भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए किस अवसर की तलाश है आपको?

छाया : बेरमो आवाज

मकोली स्थित उत्क्रमित विद्यालय के पास बी.आर.सी. भवन से रविवार की सुबह एंटी करप्शन ब्यूरो की धनबाद टीम ने बेरमो प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी महेन्द्र सिंह (फाइल फोटो) को 40 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर अपने साथ धनबाद ले गई। एसीबी की टीम ने यह कार्रवाई मनबहादुर थापा नामक एक ठेकेदार के शिकायत पर की है। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार बिल पास करने के एवज में बीईईओ सिंह ने ठेकेदार थापा से डेढ़ लाख रुपए की मांग की थी। पर थापा ने 40 हजार फ़िलहाल देने की बात कही और जिसकी शिकायत थापा ने एसीबी धनबाद की टीम से किया। जिसके बाद एसीबी की टीम रविवार की सुबह मकोली पहुंची, इधर पूर्व निर्धारित समय पर रकम लेकर ठेकेदार थापा भी पहुंचे और जैसे ही  मकोली स्थित बीआरसी भवन में उक्त राशि  बीईईओ महेन्द्र सिंह को दिया, वहीं सादे लिबास में पहले से बैठे एसीबी की टीम ने धर दबोचा। गिरफ्तार महेन्द्र सिंह बेरमो (वन) के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हैं तथा इसके पहले नावाडीह में पदस्थापित थे.

कहा जाता है कि दान जितना गुप्त होता है दानी को उतना ही पुण्य प्राप्त होता है और दान जो दिखावे के साथ होता है वह आडम्बर होता है. अब तर्क यह है कि गुप्त दान करने वाले यदि फल की इच्छा और पुण्य मात्र की प्राप्ति से उत्साहित हो कर दान करते हैं तो वह भी लालसा की श्रेणी में आ जाता है और निष्फल हो जाता है. सार यह है कि दान भी एक कर्म है जिस प्रकार आप अन्य कर्मो का साधन करते हैं. यह एक प्रक्रिया है जो आपके सामाजिक उत्तरदायित्व को एक स्थान प्रदान करती है समाज में.

कर्म को प्रधानता उसके नैतिक व आदर्श मूल्य के स्तर पर दिया  जाना चाहिए और इच्छा से व्युत्पन्न अवसाद से स्वयं को दूर रखना चाहिए. इच्छा का होना महत्वपूर्ण न होकर कैसी इच्छा है यह अधिक विचारनीय होना चाहिए. इच्छा कर्म को प्रेरित करती है, सत्कर्म आपके व्यक्तित्व का निर्माण करती है. अवसर आपकी निष्ठा की परीक्षा लेती है, यह नहीं कि अवसर मिला तो आप ईमानदारी का बिगुल बजा रहे और अवसर मिला तो अपना उल्लू भी सीधा करने से नहीं चूके.

यूँ तो अवसर की तलाश सबों को होती है, परन्तु यह कि अवसर प्राप्त होने पर उसको उपयुक्तता के साथ प्रयुक्त भी कर सकें, क्षमता किन्ही विशिष्ट आत्माओं में ही होती है. अवसर का होना किसी विशेष कर्म के निष्पादन के लिए उपयुक्त है अथवा नहीं यह पूर्ण रूप से उसके एकाधिक लाभुकों के संख्या बल से निर्धारित होना चाहिए न कि अपनी क्षमता का अनुचित लाभ लेकर स्वहित साधन कर अनैतिक रूप से प्रयुक्त किया जाये.

आप अफसर थे, आपके स्वयं को सौंपे गए कार्य के प्रति उत्तदायी बना कर पदस्थापित किया गया. उसके बदले में सरकार वह हर लाभ दे रही है जिसके आप पदानुकुल अधिकारी थे. आपने गलत को सही करने के लिए पैसे लेने शुरू किये तो सही लोगों को लगा आप गलत कर रहे हैं. जब आपने सही लोगों को भी पैसे देने के लिए विवश किया तो एक बार फिर उनको लगा कि आप गलत कर रहे हैं. जब कभी शायद आपको विवश किया गया हो गलत करने के लिए तो आप नहीं रुके और न ही रोका अपितु आप अवसर का लाभ प्राप्त करते चले गए. अब ऐसे में यह दिन देखने के लिए तैयार होंगे आप शायद, परन्तु इस घटना से एक बात तो स्पष्ट है कि लोग अब विरोध तो करेंगे.

