क्षणिकाएं : ०६

उनसे कहा तो, अच्छा नहीं होगा

आज हवाओं का रुख मेरी तरफ है,

सूरज की किरणें भी मेरी तरफ हैं.

आज जुल्फों के साये मेरी तरफ हैं,

आँचल की ओट भी मेरी तरफ है.

नहीं है तो सिर्फ, वो खुशबू नहीं है,

वो तेज, वो झीनापन नहीं है,

मैं हूँ इनका ये हैं मेरे,

भले ही लगे हो,

जितने भी पहरे,

मैं जानता हूँ

वो न हो सकेंगे मेरे,

हों भले किसी और के गिरेबां में,

उनके हाथों के घेरे,

मगर प्यार की हद में,

मुझे है रहना,

पड़े दर्द चाहे

कोई भी सहना,

रुक जाओ हवाओं,

ये उनसे न कहना,

राज की बात है,

राज ही रखना,

उनसे कहा तो, अच्छा नहीं होगा.

: नीरज पाठक