भावपूर्ण श्रद्धांजली : नवल किशोर मित्तल

भावपूर्ण श्रद्धांजली, नवल किशोर मित्तल (07.03.1957-09.03.2018)

फुसरो के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी श्री नवल किशोर अग्रवाल जी अब हम सभी के बीच नहीं रहे। 9 मार्च कि शाम 4 बजे उनके सबसे बड़े पुत्र विकास कुमार अग्रवाल ने दामोदर घाट के निकट मुखाग्नि दे कर उन्हें पंच तत्व मे विलीन किया। सभी वर्ग के लोगों के लिए अचानक यह खबर दुखद रहा। बेहद अफसोस होता है जब एक नेक इंसान हमें अचानक छोड़ के चला जाता है, नवल जी, एक सुलझे हुए व्यापारी ही नहीं बल्कि नेक दिल इंसान भी थे।

उन्होंने अपने जीवन काल में बहुत लोगों को मदद दी, हमेशा उन्होंने लोगों को अच्छा परामर्श दिया, हर वक्त उनकी यह सोच थी कि सही राह एवं सही व्यक्ति की पहचान आप को कभी हारने नहीं देगी, और यह सोच उन्हें हमेशा मजबूत बनाये रखी। वे बचपन से आखिरी सांस तक बस कर्म पर भरोसा किये ओर लोगों को प्रेरित किये। 61 वर्षीय इस व्यक्तित्व का इमानदारी एक उसुल था।

फुसरो ई-पत्रीका ऐसे नेक दिल इंसान को श्रद्धांजलि देता है और यह कामना करता है कि उनके परिवार को हिम्मत मिले। इस दुःख की घड़ी मे उनकी पत्नी का साहस समाज की समस्त महिला एवं उनके छोटे पुत्र अंकित ने बढाया। मौके पर मौजूद दिलीप मित्तल, मनोज मित्तल, विजय मित्तल, सुनिल मित्तल, श्यामसुंदर अग्रवाल, रामअवतार अग्रवाल, छितर बंसल, विनय रूंगटा, अजय गोयल, मदन अग्रवाल, नेमिचंद अग्रवाल, पंकज मित्तल, कृष्णा चांडक, पवन अग्रवाल, नविन गोयल, मारवाड़ी युवा मंच के सभी सदस्य, राधेश्याम अग्रवाल, प्रेम बाबु, मिंटू सिंह, राजेन्द्र झा, शंभू वर्णवाल, अभय विश्वकर्मा, महारुर्द सिंह, अशोक पटवारी, जगदीश पटवारी, एवं सैकड़ों लोगों ने कांधा दे कर अंतिम विदाई दी।

मारवाड़ी युवा मंच को मिला एम्बुलेंस

उद्घाटन समारोह 

माननीय बेरमो विधायक श्री योगेश्वर महतो ‘बाटूल’ के विधायक मद से मारवाड़ी युवा मंच बेरमो शाखा को वातानुकूलित एम्बुलेंस वाहन दिनांक 10 मार्च 2018 को प्रदान किया जाने वाला है.

समारोह उक्त तिथि को दिन में 11 बजे से अग्रसेन भवन, फुसरो में आयोजित किया जाना तय हुआ है.

अतः इस उद्घाटन समारोह में आप सभी समाज बंधुओं की उपस्थिति अपेक्षित है.

निवेदक
मारवाड़ी युवा मंच
बेरमो शाखा

देश मना रहा वूमन डे

वाह रे दुनिया तेरी कहानी
मेरा दुख और मेरी जवानी
रो-रो कर जगती मे राते
यही हकीकत हे जग जाने।

वाह रे दुनिया पोस्ट बनाया
नारी को शक्ति दिखलाया
कह गए झूठ अपनेपन की
और न जाने कितने सपने दिखलाया।

अब भी मै अभियान बनी हूँ,
अब भी झूठी शान बनी हूँ,
तुमने हर वक्त जो कुचला है,
उस पल से अंजान रही हूँ.

वाह रे दुनिया तेरी कहानी,
तुमने ये त्योहार मनाया,
तुमने खबर हजार बनाया
कभी मे लुटि बीच सड़कों में,
तो कभी अपनो ने धमकाया.

सोचा था मैं साथ चलूंगी,
हक अपना अब बांट चलूंगी,
पर तुमने कुछ और दिखाया,
क्यो हकीकत को झुठलाया?