इन सब बातों से एक और बात निकलती है कि क्या कभी आपने उनकी बातों का मान न रखा हो, और उन्होंने कसम उठा ली हो कि आपको सही जगह पहुंचा देंगे. या फिर वास्तव में वे आपसे और आपके रवैये से त्रस्त हो गए होंगे और आप अपने ही कर्म के जाल में फंस गए. जो भी हो इतना तो पक्का है कि उच्चाधिकारियों ने आपको पकड़ा है, वैसे लोगों ने जिन्होंने शपथ ली है ऐसे ही कर्मो को रोकने की तो आप अपनी शपथ क्यों भूल गए थे, जो आपके संस्थान ने आपको दिलाई हुई थी.

बच्चों में मोबाइल का बढ़ता उपयोग एवं इसके दुष्परिणाम – डॉ. प्रभाकर कुमार

आज का समय भौतिकवादी, आपसी प्रतिस्पर्धा का, सामाजिक चकाचौंध की एवं सूचना प्रौद्योगिकी का बढ़ना व सहज रूप से मिलना, इंटरनेट सर्वसुलभ होना और कम पैसों में 4G की सुविधा मिल पाना है। बच्चों में अनुकरण करने की प्रवृति अत्यधिक होती है, बच्चे अपने घरों एवं माता पिता के व्यवहारों का अनुकरण कर रहे हैं। आज के माता पिता की शिक्षा व संस्कार ही मर्यादित नहीं रह गए हैं तो हम बच्चों को कितना संस्कारवान बना सकते हैं। बच्चों में मोबाइल की लत घर के संस्कारों से आ रहे हैं। साथ ही घर के वातावरण से जब बच्चे स्कूल या महाविद्यालय जा रहे हैं तो अपने संगी साथियों का प्रभाव एवं उनसे यह उपकरण के प्रयोगों को सीख रहे हैं। कुछ बच्चे घर में माता पिता की नजर से बचकर उनकी मोबाइल पर हाथ साफ कर रहे हैं। बच्चों का बाल मन ऐसा होता है कि वह जल्द ही गुमराह होते या गलत चीजों की आदत जल्द सीखते हैं। मोबाइल की माता पिता की लत बच्चों में स्थानांतरित होना, घर में बच्चों को खेल खेल में मोबाइल हाथ मे दिया जाना, कहीं न कहीं प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी ही कर जाता है।

मोबाइल प्रयुक्त करने की आदत आज के समय अपने उच्चतम स्तर पर है। आजकल बच्चों की शारीरीक अवस्था में बदलाव के चलते तथा बच्चों में यौन जानकारी के प्रति उत्सुकता के कारण भी बच्चे मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग कर रहे हैं। पोर्न साइट पर आसानी से जा रहे हैं, नशे सेवन के लिये एडवांस तरीकों को बच्चे मोबाइल इंटरनेट के सहारे आसानी से सीख पा रहे हैं । बच्चों में आज महंगे एंड्रॉयड मोबाइल सेट अपने पास रखने का क्रेज बढ़ा है। माता पिता से जिद करके वह महंगे मोबाइल की खरीद कर रहे हैं। हालांकि बच्चों का बिना मोबाइल फ़ोन के भी काम हो सकता है। पर आज के समय में बच्चों की जिज्ञासा मोबाइल फोन की ओर उन्मुख है।

