आज का विचार मंथन : रविन्द्र कुमार “रवि”

मित्रों!इस लेख से पहले, मै यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ, कि मैं किसी की भी भावनाओं को ग्रसित कर, उसे आहत करने का उद्देश्य नही रखता । मै सिर्फ एक साहित्यकार के धर्म का निर्वहन करने का लघु-प्रयास कर रहा हूँ । अपने इस लेख के माध्यम से आज के डरे, सहमे, भीरू महापुरुषों को आइना दिखाने की कोशिश मात्र है ।

विगत कुछ दिनों से ये ड्रामा ज़ोर शोर से चल रहा है, धर्म-निरपेक्षता व धर्मांधता का —सुपर हिट, थ्री डी ड्रामा, जिसे देखने के लिए, एक ख़ास प्रकार के राजनैतिक चश्मे की आवश्यकता पड़ती है । मुम्बई-प्रवास के दौरान, जब मै संघर्ष के दौर से गुजर रहा था,मेरे मुस्लिम-मित्र, जो मेरे शुभ चिंतक थें, वहाँ के कुछ खास इलाकों मे ले जाने से बचते थें और सतर्क भी करते रहते थें । थोड़ा होशियार रहना भाई!यह मिनी पाकिस्तान है,यहाँ बहुत खतरा है,यहाँ कट्टर-पंथियो का झुंड है,कोई पुछे तो,मुस्लिम नाम बताना ।
बेचारे मित्र थें, मेरी सुरक्षा की चिंता स्वाभाविक थी ।

कलकत्ता-प्रवास के दौरान भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही । अब समझ मे नही आता ,जब तथाकथित इन मिनी पाकिस्तान वालों का इतना ही ख़ौफ़ था ,तो तब किसी हिन्दू ने अपने डर का इतने ज़ोर शोर से प्रचार, प्रसार क्यों नहीं किया, ना किसी ने टी0वी0 पर बैठ कर डिबेट की,ना किसी तथाकथित बुद्धिजीवी ने अवार्ड लौटाया और ना ही किसी राज नेता को कोई दर्द हुआ । कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा पर भी किसी को कभी तरस नही आयी । देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों में ऐसे अनेक घटनाएं होती रही हैं, जहाँ अपने हीं देश मे डर के साए मे लोग जीते आ रहे थें । तब किसी मीडिया, राजनेता, या इन प्रबुद्ध जनों की तंद्रा भंग नही हुई । है ना कमाल की बात?

मित्रों! हर तबके मे कुछ प्रबुद्ध वर्ग हैं, बस! उन्हें पहचाने और राष्ट्र तथा समाज के हित मे अपनी सोच को समृद्ध करते हुए, इन राजनैतिक, देश, समाज द्रोही षड्यंत्रकारियों के सता-लोलुप्तता के फन को कुचल कर इस राष्ट्र को सुरक्षित रखने मे अपना बहुमूल्य योगदान दें,क्योंकि यह देश हम सब का है ।

जय हिंद ।

गिरिडीह सांसद पर लगे आरोप की निंदा करता हूँ : अनिल झा (संस्थापक कौटिल्य महापरिवार)

कौटिल्य महापरिवार के संस्थापक श्री अनिल झा जो कस्तूरबा श्री विद्या निकेतन में कार्यालय अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं उन्होंने गिरिडीह सांसद श्री रवीन्द्र कुमार पाण्डेय पर बाघमारा विधायक ढुलु महतो द्वारा लगाये गए आरोप की कड़े शब्दों में निंदा की है और आरोप को सरासर बेबुनियाद बताया | अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए अनिल झा ने कहा कि माननीय गिरिडीह सांसद का लगभग २५ वर्षो के राजनितिक जीवन-काल में कभी भी सांसद के चरित्र पर दाग नहीं लगा है |

फुसरो सिटी ई-पत्रिका को दिए गए अपने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू श्री झा ने बताया कि समस्त गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में माननीय सांसद की एक पारिवारिक पहचान है | इनको पूरे झारखण्ड में विकास पुरुष के नाम से जाना जाता है |