नारी का सम्मान करो,
उनके हक की पहचान करो
न बातो से कुछ होना है,
अब सभी को एकजुट होना है।

अब न कोई सवाल उठेगा….
न इंसाफ का दरवाजा पिटेगा….
जो कुचलने हमें आगे आये….
उसे नारी शक्ति का रुप दिखेगा…. ”

पूरा भारत पोस्ट घुमाया
आखिर क्यों नारी को
अच्छी “बहु” नहीं बताया.

अब आगे सोचने का काम आप सभी का है,
महिला दिवस के अवसर पर सभी को बधाई।

हाई टेक होली

पर्व त्योहारों को सामूहिक रूप से उल्लास पूर्वक मनाने की हमारी परंपरा रही है। इन दिनों हम अपने सगे-संबंधियों, पड़ोसियों से मिलने उपहार-मिठाई लेकर उनके घर जाया करते थे। छोटे-बड़े के बीच चरण-स्पर्श आशीर्वाद होता, बाकी लोग गले मिलकर बधाईयाँ देते। इस प्रकार सब आनंदित होते! जिनसे वो मिल न पाते, तो मन में दुख होता था। बाद में, मिलने पर शिकायतें हुआ करती थी। सबसे एक साथ जुड़े रहने का कोई साधन भी तो नहीं होता था! 😔 लोग पत्र और greeting cards का सहारा लेते थे।

फिर आया टेलीफोन!
दूर रहने वाले अपनों से सीधा या उनके पड़ोसी के सहयोग से बातें कर पाना संभव हुआ। अपनों से बात कर मन को शांति मिलती; भले इसके लिए पैसे लगते हों और कुछ समय भी लगता था। पर मिलने वाली खुशी अनमोल होती थी।

फिर मोबाइल का आगमन हुआ!
हर घर और फिर हर हाथ में “मोबाइल” आने पर मानों जैसे भौगोलिक दूरियाँ ही समाप्त होने को आईं! बातें करना महँगा होने के कारण सीमित बातें ही होती, पर होतीं जरूर थीं। हमारी खुशियाँ और बढ़ गईं। हम ये ध्यान देते कि किसी अपने से बात करना रह तो नहीं गया!

फिर सोशल मीडिया के समय आया। फेसबुक और ट्विटर पर अपनी बात एकसाथ सब लोगों तक पहुँचाने लगें। one-to-one बातचीत में कमी आई। WhatsApp messenger और इन जैसे कुछ और साधन के आने पर लोग एक-दूसरे से अब तथा कथित “online connected” रहने लगे! इसका लाभ मोबाइल कंपनियों को अधिक होने लगा।

Jio के आने पर हमें और सुविधा उपलब्ध हुई। डाटा सस्ता हुआ और बात करने के अलग से पैसे लगने बंद हो गए। इसके लाभ कुछ सीमित लोगों को ही हुआ। अधिकांश लोग आपस में हमेशा बतियाते रहते या आॅनलाईन वीडियो देखा करते। इसी में पूरा समय निकल जाता है।

अब किसी के पास समय नहीं है किसी अपने से मिलने की!!! 😟 साधन है पर इच्छा नहीं, किसी अपने से बात करने की!!! आम दिनों की तो छोड़ ही दीजिए, सुख-दुख, पर्व त्योहारों में भी एक एकाकीपन अपने पैर पसार रहा है। हमारे अपनों का दायरा, अब हमारे दिल में छोटा होता जा रहा है। अब हम उत्सव सबके साथ नहीं, अकेले ही मनाते हैं।

प्रार्थना है कि ये आपके जीवन का सत्य न हो।

होली की आनंदमयी अनेकानेक शुभकामनाएँ!

क्यों न माने बुरा होली में

होली मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत त्योहार हुआ करता था। सुबह से तेल चुपड़ कर हम निकल जाते पर असली होली खेलती थी हमारे यहाँ की औरतें। जब वे घर से पुआ तल कर बाहर निकलती तो मुहल्ले में बवाल ही मच जाता था। उनकी टोली हर घर जाती, महिलाओं को खदेड़ निकालती। हम बच्चें अपनी-अपनी माँओं के मदद के लिये तैयार, दौड़ कर चापाकल से उनके लिये बाल्टियां भरते थे।

हँसी-ठिठोली होती थी पर क्या मजाल जो कोई पुरुष इन महिला ब्रिगेड को छेड़ देता। उन्हें भी तो मालूम था, एक बोलेंगे तो पलट कर चार सुनायेंगी ये औरतें। खुल कर होली खेलती इन औरतों को देख कर मुझे आजादी महसूस होती थी इस खूबसूरत त्योहार में।

हम कहते थे “बुरा ना मानो होली है” और उन लोगों से भी जाकर गले मिलते थे जो साल भर हमारे दुश्मन रहे। सारे मुहल्ले वाले मिलकर जबरदस्ती गले मिलवा देते थे बाकी दिन कचड़े फेंकने को लेकर लड़ने वाले पड़ोसियों को। दुनिया में कौन सा त्यौहार यह करवाने की ताकत रखता था??