दुष्परिणाम- समय से पहले परिपक्व हो रहे हैं, आसानी से इंटरनेट का उपयोग, सारी वर्जनाओं को पार कर पोर्न साइट व यौन सामग्री की खोज में समय व्यतीत करना, पढ़ाई में मन न लगा पाना, एकाग्रता की कमी, आंखों की समस्या, शारीरिक गतिविधि का अभाव, बच्चों का बौद्धिक विकास गलत रास्ते की ओर उन्मुख, समाजीकरण की प्रक्रिया अवरुद्ध, बच्चे एकांत की तलाश करते है ताकि मोबाइल पर अनावश्यक चीजों की सर्फिंग कर पाएं, माता पिता से झूठ बोलने की आदत मे वृद्धि, गलत संगति, समय का दुरुपयोग करना आदि। बच्चों में मोबाइल की आदत- जब बच्चे को मोबाइल की आदत लग जाती है और मोबाइल की सुविधा मिल नही पाती तो चोरी, दूसरे की मोबाइल लेना, इसी में हत्या कर देना। बच्चों में id (“इड” एक मनोवैज्ञानिक शब्दावली, जिसका अर्थ है “दिमाग का वह हिस्सा जिसमें सहज ही आवेग और प्राथमिक प्रक्रियाएं प्रकट होती हैं”. “id”: is a PSYCHOANALYSIS term which means “the part of the mind in which innate instinctive impulses and primary processes are manifest.”) अर्थात बच्चे सिर्फ व सिर्फ अपनी आवश्यकता की पूर्ति चाहते हैं उन्हें वास्तविकता से कोई लेना देना नही होता है। इस लिये बाल मन कोई घृणित कार्य करके भी आवश्यकता की पूर्ति कर जाता है।

तीन घरो का ताला तोड़ कर लाखो की चोरी

बेरमो थाना क्षेत्र के घुटियाटांड निवासी सी.सी.एल. कर्मी विजयकांत चैहान के क्वार्टर से बीती रात लगभग 42 हजार कि एल.ई.डी. टी.वी. चोरी हो गई. वही रेलवे कॉलोनी करगली स्थित मुन्ना सिंह के घर से आभूषण समेत, नगदी लगभग 2 लाख रुपये  की चोरी हो गई, जबकि रेस्ट हाउस काॅलोनी के सेवानिवृत हेड मास्टर जे.एल. दास गुप्ता के पिछले दरवाजे का ताला चोरों द्वारा तोड़ा दिया गया लेकिन चोरी करने का प्रयास विफल रहा.

चोरी की सुचना पाते ही बेरमो पुलिस पहुंची और जाँच में जुट गई. श्री चैहान ने बताया कि बुधवार को पडोसी के द्वारा फोन से सुचना मिली कि घर का ताला तोड़ कर टी.वी. कीचोरी हुई है. विरेन्द्र सिंह ने बताया कि मुन्ना सिंह कि घर में अलमीरा व बक्से का ताला टुटा हुआ पाया गया. कहा कि अलमीरा और बक्से में जेवरात व किमती समान लगभग 2 लाख चोरो ने चुरा लिया.

मुन्ना सिंह के पड़ोसियों ने बताया कि वे औरंगबाद अपने साला के श्राद्ध में गये हुए है. फोन में उन्हे चोरी की सूचना दे दी गई है. समाचार प्राप्त होने तक मुन्ना सिंह यहाँ के लिए चल चुके हैं. विजयकांत चैहान कारो परियोजना में ओवरमैन के पद पर कार्यरत है. चोरी से लोगो में भय व्याप्त है. सूचना पाकर वार्ड पार्षद रश्मि सिंह व अर्चना सिंह पहुंचे, और कहा कि दिन प्रतिदिन चोरी की घटना बढ़ रही है, और इसके जाँच में उपयुक्त परिणाम की आशा व्यक्त की.

संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि, किसी प्रकार चोरों को भनक लग गयी थी कि घर के लोग बाहर गए हुए हैं, घर पूरी तरह से असुरक्षित है, और घर पर माल मिलने की पूरी संभावना है. बीती रात ठंढ अधिक थी, लोग अपने घरों में रजाई में दुबके पड़े थे, बाहर का शोर सुन नहीं पाए और चोरों ने इसी हालात का फायदा उठाया और अपना हाथ साफ कर गये. यह घटना एक सबक है कि आप घर छोड़ कर ऐसे ही निकल नहीं सकते, कीमती सामान विशेष कर गहने और पैसे को किसी सुरक्षित हाथों में सौंप कर ही घर छोड़ कहीं निकलने की सोचें, क्योंकि आपके घर की रखवाली करने आपका पडोसी नहीं आयगा.

छाया / सूत्र : राजेश

बेरमो प्रखंड परिसर में प्रशासन की चेतवानी के बाद भी जारी है जुआ

फुसरो, शहीद निर्मल महतो चौक के पास, सुलभ शौचालय के पीछे, बेरमो प्रखंड कार्यालय के बगल में और बेरमो थाना के सामने प्रखंड कार्यालय के शौचालय के टंकी के ऊपर वर्षों से वहाँ खड़े करने वाले पिक-अप वैन के चालकों और कुछ स्थानीय लोगों द्वारा सरेआम जुआ खेला जाता है.