जातिगत एवं भेदभाव की राजनीति से दूर माननीय सांसद पूरे संसदीय क्षेत्र के लोगो के ह्रदय सम्राट हैं यह इनकी इसी छवि को धूमिल करने का प्रयास मात्र है | कुछ लोग राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से उनपर गलत आरोप लगा रहे हैं |

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि “मैं कौटिल्य महापरिवार,बेरमो की और से और निजी तौर पर इसकी भर्त्सना करता हूँ |”

टेलकॉम उपभोक्ता मामले से सम्बंधित शिकायतों के लिए मुझसे संपर्क करें : डॉ.एस.के.भारती

दिनांक 21 नवम्बर 2018 को Trai Govt of India द्वारा आयोजित उपभोक्ता जागरूकता COP जो होटल हंस रिजेंसी बोकारो मे उपायुक श्री बर्णवाल बोकारो की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ, जिसमें डॉ.श्याम कुवर भारती ने भी CAG मेम्बर झारखंड जोन TRAI (JHARKHAND) के रूप में भाग लिया और अपने सुझाव दिये।

इस अवसर पर झारखण्ड बिहार के सभी मोबाइल TSP टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स, उपभोकाओ और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियो और TRAI के अधिकारियो ने भाग लिया ।

कार्यशाला में उपभोकाओ को टेलिकॉम से सम्बंधित सुविधाओ और सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई। गैर सरकारी संगठन प्रतिनिधि के रूप में विजय कुमार, गौतम सागर, आरती जायसवाल, सुमन कुमारी और वासुदेव शर्मा आदि ने भी भाग लिया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के उपरांत फुसरो सिटी ई पत्रिका को अपने दिए गए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में डॉ. एस.के. भारती ने बताया कि झारखंड के मोबाइल उपभोक्ता किसी भी तरह की समस्या के लिये CAG Member होने के नाते मुझसे सम्पर्क कर सकते है।

कैंडल मार्च – सामाजिक संवेदना एवं शांतिपूर्ण विरोध का पर्याय

आज मंदसौर में दिव्या के साथ हुई दुर्घटना और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और दिव्या के जल्दी स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना के साथ फुसरो बाजार में बरनवाल महिला समिति के द्वारा शांति पूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया जो ब्लाक परिसर स्थित बजरंगबली मंदिर से शुरू होकर भूत बंगला बजरंगबली मंदिर तक गया और वहां से वापस बाजार का भ्रमण करते हुए बजरंगबली मंदिर, बेरमो थाना में आकर समाप्त हुआ। जिसमें दो सौ से ऊपर महिलाओं की सहभागिता हुई। और यह एक अत्यंत सफल कार्यक्रम हुआ। और इसमें हमारे वार्ड पार्षद श्री नीरज पाठक जी भी साथ में थे और व्यवसाई संघ के सचिव प्रत्याशी ओमप्रकाशजी उर्फ राजा साथ चल रहे थे।

बेटियों के समर्थन में और उनके शोषण के विरुध्द शांति पूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन तथा जमकर नारेबाजी की गई, बेटी बचाओ, देश बचाओ, मंदसौर के अपराधियों को फांसी दो, फांसी दो. इस कैंडल मार्च में लड़कियों एवं महिलाओं ने भरी संख्या में भाग लिया. मौके पर कई सम्मानित महिलाओं एवं बच्चियों ने अपने-अपने विचार प्रकट किये, प्रियंका ने कहा – “हमें हर हाल में ऐसी बातों का सामना करना होगा और अपनी आवाज को समाज में उठाना होगा”

