कैंडल मार्च – सामाजिक संवेदना एवं शांतिपूर्ण विरोध का पर्याय

आज मंदसौर में दिव्या के साथ हुई दुर्घटना और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और दिव्या के जल्दी स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना के साथ फुसरो बाजार में बरनवाल महिला समिति के द्वारा शांति पूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया जो ब्लाक परिसर स्थित बजरंगबली मंदिर से शुरू होकर भूत बंगला बजरंगबली मंदिर तक गया और वहां से वापस बाजार का भ्रमण करते हुए बजरंगबली मंदिर, बेरमो थाना में आकर समाप्त हुआ। जिसमें दो सौ से ऊपर महिलाओं की सहभागिता हुई। और यह एक अत्यंत सफल कार्यक्रम हुआ। और इसमें हमारे वार्ड पार्षद श्री नीरज पाठक जी भी साथ में थे और व्यवसाई संघ के सचिव प्रत्याशी ओमप्रकाशजी उर्फ राजा साथ चल रहे थे।

बेटियों के समर्थन में और उनके शोषण के विरुध्द शांति पूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन तथा जमकर नारेबाजी की गई, बेटी बचाओ, देश बचाओ, मंदसौर के अपराधियों को फांसी दो, फांसी दो. इस कैंडल मार्च में लड़कियों एवं महिलाओं ने भरी संख्या में भाग लिया. मौके पर कई सम्मानित महिलाओं एवं बच्चियों ने अपने-अपने विचार प्रकट किये, प्रियंका ने कहा – “हमें हर हाल में ऐसी बातों का सामना करना होगा और अपनी आवाज को समाज में उठाना होगा”

हमें प्रशासन के द्वारा भी पूरा सहयोग मिला। बेरमो थाना से एक पीसीआर वैन और सारे लोग हमारे साथ चल रहे थे। इस कार्यक्रम से समाज की सभी क्षेत्र के लोगों ने इस संदेश को जाना और इस घटना से वाकिफ़ हुए। मैं महिला समिति की सदस्यों का विशेषकर बरनवाल महिला समिति की नेत्री त्रय : श्रीमती मंजुरानी बरनवाल, श्रीमती अर्चना बरनवाल और श्रीमती पुष्प बरनवाल (सभी बरनवाल महिला समिति, फुसरो) और विशेष सहयोगी के रूप में बरनवाल समाज फुसरो के चमकते सितारे श्री विनय कुमार बरनवाल जी एवं श्री प्रदीप भारती जी को विशेष आभार व्यक्त करता हूँ। साथ ही बरनवाल युवक संघ, फुसरो की स्थानीय इकाई के सदस्यों को भी, जिन्होंने इस सफल कार्यक्रम का आयोजन किया बहुत-बहुत बधाई देता हूं। धन्यवाद देता हूं। – नीरज बरनवाल, आम्रपाली स्टूडियो, मेन रोड फुसरो.

जिस प्रकार मोमबत्ती जलती जाती है, पिघलती जाती है और अपना प्रकाश पुंज बिखेरती जाती है, मानो एक प्रतीक हो अँधेरे से लड़ने के हौसले का, जैसा अँधेरा हमारे समाज के बीच रह रहे विकृत मानसिकता वालों के मन में भरा है जो आये दिन हमें ऐसी घटनाओं के समाचारों से दो चार होना पड़ता है, उस अँधेरे को दूर करने के लिए हमारी संवेदनाये मोमबत्ती के सामान जलती हैं. हम समाज के सामने आगे आकर अपना विरोध प्रदर्शित करते हैं, कम से कम इससे तो नहीं चूकते, यह अच्छी बात है.

हम उन हर बातों को जिन्हें हम अपनी व्यस्तता के कारण नजरअंदाज कर जाते हैं उसपर भी कभी वैचारिक मंथन के लिए ऐसे ही सामाजिक समितियों को आगे आना होगा और खास कर युवा वर्ग को जो क्या सोचते हैं आज के सामाजिक परिवेश में क्या बदलाव लाना चाहते हैं. उन्हें सोशल मीडिया पर बिताये गए समय और उर्जा का सही प्रयोग करना होगा. सामाजिक गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना होगा, तभी समाज को सही दिशा दिया जा सकेगा. हम क्यों नहीं खुली चर्चा में भाग लें? हम क्यों नहीं ऐसे बैठक और सभाओं का आयोजन करें जिससे कि सभी अपनी बातों को रख सकें और समाज और देश हित की बात कर एक निर्णायक भूमिका निभाएं.

भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए किस अवसर की तलाश है आपको?

छाया : बेरमो आवाज

मकोली स्थित उत्क्रमित विद्यालय के पास बी.आर.सी. भवन से रविवार की सुबह एंटी करप्शन ब्यूरो की धनबाद टीम ने बेरमो प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी महेन्द्र सिंह (फाइल फोटो) को 40 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर अपने साथ धनबाद ले गई। एसीबी की टीम ने यह कार्रवाई मनबहादुर थापा नामक एक ठेकेदार के शिकायत पर की है। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार बिल पास करने के एवज में बीईईओ सिंह ने ठेकेदार थापा से डेढ़ लाख रुपए की मांग की थी। पर थापा ने 40 हजार फ़िलहाल देने की बात कही और जिसकी शिकायत थापा ने एसीबी धनबाद की टीम से किया। जिसके बाद एसीबी की टीम रविवार की सुबह मकोली पहुंची, इधर पूर्व निर्धारित समय पर रकम लेकर ठेकेदार थापा भी पहुंचे और जैसे ही  मकोली स्थित बीआरसी भवन में उक्त राशि  बीईईओ महेन्द्र सिंह को दिया, वहीं सादे लिबास में पहले से बैठे एसीबी की टीम ने धर दबोचा। गिरफ्तार महेन्द्र सिंह बेरमो (वन) के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हैं तथा इसके पहले नावाडीह में पदस्थापित थे.

कहा जाता है कि दान जितना गुप्त होता है दानी को उतना ही पुण्य प्राप्त होता है और दान जो दिखावे के साथ होता है वह आडम्बर होता है. अब तर्क यह है कि गुप्त दान करने वाले यदि फल की इच्छा और पुण्य मात्र की प्राप्ति से उत्साहित हो कर दान करते हैं तो वह भी लालसा की श्रेणी में आ जाता है और निष्फल हो जाता है. सार यह है कि दान भी एक कर्म है जिस प्रकार आप अन्य कर्मो का साधन करते हैं. यह एक प्रक्रिया है जो आपके सामाजिक उत्तरदायित्व को एक स्थान प्रदान करती है समाज में.

कर्म को प्रधानता उसके नैतिक व आदर्श मूल्य के स्तर पर दिया  जाना चाहिए और इच्छा से व्युत्पन्न अवसाद से स्वयं को दूर रखना चाहिए. इच्छा का होना महत्वपूर्ण न होकर कैसी इच्छा है यह अधिक विचारनीय होना चाहिए. इच्छा कर्म को प्रेरित करती है, सत्कर्म आपके व्यक्तित्व का निर्माण करती है. अवसर आपकी निष्ठा की परीक्षा लेती है, यह नहीं कि अवसर मिला तो आप ईमानदारी का बिगुल बजा रहे और अवसर मिला तो अपना उल्लू भी सीधा करने से नहीं चूके.

यूँ तो अवसर की तलाश सबों को होती है, परन्तु यह कि अवसर प्राप्त होने पर उसको उपयुक्तता के साथ प्रयुक्त भी कर सकें, क्षमता किन्ही विशिष्ट आत्माओं में ही होती है. अवसर का होना किसी विशेष कर्म के निष्पादन के लिए उपयुक्त है अथवा नहीं यह पूर्ण रूप से उसके एकाधिक लाभुकों के संख्या बल से निर्धारित होना चाहिए न कि अपनी क्षमता का अनुचित लाभ लेकर स्वहित साधन कर अनैतिक रूप से प्रयुक्त किया जाये.

