए उपयुक्त है अथवा नहीं यह पूर्ण रूप से उसके एकाधिक लाभुकों के संख्या बल से निर्धारित होना चाहिए न कि अपनी क्षमता का अनुचित लाभ लेकर स्वहित साधन कर अनैतिक रूप से प्रयुक्त किया जाये.

आप अफसर थे, आपके स्वयं को सौंपे गए कार्य के प्रति उत्तदायी बना कर पदस्थापित किया गया. उसके बदले में सरकार वह हर लाभ दे रही है जिसके आप पदानुकुल अधिकारी थे. आपने गलत को सही करने के लिए पैसे लेने शुरू किये तो सही लोगों को लगा आप गलत कर रहे हैं. जब आपने सही लोगों को भी पैसे देने के लिए विवश किया तो एक बार फिर उनको लगा कि आप गलत कर रहे हैं. जब कभी शायद आपको विवश किया गया हो गलत करने के लिए तो आप नहीं रुके और न ही रोका अपितु आप अवसर का लाभ प्राप्त करते चले गए. अब ऐसे में यह दिन देखने के लिए तैयार होंगे आप शायद, परन्तु इस घटना से एक बात तो स्पष्ट है कि लोग अब विरोध तो करेंगे.

इन सब बातों से एक और बात निकलती है कि क्या कभी आपने उनकी बातों का मान न रखा हो, और उन्होंने कसम उठा ली हो कि आपको सही जगह पहुंचा देंगे. या फिर वास्तव में वे आपसे और आपके रवैये से त्रस्त हो गए होंगे और आप अपने ही कर्म के जाल में फंस गए. जो भी हो इतना तो पक्का है कि उच्चाधिकारियों ने आपको पकड़ा है, वैसे लोगों ने जिन्होंने शपथ ली है ऐसे ही कर्मो को रोकने की तो आप अपनी शपथ क्यों भूल गए थे, जो आपके संस्थान ने आपको दिलाई हुई थी.

गम न करें – १७

बे-मौके सब शरीफ

मतलब यह नहीं कि यह सीधे तौर पर आपके बारे में हैं. मतलब यह है कि यह उन सभी के बारे में है जो मौके पर शरीफ बनने का ढोंग रचते हैं और समय आने पर दूसरों को आगे कर खुद उनका समर्थन अथवा उनके साथ अथवा उनके पीछे चलने को तुरंत तैयार हो जाते हैं. इसलिए बे-मौके सब शरीफ से हमारा तात्पर्य यह है कि मौका आने पर अपनी शराफत दिखाने से कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता, पर यह कि सिर्फ ख़बरों में आने के लिए या कि सिर्फ दिखावे के लिए.

आप कथनी और करनी में जितना कम अंतर रख पाते हैं उतने ही आप चरित्रवान होते हैं, यह नहीं कि आप चरित्रवान तो हों पर अवसर आने पर आप खिसक लें. यहाँ मेरा यह सब लिखना आप में से बहुतों को खल रहा होगा पर क्या करें तारीफ बनती भी होगी तो आप इसे मेरा दंभ न समझ ले इसलिए यह साफ करना जरुरी है कि मै इस लेख के माध्यम से आप सब को कुंठित नहीं करना चाहता हूँ. मेरा उद्देश्य बस इतना है कि हम अपने चरित्र के स्तर को उस ऊँचाई तक ले जा सकें जहाँ हम सचमुच ही अपने कथनी और करनी अंतर नहीं कर सकें अर्थात जैसा भी हम सोचें अथवा कहें उसपर चल भी सकें.

थोड़ी देर के लिए यह लेख आपको गप्पबाजी लग सकती है पर आप जरा ध्यान देकर इन बातों को सोचेंगे तो यही पाएंगे कि हम में से कितने ही अवसर आने पर किसी जन-कल्याणकारी कार्यों के लिए समय निकल पाते हैं? अधिकतर का उत्तर यही होगा कि अपने काम से फुर्सत मिले तभी ना. सही भी है, पर यह तभी संभव हो पाता है जब आप समय निकालना चाहें. क्या आप अपने परिवार के लिए समय नहीं निकाल पाते, क्या आप अपने किसी निजी कार्य के लिए समय नहीं निकाल पाते यदि आपका उत्तर हाँ है तो समस्या यह है कि समय आपको निकालना होता है इससे पहले कि समय आपको निकाल दे.