ऐसा नहीं है कि यह आज कल से खेला जा रहा है वर्षो पूर्व जब बाज़ार में सड़कों का चौडीकरण हुआ था और तब से ही ऑटो व पिक-अप वैन के चालकों ने बेरमो थाना एवं बेरमो प्रखंड के बीच सड़क के किनारे वाहनों को खड़ा करना शुरू किया. उस समय से ही ग्राहक की प्रतीक्षा में खड़े वाहनों के चालकों ने समय व्यतीत करने के लिए सबसे पहले लूडो खेलना शुरू किया. आगे जाकर वही लूडो का खेल शर्तों व रुपयों के खेल में परिणत हो गया जो की अब ताश की पत्तियों से सरेआम खेला जा रहा है.

आस पास लोग नजरें बचा कर गुजरते देखे जा सकते हैं. इस प्रकार खुले में यह खेल सामाजिक संस्कारों के विरुद्ध एक चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए. रोज कई बच्चे जो उस ओर से गुजरते हैं. इस प्रकार के परिवेश का क्या दुष्प्रभाव पड़ सकता है उनके जीवन में किसी को इस बात की चिंता नहीं है. हम समाज के इस रूप को कैसे सहन कर पाते हैं, यह एक विचारणीय विषय-वस्तु है. प्रशासन के नाक के नीचे चल रहे इस खेल को अब तक नहीं रोका जा सका है.

इसे रोकना इसलिए भी आवश्यक है कि जिस स्थान पर यह खेल खेला जाता है वह कोई मनोरंजन स्थल नहीं बल्कि रास्ता है जो कि प्रशासनिक क्षेत्र के परिसीमा में आता है. आने-जाने वालों को यह परिदृश्य कुप्रभावित करता है. यह खेल, खुले में शौच से भी बदतर है जो हमारी मानसिकता को प्रदूषित कर रहा है. ऐसे कृत्यों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाना चाहिए.

विगत दिनों किये गए प्रशासनिक हस्तक्षेप का भी कोई असर नहीं दिखाई दे रहा और खेल बदस्तूर जारी है. यह खेल दिन-ब-दिन जिस प्रकार से गंभीर होता जा रहा है कभी-कभी लड़ाई झगड़े के रूप में तो कभी पी-खाकर गाली-गलौज के रूप में कि उस ओर से किसी भी संभ्रांत का गुजरना मुश्किल हो जाता है. यह समस्या प्रशासन व समाज में मुंह पर मुहांसे के सामान है और एक प्रश्नचिन्ह है. यदि समय रहते इसका हल न निकाला गया तो वह दिन दूर नहीं जब इसका प्रभाव हमारे बाल-बच्चों पर दिखने लगे.

अपेक्षा है कि समाज व प्रशासन की ओर से कुछ आवश्यक कदम उठाये जायेंगे ताकि इस प्रकार की गतिविधियों पर लगाम लग सके.

बजबजाती नालियाँ और सूअरों का आतंक

आज के इस दौर में जो नालियों की व्ययवस्था है अपने शहर में उससे बढ़िया तो कभी हड़प्पा सभ्यता में हुआ करती थी, उसपर सूअरों का जमावड़ा जो उन्हें जुहू बीच का अहसास देता है. अब लगता है हमें ही तय करना होगा कि हम सूअरों की बस्ती में ही रहते हैं या हमारी बस्ती सूअर. अब हमें दोनों ही में से कोई भी स्थिति बर्दाश्त नहीं, और होना भी नहीं चाहिए. पूरे देश में चल रहे स्वच्छता अभियान को धता बताने वाला यह परिदृश्य आज कल पूरे करगली बाज़ार, रीजनल हॉस्पिटल कॉलोनी करगली, आंबेडकर कॉलोनी  और नोनिया पट्टी सहित कई आस पास के इलाकों में बिना किसी परिश्रम के राह चलते देखा जा सकता है, जिस प्रकार यहाँ आदमी से ज्यादा सूअर रास्तों पर आवारा घूमते नजर आ जाया करते हैं उससे तो यही लगता है कि स्वच्छता अभियान सिर्फ फोटो निकालने भर के लिए रह गया हो.

