गिरिडीह सांसद पर लगे आरोप की निंदा करता हूँ : अनिल झा (संस्थापक कौटिल्य महापरिवार)

कौटिल्य महापरिवार के संस्थापक श्री अनिल झा जो कस्तूरबा श्री विद्या निकेतन में कार्यालय अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं उन्होंने गिरिडीह सांसद श्री रवीन्द्र कुमार पाण्डेय पर बाघमारा विधायक ढुलु महतो द्वारा लगाये गए आरोप की कड़े शब्दों में निंदा की है और आरोप को सरासर बेबुनियाद बताया | अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए अनिल झा ने कहा कि माननीय गिरिडीह सांसद का लगभग २५ वर्षो के राजनितिक जीवन-काल में कभी भी सांसद के चरित्र पर दाग नहीं लगा है |

फुसरो सिटी ई-पत्रिका को दिए गए अपने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू श्री झा ने बताया कि समस्त गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में माननीय सांसद की एक पारिवारिक पहचान है | इनको पूरे झारखण्ड में विकास पुरुष के नाम से जाना जाता है |

जातिगत एवं भेदभाव की राजनीति से दूर माननीय सांसद पूरे संसदीय क्षेत्र के लोगो के ह्रदय सम्राट हैं यह इनकी इसी छवि को धूमिल करने का प्रयास मात्र है | कुछ लोग राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से उनपर गलत आरोप लगा रहे हैं |

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि “मैं कौटिल्य महापरिवार,बेरमो की और से और निजी तौर पर इसकी भर्त्सना करता हूँ |”

भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएँ

संवत 2075 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के प्रारंभ पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ. जानिए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जो आज के दिन से सम्बंधित हैं. ब्रह्म पुराण के मतानुसार चैत्र प्रतिपदा से ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी. इस कारण आज के दिन को सृष्टि दिवस भी कहा जाता है. शुक्ल प्रतिपदा का दिन चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस होता है. प्रतिपदा तिथि से पौराणिक व ऐतिहासिक दोनों प्रकार की कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं जिस कारण इसका महत्त्व और भी अधिक हो जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने बाली के अत्याचारी शासन से वानर प्रजा को मुक्ति दिलाई थी. इसलिए प्रजा ने घर-घर में उत्सव मनाकर ध्वज (गुड़ी) फहराए थे, तब से यह परम्परा चली आ रही है और फलस्वरूप आज के दिन को गुड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है.

नववर्ष के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले इस त्यौहार को भारतीय संस्कृति के अनुरूप विभिन्न प्रांतों में स्थानीय परम्पराओं का पालन कर मनाया जाता है. आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में ‘गुड़ी पड़वा’ को ‘उगाड़ी’ नाम से मनाया जाता है. कश्मीरी हिन्दू इस दिन को ‘नवरेह’ के रूप में मनाते हैं. मणिपुर में यह दिन ‘सजिबु नोंगमा पानबा’ या ‘मेइतेई चेइराओबा’ कहलाता है. महाराष्ट्र में घर के आंगन में गुड़ी खड़ी करने की प्रथा प्रचलित है. इसीलिए इस दिन को गुड़ी पड़वा नाम दिया गया. ऐसा माना जाता है कि यह वंदनवार घर में सुख, समृद्धि और खुशियां लाता है. इस दिन ख़ास कर महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में भारतीय व्यंजनों में पुराण पोली अथवा श्रीखंड का बनना वर्ष पर्यन्त सबसे मीठा बोलने और अच्छा व्यवहार करने की प्रेरणा देता है.

इसे नव संवत्सर भी कहते हैं इस विक्रम संवत की शुरुआत 57 ईसवी पूर्व में हुई. इसको शुरू करने वाले सम्राट विक्रमादित्य थे, इसीलिए उनके नाम पर ही इस संवत का नाम रखा गया है. इसके बाद 78 ईसवी में शक संवत का आरम्भ हुआ. इस हिन्दू नव वर्ष के पहले दिन प्रातः काल में उदित होते सूर्य को अर्घ्य देकर ईश्वर से सुख, शांति,समृद्धि और आरोग्यता की कामना की जाती है.