पर फिर देखी बदलते जमाने की होली। मेरे छोटे से शहर में भी हर घर जाने वाली वह टोली खत्म हो गयी। कुछ मुहल्लों में बची है, पर बदलते जमाने ने उसके अस्तित्व को खतरे में ला दिया है।

बड़े शहरों की होली से तो नफरत सा है। बड़ी होली खेलते हैं दिल्ली के लोग, पर बालकनी से। कल मेरी दोस्त को छत से लड़को ने पानी का गुब्बारा फेंक कर मार और वह दर्द से कराह उठी। उन्होंने कहा बुरा ना मानो होली है पर मैंने बिल्कुल बुरा माना और उनके घर के सामने खड़े होकर पूरी खड़ी-खोटी सुनायी।

रस्ते में दो बच्चे अपनी बालकनी से बाल्टी भर पानी उड़ेलने की कोशिश कर रहे थे। उनसे ज्यादा तो बड़ा बाल्टी ही था मानो। मुझे डर लगा की पानी तो पानी पर बाल्टी ही ना गिरा दे किसी के सिर पर। पूरी दिल्ली ही आते-जाते लोगो पर निशाना साधने में लगी है बिना यह सोचे कि अचानक हुये इस हमले से किसी बाइक का बैलेंस बिगड़ सकता है, किसी को चोट आ सकती है, किसी के आंखों में रंग जा सकता है। पर वे सब यही बोलेंगे बुरा ना मानो होली है।

मथुरा की होली में यही कहते हुये लोगों को विदेशी महिलाओ को जबरदस्ती छुते देखा था। वे परेशान थी, चिल्ला-चिल्ला कर मना कर रही थी।

कितनी दयनीय है आपलोगों की होली। आप होली के दिन अपने पड़ोसियों का दरवाजा खटखटाने, उनके साथ दही बड़ा बांटने की ना हिम्मत रखते हैं ना तमीज। आपको तो मालूम भी नहीं है कि बगल के घर में अकेले रह रहे बुजुर्ग दम्पति के चरणों मे आज अबीर डालने वाला कोई नहीं है। पर आप आती-जाती लड़कियों को छेड़ेंगे, किसी को चोट पहुँचा कर होली मनायेंगे, तबले की थाप पर अपने पड़ोसियों के साथ झूमेंगे नहीं ना ही उन विदेशियों को अपने जश्न में शामिल करेंगे, पर पूरी कोशिश रहेगी होली के बहाने गोरी चमड़ी पर हाथ डालने की।

आखिर कब और क्यों आ गयी हमारे यहाँ ऐसी सैडिस्टिक प्लेजर वाली होली कि, लड़कियों को घर से निकलने में डर लगने लगा उस दिन?? हमारी होली ऐसी तो कतई नहीं थी। ऐसी होली बुरा मानने वाली ही है।

यह दुनिया का सबसे रंग-बिरंगा खूबसूरत त्योहार है, जिसे ‘ कोल्डप्ले अपने एल्बम में दिखाता है, जिसकी फ़ोटो अगले दिन हर विदेशी अखबार में आती है और उस त्योहार का वास्तविक स्वरूप बिगाड़ कर अगर आप सोचेंगे कि हम बुरा नहीं मानेंगे तो आप बेवकूफ हैं। हमारा कुछ बहुत अपना था जो खो रहा है। हमें बुरा लगता है। दुःख होता है।

खेलिये पर थोड़ा खुले दिल से, बिना किसी नीचता के। तभी आपको हक हैं कहने का, “बुरा ना मानो होली है।”