चमचमाती सड़कों से जब आप नीचे मोहल्ले के सड़कों पर जाते हैं तो वार्ड संख्या 15, 16, 18, 21, और 24 में इन दिनों सूअरों का जो आतंक है यह आज कल से पनपा नहीं है, यह समस्या बहुत पुरानी है. पर अब जबकि यहाँ के इलाके नगर परिषद् के अंतर्गत आने से लोगों में एक उम्मीद जगी कि अब कुछ उपाय होगा और इस प्रकार की गन्दगी और समस्याओं से मुक्ति मिलेगी. पर बहुत दुःख के साथ बताना पड़ता है कि अब तक कई बार विभागीय नोटिस दिए जाने के बाद भी सूअर पालकों के कान पर जूँ न रेंगी.

वार्ड 24 के कुछ नौजवानों ने सामूहिक बैठक कर कई लोगों के हस्ताक्षर युक्त आवेदन भी दिए हैं अपने वार्ड पार्षद को जो कि विचाराधीन है अब तक. पूछे जाने पर कोई भी संतोष जनक उत्तर प्राप्त नहीं हो सका है. सूत्रों के हवाले से पता चला है कि इन सूअर पालकों ने सूअरों के पहचान के लिए उनके अंग-भेदन कर रखें हैं. किसी के कान तो किसी की पूंछ तो किसी को लोहे की सलाखों से दाग कर निशान आदि बनाकर अपनी पहचान दे दी गयी है. वे किसी भी मानदंड का अनुपालन करने के लिए स्वयं को बाध्य नहीं पाते और ऐसे ही मुक्त तरीके से सूअर का पालन करते हैं. एक-एक सूअर दो से तीन हजार तक में बिक जाते हैं.

ऐसा बिलकुल नहीं कि वह परिवार जो सूअर पालन से जुड़ा है, बिलकुल ही गरीब है या यह उनके परिवार के उपार्जन का एकमात्र साधन है. बकायदे सम्पन्न हैं और यह उनके ऊपरी आय का एक जरिया भर है, क्योंकि इसके पालन में न तो हिंग लगती है न फिटकरी और रंग आता है चोखा.

बजबजाती नालियों और सूअरों के बीच रहने को विवश लोग अपनी किस गलती की सजा भोग रहे हैं, यह समझ से परे है, पर अब लगता है कि लोगों ने ठान लिया है कि अब वह इसे सहन नहीं करेंगे. नगर परिषद् के कूड़ेदान में जमा कचरों को आये दिन सूअर बिखेर देते हैं. बहुत जगह पर नालियां अब भी कच्ची हैं और यह मानो सूअरों का हम्माम बना पड़ा है.

सूअरों से होने वाली बिमारियों से हम सभी भलीभांति परिचित हैं, एक अध्ययन के अनुसार स्वाईन-फ्लू का यह सबसे आसन जरिया होता है. एच१, एन१ वायरस का फैलना और उससे ग्रसित होना ऐसे वातावरण में बहुत ही आम बात है. वैसे भी इस प्रकार के वातावरण में बिमारियों का होना कोई नयी बात नहीं. जिस प्रकार के दृश्य देखने को आ रहे हैं उससे यही लगता है कि लोग आदि हो चुके हैं सूअरों के साथ रहने को, एक पल को पता ही नहीं चलता है कि लोग सूअर के घर में रह रहे हैं या सूअर इन लोगों के घरों में. स्थिति गंभीर है और दिन-ब-दिन और गंभीर होती जा रही है, पानी सर से ऊपर जाने को ही है पर पता नहीं लोग किस बात का इन्तेजार कर रहे हैं कि अब तो बस डूबना ही बाकी बचा है शायद.

अब रुख करते हैं प्रशासन का, तो उनकी ओर से ही कागजी कार्रवाई में  बस इतना ही है कि नोटिस जरूर मिला है उन सभी कथित पालकों को जिनके सूअर खुलेआम सड़कों पर पलते हैं, पर उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया है अब तक, इस बात का सबसे बड़ा कारण है की खुले में पालन होना, क्योंकि आप आसानी से यह नहीं बता सकते कि कौन सा सूअर किनका है तो आप कार्रवाई किस पर करेंगे, अव्वल तो आप साबित ही नहीं कर पाएंगे कि वे जिन्हें नोटिस मिला है सूअर पालन से जुड़े भी हैं या नहीं.