हमें प्रशासन के द्वारा भी पूरा सहयोग मिला। बेरमो थाना से एक पीसीआर वैन और सारे लोग हमारे साथ चल रहे थे। इस कार्यक्रम से समाज की सभी क्षेत्र के लोगों ने इस संदेश को जाना और इस घटना से वाकिफ़ हुए। मैं महिला समिति की सदस्यों का विशेषकर बरनवाल महिला समिति की नेत्री त्रय : श्रीमती मंजुरानी बरनवाल, श्रीमती अर्चना बरनवाल और श्रीमती पुष्प बरनवाल (सभी बरनवाल महिला समिति, फुसरो) और विशेष सहयोगी के रूप में बरनवाल समाज फुसरो के चमकते सितारे श्री विनय कुमार बरनवाल जी एवं श्री प्रदीप भारती जी को विशेष आभार व्यक्त करता हूँ। साथ ही बरनवाल युवक संघ, फुसरो की स्थानीय इकाई के सदस्यों को भी, जिन्होंने इस सफल कार्यक्रम का आयोजन किया बहुत-बहुत बधाई देता हूं। धन्यवाद देता हूं। – नीरज बरनवाल, आम्रपाली स्टूडियो, मेन रोड फुसरो.

जिस प्रकार मोमबत्ती जलती जाती है, पिघलती जाती है और अपना प्रकाश पुंज बिखेरती जाती है, मानो एक प्रतीक हो अँधेरे से लड़ने के हौसले का, जैसा अँधेरा हमारे समाज के बीच रह रहे विकृत मानसिकता वालों के मन में भरा है जो आये दिन हमें ऐसी घटनाओं के समाचारों से दो चार होना पड़ता है, उस अँधेरे को दूर करने के लिए हमारी संवेदनाये मोमबत्ती के सामान जलती हैं. हम समाज के सामने आगे आकर अपना विरोध प्रदर्शित करते हैं, कम से कम इससे तो नहीं चूकते, यह अच्छी बात है.

हम उन हर बातों को जिन्हें हम अपनी व्यस्तता के कारण नजरअंदाज कर जाते हैं उसपर भी कभी वैचारिक मंथन के लिए ऐसे ही सामाजिक समितियों को आगे आना होगा और खास कर युवा वर्ग को जो क्या सोचते हैं आज के सामाजिक परिवेश में क्या बदलाव लाना चाहते हैं. उन्हें सोशल मीडिया पर बिताये गए समय और उर्जा का सही प्रयोग करना होगा. सामाजिक गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना होगा, तभी समाज को सही दिशा दिया जा सकेगा. हम क्यों नहीं खुली चर्चा में भाग लें? हम क्यों नहीं ऐसे बैठक और सभाओं का आयोजन करें जिससे कि सभी अपनी बातों को रख सकें और समाज और देश हित की बात कर एक निर्णायक भूमिका निभाएं.

निःशुल्क साइंस एवं मैथ क्लासेज के बच्चों ने जैक बोर्ड में लहराया परचम

अर्चना सिंह द्वारा चलाए जा रहे निशुल्क साइंस मैथ क्लासेज मैं दसवीं के जैक बोर्ड के बच्चों ने अपना परचम लहराया निशुल्क शिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में सबसे बड़ा योगदान श्री उपेंद्र पांडे जी का रहा जिन्होंने आज के इस व्यवसायीकरण के दौर में निशुल्क शिक्षा देकर समाज के गरीब तबके के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा काम किया है इस संबंध में श्री उपेंद्र पांडे जी का कहना है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती बशर्ते उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन मिले.

math science class मे मुख्य रूप से सोनू कुमार ने क्रमशः मैथ में 95% साइंस में 73 प्रतिशत अमित ने मैथ में 88 प्रतिशत साइंस में 59 प्रतिशत आरती ने मैथ में 55% साइंस में 59 प्रतिशत नंबर लाया यह सभी विद्यार्थी बहुत कमजोर तबके से आते हैं.