आप अफसर थे, आपके स्वयं को सौंपे गए कार्य के प्रति उत्तदायी बना कर पदस्थापित किया गया. उसके बदले में सरकार वह हर लाभ दे रही है जिसके आप पदानुकुल अधिकारी थे. आपने गलत को सही करने के लिए पैसे लेने शुरू किये तो सही लोगों को लगा आप गलत कर रहे हैं. जब आपने सही लोगों को भी पैसे देने के लिए विवश किया तो एक बार फिर उनको लगा कि आप गलत कर रहे हैं. जब कभी शायद आपको विवश किया गया हो गलत करने के लिए तो आप नहीं रुके और न ही रोका अपितु आप अवसर का लाभ प्राप्त करते चले गए. अब ऐसे में यह दिन देखने के लिए तैयार होंगे आप शायद, परन्तु इस घटना से एक बात तो स्पष्ट है कि लोग अब विरोध तो करेंगे.

इन सब बातों से एक और बात निकलती है कि क्या कभी आपने उनकी बातों का मान न रखा हो, और उन्होंने कसम उठा ली हो कि आपको सही जगह पहुंचा देंगे. या फिर वास्तव में वे आपसे और आपके रवैये से त्रस्त हो गए होंगे और आप अपने ही कर्म के जाल में फंस गए. जो भी हो इतना तो पक्का है कि उच्चाधिकारियों ने आपको पकड़ा है, वैसे लोगों ने जिन्होंने शपथ ली है ऐसे ही कर्मो को रोकने की तो आप अपनी शपथ क्यों भूल गए थे, जो आपके संस्थान ने आपको दिलाई हुई थी.

गम न करें – १७

बे-मौके सब शरीफ

मतलब यह नहीं कि यह सीधे तौर पर आपके बारे में हैं. मतलब यह है कि यह उन सभी के बारे में है जो मौके पर शरीफ बनने का ढोंग रचते हैं और समय आने पर दूसरों को आगे कर खुद उनका समर्थन अथवा उनके साथ अथवा उनके पीछे चलने को तुरंत तैयार हो जाते हैं. इसलिए बे-मौके सब शरीफ से हमारा तात्पर्य यह है कि मौका आने पर अपनी शराफत दिखाने से कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता, पर यह कि सिर्फ ख़बरों में आने के लिए या कि सिर्फ दिखावे के लिए.

आप कथनी और करनी में जितना कम अंतर रख पाते हैं उतने ही आप चरित्रवान होते हैं, यह नहीं कि आप चरित्रवान तो हों पर अवसर आने पर आप खिसक लें. यहाँ मेरा यह सब लिखना आप में से बहुतों को खल रहा होगा पर क्या करें तारीफ बनती भी होगी तो आप इसे मेरा दंभ न समझ ले इसलिए यह साफ करना जरुरी है कि मै इस लेख के माध्यम से आप सब को कुंठित नहीं करना चाहता हूँ. मेरा उद्देश्य बस इतना है कि हम अपने चरित्र के स्तर को उस ऊँचाई तक ले जा सकें जहाँ हम सचमुच ही अपने कथनी और करनी अंतर नहीं कर सकें अर्थात जैसा भी हम सोचें अथवा कहें उसपर चल भी सकें.

थोड़ी देर के लिए यह लेख आपको गप्पबाजी लग सकती है पर आप जरा ध्यान देकर इन बातों को सोचेंगे तो यही पाएंगे कि हम में से कितने ही अवसर आने पर किसी जन-कल्याणकारी कार्यों के लिए समय निकल पाते हैं? अधिकतर का उत्तर यही होगा कि अपने काम से फुर्सत मिले तभी ना. सही भी है, पर यह तभी संभव हो पाता है जब आप समय निकालना चाहें. क्या आप अपने परिवार के लिए समय नहीं निकाल पाते, क्या आप अपने किसी निजी कार्य के लिए समय नहीं निकाल पाते यदि आपका उत्तर हाँ है तो समस्या यह है कि समय आपको निकालना होता है इससे पहले कि समय आपको निकाल दे.

