निःशुल्क साइंस एवं मैथ क्लासेज के बच्चों ने जैक बोर्ड में लहराया परचम

अर्चना सिंह द्वारा चलाए जा रहे निशुल्क साइंस मैथ क्लासेज मैं दसवीं के जैक बोर्ड के बच्चों ने अपना परचम लहराया निशुल्क शिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में सबसे बड़ा योगदान श्री उपेंद्र पांडे जी का रहा जिन्होंने आज के इस व्यवसायीकरण के दौर में निशुल्क शिक्षा देकर समाज के गरीब तबके के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा काम किया है इस संबंध में श्री उपेंद्र पांडे जी का कहना है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती बशर्ते उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन मिले.

math science class मे मुख्य रूप से सोनू कुमार ने क्रमशः मैथ में 95% साइंस में 73 प्रतिशत अमित ने मैथ में 88 प्रतिशत साइंस में 59 प्रतिशत आरती ने मैथ में 55% साइंस में 59 प्रतिशत नंबर लाया यह सभी विद्यार्थी बहुत कमजोर तबके से आते हैं.

उनके अभिभावकों ने श्री उपेंद्र पांडे जी के प्रति अपना आभार जताया इस कार्यक्रम को चलाने में अब तक श्री योगेश तिवारी श्री अरुणेश और श्री सुजीत ठाकुर का बहुत सराहनीय योगदान रहा इन सभी ने विशेष रूप से श्री उपेंद्र पांडे जी को धन्यवाद दिया और कहा कि यह कार्यक्रम आगे भी इसी तरह जारी रहना चाहिए

फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन

दिनांक ०९.१२.२०१७ दिन शनिवार को संध्या ५ बजे से बेरमो प्रखण्ड के बहुउद्देशीय भवन में राष्ट्रीय कवि संगम बोकारो जिला इकाई और महिला कल्याण समिति ढोरी के सौजन्य से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. राष्ट्र जागरण को लेकर आज की पीढी को नई चुनौती से अवगत कराने के उद्देश्य से आयोजित यह कवि सम्मलेन इस क्षेत्र के लिए एक आदर्श स्थापित कर गया, विभिन्न राज्यों से कुल १४ कवियों द्वारा काव्यपाठ किया गया.

फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन
फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन : आयोजन सञ्चालन व श्रोताओं को वाणी से बांधते कवि श्याम भारती.

आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ.श्याम कुंवर भारती और महासचिव नितेश सागर के अथक परिश्रम से इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का सफल आयोजन किया जा सका, जिसमे में भोपाल के विजय गिरी, कानपुर की अनीता वर्मा, पंजाब के दिनेश देवघरिया, दिल्ली से पंकज झा, रामगढ़ के राकेश नाजुक, सरोज कान्त झा, धनबाद के मुकेश आनंद, बसंत जोशी, राहुल कुमार, पटना से समीर परिमल, रांची से सीमा तिवारी सहित कुल १४ कवि और कवयित्रियों ने भाग लिया.

फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन
फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन : स्वागत गीत प्रस्तुत करती राम रतन उच्च विद्यालय की छात्राएं.

राम रतन उच्च विद्यालय की छात्राओ द्वारा उपस्थित कवियो का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। तथा छात्राओं ने उनके सम्मान में स्वागत गान भी प्रस्तुत किया. कवि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य- शिक्षा, साहित्य व राष्ट्रीयता की भावना का प्रचार प्रसार करना रहा। मुख्य अतिथि गिरिडीह सांसद रविन्द्र कुमार पांडेय जी के विलम्ब से आने के कारण यह कवि सम्मलेन अपने निर्धारित समय से कुछ देर से प्रारंभ हो सका.

फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन
फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन : दीप प्रज्वलित करते मुख्य एवं विशिष्ट अतिथिगण

मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्जवलित कर इस कवि सम्मलेन का प्रारंभ हुआ. इस कवि सम्मलेन में राष्ट्रीय स्तर के कवियो ने हास्य रस, वीर रस, श्रृंगार रस की प्रस्तुति करते हुए नारी उत्पीड़न, भ्रष्टाचार आदि विषयों पर कविता के माध्यम से लोगो के समक्ष अपने मंतव्य रखे.

फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन
फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन : दर्शकों को सम्मोहित करते कवि दिनेश देवघरिया जी.

कवि दिनेश देवघरिया जी ने कविता के माध्यम से कहा कि कविता समाज को दिशा प्रदान करती है. मंच को अपने ही अंदाज में संभालते हुए न सिर्फ श्रोताओं को तालियो के लिए विवश कर दिया बल्कि लोगो को अपनी कविता सुनाकर लोट-पोट भी कर डाला.

फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन
फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन : कविता पाठ करतीं कानपुर की अनीता मौर्य.

कानपुर से आयी कवियत्रि अनिता मौर्य ने सरस्वती वंदना के द्वारा नारी पर हो रहे अत्याचार पर प्रहार करते हुए कहा कि नारियो को डस रहा ये वासना का डंक. वहीं राकेश नाजुक जी अपनी अस्वस्थता के कारण कविता पाठ नहीं कर सके, जिसका उन्हें मलाल रहा.

फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन
फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन : कवि बसंत जोशी का स्वागत करते कवि नितेश सागर.

दिल्ली से आये युवा कवि पंकज झा ने संस्कृत में अपनी ही शैली में जब “शनैः-शनैः मम हृदये आगच्छ” प्रस्तुत किया तो सचमुच शनैः-शनैः लोगों के दिलों में अपनी छाप छोड़ गए. भोपाल से आये ‘सूरमा’ कवि विजय गिरि ने अपनी वीर रस की कविता से श्रोताओं का रक्त संचार बढा दिया और पाकिस्तान को शर्मिंदा भी किया, साथ ही ‘भारत माता की- जय” के गगनभेदी उच्चाटन से पूरे सदन को गुंजायमान कर दिया. जहाँ एक ओर कवि सुनिल खवड़े, मुकेश आनंद, राहुल कुमार, राज रामगढ़ी, अमित कुमार आदि ने अपनी कविता से लोगो को मंत्रमुग्ध किया वहीं, बसंत जोशी जी के “चापाकल” ने वाकई सब श्रोताओं की प्यास बुझाई और हंसा-हंसा कर लोट पोट कर दिया.

फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन
फुसरो में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन  : श्री गिरिजा शंकर पाण्डेय जी, सम्मलेन को संबोधित करते हुए.

अंत में हमारे इस समाज के अभिभावक स्वरुप श्री गिरिजा शंकर पाण्डेय जी ने सभी कवियों का इस सम्मलेन में आगमन हेतु और कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु योगदान के लिए सम्मान पत्र द्वारा सम्मानित करते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया और इस आयोजन के लिए श्याम भारती जी तथा नितेश सागर जी को बधाई भी दी. अन्य विशिष्ट श्रोतागणों में ज्ञानशिला विद्यालय के निदेशक प्रकाश मिश्रा, उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार, भोजपुरी समाज से लाखन सिंह, वार्ड पार्षद इंदु देवी, भाजपा नगर अध्यक्ष भाई प्रमोद, सनत कुमार सिंह, केदार सिंह, दिलीप गोयल, नीतू गोयल, रोहित मित्तल, सूरज मित्तल, शिव सिन्हा, शिव कुमार, संजय गुप्ता, तथा शक्ति सिंह के अतिरिक्त सभी समाचार पत्रों के संवाददाता तथा ब्यूरो प्रमुख उपस्थित थे.

लवली श्रृंगार स्टोर एण्ड बुटिक भव्य उद्घाटन

लवली श्रृंगार स्टोर एण्ड बुटिक

लवली श्रृंगार स्टोर एण्ड बुटिक
लवली श्रृंगार स्टोर एण्ड बुटिक का उद्घाटन करते हुए सैनिक पब्लिक स्कूल के प्रिंसीपल श्री महेश्वर यादव.

दिनांक 08-12-2017 दिन शुक्रवार को रहीमगंज, मेन रोड फुसरो के सामने नये प्रतिष्ठान “लवली श्रृंगार स्टोर एण्ड बुटीक” का शुभ उद्घाटन सैनिक पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल श्री महेश्वर यादव व भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष समिजुद्दीन जी ने रिबन काट कर किया।

इस अवसर पर प्रतिष्ठान की संचालिका पिंकी मित्तल, महेश अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, विकाश अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, रेखा देवी, मनीषा अग्रवाल, भगवती देवी, पूनम देवी, मो.मुद्सर, प्रिय अग्रवाल आदि उपस्थित थे, तथा सबने मिलकर संचालिका पिंकी अग्रवाल का उत्साहवर्धन किया और बधाईयाँ दीं.

मूल रूप से यह दुकान एक महिला द्वारा चलाया जाने के कारण किसी भी वर्ग अथवा समुदाय की महिलाएं यहाँ निःसंकोच खरीदारी कर सकती हैं. क्योंकि महिलाओं के प्रसाधन से सम्बंधित सामग्रियों को एक महिला बेहतर तौर पर समझ व बता सकती है, यह एक सुलभ बात हो जाती है.

