राष्ट्र भक्ति और हम

शीर्षक के माध्यम से अपनी बात कहने की आजादी चाहता हूँ। राष्ट्र और राष्ट्र भक्ति को हम में से हर एक के जीवन में प्रथम स्थान प्राप्त है, इसमें कोई संदेह नहीं है। पर इसे प्रर्दशित करने के अपने-अपने तरीके हैं। जिस तरह एक सैनिक सीमा पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपनी राष्ट्र भक्ति प्रर्दशित करता है ठीक उसी तरह एक कवि अपनी कविताओं के माध्यम से, लेखक अपने लेखों के माध्यम से, कलाकार, साहित्यकार व इन जैसे ही सभी अपनी-अपनी विधाओं के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपनी सच्ची कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

इनमें से किसी के बारे यह आकलन किया जाना कि कौन अपने देश के लिए ज्यादा वफादार अथवा समर्पित है, कौन नहीं, सर्वथा अनुचित है। कौन राष्ट्र भक्ति की दौड़ का स्वर्ण पदक विजेता है, इसके निर्णय की कौन से सर्वमान्य सिद्धांत है, पता नहीं। हमारे देश की भी अजीब विडंबना है। बहुत कम ही ऐसे मौके आते हैं जब एक सही विषय के पक्ष में अथवा सही विषय के लिए लोग आंदोलन करते हैं। समय समय पर कुछ स्व्यंभू कबिलाई किस्म के नेता उभरते हैं और हमारी सोच और विचार की सांझी विरासत के साथ जम कर खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं। इनके आयोजित तमाशे में कुछ भीड़ भी होती है जो इनके अनुसार समर्थक होते हैं। इन्हीं तथाकथित समर्थकों की भीड़ इनके आयोजन की सफलता अथवा असफलता की कहानी बयां करती है।

यह बात जब मैंने अपने एक मुसलमान दोस्त से पूछी तो उसने बेबाकी से अपनी बात कही। उसने कहा कि बंटवारे के समय जब हम में से हर एक के पास यह विकल्प मौजूद था कि हम कहां जाएं, हमने इसी माटी में दफ़न होने का विकल्प चुना। वह भी इसलिए कि हमें अपने भाईयों पर जो हिन्दू थे, खुद से ज्यादा भरोसा था। मुझे उसके कथन में सच्चाई की झलक दिखाई दी। लोग चाहे जितना जोर लगा दें, चंद फिरकापरस्त लोगों की नापाक कोशिश हमारे विश्वास की डोर टूटने नहीं देगी।

झारखण्ड राज्य में ग्राम सभा सशक्तिकरण : एक सुझाव

झारखण्ड राज्य स्थापना के 17 साल बीतने एवं वर्ष 2010 से त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू हो जाने के बाद भी ग्राम सभा के सशक्तिकरण का कार्य राज सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है. शोध एवं अध्ययन बताते हैं कि आम तौर पर ग्राम सभाओं में गणपूर्त्ति (ग्राम सभा के कुल सदस्यों का 1/10 भाग जिसमें 33% महिला सदस्य का होना जरुरी) नहीं हो पाती है. ग्राम सभा में भागीदारी के प्रमाण स्वरुप घर-घर जा कर ग्राम सभा सदस्यों से ग्राम सभा पंजी में हस्ताक्षर लिए जाने की अदभुत परंपरा विकसित होते जा रही है. जो पंचायती राज व्यवस्था के सारतत्व को ही कुप्रभावित कर जाती है.

 यह सर्वविदित है कि ग्राम सभा में ही विकास की सम्पूर्ण योजनायें परिकल्पित एवं रेखांकित होती हैं, एवं तदनुसार पारित प्रस्तावों के आधार पर कार्यरूप में आती हैं. अतः ग्राम सभा में ग्राम सभा सदस्यों की समुचित भागीदारी एवं उसकी कार्यवाही में पूर्ण पारदर्शिता का होना नितांत आवश्यक है और ऐसा सुनिश्चित कर ही हम ग्राम सभा को सशक्त एवं पंचायती राज व्यवस्था के मूल तत्व को अक्षुण्ण रख सकते हैं.