महत्वपूर्ण यह नहीं कि आप किन बातों अथवा कार्यों के लिए समय निकाल पाते हैं अपितु यह कि आप किन बातों अथवा कार्यों के लिए स्वयं को अनुकूल पाते हैं. यदि नहीं तो फिर आप चाहें कि उक्त कार्यों के लिए भी आप समय निकालें. क्योंकि यह आपके ही हाथों में होता है पूर्णरुपेण. आप टालमटोल के शिकार महसूस होते हैं यदि आप चाह कर भी समय प्रबंधन नहीं कर पाते और इसका ठीकरा दूसरों के सर फोड़ने को उद्दत रहते हैं.

आईये इस उधेड़बुन से निकालें जीवन बहुत खुबसूरत है, इसका आनंद लीजिये, नहीं समझ आ रहा हो तो किसी मनोवैज्ञानिक से जरुर मिलें, आप पागल नहीं हैं पर इस स्थिति में अधिक देर रहना आपको जल्द ही उस श्रेणी में ला खड़ा कर सकता है, इसलिए कि कही और अधिक देर न हो जाये, अपने आपको, अपने लिए कुछ ऐसा करें जिससे आपके मन, आत्मा और चित्त को प्रसन्नता होती हो, साथ ही दूसरों की प्रसन्नता का कारण हो ऐसे कृत्यों में स्वयं को उलझाएँ.

इसलिए गम न करें खुश रहें.

25 फरवरी को होगा आजसू फुसरो नगर कार्यकर्ता सम्मेलन

आजसू पार्टी फुसरो नगर व बेरमो प्रखंड समिति की बैठक फुसरो स्थित प्रधान कार्यालय में हुई जिसकी अध्यक्षता नगर अध्यक्ष विनोद बाउरी ने तथा संचालन प्रखंड सचिव सुरेश महतो ने किया। बैठक में सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया की आगामी 25 फरवरी 2018 को आजसू पार्टी फुसरो नगर व बेरमो प्रखंड के कार्यकर्ता मिलान समारोह सह मिलन कार्यक्रम फुसरो में किया जाएगा।
केंद्रीय मुख्यालय सचिव कमलेश महतो ने कहा कि संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता है, और आजसू पार्टी हमेशा जनता की समस्याओ को लेकर आंदोलन करते आ रही है, और आगे भी करेगी। भविष्य में आंदोलन को और धारदार बनाने हेतु फुसरो नगर के सभी वार्डो में बैठक कर संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे कहा कि आजसू पार्टी का जनाधार पूरे झारखंड में बढ़ रहा है। यहां युवाओ और महिलाआ को पार्टी में जोड़ने पर बल दिया गया। इस अवसर पर महेंद्र चैधरी, मंजूर अंसारी, बिनोद महतो, प्रमोद कुमार, मनोज पांडेय, संतोष महतो , अनिल झा, बीरू हाड़ी, आदि उपस्थित थे।
 छाया / सूत्र : बेरमो आवाज

राष्ट्र भक्ति और हम

शीर्षक के माध्यम से अपनी बात कहने की आजादी चाहता हूँ। राष्ट्र और राष्ट्र भक्ति को हम में से हर एक के जीवन में प्रथम स्थान प्राप्त है, इसमें कोई संदेह नहीं है। पर इसे प्रर्दशित करने के अपने-अपने तरीके हैं। जिस तरह एक सैनिक सीमा पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपनी राष्ट्र भक्ति प्रर्दशित करता है ठीक उसी तरह एक कवि अपनी कविताओं के माध्यम से, लेखक अपने लेखों के माध्यम से, कलाकार, साहित्यकार व इन जैसे ही सभी अपनी-अपनी विधाओं के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपनी सच्ची कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

इनमें से किसी के बारे यह आकलन किया जाना कि कौन अपने देश के लिए ज्यादा वफादार अथवा समर्पित है, कौन नहीं, सर्वथा अनुचित है। कौन राष्ट्र भक्ति की दौड़ का स्वर्ण पदक विजेता है, इसके निर्णय की कौन से सर्वमान्य सिद्धांत है, पता नहीं। हमारे देश की भी अजीब विडंबना है। बहुत कम ही ऐसे मौके आते हैं जब एक सही विषय के पक्ष में अथवा सही विषय के लिए लोग आंदोलन करते हैं। समय समय पर कुछ स्व्यंभू कबिलाई किस्म के नेता उभरते हैं और हमारी सोच और विचार की सांझी विरासत के साथ जम कर खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं। इनके आयोजित तमाशे में कुछ भीड़ भी होती है जो इनके अनुसार समर्थक होते हैं। इन्हीं तथाकथित समर्थकों की भीड़ इनके आयोजन की सफलता अथवा असफलता की कहानी बयां करती है।