चैत्र नवरात्र का प्ररम्भ भी आज के ही दिन से होता है, नवरात्र के प्रथम दिवस पर माँ शैलपुत्री, द्वितीय दिवस पर माँ ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिवस पर माँ चंद्रघंटा, चतुर्थ दिवस पर माँ कुष्मांडा, पंचम दिवस पर माँ स्कंदमाता, षष्ठम दिवस पर माँ कात्यायनी, सप्तम दिवस पर माँ कालरात्री, अष्टम दिवस पर माँ महागौरी तथा इसी प्रकार नौवें दिन पूजन-हवन आदि के बाद कन्या भोजन कराया जाता है और माँ नवदुर्गा की पूजा अर्चना के साथ नवरात्र का समापन होता है और इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाती है जो श्रीराम के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है.

नववर्ष के प्रारंभ के साथ ही चैती छठ का आगमन हो जाता है, घरों में साफ सफाई का विशेष महत्व होता है. एवं प्रत्यक्ष एवं साक्षात् देव भगवान सूर्य की उपासना की जाती है. इस वर्ष चैती छठ व्रत की महत्वपूर्ण तिथियाँ इस प्रकार हैं :
21-03-2018 : नहाय खाय
22-03-2018 : खरना
23-03-2018 : संध्या अर्घ्य
24-03-2018 : प्रातः अर्घ्य

इस वर्ष दिनांक 25-03-2018 को ही अष्टमी एवं नवमी तिथि पर रही है. जिस कारण, जिन्हें व्रत करना है वे कन्या भोजन 25 को ही करावें परन्तु अपने अष्टमी व्रत का पारण दिनांक 26-03-2018 को ही करें.

मारवाड़ी युवा मंच को मिला एम्बुलेंस

उद्घाटन समारोह 

माननीय बेरमो विधायक श्री योगेश्वर महतो ‘बाटूल’ के विधायक मद से मारवाड़ी युवा मंच बेरमो शाखा को वातानुकूलित एम्बुलेंस वाहन दिनांक 10 मार्च 2018 को प्रदान किया जाने वाला है.

समारोह उक्त तिथि को दिन में 11 बजे से अग्रसेन भवन, फुसरो में आयोजित किया जाना तय हुआ है.

अतः इस उद्घाटन समारोह में आप सभी समाज बंधुओं की उपस्थिति अपेक्षित है.

निवेदक
मारवाड़ी युवा मंच
बेरमो शाखा

सुपरमून, ब्लूमून, ब्लडमून और चंद्रग्रहण : क्या कहती हैं आधुनिक विज्ञान एवं ज्योतिषीय गणनाएं

31 जनवरी को भारत और दुनिया भर के लोगों को एक दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिलेगी. यह मौका है ‘ब्लडमून’, ‘सुपरमून’ और ‘ब्लूमून’ का. एक साथ ये तीनों घटनाएं भारत के लोग शाम 6.21 बजे से 7.37 बजे तक देख सकेंगे. इस दौरान चंद्रमा आम दिनों की तुलना में अधिक बड़ा और चमकदार दिखेगा. यह 2018 का पहला चंद्रग्रहण है और इस दौरान यह लाल भी दिखेगा.

नासा के अनुसार पूर्ण चंद्र ग्रहण का सबसे अच्छा नज़ारा भारत और ऑस्ट्रेलिया में दिखेगा. भारत में लोग 76 मिनट के लिए लोग बिना टेलीस्कोप या उपकरण की मदद के अपनी आंखों से सीधे इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देख सकेंगे.

कहीं आप भी तो नहीं डरते ग्रहण से? बर्फ़ जमा चांद देखा है कभी!

भारत के अलावा यह दुर्लभ नज़ारा समूचे उत्तर अमरीका, प्रशांत क्षेत्र, पूर्वी एशिया, रूस के पूर्वी भाग, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में भी दिखेगा. चलिए यह जानते हैं कि यह चंद्रग्रहण इतना महत्वपूर्ण क्यों है? वैज्ञानिकों के लिए यह महत्वपूर्ण कैसे है? आख़िर सुपरमून, ब्लूमून और ब्लडमून होता क्या है?

31 जनवरी का चंद्रग्रहण तीन कारणों से है खास:

सुपरमूनः यह लोगों के पास दो महीने के भीतर लगातार तीसरी बार सुपरमून देखने का मौका है. इससे पहले 3 दिसंबर और 1 जनवरी को भी सुपरमून दिखा था. सुपरमून वह खगोलीय घटना है जिसके दौरान चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है और 14 फ़ीसदी अधिक चमकीला भी. इसे पेरिगी मून भी कहते हैं. धरती से नजदीक वाली स्थिति को पेरिगी (3,56,500 किलोमीटर) और दूर वाली स्थिति को अपोगी (4,06,700 किलोमीटर) कहते हैं.