होली की सबको शुभकामनायें। 

चिन्तन – ०४

शैक्षणिक प्रतिबद्धताएँ –

बच्चों के छेत्र में कार्य करने वालों में विशेष कर शिक्षकों में अपेक्षित प्रमुख शीलगुणों ( Traits ) में- कोमल हिर्दय, संवेदनशील, मृदुभाषी व्यक्तित्व, परानुभूति संपन्न व्यक्तित्व, वात्सल्यता, ममत्व, बच्चों की तरह सोचने वाले, त्वरित निर्णय और बाल हित में सोचने वाले, समय देने वाले, आपातस्थिति में उपलब्ध होने वाले, परिपक्व मस्तिष्क वाले व्यक्तित्व, ज्ञानवान आदि होने चाहिए। साथ ही नेतृत्व का कमान उन्हें दी जानी चाहिये जो कुशलता के साथ समदर्शी भाव से पूरी टीम के साथ समयोजनशीलता, तारतम्य व समझ विकसित करें, तब जाकर ही नेतृत्व शैली प्रगाढ़ बन पाएगी।

बच्चों के छेत्र में कार्य करने वाले व्यक्तित्व के चुनाव में ध्यान दिये जाने की जरूरत है- लिखित परीक्षा, मौखिक परीक्षा। साथ साथ Aptitude Test से व्यक्ति के अंदर छिपे भाव को भी जाना जा सकता है। बच्चे देश के कर्णधार माने गये हैं, इस परिपेक्ष्य में बच्चों के अधिकार व सरंक्षण कर रहे व्यक्तियों के पारदर्शिता से चुनाव किये जाने से ज़िले, राज्य और राष्ट्र में इसका व्यापक प्रभाव दिख पायेगा।

शिक्षा व्यवसाय नहीं अपितु जीवन ध्येय है। शिक्षक के चरित्र, ज्ञान व प्रतिबद्धता से ही छात्रों के व्यक्तित्व का समग्र विकास एवं चरित्र निर्माण संभव है। शिक्षक में चार तरह की प्रतिबद्धता अतिआवश्यक है-

पहला- छात्रों के प्रति प्रतिबद्धता- यहां पाठ्यक्रम के विषयों को रोचक बनाना, छात्रों में मूल्य बोध कराना, साथ ही साथ छात्रों के जीवन को दिशा दिये जाने प्रथम प्रतिबद्धता है।

दूसरा- शिक्षक का विषय के प्रति प्रतिबद्धता- विषय पर नियंत्रण व प्रभावी ढंग से अभिव्यक्ति, साथ ही साथ नियमित अभ्यास अनिवार्य रूप से छात्रों को कराया जाना दूसरी प्रतिबद्धता के अंतर्गत आती है।

तीसरा- समाज के प्रति प्रतिबद्धता- शिक्षक को विद्यालय, महाविद्यालय एवं यूनिवर्सिटी के छात्रों में सामाजिक जागरूकता, चेतना, संवेदना जगाने एवं उसमें राष्ट्र भक्ति के संस्कार देने के संभावित प्रयास किये जाने चाहिए।

चौथा- स्वयं के प्रति प्रतिबद्धता- शिक्षा देना व्यवसाय नही, अपितु ध्येय है। शिक्षा देना यह मनुष्य के निर्माण का कार्य है।

उपरोक्त चार तरह की प्रतिबद्धता से छात्रों के व्यक्तित्व का समग्र, सर्वांगीण एवं चहुमुँखीं विकास की जा सकती है। शिक्षक अगर ज्ञानवान, प्रखर, ओज वान, कौशल विकास में निपुण, अभिप्रेरणात्मक स्तर बढ़ाने में निपुण, प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती से छात्रों का सामना करवाने में निपुण होंगे, तो छात्रों के परिष्कृत व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षक अपनी अद्वितीय भूमिका का निर्वहन कर पाएंगे। जैसे शिक्षक होंगे, वैसे समाज का सृजन होता दिखेगा।

गम न करें – १७

बे-मौके सब शरीफ

मतलब यह नहीं कि यह सीधे तौर पर आपके बारे में हैं. मतलब यह है कि यह उन सभी के बारे में है जो मौके पर शरीफ बनने का ढोंग रचते हैं और समय आने पर दूसरों को आगे कर खुद उनका समर्थन अथवा उनके साथ अथवा उनके पीछे चलने को तुरंत तैयार हो जाते हैं. इसलिए बे-मौके सब शरीफ से हमारा तात्पर्य यह है कि मौका आने पर अपनी शराफत दिखाने से कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता, पर यह कि सिर्फ ख़बरों में आने के लिए या कि सिर्फ दिखावे के लिए.