यह बात जब मैंने अपने एक मुसलमान दोस्त से पूछी तो उसने बेबाकी से अपनी बात कही। उसने कहा कि बंटवारे के समय जब हम में से हर एक के पास यह विकल्प मौजूद था कि हम कहां जाएं, हमने इसी माटी में दफ़न होने का विकल्प चुना। वह भी इसलिए कि हमें अपने भाईयों पर जो हिन्दू थे, खुद से ज्यादा भरोसा था। मुझे उसके कथन में सच्चाई की झलक दिखाई दी। लोग चाहे जितना जोर लगा दें, चंद फिरकापरस्त लोगों की नापाक कोशिश हमारे विश्वास की डोर टूटने नहीं देगी।

पत्रकार संगठन को मजबूती देने का प्रयास तेज, 3 फरवरी से सदस्यता अभियान शुरू

दिनांक 31-01-2018 को करगली स्थित अतिथिगृह में दी प्रेस क्लब बोकारो के प्रतिनिधियो के संग बेरमों क्षेत्र के विभिन्न अखबार व चैनल से जुडे प्रमुख प्रतिनिधियो की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार राकेश वर्मा ने की। यहां संगठन के निर्वाचन समिति के प्रमुख रामप्रवेश सिंह, शंभू पाठक और विल्सन फ्रांसिस ने उपस्थित पत्रकारो को जानकारी देते हुए बताया कि जिला में कलमकारों का एक सशक्त संगठन बने। इसको लेकर एक कारगर पहल अनुभवी और युवा वर्ग के प्रेस प्रतिनिधियो द्वारा किया जा रहा है। संगठन का बेरमो क्षेत्र के सदस्यता अभियान को लेकर विजय कुमार सिंह और मनोज शर्मा को सर्वसम्मति से प्रभारी नियुक्त किया गया है।

इस अवसर पर पत्रकार ज्ञानेंदू जयपुरियार ने कहा कि बेरमो कोयलांचल के पत्रकार साथियो का सदैव जिला के गठित किये जाने वाले विभिन्न प्रकार की पत्रकार समितियो में अहम भागीदारी रही है। दी प्रेस क्लब बोकारो की नवगठित किये गये समिति के सदस्यो का अनुरोध है कि पूर्व की तरह इसमें सकरात्मक भागीदारी हो। पत्रकार संजीव कुमार ने बोकारो में सभी कलमकारो को एक मंच में लाये जाने वाले प्रयासो से उपस्थित सदस्यो को अवगत कराया।

पत्रकार राकेश वर्मा ने कहा कि बोकारो जिला में पत्रकारो का एक मजबूत संगठन हो। यह सबकी आंतरिक इच्छा है। लेकिन दुखद परिस्थिति है कि सामूहिक रुप से एकता नहीं बन पा रहा है। उन्होने कहा कि 1 फरवरी को अन्य पक्ष के सदस्यो से बातचीत कर एकजुट करने का प्रयास करेगें। यहां सर्व सम्मति से निर्णय हुआ कि अगामी 3 फरवरी को अफसर्स क्लब कारगली में बेरमों अनुमंडल से जुडे पत्रकारो की सामूहिक बैठक कर सदस्यता अभियान की शुरुआत की जायेगी।

साथ ही नवगठित समिति में संपूर्ण क्षेत्र की  भागीदारी कैसे हो, इसके लिए सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया जायेगा। इस अवसर पर बोकारो से बसंत मधुकर, मनोज विशाल, मृत्युंजय कुमार, संजय कुमार, अजय कुमार सिंह, सिद्धार्थ कुमार, विनय कुमार सिंह, अनिल पाठक, रघुबीर प्रसाद, सुभाष ठाकुर, मोहित नंदन सहित कई पत्रकार बन्धु प्रमुख रुप से उपस्थित थे।