ब्लूमूनः यह महीने के दूसरे फुल मून यानी पूर्ण चंद्र का मौक़ा भी है. जब फुलमून महीने में दो बार होता है तो दूसरे वाले फुलमून को ब्लूमून कहते हैं.

ब्लडमूनः चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया की वजह से धरती से चांद काला दिखाई देता है. 31 तारीख को इसी चंद्रग्रहण के दौरान कुछ सेकेंड के लिए चांद पूरी तरह लाल भी दिखाई देगा. इसे ब्लड मून कहते हैं.

यह स्थिति तब आती है जब सूर्य की रोशनी छितराकर होकर चांद तक पहुंचती है. परावर्तन के नियम के अनुसार हमें कोई भी वस्तु उस रंग की दिखती है जिससे प्रकाश की किरणें टकरा कर हमारी आंखों तक पहुंचती है. चूंकि सबसे लंबी तरंग दैर्ध्य (वेवलेंथ) लाल रंग का होती है और सूर्य से सबसे पहले वो ही चांद तक पहुंचती है जिससे चंद्रमा लाल दिखता है. और इसे ही ब्लड मून कहते हैं.

कब लगता है चंद्रग्रहण?
सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच में इस तरह आ जाती है कि चांद धरती की छाया से छिप जाता है. यह तभी संभव है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अपनी कक्षा में एक दूसरे के बिल्कुल सीध में हों.

पूर्णिमा के दिन जब सूर्य और चंद्रमा की बीच पृथ्वी आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इससे चंद्रमा के छाया वाला भाग अंधकारमय रहता है. और इस स्थिति में जब हम धरती से चांद को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है. इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है.

खगोल वैज्ञानिकों के लिए मौका
33 साल से कम उम्र के लोगों के लिए यह पहला मौका होगा जब वो ब्लड मून देख सकते हैं. नासा के अनुसार पिछली बार ऐसा ग्रहण 1982 में लगा था और इसके बाद ऐसा मौका 2033 में यानी 25 साल के बाद आएगा. खगोल वैज्ञानिकों के लिए भी यह घटना बेहद महत्वूपर्ण मौका है. उन्हें इस दौरान यह देखने का मौका मिलेगा कि जब तेज़ी से चंद्रमा की सतह ठंडी होगी तो इसके क्या परिणाम होंगे.

ज्योतिषीय विश्लेषण :
पूर्णिमा की रात्रि को चंद्रमा पुर्णतः गोलाकार का दिखाई देता है, लेकिन कभी कभी किसी वजह से चंद्रमा के पूर्ण हिस्से पर धनुष या हंसिया के आकार की काली परछाई दिखने लगती है। जो कभी-कभी चाँद को पूरी तरह से ढक लेती है। पहली स्थिति को चन्द्र अंश ग्रहण या खंड-ग्रहण कहते है जबकि दूसरी स्थिति को पूर्ण चन्द्र ग्रहण या खग्रास कहते है।

ऐसा विशेषकर पूर्णिमा पर ही होता है। वर्ष 2018 का पहला चंद्रग्रहण भी पूर्णिमा के दिन ही दिखाई देगा। 31 जनवरी 2018 यानी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को वर्ष 2018 का पहला खग्रास चन्द्र ग्रहण होगा। इस दिन पुरे 12 घंटों तक भगवान के दर्शन करना अशुभ माना जाएगा, इसलिए इस समय मंदिरों के पट बंद रहेगे और किसी तरह की पूजा नहीं की जाएगी।

31 जनवरी 2018 को पड़ने वाला खग्रास चन्द्र ग्रहण विश्व के अन्य हिस्सों के साथ-साथ भारत में भी पूर्ण रूप से दिखाई देगा। चन्द्र ग्रहण की अवधि कुल 3 घंटे 23 मिनट की होगी। पूर्णिमा तिथि होने के कारण भगवान शिव और भगवान विष्णु की उपासना के लिए सुबह 8:28 तक का समय सही माना जा रहा है।