उनके अभिभावकों ने श्री उपेंद्र पांडे जी के प्रति अपना आभार जताया इस कार्यक्रम को चलाने में अब तक श्री योगेश तिवारी श्री अरुणेश और श्री सुजीत ठाकुर का बहुत सराहनीय योगदान रहा इन सभी ने विशेष रूप से श्री उपेंद्र पांडे जी को धन्यवाद दिया और कहा कि यह कार्यक्रम आगे भी इसी तरह जारी रहना चाहिए

विष्णुगढ़ में हुआ कवि सम्मेलन : राकेश नाजुक हुए सम्मानित

उत्सव : मांडू विधायक जयप्रकाश भाई पटेल जी का जन्मदिन का अवसर
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विष्णुगढ़ के प्लस टू इंटर कॉलेज में कवियत्री और समाजसेविका श्रीमती अनिता महतो जी के द्वारा काव्यवर्षा नाम से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया ! ये काव्यवर्षा मांडू के विधायक श्री जयप्रकाश भाई पटेल जी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर किया गया ! आयोजन में बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता ,मूक नाटक, नृत्य प्रतियोगिता के साथ साथ कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया !

आयोजन समिति के सदस्यों ने विधायक जी का स्वागत बुके देकर और माला पहनाकर किया ! इस शुभअवसर पर रामगढ़ जिला के उभरते गीतकार राकेश नाजुक ने अपने गीतों से दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया,,राकेश के गीत ख्वाब है प्रीत है गीत संगीत है को लोग साथ साथ पढ़ रहे थे ! राकेश नाजुक ने विधायक जी की माँ के सम्मान में एक मुक्तक * माँ की आंखों में जब भी उतरता हूँ मैं ,,खौफ से एक पल भी न डरता हूँ मैं * पढ़कर सबका मन जीत लिया ,,कार्यक्रम का समापन विधायक जी के हाथों केक काटकर हुआ ! साथ ही सभी कवियों के साथ साथ राकेश नाजुक जी को विधायक जी ने मोमेंटो और उपहार देकर सम्मानित किया !

बाहर से आए कवियों में अनन्त महेंद्र,अजय धुनि,रेणु मिश्रा,अशोक गुप्ता ,पुष्कर राज,अनंत ज्ञान, नितेश सागर,रविन्द्र रवि ने भी अपनी रचनाओ से शमा बांधा,सभी ने अनिता महतो जी के द्वारा उठाए गए इस कदम की खूब प्रंशसा की !

सोच की आजादी

हमारा सम्पूर्ण जीवन हमारे विचारों के द्वारा नियंत्रित होता है | हमारे जैसे विचार होते हैं , हमारी जैसी सोच होती है ; हमारी जैसी चिंतन धारा होती है ; वैसी ही हमारी प्रवृति होती है | जैसी प्रवृति होगी व्यवहार ठीक उसी के अनुकूल होगा ;व्यवहार के अनुरूप ही हमारे जीवन का निर्माण होता है | निष्कर्षतः मनुष्य का समग्र जीवन उसकी सोच व विचारधाराओं के गीर्द ही घूमती है | अब देखने की जरूरत यह है कि व्यक्ति की विचारधारा कैसी है ? यदि व्यक्ति सकारात्मक विचारों का स्वामी है तो उसके जीवन में पवित्रता स्थाई रूप से रहेगी | विचारधार दूषित है तो जीवन भी दूषित हो जाता है | नदी किनारे एक कुंभकार मिट्टी को आकार दे रहा था | वह मिट्टी से चिलम बना रहा था | अचानक उसके विचार बदले और उसने चिलम की जगह घड़ा बनाना शुरू कर दिया | पास बैठी कुम्हारिन ने पूछा मिट्टी का आकार क्यों बदल गया ? कुम्हार ने कहा कि बस यूँ ही मेरा विचार बदल गया | माटी ने तत्तक्षण कहा तुम्हारे विचार क्या बदले मेरा तो संसार ही बदल गया |