नगर परिषद् ने सक्रियता दिखाते हुए कई लोगों को नोटिस भेजा भी है, जिनमे मुख्य नाम हैं.

  1. श्री लखन राम पिता स्व.बलि राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला
  2. श्री गडी पासी पिता श्री शम्भू पासी, ढोरी पंचायत
  3. श्री सिकंदर राम, पिता श्री दुर्बल राम, आंबेडकर कॉलोनी
  4. श्री नंदकिशोर राम, पिता स्व.बाढो राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला
  5. श्री मनोज राम, पिता श्री प्रसादी राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला
  6. श्री अजय पासी, पिता श्री तोलन पासी, ढोरी पंचायत
  7. श्री नवल राम, पिता श्री लालू राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला

सूची बहुत लम्बी है, इससे एक बात तो साबित है कि इस प्रकार के व्यवसाय से जुड़े लोगों के पास किसी भी प्रकार का कोई भी पशुपालन से सम्बंधित अनुक्रमणिका नहीं है और न ही जो कुछ अगर हो भी तो उसका अनुपालन ही किया जा रहा है. विभाग से की गयी बातचीत में यह भरोसा दिलाया गया कि बहुत जल्द ही आवारा पशुओं खास कर सूअरों की धरा-पकड़ी शुरू होगी और उन्हें दूर किसी अज्ञात स्थान पर रिहायशी इलाके से दूर छोड़ दिया जायगा अथवा अन्य किसी ऐसे पालक के सुपुर्द कर दिया जायगा जो उक्त पशु के पालन की समुचित व्यवस्था और तरीके का अनुपालन करते हों. आशा है कि विभाग जल्द ही कोई कार्रवाई करेगा और इनके आतंक से शहर वासियों को मुक्त कर पायेगा.

भा.ज.यु.मो. फुसरो द्वारा कार्तिक एस. (एसपी बोकारो) का स्वागत

भारतीय जनता युवा मोर्चा फुसरो द्वारा बोकारो जिला के नए पदस्थापित पुलिस आरक्षी अधीक्षक श्री कार्तिक एस जी का बेरमो थाना में पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया. स्वागतकर्ताओं में मुख्य रूप से भारतीय जनता युवा मोर्चा फुसरो नगर अध्यक्ष बैभव चौरसिया, महामंत्री सुमित सिंह, कोषाध्यक्ष रोहित मित्तल, मिडिया प्रभारी सूरज विश्वकर्मा, बैजू मालाकार, अमित सिन्हा, नीरज सिंह, सियाराम, सतीश श्रीवास्तव आदि सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे.

इस भेंट में सबने अपना-अपना परिचय साझा किया और जनता और पुलिस के साथ मधुर संबधों पर भी चर्चा हुई, बताया गया कि जहाँ एक ओर पुलिस की मुस्तैदी और सक्रियता हर जगह – हर समय आवश्यक है वहीं दूसरी ओर जनता में भी सहयोग की भावना का होना अति आवश्यक है. सामाजिक सुरक्षा रुपी सिक्के के जनता और पुलिस दो अलग-अलग पहलू हैं, किसी एक में भी खोट उसे चलने नहीं देगी.

आज के दौर में संज्ञान लेना सिर्फ पुलिस का ही कर्तव्य नहीं, जनता भी अपने आस-पास की अनियमितताओं की ओर पुलिस का ध्यानाकर्षण करा सकती है. शिकायत और केस के निपटारे में जन-सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता. वैसे भी अदालतों में लंबित पड़े मामले निपटने में समय की आवश्यकता है जो कम पड़ रही है. ऐसे में जन-सहयोग और आपसी-सुलह एक अच्छा विकल्प बन सकता है जिसमे पुलिस और जनता की सक्रियता अनिवार्य है.

एस.पी. महोदय ने अधिक समय न लेते हुए कहा कि “आज मर्डर मिस्ट्री सुलझाने आया हूँ, फिर आप सभी के सहयोग से पूरे जिले में सुशासन कायम करना है”.