कौन कौन से देशों में दिखाई देगा 2018 का पहला पूर्ण चन्द्र ग्रहण :
भारत के साथ-साथ यह एशिया, ऑस्ट्रेलिया, रूस, मंगोलिया, जापान आदि के क्षेत्रों में चंद्रोदय के समय प्रारंभ होगा तथा उत्तरी अमेरिका, कनाडा तथा सुदूर पनामा क्षेत्र के कुछ भागों में चंद्रास्त के समय ग्रहण का मोक्ष दिखाई देगा। भारतीय मानक समयानुसार पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों (असम, बंगाल, झारखंड, बिहार) में खंड चन्द्र ग्रहण सायं 05:58 से रात्रि 08:41 तक होगा। खग्रास चन्द्र ग्रहण की कुल अवधि 1 घंटा 16 मिनट की होगी जबकि पुरे चंद्रग्रहण की अवधि 2 घंटे 43 मिनट 10 सेकंड की होगी। इसका ग्रासमान 1.316 है।

चंद्रग्रहण 31 जनवरी 2018 की सम्पूर्ण जानकारी इस प्रकार है :-
चंद्रग्रहण का समय – शाम 05:58:00 से रात्रि 08:41:10 तक
चंद्रग्रहण की अवधि – 2 घंटे 43 मिनट 10 सेकंड
सूतक काल प्रारंभ – प्रातः 07:07:21 AM
सूतक काल की समाप्ति – रात्रि 08:41:10 PM

संवत् 2074, शक 1939, माघशुक्ल पूर्णिमा, बुधवार 31 जनवरी 2018 को खग्रास चन्द्र ग्रहण। कर्क राशि, पुष्य नक्षत्र। सूतक काल सुबह 10:18 AM से प्रारंभ हो जाएगा। ग्रहण का समय चंद्रोदय के साथ ही शुरू हो जाएगा।

ग्रहण के समय क्या ना करें?
ग्रहण के समय मूर्ति छूना, भोजन तथा नदी में स्नान करना वर्जित माना जाता है। सूतक काल के समय किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। भोजन ग्रहण करने और पकाने से दूर रहना अच्छा माना जाता है। देवी देवताओं और तुलसी आदि को स्पर्श नहीं करना चाहिए। सूतक के दौरान गर्भवती स्त्री का घर से बाहर निकलना और ग्रहण देखना वर्जित माना जाता है। ये शिशु की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि इससे उसके अंगों को नुकसान पहुँच सकता है।
इसके अलावा नाख़ून काटना, बात कटवाना, निद्रा मैथुन आदि जैसी गतिविधियों से भी ग्रहण व् सूतक काल के समय परहेज करना चाहिए। माना जाता है इस काल में स्त्री प्रसंग से बचना चाहिए अन्यथा आंखों से संबंधित बिमारियों के होने का खतरा बना रहता है।

ग्रहण समाप्त होने के पश्चात् पुरे घर को गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए और सूतक काल प्रारंभ होने से पूर्व दूध, जल, दही, अचार आदि खान-पान की सभी चीजों में कुशा या तुलसी के पत्ते दाल देने चाहिए। माना जाता है ग्रहण के दौरान खान पान की सभी चीजें बेकार हो जाती है और वे खाने लायक नहीं रहती। ऐसा करने से आप ग्रहण समाप्त होने के बाद इन्हें पुनः खा सकते है।

31 जनवरी 2018 के चंद्र ग्रहण का विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

मेष – इस राशि के जातकों को ग्रहण का शुभ फल मिलेगा। आजीविका से जुड़े सभी क्षेत्रों में लाभ की प्राप्ति होगी। स्वास्थ्य का ख़ास ध्यान रखें। क्या करें – ग्रहण के दौरान भगवान शिव की उपासना करें। ग्रहण समाप्त होने पर हरी वस्तुएं दान करें।

वृषभ – आपके लिए साल का यह पहला चन्द्र ग्रहण कई मामलों में अनुकूल रहेगा। करियर में बदलाव के योग हैं। नौकरी और व्यापार में उन्नति होगी। निर्णयों लेते समय खास सावधानी रखें। अचानक धन लाभ होने की संभावना है। क्या करें – आपके लिए भगवान कृष्ण की उपासना करना अच्छा रहेगा। गृहण समाप्ति के बाद लाल फलों का दान करें।