वस्तुतः किसी व्यक्ति के जीवन की ऊँचाई उसके नजरिये की ऊँचाई पर निर्भर करती है | यदि सोच स्वस्थ है तो व्यक्ति का जीवन मानवता का आदर्श बन जाता है और सोच यदि नकारात्मक है तो पूरी मानव जाति के लिए कलंक बन जाता है हम चाहें तो अच्छे नजरिये के बल पर अपने भीतर सकारात्मकता को प्रकट कर अपने जीवन में अहोभाव का अलग आनंद उत्पन्न कर अभिनव उल्लास की अभिव्यक्ति कर सकते हैं |

सोच तीन प्रकार की मानी गई है – भौतिक सोच व्यवहारिक सोच व  आध्यात्मिक सोच |

भौतिक सोच वाले व्यक्ति भोगवादी मनोवृति से ग्रसित होने के कारण इनके जीवन में दुखों का अम्बार लग जाता है | भौतिक सोच मनुष्य की चिंतनधारा को संकीर्ण बना देती है | ऐसे लोग स्वार्थी मनोवृति के धारक बन जाते हैं,

व्यावहारिक सोच में जीने वाले लोग इस बात के प्रति सजग रहते हैं कि उनके किसी बर्ताव से सामने वाला आहत न हो बल्कि विशेष रूप से प्रभावित हो |

सर्वश्रेष्ठ सोच अध्यात्मिक सोच को माना गया है | अध्यात्मिक सोच से प्रभावित व्यक्ति बुराई में भी अच्छाई ढूँढ लेता है | वह दूसरों पर दोषारोपण की जगह स्वयं को उस हालात में स्थापित कर सूक्ष्मता से विचार करता है | राम और रावण के अंतर का कारण क्या था राम अध्यात्मिक सोच से भरे थे , उनका त्यागमय और मार्यादित जीवन ही उन्हें ईश्वरत्व की महिमा से मंडित कर दिया | जबकि रावण की भौतिक सोच ही उसे संसार में घृणा का पात्र बना दिया | यह अतीत में राम और रावण की घटना ही नहीं आज भी एसा ही होता है |

सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति अपनी चिंतनधारा व प्रर्वृति के बल पर अपने जीवन का उत्कर्ष कर लेता है और जीवन को मंदिर बना लेता है |

प्रभावशाली व ऐतिहासिक व्यक्ति वही माना गया है जिसकी सोच स्वतंत्र रही है | जो किसी की थोपी गई विचारधारा को अपने जीवन का मार्ग नहीं बनाता बल्कि अपने जीवन की इमारत की भव्यता स्वयं गढ़ता है और अखंड विश्वास के साथ लक्ष्य को प्राप्त कर इतिहास रचता है | कहा भी गया है सुने सबकी, करें वही, जिसकी अनुमति आपकी आत्मा देती हो | आत्मा की आवाज सुन कर अपने जीवन को गति देनें वाला प्राणी कभी भी असफलता का न तो मुख देखता है न ही हताशा, निराशा व अवसाद का शिकार होता है , प्रारब्ध को ही अपने जीवन का श्रेष्ठ परिणाम समझ प्रफुल्लित मन से स्वीकार कर लेता है | हाँ , जीवन पथ संघर्ष व चुनौतियों भरे अवश्य होंगे किन्तु आजाद चिंतन वाले व्यक्ति कभी विचलित नहीं होते | स्वतंत्र चिंतन, मनन मंथन ही श्रेष्ठ व सत्य मार्ग दिखलाने का कार्य करता है | स्वतंत्र व सम्यक चिंतन से जुड़ने की कोशिश हमारे जीवन में सार्थक उपलब्धियाँ अर्जित कराता है हमारे सफल संतुष्ट जीवन का मूलाधार हमारी सोच की धुरी पर केन्द्रित है |