महत्वपूर्ण यह नहीं कि आप किन बातों अथवा कार्यों के लिए समय निकाल पाते हैं अपितु यह कि आप किन बातों अथवा कार्यों के लिए स्वयं को अनुकूल पाते हैं. यदि नहीं तो फिर आप चाहें कि उक्त कार्यों के लिए भी आप समय निकालें. क्योंकि यह आपके ही हाथों में होता है पूर्णरुपेण. आप टालमटोल के शिकार महसूस होते हैं यदि आप चाह कर भी समय प्रबंधन नहीं कर पाते और इसका ठीकरा दूसरों के सर फोड़ने को उद्दत रहते हैं.

आईये इस उधेड़बुन से निकालें जीवन बहुत खुबसूरत है, इसका आनंद लीजिये, नहीं समझ आ रहा हो तो किसी मनोवैज्ञानिक से जरुर मिलें, आप पागल नहीं हैं पर इस स्थिति में अधिक देर रहना आपको जल्द ही उस श्रेणी में ला खड़ा कर सकता है, इसलिए कि कही और अधिक देर न हो जाये, अपने आपको, अपने लिए कुछ ऐसा करें जिससे आपके मन, आत्मा और चित्त को प्रसन्नता होती हो, साथ ही दूसरों की प्रसन्नता का कारण हो ऐसे कृत्यों में स्वयं को उलझाएँ.

इसलिए गम न करें खुश रहें.

पत्रकार संगठन को मजबूती देने का प्रयास तेज, 3 फरवरी से सदस्यता अभियान शुरू

दिनांक 31-01-2018 को करगली स्थित अतिथिगृह में दी प्रेस क्लब बोकारो के प्रतिनिधियो के संग बेरमों क्षेत्र के विभिन्न अखबार व चैनल से जुडे प्रमुख प्रतिनिधियो की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार राकेश वर्मा ने की। यहां संगठन के निर्वाचन समिति के प्रमुख रामप्रवेश सिंह, शंभू पाठक और विल्सन फ्रांसिस ने उपस्थित पत्रकारो को जानकारी देते हुए बताया कि जिला में कलमकारों का एक सशक्त संगठन बने। इसको लेकर एक कारगर पहल अनुभवी और युवा वर्ग के प्रेस प्रतिनिधियो द्वारा किया जा रहा है। संगठन का बेरमो क्षेत्र के सदस्यता अभियान को लेकर विजय कुमार सिंह और मनोज शर्मा को सर्वसम्मति से प्रभारी नियुक्त किया गया है।

इस अवसर पर पत्रकार ज्ञानेंदू जयपुरियार ने कहा कि बेरमो कोयलांचल के पत्रकार साथियो का सदैव जिला के गठित किये जाने वाले विभिन्न प्रकार की पत्रकार समितियो में अहम भागीदारी रही है। दी प्रेस क्लब बोकारो की नवगठित किये गये समिति के सदस्यो का अनुरोध है कि पूर्व की तरह इसमें सकरात्मक भागीदारी हो। पत्रकार संजीव कुमार ने बोकारो में सभी कलमकारो को एक मंच में लाये जाने वाले प्रयासो से उपस्थित सदस्यो को अवगत कराया।

पत्रकार राकेश वर्मा ने कहा कि बोकारो जिला में पत्रकारो का एक मजबूत संगठन हो। यह सबकी आंतरिक इच्छा है। लेकिन दुखद परिस्थिति है कि सामूहिक रुप से एकता नहीं बन पा रहा है। उन्होने कहा कि 1 फरवरी को अन्य पक्ष के सदस्यो से बातचीत कर एकजुट करने का प्रयास करेगें। यहां सर्व सम्मति से निर्णय हुआ कि अगामी 3 फरवरी को अफसर्स क्लब कारगली में बेरमों अनुमंडल से जुडे पत्रकारो की सामूहिक बैठक कर सदस्यता अभियान की शुरुआत की जायेगी।

साथ ही नवगठित समिति में संपूर्ण क्षेत्र की  भागीदारी कैसे हो, इसके लिए सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया जायेगा। इस अवसर पर बोकारो से बसंत मधुकर, मनोज विशाल, मृत्युंजय कुमार, संजय कुमार, अजय कुमार सिंह, सिद्धार्थ कुमार, विनय कुमार सिंह, अनिल पाठक, रघुबीर प्रसाद, सुभाष ठाकुर, मोहित नंदन सहित कई पत्रकार बन्धु प्रमुख रुप से उपस्थित थे।