फुसरो ई-पत्रिका पिंकी अग्रवाल के इस प्रयास के साथ है. वास्तव में यह प्रयास आज के युग के मुताबिक इन्टरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने की राह में एक कदम है. हम उम्मीद कर सकते हैं कि हमारे समाज में इसी प्रकार और भी महिलएं स्वाबलंबी होने की दिशा में आगे आयेंगी. यह कदम उठा कर पिंकी अग्रवाल ने न सिर्फ एक ओर महिलाओं की समाज में सुधरती स्थिति का परिचय दिया है बल्कि साथ ही महिला सशक्तिकरण का एक बेहतर उदाहरण भी प्रस्तुत किया है.

लवली श्रृंगार स्टोर एण्ड बुटिक
महिलाओं के सौन्दर्य प्रसाधन से सम्बंधित साजो-सामान से परिपूर्ण लवली श्रृंगार स्टोर एण्ड बुटिक

यहां बच्चों के लिए खिलोने, महिलाओं के लिए कॉस्मेटिक, लड़कियों के लिए लेगिंस एवं कुर्ती, सभी वर्ग के लिए गिफ्ट आइटम्स उचित मूल्य पर उपलब्ध है।

महिला सशक्तिकरण : वर्तमान परिदृश्य

महिला सशक्तिकरण, अबला नारी, नारी शक्ति पहचानो। कुछ अजीब सा लगता है मुझे ये सब। आज की नारी और पहले की नारी, क्या इसने अपनी शक्ति को आज तक नही पहचाना। यह तो वह नारी है जो हमेशा से अपनी शक्ति का दुरूपयोग करती आ रही है। हम कथा-कहानियों में पढ़ते हैं तो शायद हमें यकीन नही आता, मगर हम प्रत्यक्ष देखते हैं तब भी हमारी आंखों पर पट्टी बंध जाती है। आज हर घर में लड़ाई होती है नारी ही नारी की दुश्मन है।

सास के साथ बहू की या फिर बहू के साथ सास की लड़ाई हम प्रत्यक्ष रूप से हर घर में देखते हैं। और फिर मुकदमा कोर्ट कचहरियों तक जाता है तो बेचारे पुरूषों के कंधों पर और भार आ जाता है। सारे दिन काम करते हैं शाम को घर आओ तो फिर वही क्लेष, सुबह काम पर जाने से पहले क्लेष। आखिर कब तक चलेगा। यह क्लेष। यदि भूले-बिसरे स्त्री को एकाध थप्पड़ मार भी दिया तो वे इस बात का बतंगड़ बना लेती हैं। और पहुंच जाती हैं थाने। बंद करा देती हैं अपने ही मर्द को।

नारी में तो वो शक्ति है जो यदि इसे स्वतंत्र कर दिया जाये तो पूरे संसार को एक अकेली ही नष्ट कर सकती है। नारी की बुद्धि हमेशा उल्टी चलती है। धार्मिक ग्रंथों से लेकर आज इस कलयुग तक नारी हमेशा घर को उजाड़ती ही आई है। आज के नेता हो या किसी भी मिलीटरी के ऑफिसर भले ही हो और देश पर राज करते हों सेना को हुक्म देते हो मगर घर में उनपर उनकी बीबियों का राज है। अपनी पत्नी का हुक्म मानते है। रही सही कसर औरतों की हमारी सरकार ने पूरी कर दी, इनके लिए कानून बनाकर।

ये कानूनों का धड़ल्ले से गलत प्रयोग कर रही हैं। इससे मुसीबत आ गई है बेचारे मर्दों पर। घर से किसी तरह से बीवी से माफी मांगकर बाहर निकलते हैं तो बाहर किसी औरत से उलझ जाते हैं। फिर चाहे गलती औरत की ही क्यों ना हो। चाहे गलती औरत की हो या मर्द की, जेल की चक्की तो बेचारे पुरूष को ही पीसनी पड़ती हैं। इसलिए मेरा विचार तो यही है कि इस बेचारी अबला नारी को हमारी सरकार ने और ज्यादा से ज्यादा शक्ति दे देनी चाहिए। ताकि ये आराम से रह सके।