सूत्र / छाया : बेरमो आवाज

फुसरो में संत रैदास की जयंति मनायी गयी

फुसरो पुराना बीडीओ आफिस के राजा बंगला स्थित विवाह मंडप में बुधवार को अखिल भारतीय रविदास महासंघ के तत्वधान में गुरू रैदास की जयंति समारोह मनायी गयी। इस दौरान बेरमो प्रखंड मुख्यालय से गाजे बाजे के साथ विशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस में सैकडों महिला-पुरूष व बच्चों ने भाग लिया। समारोह की शुरूआत रैदास के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष गोवर्धन रविदास व संचालन सुधीर राम ने किया । यहां मुख्य अतिथि फुसरो नगर परिषद अध्यक्ष नीलकंठ रविदास ने कहा कि संत रैदास सिर्फ जाति-समाज के नहीं बल्कि मानव जगत के कल्याण की बातें समाज को बतायी। उन्होने अपने समय के ब्राहमणों को तर्क में पराजित कर संत की उपाधी प्राप्त की थी। इनके ज्ञान प्राप्त कर मीरा बाई कृश्ण की परम भक्त हो गयी। वक्ता ने कहा कि संत रैदास व बाबा भीमराव अंबेदकर के विचारों से ही समाज व देश का कल्याण है। मौके पर बालदेव रविदास, गोपाल रविदास, फुलचंद रविदास, हिरालाल रविदास, निर्मल रविदास, सुरज पासवान, राजेश राम, आदि मौजूद थे।

संत गुरु रविदास जी

रैदास नाम से विख्यात संत रविदास का जन्म सन् 1388 (इनका जन्म कुछ विद्वान 1398 में हुआ भी बताते हैं) को बनारस में हुआ था। रैदास कबीर के समकालीन हैं। रैदास की ख्याति से प्रभावित होकर सिकंदर लोदी ने इन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा था। मध्ययुगीन साधकों में रैदास का विशिष्ट स्थान है। कबीर की तरह रैदास भी संत कोटि के प्रमुख कवियों में विशिष्ट स्थान रखते हैं। कबीर ने ‘संतन में रविदास’ कहकर इन्हें मान्यता दी है। मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा जैसे दिखावों में रैदास का बिल्कुल भी विश्वास न था। वह व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं और आपसी भाईचारे को ही सच्चा धर्म मानते थे। रैदास ने अपनी काव्य-रचनाओं में सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्दों का भी मिश्रण है। रैदास को उपमा और रूपक अलंकार विशेष प्रिय रहे हैं। सीधे-सादे पदों में संत कवि ने हृदय के भाव बड़ी स़फाई से प्रकट किए हैं। इनका आत्मनिवेदन, दैन्य भाव और सहज भक्ति पाठक के हृदय को उद्वेलित करते हैं। रैदास के चालीस पद सिखों के पवित्र धर्मग्रंथ ‘गुरुग्रंथ साहब’ में भी सम्मिलित हैं। कहते हैं मीरा के गुरु रैदास ही थे।

 

रैदास के पद :
अब कैसे छूटे राम रट लागी।
प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी, जाकी अँग-अँग बास समानी॥
प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा॥
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती॥
प्रभु जी, तुम मोती, हम धागा जैसे सोनहिं मिलत सोहागा॥

रैदास के दोहे :
जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।

रैदास कनक और कंगन माहि जिमि अंतर कछु नाहिं।
तैसे ही अंतर नहीं हिन्दुअन तुरकन माहि।।

हिंदू तुरक नहीं कछु भेदा सभी मह एक रक्त और मासा।
दोऊ एकऊ दूजा नाहीं, पेख्यो सोइ रैदासा।।

रैदास की साखियाँ :
हरि सा हीरा छाड़ि कै, करै आन की आस ।
ते नर जमपुर जाहिँगे, सत भाषै रैदास ।। १ ।।