मिथुन – इस राशि के जातकों के लिए यह चंद्र ग्रहण शुभ परिणाम नहीं दे रहा है। आर्थिक मामलों में नुकसान होने की संभावना है। सेहत का खास ध्यान रखें। क्या करें–ग्रहण में हनुमान जी की आराधना करें। ग्रहण के बाद सफ़ेद चीजों का दान करें।

कर्क – दुर्घटना के योग है, वाहन सावधानी से चलाएं। शरीर का ध्यान रखें, स्वास्थ्य खराब हो सकता है। विवादों से बचने का प्रयास करें। क्या करें – ग्रहण के समय चंद्रमा के मंत्रो का जप करें। ग्रहण समाप्त होने पर काली वस्तुएं दान करें।

सिंह – इस राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण शुभ संकेत नहीं दे रहा है। धन हानि हो सकती है। आंखों का ध्यान रखें। गृह कलेश से बचें मानसिक चिंता परेशानी का कारण बन सकती है। क्या करें – ग्रहण के समय हनुमान चालीसा का पथ करें और समाप्त होने पर जुटे या छाते का दान करें।

कन्या – इनके लिए यह ग्रहण अनुकूल रहेगा। आकस्मिक धन लाभ के योग है। सुख सुविधा में वृद्धि हो सकती है। छोटी यात्रा की संभावना है। नौकरी सम्बन्धी निर्णयों में सावधानी बरतें। क्या करें – रामरक्षा स्त्रोत्र का पाठ करें। ग्रहण समाप्ति के बाद अन्न का दान करें।

तुला – इस राशि के जातको को चंद्रग्रहण से शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। किसी बात का भय बना रहेगा। परिवार में समस्याएँ हो सकती है। किसी दुर्घटना के शिकार हो सकते है। क्या करें – ग्रहण में दुर्गा कवच का पाठ करें और समाप्ति पर काली वस्तुएं दान दें।

वृश्चिक – प्रेम संबंधों में समस्याएं हो सकती है। क्योंकि यह चंद्रग्रहण आपके लिए अनुकूल नहीं है। कोई विशेष बात परेशानी का कारण बन सकती है। सन्तान को कष्ट की संभावना है। क्या करें – हनुमान चालीसा का पाठ करें। ग्रहण समाप्त होने पर फलों का दान करें।

धनु – यह आपके लिए मिलाजुला परिणाम लेकर आएगा। धन लाभ तो होगा परन्तु खर्चे भी होंगे। नौकरी और करियर में परेशानी हो सकती है। क़ानूनी मामलों में परेशानी के योग है। वाहन ध्यान से चलायें। क्या करें – ग्रहण में चंद्रमा के मन्त्रों का उच्चारण करते रहे और बाद में सफ़ेद वस्तुओं का दान करें।

मकर – परिवार के लिए यह ग्रहण अच्छा नहीं है। जीवनसाथी से रिश्ते बिगड़ने के आसार है। व्यापार में धन की हानि हो सकती है ध्यान रखें। सेहत को लेकर परेशानी हो सकती है। क्या करें – ग्रहण में हनुमान बाहुक का पाठ करें और बाद में लाल फल का दान करें।

कुंभ – सेहत के प्रति ध्यान देने की आवश्यकता है। करियर में सफलता मिल सकती है। कोई बात चिंता ला सकती है। सफलता पाने के लिए संघर्ष करना होगा। क्या करें – ग्रहण में शिव जी का ध्यान करें और ग्रहण समाप्त होने पर निर्धनों को भोजन कराएँ।

मीन – यह चंद्रग्रहण आपको शिक्षा के क्षेत्र में परेशानी दे सकता है। पेट से संबंधी समस्या हो सकती है। गर्भवती महिलाएं खास ख्याल रखें। सन्तान पक्ष को लेकर परेशानी हो सकती है। क्या करें – ग्रहण में श्रीकृष्ण की उपासना करें और बाद में केले का दान करें।

सौजन्य : बी.बी.सी.हिंदी एवं शुभ तिथि

राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन के सहयोग से प्रेमी युगल की हुई शादी