सनद रहे कि बीती रात सी.सी.एल. ढोरी प्रक्षेत्र के कल्याणी कांटा में ड्यूटी के दौरान 15 -20 की संख्यां में पहुंचे अज्ञात अपराधियों ने सी.आई.एस.एफ. हेड कांस्टेबल आर.के. प्रसाद की हत्या कर दी थी.

चोरी की बढती घटना : महिलाओं ने ली सुरक्षा की जिम्मेवारी

चोरी की बढती घटनाओं ने सेंट्रल कॉलोनी, मकोली में रहने वाले लोगों को इन दिनों परेशान कर रखा है. चंद्रपुरा थाना में शिकायतें बढ़ रही हैं पर उस पर सुनवाई के नाम पर अब तक कोई एक्शन नहीं लिया जा सका है.

जहाँ एक ओर चंद्रपुरा थाना क्षेत्र के सेन्ट्रल कॉलोनी में बढ़ी चोरी की घटना से चितिंत यहां की महिलाओं ने रात में जागने का ऐलान किया है. जो स्वयं में इस पुरुष प्रधान समाज के लिए विचार करने योग्य है. वहीं इस प्रकार की घटनाएं पुलिस की विफलता को स्पष्ट बता रही हैं.

इसी सन्दर्भ बीती रात महिलाओं ने एक बैठक रख कर इस बात की जानकारी दी जिनमें ऊषा देवी, संजू देवी,  नामिता देवी, अमीना खातून, गायत्री देवी, सरिता देवी, मंजू देवी, ललिता देवी आदि प्रमुख थीं. उन सभी बैठक में भाग ले रही महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि चोरी की घटनाओं पर रोक सहित अपराधी कि गिरफ्तारी नहीं होने पर वे सड़क पर उतर कर आंदोलन करने को बाध्य होगी.

इन घटनाओं पर रोक का जिम्मा प्रशासन का है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता पर सहयोग की बात करें तो थोड़ी जिम्मेदारी अपनी भी बनती ही है, अपने घरों की सुरक्षा और चौकसी का इन्तेजाम अपने स्वयं का तो होना ही चाहिए, पर इसमें प्रशासन का तड़का जरुरी है, क्योंकि प्रशासन जब तक चौकस नहीं होगा ऐसे चोरों की हिम्मत बढ़ी रहेगी.

सूत्र/छाया : कोयलांचल एक्सप्रेस ग्रुप 

मन दुखी है!

आजकल के बच्चों को यह क्या होता जा रहा है कि पहले तो वो अपने स्कूल की जहाँ कि वो पढ़े हैं कभी या अभी भी पढ़ रहे हैं उनके पूर्व या वर्तमान में जो शिक्षक हैं उनके व्यंगात्मक फोटो व टिप्पणियों को खुलेआम धरल्ले से पोस्ट कर रहे हैं और उस पोस्ट को शेयर, फॉरवर्ड व लाइक किया जा रहा है. बिना इस बात की चिंता किये की इसके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं?

चलिए धोड़ी देर के लिए इसे बच्चों द्वारा मन की खीज निकालने का माध्यम भर मान लेते हैं, पर यह कैसा बेबुनियाद आरोप है? और है तो कार्रवाई का यह कौन सा तरीका है? लोगो से बात की तो सबने सोशल मिडिया की ही बात की और कहा उन्हें यहीं से इसकी जानकारी हुई, और महज सोशल मिडिया पर यह बात फैला भर देने से हम भी किसी को कसूरवार मान ले यह तो कोई सभ्य समाज का लक्षण नहीं जान पड़ता. अब यदि तथाकथित रूप से उनपर यह आरोप लगा भी है तो क्यों नहीं यह मामला उचित कार्रवाई के रूप में सामने आया? इस रूप में क्यों भद्दे-भद्दे पोस्ट बनाकर उसे सोशल मिडिया पर पोस्ट किया जा रहा है?

विद्यालय के परीक्षा विभाग के प्रमुख एवं सेकंड इन कमांड पर लगाया गया तथाकथित आरोप न सिर्फ बेबुनियाद है बल्कि एक सोची समझी रणनीति के अंतर्गत बहुत बड़ी साजिश है. और इस साजिश को अंजाम तक पहुचाने का काम यहाँ के ही बच्चे कर रहे हैं और बड़ों को भी बरगला कर उनके सामाजिक पकड़ का फायदा उठाया रहे है और इस बात में साथ दे रहे हैं उस स्कूल के ही बच्चे जिन्होंने जैसे बीड़ा ही उठा रखा है की कौन दोषी है और उसको वो फेसबुक पर ही सजा दे डालेंगे.

