बजबजाती नालियाँ और सूअरों का आतंक

आज के इस दौर में जो नालियों की व्ययवस्था है अपने शहर में उससे बढ़िया तो कभी हड़प्पा सभ्यता में हुआ करती थी, उसपर सूअरों का जमावड़ा जो उन्हें जुहू बीच का अहसास देता है. अब लगता है हमें ही तय करना होगा कि हम सूअरों की बस्ती में ही रहते हैं या हमारी बस्ती सूअर. अब हमें दोनों ही में से कोई भी स्थिति बर्दाश्त नहीं, और होना भी नहीं चाहिए. पूरे देश में चल रहे स्वच्छता अभियान को धता बताने वाला यह परिदृश्य आज कल पूरे करगली बाज़ार, रीजनल हॉस्पिटल कॉलोनी करगली, आंबेडकर कॉलोनी  और नोनिया पट्टी सहित कई आस पास के इलाकों में बिना किसी परिश्रम के राह चलते देखा जा सकता है, जिस प्रकार यहाँ आदमी से ज्यादा सूअर रास्तों पर आवारा घूमते नजर आ जाया करते हैं उससे तो यही लगता है कि स्वच्छता अभियान सिर्फ फोटो निकालने भर के लिए रह गया हो.

चमचमाती सड़कों से जब आप नीचे मोहल्ले के सड़कों पर जाते हैं तो वार्ड संख्या 15, 16, 18, 21, और 24 में इन दिनों सूअरों का जो आतंक है यह आज कल से पनपा नहीं है, यह समस्या बहुत पुरानी है. पर अब जबकि यहाँ के इलाके नगर परिषद् के अंतर्गत आने से लोगों में एक उम्मीद जगी कि अब कुछ उपाय होगा और इस प्रकार की गन्दगी और समस्याओं से मुक्ति मिलेगी. पर बहुत दुःख के साथ बताना पड़ता है कि अब तक कई बार विभागीय नोटिस दिए जाने के बाद भी सूअर पालकों के कान पर जूँ न रेंगी.

वार्ड 24 के कुछ नौजवानों ने सामूहिक बैठक कर कई लोगों के हस्ताक्षर युक्त आवेदन भी दिए हैं अपने वार्ड पार्षद को जो कि विचाराधीन है अब तक. पूछे जाने पर कोई भी संतोष जनक उत्तर प्राप्त नहीं हो सका है. सूत्रों के हवाले से पता चला है कि इन सूअर पालकों ने सूअरों के पहचान के लिए उनके अंग-भेदन कर रखें हैं. किसी के कान तो किसी की पूंछ तो किसी को लोहे की सलाखों से दाग कर निशान आदि बनाकर अपनी पहचान दे दी गयी है. वे किसी भी मानदंड का अनुपालन करने के लिए स्वयं को बाध्य नहीं पाते और ऐसे ही मुक्त तरीके से सूअर का पालन करते हैं. एक-एक सूअर दो से तीन हजार तक में बिक जाते हैं.

ऐसा बिलकुल नहीं कि वह परिवार जो सूअर पालन से जुड़ा है, बिलकुल ही गरीब है या यह उनके परिवार के उपार्जन का एकमात्र साधन है. बकायदे सम्पन्न हैं और यह उनके ऊपरी आय का एक जरिया भर है, क्योंकि इसके पालन में न तो हिंग लगती है न फिटकरी और रंग आता है चोखा.

बजबजाती नालियों और सूअरों के बीच रहने को विवश लोग अपनी किस गलती की सजा भोग रहे हैं, यह समझ से परे है, पर अब लगता है कि लोगों ने ठान लिया है कि अब वह इसे सहन नहीं करेंगे. नगर परिषद् के कूड़ेदान में जमा कचरों को आये दिन सूअर बिखेर देते हैं. बहुत जगह पर नालियां अब भी कच्ची हैं और यह मानो सूअरों का हम्माम बना पड़ा है.

सूअरों से होने वाली बिमारियों से हम सभी भलीभांति परिचित हैं, एक अध्ययन के अनुसार स्वाईन-फ्लू का यह सबसे आसन जरिया होता है. एच१, एन१ वायरस का फैलना और उससे ग्रसित होना ऐसे वातावरण में बहुत ही आम बात है. वैसे भी इस प्रकार के वातावरण में बिमारियों का होना कोई नयी बात नहीं. जिस प्रकार के दृश्य देखने को आ रहे हैं उससे यही लगता है कि लोग आदि हो चुके हैं सूअरों के साथ रहने को, एक पल को पता ही नहीं चलता है कि लोग सूअर के घर में रह रहे हैं या सूअर इन लोगों के घरों में. स्थिति गंभीर है और दिन-ब-दिन और गंभीर होती जा रही है, पानी सर से ऊपर जाने को ही है पर पता नहीं लोग किस बात का इन्तेजार कर रहे हैं कि अब तो बस डूबना ही बाकी बचा है शायद.

अब रुख करते हैं प्रशासन का, तो उनकी ओर से ही कागजी कार्रवाई में  बस इतना ही है कि नोटिस जरूर मिला है उन सभी कथित पालकों को जिनके सूअर खुलेआम सड़कों पर पलते हैं, पर उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया है अब तक, इस बात का सबसे बड़ा कारण है की खुले में पालन होना, क्योंकि आप आसानी से यह नहीं बता सकते कि कौन सा सूअर किनका है तो आप कार्रवाई किस पर करेंगे, अव्वल तो आप साबित ही नहीं कर पाएंगे कि वे जिन्हें नोटिस मिला है सूअर पालन से जुड़े भी हैं या नहीं.

नगर परिषद् ने सक्रियता दिखाते हुए कई लोगों को नोटिस भेजा भी है, जिनमे मुख्य नाम हैं.

  1. श्री लखन राम पिता स्व.बलि राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला
  2. श्री गडी पासी पिता श्री शम्भू पासी, ढोरी पंचायत
  3. श्री सिकंदर राम, पिता श्री दुर्बल राम, आंबेडकर कॉलोनी
  4. श्री नंदकिशोर राम, पिता स्व.बाढो राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला
  5. श्री मनोज राम, पिता श्री प्रसादी राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला
  6. श्री अजय पासी, पिता श्री तोलन पासी, ढोरी पंचायत
  7. श्री नवल राम, पिता श्री लालू राम, करगली बाज़ार, हरिजन टोला

सूची बहुत लम्बी है, इससे एक बात तो साबित है कि इस प्रकार के व्यवसाय से जुड़े लोगों के पास किसी भी प्रकार का कोई भी पशुपालन से सम्बंधित अनुक्रमणिका नहीं है और न ही जो कुछ अगर हो भी तो उसका अनुपालन ही किया जा रहा है. विभाग से की गयी बातचीत में यह भरोसा दिलाया गया कि बहुत जल्द ही आवारा पशुओं खास कर सूअरों की धरा-पकड़ी शुरू होगी और उन्हें दूर किसी अज्ञात स्थान पर रिहायशी इलाके से दूर छोड़ दिया जायगा अथवा अन्य किसी ऐसे पालक के सुपुर्द कर दिया जायगा जो उक्त पशु के पालन की समुचित व्यवस्था और तरीके का अनुपालन करते हों. आशा है कि विभाग जल्द ही कोई कार्रवाई करेगा और इनके आतंक से शहर वासियों को मुक्त कर पायेगा.