कुछ नया करने का साहस और जुनून आजाद ख्याल की टोलियों में पाए जाने वाले कुछ चुनिंदे लोगों में ही होते हैं , ऐसे लोग न आग से खेलने में घबराते हैं न ही झुलस जाने के परिणाम की चिंता करते हैं | निश्कर्षतः ऐसे व्यक्ति जमाने की परवाह किए बिना एक ऐसी लकीर खींच डालते हैं जिसे भावी पीढ़ी मिटा तो नहीं पाती बल्कि उस पथ की अनुगामिनी अवश्य हो जाती है | ऐसे ही विरले लोग खुले आसमान में ऊँची उड़ान तय करते हैं , सपनों में मनचाहा रंग भरते हैं और धरती को एक चमत्कार भेंट स्वरूप सौंप देते हैं | हमारी धरती के जितने भी आविष्कर्ता हुए जिनकी खोजों की बदौलत मानव सम्यता ने सुई से लेकर चाँद तक के सफर की यात्रा तय की है , निःसंदेह उनके मन की उड़ान , आसमान को छूने के लिए फड़फडाते पंखों ने कभी विश्राम नहीं लिया होगा , ऐसे ही आजाद लोग दुनिया की तस्वीर बदलने का ज़ज्बा रखते हैं |

अंततः विलक्षण व्यक्ति सत चिंतन व स्वतंत्र सोंच की बुनियाद पर ही अपने जीवन के साथ संसार में भी व्यापक परिवर्तन का निमित माना गया है | कहते हैं कि सोच तेरी बदली तो नजारा बदल गया, किश्ती ने बदला रूप तो किनारा बदल गया |

ओम प्रकाश यादव

 

 

 

 

 

लेखक डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल
झुमरीतिलैया, कोडरमा, के प्राचार्य हैं.

Teachers Required – शिक्षकों की आवश्यकता

TEACHERS  REQUIRED

A renowned school system in ADSSVM (Anpati Devi Saraswati Shishu Vidya Mandir), Phusro invites qualified and experienced candidates for primary teacher (Female, preferably unmarried).

Interested candidates may appear for a written test on 29th of March 2018 at 10:00AM with their resume, and may also frequent in English Reading, Writing and Speaking

S/d
Principal
Mobile:
9546634081
9470356696

शिक्षकों की आवश्यकता

शहर के एक प्रतिष्ठित विद्यालय अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, फुसरो में सुशिक्षित एवं अनुभवी सह अंग्रेजी सुलभ प्राथमिक स्तर के लिए शिक्षक (लड़की/महिला, अविवाहित को प्राथमिकता) की आवश्यकता है.

इच्छुक अभ्यर्थी अपने संक्षिप्त परिचय के साथ दिनांक 29-03-2018 को सुबह 10:00 बजे से आ सकते हैं.

ह./प्र.
प्रधानाध्यापक
संपर्क सूत्र
9546634081
9470356696

भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए किस अवसर की तलाश है आपको?

छाया : बेरमो आवाज

मकोली स्थित उत्क्रमित विद्यालय के पास बी.आर.सी. भवन से रविवार की सुबह एंटी करप्शन ब्यूरो की धनबाद टीम ने बेरमो प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी महेन्द्र सिंह (फाइल फोटो) को 40 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर अपने साथ धनबाद ले गई। एसीबी की टीम ने यह कार्रवाई मनबहादुर थापा नामक एक ठेकेदार के शिकायत पर की है। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार बिल पास करने के एवज में बीईईओ सिंह ने ठेकेदार थापा से डेढ़ लाख रुपए की मांग की थी। पर थापा ने 40 हजार फ़िलहाल देने की बात कही और जिसकी शिकायत थापा ने एसीबी धनबाद की टीम से किया। जिसके बाद एसीबी की टीम रविवार की सुबह मकोली पहुंची, इधर पूर्व निर्धारित समय पर रकम लेकर ठेकेदार थापा भी पहुंचे और जैसे ही  मकोली स्थित बीआरसी भवन में उक्त राशि  बीईईओ महेन्द्र सिंह को दिया, वहीं सादे लिबास में पहले से बैठे एसीबी की टीम ने धर दबोचा। गिरफ्तार महेन्द्र सिंह बेरमो (वन) के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हैं तथा इसके पहले नावाडीह में पदस्थापित थे.