स्पष्ट है कि अब तक आपके मन में यह विचार आ चूका होगा की आखिर क्यों? आखिर क्यों कोई भी इस प्रकार के दोषारोपण का दुस्साहस करेगा, वो भी समाज के किसी सम्मानित व्यक्ति के विरुद्ध. आपकी सोच को सलाम करते हुए यह बहुत ही स्पष्टता के साथ बताना चाहता हूँ की शिक्षक, जिनपर यह झूठा आरोप लगाया जा रहा है वे विगत २० से भी अधिक वर्षों से विद्यालय में कार्यरत हैं और अब कुछ गिने चुने वर्ष बचे हैं उनके कार्यकाल पूरे होने को, ऐसे में कोई शिक्षक इस तरह की हरकत करना तो दूर, सोच भी कैसे सकता है, विचारणीय है.

मेरे कार्यकाल में मैंने उन्हें कभी भी अभद्र भाषा तक का प्रयोग करते न तो देखा न सुना. यहाँ मेरे से तात्पर्य केवल मेरे नहीं बल्कि तत्संबधी जिन जिन लोगो से मैंने बात की उन्होंने इसे सोची समझी साजिश का ही नाम दिया और कहा की कई बार विद्यालय के लगभग पुराने शिक्षको में शुमार उनके नाम और समाज में लोगो से पहचान जान के कारण प्रायः लोग नामांकन के लिए उनसे संपर्क करने आ जाया करते थे.

यहाँ एक बात और स्पष्ट कर दूं की ऐसे लोगों में मैं स्वयम भी शामिल रहा, पर शिक्षक के सुझाये रास्ते अर्थात सामान्य प्रक्रिया का अनुसरण कर ही मैं चला और कई विद्यार्थियों के नामांकन करवाए भी जबकि बहुतों का नही भी हो सका. नामांकन के सिलसिले में उनसे तथाकथित व्यक्तियों द्वारा ऑफर्स भी दिए गए जिन्हें शिक्षक ने विनम्रता से अस्वीकार कर दिया था, परन्तु बहुत कहने पर भी जब उन्होंने प्रक्रिया से आने की सलाह दी तो उक्त लोगों द्वारा उन्हें धमकी भी दी गयी, पर शिक्षक ने उन्हें नजरंदाज कर दिया, क्योंकि यह उनके लिए दिनचर्या की बात थी, और अब ऐसे ही लोगों द्वारा अपनी दी गयी धमकी को सार्थक सिद्ध करने के लिए समाज के ही कमजोर/अबोध कड़ियों को कन्धा बनाकर शिक्षक के सम्मान की अर्थी उठाई जा रही है, और अब भी हम चुप बैठे तो वह दिन दूर नहीं जब आये दिन ऐसी शिकायतों को बतौर हथियार की तरह उपयोग में लाना आम बात हो जायगी. और शिक्षक जैसे सम्मानित और मर्यादित लोगों का समाज में जीना दूभर हो जायगा.

आग्रह है की ऐसे बच्चों के अभिभावाक जागें और देखें की उनके बच्चे जिन्हें वे प्रायः घर के अन्दर ही पाकर समझ लेते हैं की उनकी संगती अच्छी है, भ्रम में जी रहे हैं, सनद रहे की सोशल मिडिया के दुष्परिणाम से सम्बंधित अभी तक हजारो ऐसे मामले देखने को मिलते रहे हैं.

 मेरी समाज के सभी बुद्धिजीवियों से अपील है की वे आगे आयें और चाहे वह विद्यालय प्रशासन हो अथवा नागरिक प्रशासन उन पर यह दवाब बनायें की ऐसे अभद्र टिप्पणियों को सार्वजनिक कर किसी के मर्यादा को ठेस पहुचाने का काम कर रहे समाज के उन शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे जिससे की आगे से कोई भी इस तरह की गैरजिम्मेदाराना हरकत करने से पहले सौ बार नहीं हजार बार सोचे.