इनको इस प्रकार की शक्ति देनी चाहिए जैसे कि- हर पुरूष को सुबह से शाम तक काम करना चाहिए और शाम को पत्नी को अच्छी-अच्छी चीजें लाकर दें घर आकर घर का काम जैसे कि खाना बनाना बर्तन साफ करना आदि करे, फिर अपनी औरत के सोते समय पैर दबाए। जो पुरूष ऐसा काम नही करेगा उसकी औरत उसके प्रति न्यायालय के दरवाजे खटखटा सकती है। और न्यायालय के न्यायाधीश को उसकी बात माननी पड़ेगी। यदि वह नही मानेगा तो उसको भी कानून तोड़ने की ऐवज में कोई भी सजा दी जा सकती है।

न्यायालय के न्यायाधीश को उसके पति के प्रति कड़ी से कड़ी सजा या जो उसकी पत्नी चाहती है वह सजा देनी होगी। उस पर वह पत्नी को सताने या मारने वाली धारा लगा सकता है। पत्नी चाहे तो अपने पति पर दहेज का आरोप भी लगा सकती है। वह यह चाह सकती है उसका पति उस पर अत्याचार करता है। वह अपने पति के साथ नही रहना चाहती। पति भी यही चाहे तो अच्छा है कम-से-कम जेल में उसे दाल-रोटी तो सुकून से मिल ही सकती है।

यह लेखक के अपने विचार हैं.

महिला विकास एवं सशक्तिकरण

|| महिला विकास एवं सशक्तिकरण ||

भारत में वैदिक काल से ही यह सर्वस्वीकृत रहा है कि स्त्री पृथ्वी पर नैतिकता, मानवता और सभ्यता के विकास का अपरिमित रही है और तभी से उसे माता, पत्नी और बहन के रूप में आदरणीय माना गया है.

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता |
यत्र एतास्तु न पूज्यन्ते, सर्वातत्राफला क्रिया ||”

वैदिक वांग्मय में उपलब्ध महिलाओं का गौरवपूर्ण व्यक्तित्व तत्कालीन समाज में उनके पूर्ण विकास का द्योतक है. उस समय उन्हें देवी तुल्य माना जाता था. उनमे ईश्वरीय गुणों कि कल्पना की गई तथा उन्हें वेद-वेदांगो, शास्त्रों, कलाओं का ज्ञान प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार था. गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा एवं घोषा ने ज्ञान के बल पर सम्माननीय स्थान प्राप्त किया. इन्द्रसेन, विश्लय, नमुचि, विपुला आदी जैसीं महिलाएं पारिवारिक व सामाजिक मर्यादाओं का पालन करते हुए शस्त्र विद्या में निपुण हुईं और राष्ट्र रक्षा में सहभागी बनी. वे विदुषी, वीरांगना, तेजस्विनी, वीर पुत्रों की माता होने के साथ-साथ कर्तव्यनिष्ठ अर्धांगिनी, सदगृहिणी और अपनी संतान को संस्कारयुक्त शिक्षा देने वाली प्रथम शिक्षिका भी बनी.

माता के रूप में महिला ही बालक को सुसंस्कृत करती है और उसकी शिक्षा के लिए परिवार में ऐसे वातावरण का निर्माण करती है कि वह भविष्य में भारत का सुयोग्य सुसंस्कृत नागरिक बनता है. महिला गृहिणी, परिवार कि धुरी है, संस्कृति का संरक्षण-संवर्द्धन करने वाली, सृष्टिक्रम को आगे बढाने वाली, समाज को नयी दिशा देने में समर्थ, नर को नारायणी बनाने वाली महिला ही है. आज हम जैसे नागरिक समाज तथा राष्ट्र बनाना चाहते हैं तदनुरूप महिला के समग्र विकास कि चिंता करनी आज की आवश्यकता है.

आज भारत में चतुर्दिक पाश्चात्य प्रभाव दृष्टिगत होता है, प्रत्येक क्षेत्र में चाहे शिक्षा का हो या रहन सहन का हो या संसकारों एवं पहनावे के प्रश्न हों सब ओर पाश्चात्यीकरण हावी है. पश्चिम का अनुकरण करने की होड़ में परिवारों का विघटन हो रहा है. संयुक्त परिवार टूट रहा है, वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ रही है. जीवन मूल्य और आदर्श गायब हो रहे हैं, संस्कृति का क्षरण हो रहा है.

महिला विकास के सन्दर्भ में प्रचलित तीन शब्द- समानता, अधिकार एवं स्वतंत्रता मुख्य रूप से सुनने को मिलता है. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में महिलाओं की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए हमारे संविधान निर्माताओं ने भारतीय संविधान में उन्हें पुरुषों के समान अधिकार प्रदान किये और उनकी स्वतंत्र सत्ता कि स्वीकृति दी. तदनुसार जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर आगे बढ़ रही है तथा अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं. ऐसी महिलाओं की संख्या मुट्ठी भर ही है.

