कविता

|| यौवन ||

आरूढ़ रश्मि रथ पे, नवजीवन की किरण.

प्रफुल्लित मन मृदुल, तृप्त अनावृत यौवन.

उच्छृल नदी प्रतिविम्बित, समृद्ध रवि रक्त कण.

समीर मंद वेग में, उन्मत्त च्यूत जिर्ण पर्ण.

विस्तृत क्षिति निजभाववश, चहुँ दिक वृत्त नील वर्ण.

खग-वृंद श्रृंगकलवरत, मदसिक्त भू आसक्त मन.

संयुक्त मुक्त भुक्त है, हो रहा है चित्त हरण.

हर्षित प्रकृति रिक्त में, भरने लगी कर श्री वरण.

त्रिभुवन स्तब्ध है, संतप्त शक्त तत्व कण.

आकृष्ट हो निकृष्ट से, विभ्रांत दृष्टि आवरण.

-: रचना :-
: रविन्द्र कुमार ‘रवि’ :
शिक्षक, कवि एवं संगीतज्ञ
नया रोड, फुसरो.

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कविता
यह समर आज अंतिम होगा

यह समर आज अंतिम होगा ………………………………. यह समर आज अंतिम होगा मत सोच कि यह मद्धिम होगा मिट जाएगा अब सब अंतर हर भय होगा अब छू-मंतर हर दिशा आज संवाद करे हर क्षण हर पल अनुनाद भरे बिछड़े का होगा आज मिलन बिन ब्याही बने नहीं दुल्हन अब नहीं …

कविता
आओ एक दीप जला जाओ!

आओ एक दीप जला जाओ ………………………………. तुम बनो आज अब उद्दीपक तुम हो तो जल पाए दीपक तुम हो तो दूर अंधेरा हो जगमग प्रकाश से डेरा हो मैं तुझे ही दीपक मान रहा तू सदा जले यह ठान रहा तुझमें घी बाती भरता हूँ अब हो बयार ना डरता …

कविता
हिन्दुस्तान (झेलम तट, राजबाग – 07 जून 1969)

|| हिंदुस्तान || (झेलम तट स्थित राजबाग से 07 जून 1969 को) कितना महान प्यारा हिन्दुस्तान है | नागराज कि ऊँचाई देशाभिमान है || कश्मीर भारत वर्ष का शाश्वत ईमान है | इस पर न्योछावर तन-मन अनमोल प्राण है || पावन पवित्र नदियाँ उपवन हरे भरे हैं | भारत के …