क्षणिकाएं : ०१

|| यौवन ||

आरूढ़ रश्मि रथ पे, नवजीवन की किरण.

प्रफुल्लित मन मृदुल, तृप्त अनावृत यौवन.

उच्छृल नदी प्रतिविम्बित, समृद्ध रवि रक्त कण.

समीर मंद वेग में, उन्मत्त च्यूत जिर्ण पर्ण.

विस्तृत क्षिति निजभाववश, चहुँ दिक वृत्त नील वर्ण.

खग-वृंद श्रृंगकलवरत, मदसिक्त भू आसक्त मन.

संयुक्त मुक्त भुक्त है, हो रहा है चित्त हरण.

हर्षित प्रकृति रिक्त में, भरने लगी कर श्री वरण.

त्रिभुवन स्तब्ध है, संतप्त शक्त तत्व कण.

आकृष्ट हो निकृष्ट से, विभ्रांत दृष्टि आवरण.

-: रचना :-
: रविन्द्र कुमार ‘रवि’ :
शिक्षक, कवि एवं संगीतज्ञ
नया रोड, फुसरो.

रविन्द्र कुमार 'रवि'

रविन्द्र कुमार ‘रवि’,
कवि, संगीतकार, गायक, साहित्यकार एवं एक शिक्षक
सेन्ट्रल कॉलोनी, मकोली, फुसरो, बोकारो, 829144
मोबाइल: 072098 17343

You May Also Like