संवैधानिक रूप से समाज में महिलाओं कि स्थिति जितनी गौरवपूर्ण सम्मानित और प्रतिष्ठित है वस्तुस्थिति उसके बिलकुल विपरीत है. व्यावहारिक रूप से देखें तो समानता, स्वतंत्रता, महिला विकास का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, दावे किये जा रहे हैं पर देश में घर और बाहर दोनों ही मोर्चों पर नारी पिस रही है. शोषण का शिकार, असुरक्षित तथा हीनता कि भावना से ग्रस्त है. समानता, अधिकार व स्वतंत्रता के नारे देश कि महिलाओं को दिग्भ्रमित करके भटकाव की ओर ले जा रहे हैं और इसका दुष्परिणाम समाज में दिख भी रहा है.

समानता, अधिकार और स्वतंत्रता का भरपूर लाभ लेने के चक्कर में यह भूल जातीं हैं कि ईश्वर ने स्त्री-पुरुष की संरचना भिन्न रखी है. उनके गुण, कर्म, स्वभाव भिन्न हैं, जिस कारण दायित्वों में भिन्नता होना स्वाभाविक है.

मुंशी प्रेमचंद ने अपने एक उपन्यास में लिखा है “पुरुष में नारी के गुण आ जाते हैं तो वह देवता बन जाता है. तथा नारी, यदि पुरुष के गुण अपनाती है तो वह उद्दंड और उच्छ्रंखला हो जाती है.”

सम्पूर्ण वैदिक वांग्मय और हमारी संस्कृति परंपरा के अनुसार नारी सृष्टि की नियामक शिशु सृजनहार माँ है, परिवार की धुरी है तथा एक सहधर्मिणी है. प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा ने संस्कृति के स्वर कहा है, “जब हम भारतीय संस्कृति कि अक्षुण्ण परंपरा को देखते हैं तो स्पष्ट परिलक्षित होता है कि हमारी संस्कृति ने नारी को आत्मरूप की ही नहीं उसके दिव्यात्म रूप को भी ऐसी प्रतिष्ठा प्रदान की जो देश काल के परिवर्तन क्रम से परिवर्तित होते हुए भी अपने मूलरूप में भारतीय जीवन पद्धति में महत्वपूर्ण स्थान रखती है. यह संतति के सिर्फ जन्म देने के कारण उसका महत्व होता तो प्राणी शास्त्र में विज्ञान के विकास में उसकी दिव्यात्मकता खो जाती, अपितु आज भी दिव्यात्म रूप भारतीय संस्कृति में अनेक रूपों में अपनी स्थिति बनाये हुए है, यथा ‘भारत-माता’, ‘धरती-माँ’ राष्ट्रीयता, प्राकृत, सांख्य, वेदांत आदि दर्शनों में तंत्र समाधानों के शक्ति के रूप में ‘राधा’, ‘सीता’ के रूप में, बहन, प्रेयसी के रूप में आदि. संतो का कहना है “ईश्वर को देखना है तो मातृरूप में देखो- ‘मातृदेवो भव’. भारतीय नारी में देश का ही नहीं बल्कि विश्व का भी नेतृत्व करने की क्षमता है.

स्त्री में निहित सप्तशक्तियाँ- ‘कीर्ति श्री वाक् च नारीणाम, स्मृति, मेधा, धृति क्षमा’ |

मानवीय जीवन में जितने सद्गुण हैं, स्त्रीवाचक, स्त्रीलिंग हैं. जैसे भक्ति, शक्ति, निति, मुक्ति, आदि. स्त्रियों का सतीत्व, तेज व पवित्रता ही राष्ट्र की धरोहर है. संसार में ईश्वरीय शक्ति सबसे अधिक स्त्री को ही मिली है. स्त्री को अपना जीवन स्वयं साध्य्मय बनाना होगा. इस प्रकार का दृष्टिकोण अपनाना होगा कि स्त्री अपना रक्षण करने में स्वयं समर्थ हो. स्त्री अपनी इन सात शक्तियों का चिंतन करते हुए दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती के गुणों को उजागर कर भारत माता के चरणों में समर्पित हों एवं पुरुषों का भी मार्ग दर्शन करे.

ममता श्रीवास्तव,
प्रधानाचार्या
कस्तूरबा श्री विद्या निकेतन
ढोरी, (बोकारो)