बालीडीह के छतनीटांड के रहने वाले सीताराम घटवार के पुत्र सूरज घटवार तथा गोडाबालीडीह निवासी अंजू कुमारी के बीच करीब चार वर्षो से चल रहे प्रेम को विवाह में परिणित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सूरज और अंजू के परिवार वाले स्वजातीय होते हुए भी इस शादी के, विवाह-पूर्व प्रेम के कारण नाराज चल रहे थे. राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियन्त्रण संगठन के सक्रिय सदस्य परमानन्द सिंह एवं प्रभात सिन्हा  ने इस बात की जानकारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपक तिवारी को दी तथा उनसे प्रेमी युगल की मदद करने को कहा. इस बात पर दीपक तिवारी ने त्वरित कार्यवाई करते हुए दोनों परिवारों को सूचित किया और उन्हें दो दिन का समय दिया कि वे इसके लिए राजी हो जाएँ और बालीडीह थाना में उपस्थित हों ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके.

बालीडीह थाना में इंस्पेक्टर कमल किशोर तथा अजय कुमार, संजय सिंह व एन.के.सिंह आदि के सहयोग से दोनों परिवारों को बुलाया गया और मानवाधिकार संगठन के लोगों की उपस्थिति में यह बात खुलकर सामने आई कि लड़की के माता पिता इस बात के पता चलने पर तुरंत शादी के लिए जोर दे रहे थे, जबकि लडके के माता पिता कुछ दिन रुक कर शादी के लिए कह रहे थे. सामाजिक परम्परा का निर्वहन करने हेतु त्वरित शादी के लिए दोनों परिवारों को आखिरकार राजी कर लिया गया, और थाने में ही दोनों को शादी करा दी गई.

मानवाधिकार संगठन द्वारा इस प्रकार के सामाजिक हस्तक्षेप की सराहना की जा रही है. समाज में इस प्रकार की भूमिका की अपेक्षा सदैव ही ऐसे सगठनों से की जाती रही है, समय समय पर इनके द्वारा किये जाने वाले प्रयासों से जन जागरूकता एवं जन कल्याण के कार्य निष्पादित होते रहे हैं. इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य निशा हेम्ब्रम, मुखिया गणेश ठाकुर आदि उपस्थित थे.

गिरिडीह, धनबाद एवं बोकारो हवाई अड्डों का हो विकास : रविन्द्र कुमार पाण्डेय

गिरिडीह सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री अशोक गजपति राजू से मिलकर गिरिडीह, धनबाद एवं बोकारो के हवाई अड्डो को विकसित कर यहाॅ से घरेलू हवाई उड़ान प्रारम्भ करने की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। सांसद श्री पाण्डेय ने केन्द्रीय मंत्री से कहा कि गिरिडीह, धनबाद एवं बोकारो हवाई अड्डों को विकसित कर घरेलू उड़ान प्रारम्भ करने की मांग वर्षो से की जा रही है।

उन्होंने कहा कि गिरिडीह हवाई अड्डा से 40 कि0मी0 की दूरी पर जैनियों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पारसनाथ (मधुबन) है जहाॅ देशभर से जैन समुदाय के लोगों का सालों भर आना-जाना लगा रहता है। गिरिडीह से हवाई सेवा प्रारम्भ होने से देश-विदेश के तीर्थ यात्रियों सहित आम लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। इसी तरह धनबाद जो कि कोयला की राजधानी के नाम से जाना जाता है तथा बोकारो जो कि सेल संयंत्र एवं औद्योगिक प्रतिष्ठान के रूप में जाना जाता है से भी हवाई सेवा शुरू करने की आवश्यकता है।

सांसद श्री पाण्डेय ने राँची, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, देवघर तथा गिरिडीह को एक हवाई सर्किट में जोड़ने की ओर केन्द्रीय मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया। इसके साथ ही उन्होंने बोकारो जिले के गोमिया प्रखण्ड स्थित स्वांग हवाई अड्डा जो ओरिका के अधीन है, को अधीग्रहण कर इसके चाहरदिवारी निर्माण कर इसे विकसित करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि यहाॅ पर ओरिका कंपनी की निजी छोटे विमान सहित हैलिकाॅप्टर भी उतरा करता है। स्वांग हवाई अड्डा का विकसित होना प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी उपयुक्त होगा क्योंकि इसके सटे पूरा क्षेत्र उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र है। सांसद श्री पाण्डेय के मांगो को केन्द्रीय मंत्री ने गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक पहल करने का आश्वाशन दिया।

: मृत्युंजय कुमार पाण्डेय
निजी सचिव,
सांसद, गिरिडीह

रिजेक्ट कोल हादसा : आखिर कब तक भुगतेंगे खामियाजा?