आप कथनी और करनी में जितना कम अंतर रख पाते हैं उतने ही आप चरित्रवान होते हैं, यह नहीं कि आप चरित्रवान तो हों पर अवसर आने पर आप खिसक लें. यहाँ मेरा यह सब लिखना आप में से बहुतों को खल रहा होगा पर क्या करें तारीफ बनती भी होगी तो आप इसे मेरा दंभ न समझ ले इसलिए यह साफ करना जरुरी है कि मै इस लेख के माध्यम से आप सब को कुंठित नहीं करना चाहता हूँ. मेरा उद्देश्य बस इतना है कि हम अपने चरित्र के स्तर को उस ऊँचाई तक ले जा सकें जहाँ हम सचमुच ही अपने कथनी और करनी अंतर नहीं कर सकें अर्थात जैसा भी हम सोचें अथवा कहें उसपर चल भी सकें.

थोड़ी देर के लिए यह लेख आपको गप्पबाजी लग सकती है पर आप जरा ध्यान देकर इन बातों को सोचेंगे तो यही पाएंगे कि हम में से कितने ही अवसर आने पर किसी जन-कल्याणकारी कार्यों के लिए समय निकल पाते हैं? अधिकतर का उत्तर यही होगा कि अपने काम से फुर्सत मिले तभी ना. सही भी है, पर यह तभी संभव हो पाता है जब आप समय निकालना चाहें. क्या आप अपने परिवार के लिए समय नहीं निकाल पाते, क्या आप अपने किसी निजी कार्य के लिए समय नहीं निकाल पाते यदि आपका उत्तर हाँ है तो समस्या यह है कि समय आपको निकालना होता है इससे पहले कि समय आपको निकाल दे.

महत्वपूर्ण यह नहीं कि आप किन बातों अथवा कार्यों के लिए समय निकाल पाते हैं अपितु यह कि आप किन बातों अथवा कार्यों के लिए स्वयं को अनुकूल पाते हैं. यदि नहीं तो फिर आप चाहें कि उक्त कार्यों के लिए भी आप समय निकालें. क्योंकि यह आपके ही हाथों में होता है पूर्णरुपेण. आप टालमटोल के शिकार महसूस होते हैं यदि आप चाह कर भी समय प्रबंधन नहीं कर पाते और इसका ठीकरा दूसरों के सर फोड़ने को उद्दत रहते हैं.

आईये इस उधेड़बुन से निकालें जीवन बहुत खुबसूरत है, इसका आनंद लीजिये, नहीं समझ आ रहा हो तो किसी मनोवैज्ञानिक से जरुर मिलें, आप पागल नहीं हैं पर इस स्थिति में अधिक देर रहना आपको जल्द ही उस श्रेणी में ला खड़ा कर सकता है, इसलिए कि कही और अधिक देर न हो जाये, अपने आपको, अपने लिए कुछ ऐसा करें जिससे आपके मन, आत्मा और चित्त को प्रसन्नता होती हो, साथ ही दूसरों की प्रसन्नता का कारण हो ऐसे कृत्यों में स्वयं को उलझाएँ.

इसलिए गम न करें खुश रहें.

25 फरवरी को होगा आजसू फुसरो नगर कार्यकर्ता सम्मेलन

आजसू पार्टी फुसरो नगर व बेरमो प्रखंड समिति की बैठक फुसरो स्थित प्रधान कार्यालय में हुई जिसकी अध्यक्षता नगर अध्यक्ष विनोद बाउरी ने तथा संचालन प्रखंड सचिव सुरेश महतो ने किया। बैठक में सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया की आगामी 25 फरवरी 2018 को आजसू पार्टी फुसरो नगर व बेरमो प्रखंड के कार्यकर्ता मिलान समारोह सह मिलन कार्यक्रम फुसरो में किया जाएगा।
केंद्रीय मुख्यालय सचिव कमलेश महतो ने कहा कि संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता है, और आजसू पार्टी हमेशा जनता की समस्याओ को लेकर आंदोलन करते आ रही है, और आगे भी करेगी। भविष्य में आंदोलन को और धारदार बनाने हेतु फुसरो नगर के सभी वार्डो में बैठक कर संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे कहा कि आजसू पार्टी का जनाधार पूरे झारखंड में बढ़ रहा है। यहां युवाओ और महिलाआ को पार्टी में जोड़ने पर बल दिया गया। इस अवसर पर महेंद्र चैधरी, मंजूर अंसारी, बिनोद महतो, प्रमोद कुमार, मनोज पांडेय, संतोष महतो , अनिल झा, बीरू हाड़ी, आदि उपस्थित थे।
 छाया / सूत्र : बेरमो आवाज