कहा जाता है कि दान जितना गुप्त होता है दानी को उतना ही पुण्य प्राप्त होता है और दान जो दिखावे के साथ होता है वह आडम्बर होता है. अब तर्क यह है कि गुप्त दान करने वाले यदि फल की इच्छा और पुण्य मात्र की प्राप्ति से उत्साहित हो कर दान करते हैं तो वह भी लालसा की श्रेणी में आ जाता है और निष्फल हो जाता है. सार यह है कि दान भी एक कर्म है जिस प्रकार आप अन्य कर्मो का साधन करते हैं. यह एक प्रक्रिया है जो आपके सामाजिक उत्तरदायित्व को एक स्थान प्रदान करती है समाज में.

कर्म को प्रधानता उसके नैतिक व आदर्श मूल्य के स्तर पर दिया  जाना चाहिए और इच्छा से व्युत्पन्न अवसाद से स्वयं को दूर रखना चाहिए. इच्छा का होना महत्वपूर्ण न होकर कैसी इच्छा है यह अधिक विचारनीय होना चाहिए. इच्छा कर्म को प्रेरित करती है, सत्कर्म आपके व्यक्तित्व का निर्माण करती है. अवसर आपकी निष्ठा की परीक्षा लेती है, यह नहीं कि अवसर मिला तो आप ईमानदारी का बिगुल बजा रहे और अवसर मिला तो अपना उल्लू भी सीधा करने से नहीं चूके.

यूँ तो अवसर की तलाश सबों को होती है, परन्तु यह कि अवसर प्राप्त होने पर उसको उपयुक्तता के साथ प्रयुक्त भी कर सकें, क्षमता किन्ही विशिष्ट आत्माओं में ही होती है. अवसर का होना किसी विशेष कर्म के निष्पादन के लिए उपयुक्त है अथवा नहीं यह पूर्ण रूप से उसके एकाधिक लाभुकों के संख्या बल से निर्धारित होना चाहिए न कि अपनी क्षमता का अनुचित लाभ लेकर स्वहित साधन कर अनैतिक रूप से प्रयुक्त किया जाये.

आप अफसर थे, आपके स्वयं को सौंपे गए कार्य के प्रति उत्तदायी बना कर पदस्थापित किया गया. उसके बदले में सरकार वह हर लाभ दे रही है जिसके आप पदानुकुल अधिकारी थे. आपने गलत को सही करने के लिए पैसे लेने शुरू किये तो सही लोगों को लगा आप गलत कर रहे हैं. जब आपने सही लोगों को भी पैसे देने के लिए विवश किया तो एक बार फिर उनको लगा कि आप गलत कर रहे हैं. जब कभी शायद आपको विवश किया गया हो गलत करने के लिए तो आप नहीं रुके और न ही रोका अपितु आप अवसर का लाभ प्राप्त करते चले गए. अब ऐसे में यह दिन देखने के लिए तैयार होंगे आप शायद, परन्तु इस घटना से एक बात तो स्पष्ट है कि लोग अब विरोध तो करेंगे.

इन सब बातों से एक और बात निकलती है कि क्या कभी आपने उनकी बातों का मान न रखा हो, और उन्होंने कसम उठा ली हो कि आपको सही जगह पहुंचा देंगे. या फिर वास्तव में वे आपसे और आपके रवैये से त्रस्त हो गए होंगे और आप अपने ही कर्म के जाल में फंस गए. जो भी हो इतना तो पक्का है कि उच्चाधिकारियों ने आपको पकड़ा है, वैसे लोगों ने जिन्होंने शपथ ली है ऐसे ही कर्मो को रोकने की तो आप अपनी शपथ क्यों भूल गए थे, जो आपके संस्थान ने आपको दिलाई हुई थी.

भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएँ

संवत 2075 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के प्रारंभ पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ. जानिए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जो आज के दिन से सम्बंधित हैं. ब्रह्म पुराण के मतानुसार चैत्र प्रतिपदा से ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी. इस कारण आज के दिन को सृष्टि दिवस भी कहा जाता है. शुक्ल प्रतिपदा का दिन चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस होता है. प्रतिपदा तिथि से पौराणिक व ऐतिहासिक दोनों प्रकार की कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं जिस कारण इसका महत्त्व और भी अधिक हो जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने बाली के अत्याचारी शासन से वानर प्रजा को मुक्ति दिलाई थी. इसलिए प्रजा ने घर-घर में उत्सव मनाकर ध्वज (गुड़ी) फहराए थे, तब से यह परम्परा चली आ रही है और फलस्वरूप आज के दिन को गुड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है.

नववर्ष के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले इस त्यौहार को भारतीय संस्कृति के अनुरूप विभिन्न प्रांतों में स्थानीय परम्पराओं का पालन कर मनाया जाता है. आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में ‘गुड़ी पड़वा’ को ‘उगाड़ी’ नाम से मनाया जाता है. कश्मीरी हिन्दू इस दिन को ‘नवरेह’ के रूप में मनाते हैं. मणिपुर में यह दिन ‘सजिबु नोंगमा पानबा’ या ‘मेइतेई चेइराओबा’ कहलाता है. महाराष्ट्र में घर के आंगन में गुड़ी खड़ी करने की प्रथा प्रचलित है. इसीलिए इस दिन को गुड़ी पड़वा नाम दिया गया. ऐसा माना जाता है कि यह वंदनवार घर में सुख, समृद्धि और खुशियां लाता है. इस दिन ख़ास कर महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में भारतीय व्यंजनों में पुराण पोली अथवा श्रीखंड का बनना वर्ष पर्यन्त सबसे मीठा बोलने और अच्छा व्यवहार करने की प्रेरणा देता है.

इसे नव संवत्सर भी कहते हैं इस विक्रम संवत की शुरुआत 57 ईसवी पूर्व में हुई. इसको शुरू करने वाले सम्राट विक्रमादित्य थे, इसीलिए उनके नाम पर ही इस संवत का नाम रखा गया है. इसके बाद 78 ईसवी में शक संवत का आरम्भ हुआ. इस हिन्दू नव वर्ष के पहले दिन प्रातः काल में उदित होते सूर्य को अर्घ्य देकर ईश्वर से सुख, शांति,समृद्धि और आरोग्यता की कामना की जाती है.

चैत्र नवरात्र का प्ररम्भ भी आज के ही दिन से होता है, नवरात्र के प्रथम दिवस पर माँ शैलपुत्री, द्वितीय दिवस पर माँ ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिवस पर माँ चंद्रघंटा, चतुर्थ दिवस पर माँ कुष्मांडा, पंचम दिवस पर माँ स्कंदमाता, षष्ठम दिवस पर माँ कात्यायनी, सप्तम दिवस पर माँ कालरात्री, अष्टम दिवस पर माँ महागौरी तथा इसी प्रकार नौवें दिन पूजन-हवन आदि के बाद कन्या भोजन कराया जाता है और माँ नवदुर्गा की पूजा अर्चना के साथ नवरात्र का समापन होता है और इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाती है जो श्रीराम के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है.

नववर्ष के प्रारंभ के साथ ही चैती छठ का आगमन हो जाता है, घरों में साफ सफाई का विशेष महत्व होता है. एवं प्रत्यक्ष एवं साक्षात् देव भगवान सूर्य की उपासना की जाती है. इस वर्ष चैती छठ व्रत की महत्वपूर्ण तिथियाँ इस प्रकार हैं :
21-03-2018 : नहाय खाय
22-03-2018 : खरना
23-03-2018 : संध्या अर्घ्य
24-03-2018 : प्रातः अर्घ्य

इस वर्ष दिनांक 25-03-2018 को ही अष्टमी एवं नवमी तिथि पर रही है. जिस कारण, जिन्हें व्रत करना है वे कन्या भोजन 25 को ही करावें परन्तु अपने अष्टमी व्रत का पारण दिनांक 26-03-2018 को ही करें.