सी.सी.एल बी.एंड के. प्रक्षेत्र के करगली वाशरी अंर्तगत बालू बैंकर के समीप दामोदर नदी स्थित रिजेक्ट कोल डीपो में कोयला चुनने के दौरान चाल धसने से हुए हादसे में हुई मौत की जिम्मेवारी आखिर कौन लेगा?

इस घटना ने एक बाद सिद्ध कर दिया है कि अभी भी समाज का एक तबका ऐसा है जो इस तरह के काम से अपना जीवन यापन करता है. पेट-पालन के नाम पर उनके इस मजबूरी का फायदा उठा कर उसकी आड़ में अपना उल्लू सीधा करने वालों पर कार्रवाई होना जरुरी है ताकि ऐसे असुरक्षित वातावरण में काम करने वालों को सुरक्षा अथवा हादसे में उचित मुआवजा आदि मिल सके. अव्वल तो ऐसे स्थानों का खुलेआम होना ही गलत है पर जहाँ एक ओर इस ढेर से जिन्हें फायदा पहुंच रहा है उनकी जिम्मेवारी नहीं बांटी कि बिना सुरक्षित तरीके अथवा इन्तेजाम के ऐसे काम कराये जाते हैं और दुर्घटना के बाद गधे के सींग की तरह गायब हो जाते हैं. जरुरत है प्रशासन को सख्त रवैया अपनाने का ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके, वरना आये दिन इसकी पुनरावृत्ति होगी और हमें ऐसे वारदातों की खबर मिलती रहेगी इससे इंकार नहीं किया जा सकता है.

बेरमो थाना अंतर्गत सी.सी.एल. बी.एंड के. प्रक्षेत्र के करगली वाशरी के सिंगारबेडा के बालू बैंकर स्थित रिजेक्ट कोल डंप में शुक्रवार 29/12/2017 को चाल धंसने से एक युवती की दर्दनाक मौत एवं दो महिला घायल हो गई. घटना में भेड़मुक्का बस्ती निवासी गुलाब अंसारी के 20 वर्षीय पुत्री नरगिस खातून की मौत हो गई. वहीं बिक्कू मियां की पत्नी फातमा बीबी व शनिचर तुरी की पत्नी एतवारी देवी घायल हो गई. घटना के बाद स्थानीय लोगों द्वारा नगरिस को कोयले के ढेर से बहार निकाल इलाज हेतु केंद्रीय अस्पताल ढोरी पहुंचाया गया. जहां  चिकित्सक डाॅ. ए. डाँन  ने मृत घोषित कर दिया. घटना के संबंध में बताया जाता है कि वाशरी रिजेक्ट कोल में दर्जनों महिलाएं कोयला चुनने का काम कर रही थी. तभी 30-40 फीट ऊँचा चाल अचानक धंस गया. जिसमें फातीमा बीबी व नरगिस कोयले की ढेर में दब गई. जिसके बाद अन्य महिलाओं के द्वारा हो हल्ला किये जाने के बाद कुछ लोगों के घटना स्थल पर पहुंच फतीमा बीबी को किसी तरह कोयले की ढेर से बाहर निकाला. परंतु नरगिस को निकालने में असफल रहे, जिसके बाद पोकलेन के मदद से कोलये की मलबा का हटा कर नरगिस को बाहर निकाला जा सका. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए चास भेज दिया. देर शाम को पुलिस ने नरगिस के शव को उसके परिजनों को सौप दिया.

मौके पर उपस्थित लोग व अधिकारी
घटनास्थल पर उपस्थित प्रबंधन व प्रशासनिक अधिकारी.

