देश मना रहा वूमन डे

वाह रे दुनिया तेरी कहानी
मेरा दुख और मेरी जवानी
रो-रो कर जगती मे राते
यही हकीकत हे जग जाने।

वाह रे दुनिया पोस्ट बनाया
नारी को शक्ति दिखलाया
कह गए झूठ अपनेपन की
और न जाने कितने सपने दिखलाया।

अब भी मै अभियान बनी हूँ,
अब भी झूठी शान बनी हूँ,
तुमने हर वक्त जो कुचला है,
उस पल से अंजान रही हूँ.

वाह रे दुनिया तेरी कहानी,
तुमने ये त्योहार मनाया,
तुमने खबर हजार बनाया
कभी मे लुटि बीच सड़कों में,
तो कभी अपनो ने धमकाया.

सोचा था मैं साथ चलूंगी,
हक अपना अब बांट चलूंगी,
पर तुमने कुछ और दिखाया,
क्यो हकीकत को झुठलाया?

नारी का सम्मान करो,
उनके हक की पहचान करो
न बातो से कुछ होना है,
अब सभी को एकजुट होना है।

अब न कोई सवाल उठेगा….
न इंसाफ का दरवाजा पिटेगा….
जो कुचलने हमें आगे आये….
उसे नारी शक्ति का रुप दिखेगा…. ”

पूरा भारत पोस्ट घुमाया
आखिर क्यों नारी को
अच्छी “बहु” नहीं बताया.

अब आगे सोचने का काम आप सभी का है,
महिला दिवस के अवसर पर सभी को बधाई।

कोई सुन रहा है इन बेजुबानों की… और आप?

बिजली के नंगे तारो पर अक्सर पंछियों की बैठक होती है, और इन खतरों से अनजान पंछी कभी कभी बिजली के झटके से घायल भी हो जाया करते हैं। जिन्दगी किसी की भी हो, अनमोल होती है, चाहे वो इंसान हो या फिर जानवर। ये कहना है पेशे से व्यवसायी फुसरो बाज़ार मेन रोड निवासी श्री अंक्ति मित्तल का.

घायल पक्षी के साथ अंकित मित्तल, मेन रोड फुसरो

अक्सर अंकित जब पंछियों को इस प्रकार से घायल होते देखते हैं तो इन नादान परिन्दो से कभी यह सोचकर मुंह नहीं फेरा कि ये बस परिन्दे है, न कोई नाम है इनका, न ही कोई पहचान है इनकी और न कोई पता ही। न कोई पूछताछ होगी इनके मृत् शरीर की। पर अपने कोमल हृदय की आवाज सुनकर आज तक 9 पंछियों को बचाया इन्होंने.

फुसरो सिटी को दिए गए एक्स्क्लूसिव इंटरव्यू में अंकित ने आगे बताया कि यहाँ कोई ऐसी संस्था नहीं जो इस प्रकार के जानवरों अथवा पक्षियों के लिए कोई काम करती हो। साथ ही उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनकी कोशिश है लोगों को इसके बारे में जागरूक बनाने की और कुछ समय बाद ही सही लोगों में जागरूकता आयेगी और यूं ही कोई जानवर और पक्षी नहीं मर जाया करेंगे. करते हे कि यह नेक कोशिश आप भी करे क्योंकि यह भी हमारे जीवन का एक अनमोल हिस्सा है.

सच है, इसे कहते हैं मानवता. जरुरी नहीं कि कल से आप भी सिर्फ पक्षियों को बचाने में ही लग जाएँ, पर जरुर आपको ऐसे ही किसी कार्य में स्वयं को सम्मिलित कर ही लेना चाहिए जिसका सामाजिक सरोकार और मानवता, देश-धर्म से सीधा सम्बन्ध हो. आप स्वयं को किसी भी पेशे अथवा परिवेश में पाते हों, अपनी प्राथमिकताओं को सुनिश्चित करें और समाज और देश हित में जो भी बन पड़े जरुर करें.