जीविका के लिए जोखिम

मेलों में अक्सर देखने को मिल जाते हैं ऐसे कलाकारों के समूह जो आजीविका के लिए इतने जोखिम भरे व्यवसाय को अपनाते हैं. बहुत दुःख होता है की अपने देश में ऐसे कला की कोई कद्र नहीं. महज कुछ रुपये खर्च कर हम उस रोमांच का अनुभव तो कर लेते हैं परन्तु उसके पीछे के सत्य से मुह भी मोड़ लेते हैं.

14 वीं शताब्दी के रोम में/से लैटिन शब्द सर्कुलर लाइन से आहरित शब्द सर्कस एक सर्कुलर लाइन अर्थात रेखांकित घेरे के अन्दर किसी प्रतियोगिता अथवा करतब का आयोजन, सर्कस कहलाने लगा.

विदेशो खास कर रूस, चीन एवं जापान आदि में इसके लिए अलग, स्थायी रूप से निर्मित स्थान हैं जहाँ नित्य नए करतब दिखाए जाते हैं. वहां मनोरंजन के विशिष्ट साधन के रूप में इसे ख्याति प्राप्त है. अपने यहाँ सिनेमा घरों को छोड़ (अब पीवीआर) दूसरा सार्वजनिक मनोरंजन के नाम पर कोई विकल्प नहीं दिखता है, ऐसे में मेलों में अक्सर ऐसे व्यवसाय को ही लगाना पसंद किया जाता है जो कोई भी पूरे वर्ष चक्र में नहीं देख पाता हो, और लोग बरबस खिंचे चले जाते हैं.

ऐसे ही एक मेले में जो दुर्गा पूजा के अवसर पर सेंट्रल कॉलोनी, मकोली में इस वर्ष भी प्रतिवर्ष की भांति आयोजित हुआ जिसमे इस वर्ष बच्चों के पुरजोर आग्रह पर विवश होकर ‘दुर्गेश्वरी मारुती सर्कस‘ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘मौत का कुआँ’ देखने का अवसर (अवसर नहीं मैं तो सौभाग्य कहूँगा) प्राप्त हुआ तो मैं उसे अपने कमरे में रिकॉर्ड करने से खुद को नहीं रोक पाया. और बच्चो के आग्रह पर इसे आप सबके साथ अपने अनुभव को बाँटने से भला कैसे रोक पाता.

अंत में बस यही कहना चाहूँगा की महँगी-महँगी फिल्मो से जो मनोरंजन मिलता है उसकी एक अपनी अलग पहचान और महत्व है मैं कदापि उसे नकार नहीं रहा परन्तु जिस कला को आप सामने लाइव देखते हैं, उसका एक अलग ही आनंद है. तो आपको जब भी मौका मिले ऐसे अवसरों को मत चूकिए, क्योंकि ये आपका मनोरजन तो करते हैं पर अपनी जीविका के लिए जो जोखिम उठाते हैं उसका कोई सानी नहीं.

दशहरा – १०

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी,
तृतीयं चन्द्रघंटेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्,
पंचमं स्क्न्दमातेति 
षष्ठं कात्यायनीति च,
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्,
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः

|| आप सभी को विजयादशमी  की शुभकामनायें ||

आप सभी को टीम phusro.in की तरफ से दशहरा की हार्दिक शुभकामनायें, माँ आप सबकी मनोकामनाओं को पूरा करें. आज के दिन मेले का सपरिवार आनंद उठाएं, हाँ सावधानी का ख़याल रखें, प्रशासन का सहयोग करें ताकि शांतिपूर्ण तरीके से मेला संपन्न हो सके, बच्चों की जेब में नाम व पते की पर्ची रखना न भूले. कम उम्र के बच्चों को ऊँचे झूले इत्यादि से दूर रखें. किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर तुरंत मेले में स्थित जन-सूचना केंद्र से संपर्क करें. अफवाहों से बचें. बिना सोचे समझे किसी भी बात पर यकीन करने से पहले तथ्य की पुष्टि करें.

शुभ – दशहरा

प्रस्तुत है ऐसे विशेष लोगों के लिए जो फुसरो से दूर रह रहे हैं और उन्हें अपने घर की याद आ रही है, तो इस दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर वो भी माता के दर्शन करें, और पुण्य के भागी बने.

फुसरो दुर्गा-मण्डप में माता की झांकी

श्री श्री दुर्गा पूजा समिति फुसरो में हर वर्ष की तरह आयोजित दुर्गा पूजा में, माता की झांकी दिखाई गयी. जिसे हजारीबाग के कलाकारों ने मिलकर पूरा किया. यहाँ पहले भी अलग-अलग थीम पर माता की झांकी दिखाई जाती रही है, विगत कुछ वर्षो पहले इसे बंद कर दिया गया था यह बताते हुए की स्थापित मूर्ती की हिलाना नहीं चाहिए. पर विद्वानों ने यह कह इसका खंडन किया की शोभा के रूप में प्रदर्शित मूर्ती और प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ती में बहुत अंतर होता है. झांकी शोभा से सम्बन्ध रखती है तो उस मूर्ती के हिलने-डुलने से कोई परेशानी नहीं. क्योकि पाठ-पूजा तो प्रतिपदा से ही शुरू हो जाती है, जब की मूर्ती तब तक निर्माणाधीन ही होती है. इसलिए झांकी की परम्परा पुनर्स्थापित हो गयी.