डी.ए.वी. ढोरी में मनाई गयी महात्मा एन. डी. ग्रोवर की पुण्य तिथि

डी. ए. वी. पब्लिक स्कूल, ढोरी में मंगलवार को महात्मा एन. डी. ग्रोवर की पुण्य तिथि मनायी गयी। उक्त अवसर पर वैदिक हवन का आयोजन किया गया। तत्पश्चात स्व. ग्रोवर साहब की तस्वीर पर विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक- शिक्षिकाओं तथा छात्र प्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित की। डा. आर. सी. झा ने उनके व्यक्तित्व एवं सुकृत्यों पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने झारखण्ड सहित 8 राज्यों में लगभग 200 विद्यालयों की स्थापना की।

शिक्षा का अलख जगाने के साथ-साथ आर्यसमाज का विस्तार, प्रचार व प्रसार भी किया। वे गरीबों के मसीहा के रूप में जाने जाते हैं। प्रचार्य श्री एस. कुमार ने बताया कि आर्य समाज की प्रखर विभूति, स्वतंत्रता सेनानी, रसायन शास्त्र के प्रकांड ज्ञाता, तथा जीवट प्रतिभा, कर्मठ व अनुशासित व्यक्तित्व के स्वामी थे स्व. ग्रोवर। 15 नवंबर, 1923 में इशाखेल (पाकिस्तान) पंजाब प्रांत में जन्मे ग्रोवर साहब ने 1957 से आर्य समाज को अपनी सेवाएँ दी। वे हिसार व पंजाब में डी. ए. वी. पब्लिक स्कूल के प्राचार्य रहे। तदन्तर राँची, पटना जोन के क्षेत्रीय निदेशक तथा डी. ए. वी. काॅलेज मैनेजिंग कमिटी के उपाध्यक्ष बने।

उन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी समाज के शोषित दलित और उपेक्षित वर्ग की सेवा में लगा दी। ऐसे महामानव ने असंख्य विद्यालय खोलकर समाज में शिक्षा के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने का कार्य किया। अंततः उन्होंने 6 फरवरी 2008 को अंतिम साँस लेकर इस मायावी संसार से विदा हो गये। उनके पद्चिह्नों पर चलना हम सबके लिये एक प्रेरणा स्त्रोत है। कार्यक्रम की उद्घोषणा श्री अशोक पाल ने किया। कार्यक्रम की सफलता में श्री एस. के. शर्मा, श्री राकेश कुमार, सुश्री श्वेता, श्री पंकज यादव तथा श्रीमती मौसमी गुप्ता का सराहनीय योगदान रहा।

छाया / सूत्र : बेरमो आवाज

कांग्रेस पार्टी का झंडा लगाओ अभियान

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के निर्देशानुसार फुसरो नगर परिषद् क्षेत्र, वार्ड नंबर 25, 26 (फुसरो डॉ कस्तुरी मुखर्जी अस्पताल मुहल्ला, बेरमो प्रखण्ड रोड़ मुहल्ला, फुसरो मेन रोड बंगाली मुहल्ला,अवध सिनेमा रोड) में कांग्रेस जनों के आवासों व दुकानों पर कांग्रेस पार्टी का झंडा लगाने का कार्यक्रम किया गया।

प्रभारी सच्चिन्द सिंह के द्वारा संचालित किया गया था।कांग्रेस के वरीय नेता महारुद्र नारायण सिंह ने कहा कि कार्यकत्ता ही पार्टी के रीढ़ है, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रति विश्वास बढ़ रहा है कहा कि कार्यकत्ता ही पार्टी के रीढ़ है, उनके बदौलत ही चुनाव जीता जा सकता है।

मौके पर बेरमो प्रखण्ड अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह, उत्तम सिंह, परवेज अख्तर, आबिद हुसैन, छेदी नोनिया, जसिम रजा, कृष्ण कुमार चाण्डक, केदार सिंह, रामवली चैहान, ब्रिजेश सिंह, बृजमोहन, शम्भु यादव, मनोज शर्मा, मो.नसीम, बिनोद चैरासिया, शंकर पासवान, दीपक कुमार सिंह,रामाशीष महतो, अखिलेश सिंह, गोपाल गुप्ता, मो. साकिर हुसैन, सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

सूत्र / छाया : बेरमो आवाज