घटना की सूचना पाकर बेरमो एस.डी.एम. प्रेम रंजन, ए.एस.पी. सुभाषचंद्र जाट, बेरमो सी.ओ. एम.एन. मंसूरी, बेरमो थाना प्रभारी नवल कुजूर आदि ने घटना स्थल पर पहुंच हादसे का जायजा लिया. सूचना पाकर काफी संख्या में लोग अस्पताल पहुँच कर मुआवजा की मांग करने लगे। मुआवजे के तौर पर 50 हजार रुपये देने का आसवासन दिया गया और तत्काल 10 हजार रुपये परिजनो को दिये गये।

रिजेक्ट सेल में रोजाना दर्जनों हाईवा व ट्रक द्वारा कोयले की ढुलाई होती है। यहां कोयला को मजदूरों द्वारा चुनकर वाहनों में लोड किया जाता है। कोयला चुनने के लिए सैकड़ों महिला- पुरुष इस कार्य में लगे हुए है। बालू बैंकर में जमे रिजेक्ट कोल का उठाव प्रबंधन द्वारा नियमों को ताक पर रख कर कराया जा रहा है. नियम के तहत कोल का उठाव पे-लोडर के माध्यम से किया जाना होता है. इसके वाबजूद स्थानीय महिलाएं व युवतियों के द्वारा रिजेक्ट कोल में जमा ढेर से गुणवत्ता युक्त कोयला चुनवाया जाता है. प्राप्त सूचना के अनुसार कमेटी के द्वारा ट्रक से 1400 सौ रूपये और हाईवा से दो हजार रुपये प्रति ट्रक की अवैध वसूली की जाती रही है।

वर्षो पूर्व यहां टीलेनुमा रिजेक्ट कोल हाईवाल की शक्ल अख्तियार करने के बावजूद अच्छे क्वायलिटी के कोयला चुनकर निकालने के लिए महिला, युवती व पुरूष मजदूर का जमावड़ा लगा रहता है. कोयला चुनकर उठाव कराने का यह गोरख-धंधा यहां खुलेआम चल रहा है. जिसका संचालन कुछ स्थानीय लोगों द्वारा कराया जाता है. जिसके एवज में यहां से कोयला उठाव करने वाले से बिडिंग रेट के अलावे बंधी-बधाई मोटी राशि की वसूली भी की जाती रही है.

इससे पूर्व 26 अप्रैल 2015 को चाल धंसने से कमलेश महतो की 35 वर्षीय पत्नी उमा देवी व एक अन्य महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गई थी. जिसके बाद स्थानीय लोगों के द्वारा उपचार हेतु केंद्रीय अस्पताल ढोरी पहुंचाया गया जहां से उसे धनबाद रेफर कर दिया गया. पिछले माह 2 नवंबर बबीता देवी जलावन कोयला चुनने के दौरान चाल धसने से घायल हो गई थी। लगभग तीन वर्ष पूर्व यहां पर चाल धसने से दो महिला की मौत हो चुकी है। इस दौरान भी प्रबंधन को काफी फजीहत का सामना करना पड़ा था। वहीं बालू बैंकर रिजेक्ट सेल में कोयला चुनने के दौरान आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके है। शुक्रवार को रिजेक्ट कोल लोड करने के लिए 195 ट्रक गई थी। जिसमे 125 ट्रक लोड हुआ था, घटना होने के बाद 70 ट्रक खाली वापस लौटायी गई।

रिजेक्ट कोल हादसे में हुई शर्मसार प्रशासन की खुली पोल
रिजेक्ट कोल हादसे में शर्मसार प्रबंधन और प्रशासन की खुली पोल, दिया जाँच और कार्रवाई का दिलासा

इस संबध में पी.ओ. टी.एन. शर्मा ने कहा कि घटना की जानकारी मुझे मिली है। घटना की पुर्नावृति न हो इसके लिए सुरक्षा का पुरा प्रबंध किया जायेगा। घटना दुखद है। कमिटि के द्वारा परिजनो को मुआवजा दी गई। सी.सी.एल. गार्ड को तैनात किया गया है, लेकिन स्थानीय ग्रामीण अतिक्रमण किये रहते है। इधर बी.एम.एस. के ढोरी क्षेत्रीय सचिव विकास कुमार ने कहा कि स्थानिय प्रशासन व प्रबंधन की लापरवाही के कारण घटना घट रही है। उन्होने उच्च स्तरीय जाँच कि मांग की है। मौके पर वार्ड पार्षद जसीम रजा, जिला अध्यक्ष जगरनाथ राम, झामुमो नेता बैजनाथ महतो, देवीदास, मदन महतो, दिपक महतो, कमलेश महतो, बीरन लोहार, उदय गुप्ता, सुरजित चक्रवर्ती, नरेशतो, रेहाना राज, संतोष महतो आदि उपस्थित थे।

छाया / सूत्र : राजेश “बेरमो आवाज”