अंतरगति रार्चैँ नहीं, बाहर कथैं उदास ।
ते नर जम पुर जाहिँगे, सत भाषै रैदास ।। २ ।।

रैदास कहें जाके ह्रदै, रहै रैन दिन राम ।
सो भगता भगवंत सम, क्रोध न ब्यापै काम ।। ३

कोल इंडिया को करारा जवाब देने की जरूरत है : लखनलाल महतो

श्रम कानून में बदलाव सहित कोयला मजदूरों पर हो रहे हमले के विरोध में मंगलवार को संयुक्त श्रमिक संगठन की तत्वाधन में चार नम्बर जरीडीह मोड़ में एक सत्याग्रह स्वरुप आंदोलन किया गया। श्रमिक संगठन एटक से संबद्ध यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन (यू.सी.डब्लू.यू)  के राष्ट्रीय महामंत्री लखनलाल महतो ने कहा कि जिस तरह तेजी से केंद्र सरकार व कोल इंडिया द्वारा श्रम कानून में बदलाव की जा रही है उससे कोयला मजदूर ठेका मजदूर के सामने आने वाला समय मे बड़ी समस्या उत्पन हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मजदूरों के समस्या पर सभी श्रमिक संगठन को एकजुटता का परिचय देकर सरकार व कोल इंडिया को करारा जवाब देने की जरूरत है, और आवश्यकता पड़ने पर इस आन्दोलन को देशव्यापी आन्दोलन का रूप दिया जायगा ताकि श्रमिकों के हितों की रक्षा की जा सके।

एटक के वरिष्ठ नेता अफताब आलम खान ने कहा कि कोयला श्रमिको पर हो रहे हमले पर संगठन के नेताओ को आगे बढ़कर विरोध करने की आवश्यकता आन पड़ी है। जिसके लिए सभी का एक पटल पर आकर एक जुट होकर इस दिशा में पहल करने की जरुरत है, यदि  ऐसे श्रमिक विरोधी गतिविधियों को समय रहते नहीं रोका गया तो आने वाले समय में कोयला मजदूरों को उनका हक व अधिकार नहीं मिल पायेगा। मौके पर सुजीत घोष, विजय भोई, गणेश महतो, फुसरो नगर परिषद् अध्यक्ष नीलकंठ रविदास, जवाहरलाल यादव आदि मजदूर प्रेमी व्यक्ति उपस्थित थे।

छाया/सूत्र : बेरमो आवाज

बाबा आम्टे नगरवासियों का ऐसे मना गणतंत्र दिवस

फुसरो नगर परिषद उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार ने अपने चिर-परिचित अंदाज में मनाया गणतंत्र दिवस. 26 जनवरी 2018 को झंडोत्तोलन के पश्चात वे अपने सहयोगियों साथ निकल पड़े उस बस्ती की ओर जहाँ सभी विभिन्न मौकों पर गरीबों को दान देने जाया करते हैं. जी हाँ, आपने सही समझा, बाबा आमटे नगर जिसे पूर्व में कुष्ठ बस्ती के नाम से भी जाना जाता था. वहां के निवासियों के बीच अन्न का वितरण करते हुए उन्होंने अपने गणतंत्र दिवस की शुरुआत की और निकल पड़े सुभाष नगर की ओर जहाँ और भी गरीबों को अन्न का दान किया गया.

हमारे सभ्य समाज में अभी भी एक ऐसा तबका है जो इन अवसरों पर प्रायः ही याद कर लिया जाया करता है. कचरे चुन कर और कभी-कभी भिक्षाटन कर जीवन यापन करने वाले ऐसे ही कुछ गरीबों की बस्ती है, जिसे नाम तो दे दिया गया बाबा आमटे नगर, पर उनके दैनिक जीवन के सर्वजनिक उपयोग की सरकारी महकमो से मिलने वाली सुविधाओं का सदा से अभाव ही रहा है. सी.सी.एल. के लगे बोर्ड पर वहां की जनसांख्यिकी को दर्शाने भर से उनका अपने सामाजिक दायित्व को पूरा समझना आखिर कहाँ की दूरदर्शिता है.