 इस सन्दर्भ में निम्नांकित सुझावों पर अमल करके हम ग्राम सभा को सशक्त कर सकते हैं-

 सर्वप्रथम, ग्राम सभा आयोजन की तिथि समय एवं स्थान की सूचना देने से सम्बंधित तंत्र को मजबूत करना होगा. सूचना दिए जाने हेतु उपयोग में लायी जाने वाली सामग्रियों यथा- ध्वनि विस्तारक यंत्र, ढोल, हैण्ड-बिल, पोस्टर आदि का प्रयोग समुचित तरीके से किया जाना आवश्यक है. इतना ही नहीं आज अधिकांश ग्राम पंचायतें इन्टरनेट सेवा से जुड़ी हैं. फलतः ग्राम सेवा के प्रचार प्रसार हेतु सोशल साइट्स का उपयोग भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. इस हेतु प्रत्येक ग्राम पंचायत का फेसबुक पर अपना एक पेज होना जरुरी है, जिससे ग्राम पंचायत के बहुसंख्यक लोग उससे जुड़ कर पंचायतों की क्रियाविधि से अपने को संगत रख सकेंगे.

 दूसरे, ग्राम सभा की सूचना देते समय ग्राम सभा में चर्चा किये जाने वाले मुख्य एजेंडों को प्रचारित किया जाना चाहिए. ऐसा किये जाने से विषयों से सम्बंधित हितग्राही व्यक्ति अपने अन्य कार्यों के ऊपर ग्राम सभा में भाग लेने के कार्य को प्राथमिकता दे सकेंगे एवं परिणास्वरूप ग्राम सभा में सदस्यों की भागीदारी बढ़ेगी.

 तीसरे, ग्राम सभा स्थल भी ग्राम सभा के सदस्यों की भागीदारी को प्रभावित करता है. फलतः सभा स्थल के चयन में पूर्ण सतर्कता एवं गंभीरता बरतनी चाहिए. सभा स्थल का सुरक्षित होना एवं सदस्यों के द्वारा जरुरत पर उपयोग हेतु पेयजल के साथ-साथ महिला-पुरुषों द्वारा उपयोग किये जाने वाले पृथक शौचालयों से युक्त स्थान/भवन श्रेयस्कर माना जाता है.

 चौथे, ग्राम सभा की बैठक आरंभ करने से ठीक पहले, यदि उस ग्राम में पिछली बैठक और वर्तमान बैठक के अन्तराल में कोई असह्य दुर्घटना घटी हो तो उस सन्दर्भ में उस घटना के प्रति शोक संवेदना व्यक्त किया जाना व्यावहारिक प्रतीत होता है. ऐसा किये जाने से लोगों का आपस में संवेदनात्मक जुड़ाव के साथ-साथ सरकारी तंत्र के संवेदनशील एवं मित्रवत होने का जीवंत साक्ष्य मिल सकेगा और वे ग्राम सभा में अपनी-अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने में ज्यादा सहज महसूस कर सकेंगे.

 पांचवें, प्रत्येक ग्राम सभा की शुरुआत एक प्रेरक गीत से की जानी चाहिए जिसमें सामुदायिक गीत की प्रधानता के साथ-साथ अभिवंचित परिवारों के लाभ के प्रति जन सामान्य का सहयोगी रवैया प्रतिध्वनित हो.

 छठे, ग्राम सभा में प्रस्तावों पर चर्चोपरांत लिए गए विधिसम्मत निर्णय का दस्तावेजीकरण ग्राम सभा के दौरान ही होने चाहिए. औपचारिक दस्तावेजीकरण का कार्य ग्राम सभा स्थल से हटकर या अन्य दिनों में नहीं किया जाना चाहिए. ग्राम सभा के प्रति लोगों में विश्वास पैदा करने हेतु यह एक आवश्यक तत्व है.

 ग्राम सभा के सशक्तिकरण हेतु सुझाये गए उपर्युक्त उपायों को व्यवहार में लाकर हम ग्राम सभा को वास्तविक स्वरुप प्रदान करने में सफल हो सकेंगे साथ ही ग्राम सभा को एक नया कलेवर दिया जा सकेगा जो किसी न किसी रूप में आम जनों की उत्तरोत्तर सहभागिता के मार्ग को प्रशस्त करता दिखाई देगा.

 राजेश पाठक
सांख्यिकी पर्यवेक्षक
(झारखण्ड सरकार)
9113150917