सूत्र / छाया : बेरमो आवाज

फुसरो में संत रैदास की जयंति मनायी गयी

फुसरो पुराना बीडीओ आफिस के राजा बंगला स्थित विवाह मंडप में बुधवार को अखिल भारतीय रविदास महासंघ के तत्वधान में गुरू रैदास की जयंति समारोह मनायी गयी। इस दौरान बेरमो प्रखंड मुख्यालय से गाजे बाजे के साथ विशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस में सैकडों महिला-पुरूष व बच्चों ने भाग लिया। समारोह की शुरूआत रैदास के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष गोवर्धन रविदास व संचालन सुधीर राम ने किया । यहां मुख्य अतिथि फुसरो नगर परिषद अध्यक्ष नीलकंठ रविदास ने कहा कि संत रैदास सिर्फ जाति-समाज के नहीं बल्कि मानव जगत के कल्याण की बातें समाज को बतायी। उन्होने अपने समय के ब्राहमणों को तर्क में पराजित कर संत की उपाधी प्राप्त की थी। इनके ज्ञान प्राप्त कर मीरा बाई कृश्ण की परम भक्त हो गयी। वक्ता ने कहा कि संत रैदास व बाबा भीमराव अंबेदकर के विचारों से ही समाज व देश का कल्याण है। मौके पर बालदेव रविदास, गोपाल रविदास, फुलचंद रविदास, हिरालाल रविदास, निर्मल रविदास, सुरज पासवान, राजेश राम, आदि मौजूद थे।

संत गुरु रविदास जी

रैदास नाम से विख्यात संत रविदास का जन्म सन् 1388 (इनका जन्म कुछ विद्वान 1398 में हुआ भी बताते हैं) को बनारस में हुआ था। रैदास कबीर के समकालीन हैं। रैदास की ख्याति से प्रभावित होकर सिकंदर लोदी ने इन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा था। मध्ययुगीन साधकों में रैदास का विशिष्ट स्थान है। कबीर की तरह रैदास भी संत कोटि के प्रमुख कवियों में विशिष्ट स्थान रखते हैं। कबीर ने ‘संतन में रविदास’ कहकर इन्हें मान्यता दी है। मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा जैसे दिखावों में रैदास का बिल्कुल भी विश्वास न था। वह व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं और आपसी भाईचारे को ही सच्चा धर्म मानते थे। रैदास ने अपनी काव्य-रचनाओं में सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्दों का भी मिश्रण है। रैदास को उपमा और रूपक अलंकार विशेष प्रिय रहे हैं। सीधे-सादे पदों में संत कवि ने हृदय के भाव बड़ी स़फाई से प्रकट किए हैं। इनका आत्मनिवेदन, दैन्य भाव और सहज भक्ति पाठक के हृदय को उद्वेलित करते हैं। रैदास के चालीस पद सिखों के पवित्र धर्मग्रंथ ‘गुरुग्रंथ साहब’ में भी सम्मिलित हैं। कहते हैं मीरा के गुरु रैदास ही थे।

 

रैदास के पद :
अब कैसे छूटे राम रट लागी।
प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी, जाकी अँग-अँग बास समानी॥
प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा॥
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती॥
प्रभु जी, तुम मोती, हम धागा जैसे सोनहिं मिलत सोहागा॥

रैदास के दोहे :
जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।

रैदास कनक और कंगन माहि जिमि अंतर कछु नाहिं।
तैसे ही अंतर नहीं हिन्दुअन तुरकन माहि।।

हिंदू तुरक नहीं कछु भेदा सभी मह एक रक्त और मासा।
दोऊ एकऊ दूजा नाहीं, पेख्यो सोइ रैदासा।।

रैदास की साखियाँ :
हरि सा हीरा छाड़ि कै, करै आन की आस ।
ते नर जमपुर जाहिँगे, सत भाषै रैदास ।। १ ।।

अंतरगति रार्चैँ नहीं, बाहर कथैं उदास ।
ते नर जम पुर जाहिँगे, सत भाषै रैदास ।। २ ।।

रैदास कहें जाके ह्रदै, रहै रैन दिन राम ।
सो भगता भगवंत सम, क्रोध न ब्यापै काम ।। ३