कृष्ण कुमार वहां के लोगों से मिले और उनकी समस्याओं से अवगत हुए और भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनके सभी समस्याओं के निवारण के उपाय होंगे. लोगों ने मिलकर सामूहिक रूप से पानी की समस्या से अवगत कराया और कहा कि एक जो पम्पसेट लगा भी है तो उससे पानी पूरा नहीं हो पाता है. वहां पहले से ही गड़े चापाकल पर मोटर लग जाने से पानी की सप्लाई को दुरुस्त किया जा सकता है, इसपर विचार कर जल्द ही इसे मूर्त रूप दिया जायगा जिसके लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे.

बताते चलें की अभी हाल ही में फुसरो नगर परिषद द्वारा ओ.डी.एफ. (Open Defection Free) अर्थात खुले में शौच से मुक्ति की दिशा में पहल हुई है, पर बड़े दुःख के साथ कहना पड़ता है कि इस बस्ती में अभी तक शौचालय नहीं बन पाया है और लोग अभी भी खुले में शौच के लिए विवश हैं. जो शौचालय है भी उसकी दशा बहुत ही दयनीय है. ऐसे में हमारा तंत्र कैसे गणतंत्र मना पाता है, यह एक विचारनीय तथ्य है.

यह बस्ती हमारे सभ्य समाज के मखमल पर टाट का पैबंद नहीं बल्कि हमारे सामाजिक तंत्र पर एक ऐसा जंग लगा पुर्जा है जो कि सदा ही से ऐसा ही रहने के लिए बसाया गया है ताकि हम अपनी संवेदनाओं को ऐसे अवसरों पर सहलाते रहें और खुद को सामाजिक प्राणी कहलाने का दंभ पालते रहें. कहीं न कहीं कसूर उनका भी है जो यहाँ के निवासी हैं जिन्हें ऐसे ही जीवन यापन करने की विवशता अब सामान्य लगने लगी है.

सम्पूर्ण ब्राह्मण समाज एवं कौटिल्य महापरिवार का संयुक्त वनभोज सह मिलन समारोह : २१ जनवरी को

सम्पूर्ण ब्राह्मण समाज एवं कौटिल्य महापरिवार का संयुक्त वनभोज सह मिलन समारोह रविवार दिनांक २१ जनवरी २०१८ को प्रातः १०:३० बजे से अपराहन २.०० बजे तक हिंदुस्तान पुल स्थित हथियापत्थर में होगी | समारोह में मुख्य अतिथि गिरिडीह लोक सभा क्षेत्र के मा० सांसद श्री रवीन्द्र कुमार पाण्डेय जी होंगें | जिसमे कौटिल्य महापरिवार तथा सम्पूर्ण ब्राह्मण समाज के सभी सदस्य मौजूद रहेंगे |

यह जानकारी देते हुए कौटिल्य महापरिवार के संस्थापक अनील चन्द्र झा ने बताया कि विगत माह दिनांक २३ दिसम्बर २०१७ को श्री गिरजाशंकर पाण्डेय एवं श्री छत्रधारी मिश्रा के संयुक्त अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद कौटिल्य महापरिवार प्रमूख रवीन्द्र कुमार मिश्रा एवं सुरेश दूबे के स्वीकृति के पश्चात दोनों संगठन के अध्यक्ष जितेन्द्र दूबे तथा अजय कुमार झा के लिखित स्वीकृति के बाद २१ जनवरी के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए कौटिल्य महापरिवार का २० जनवरी को होनेवाली बैठक तत्काल स्थगित रखा गया है|

इस बात की पुष्टि करते हुए जितेन्द्र दूबे ने कहा कि इसी कारण अब 21 जनवरी का दिन तय किया गया है वनभोज कार्यक्रम के आयोजन के लिए. जिसमे सभी ब्राह्मण समुदाय के लोगों से आग्रह है कि इसमें सम्मिलित होकर अपनी संगठनात्मक एकता का परिचय देते हुए इसे सफल बनायें तथा एक नयी शुरुआत की ओर बढ़ने में सहभागी बने.