मैंने आत्महत्या नहीं की : पुष्पा भालोटिया

मैंने आत्महत्या नहीं की है : पुष्पा भालोटिया

मैं पुष्पा भालोटिया बोल रही हूं, वहीं पुष्पा भालोटिया जिसे रानीगंज में उसका पति दिनदहाड़े षडयंत्र रचकर हत्या करवा देता है, वहीं पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या पर रानीगंज का सभ्य मारवाड़ी समाज चुप्पी साध लेता है, वहीं पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या को उसके समुदाय वाले आत्महत्या घोषित करने के लिए अपने राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव का दुरुपयोग कर रहें हैं।

जी हां, मै पुष्पा भालोटिया बोल रही हूं, वहीं पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या पर उसके समुदाय का एक भी समाजिक, राजनीतिक अथवा धर्मिक नेतृत्व करने वाले व्यक्ति द्वारा विरोध नहीं होता है, वहीं पुष्पा भालोटिया जिसकी क्रूर हत्या पर रानीगंज का पूरा मारवाड़ी समुदाय शांति बनाए हुआ है, वहीं पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या पर उसके समुदाय में कोई रोष नहीं है। वहीं पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या पर मारवाड़ी समुदाय के युवकों में कोई आक्रोश नहीं है।

जी हां, मै पुष्पा भालोटिया बोल रही हूं, वही पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या पर न्याय के सौदागरों के कारण उसके पिता की वृद्ध आंखो के आंसू सूखने लगे है, वहीं पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या पर षढ़यंत्रकारी बाजीगरों के कारण उसकी वृद्ध मां को रानीगंज मारवाड़ी समुदाय द्वारा शोक सन्देश के बजाये हास्यात्मक वातावरण बनाकर आनंदमय हो रहा है।

जी हां, मै पुष्पा भालोटिया बोल रही हूं, वही पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या पर अपने वर्चस्व को बचाने के लिए हत्यारों को सहयोग दिया जा रहा है, वहीं पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या की कीमत उसी के समुदाय वालो ने लगाई है, जी हां वही पुष्पा भालोटिया जिसकी मृत शरीर पर वर्चस्व का खेल हो रहा है। जी हां वही पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या को पचाने का प्रयास रानीगंज के उसी सभ्य समाज द्वारा किया जा रहा है। जी हां वही पुष्पा भालोटिया जिसकी लाशों का कीमत लगाया जा चुका है।

जी हां, मै पुष्पा भालोटिया बोल रही हूं , वही पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या हुई है, आत्महत्या नहीं, मै उसी समुदाय को बोल रही हूं जिसके बीच मै रहती थी, उसी समुदाय को बोल रही हूं जिसपर मै गौरानवित होती थी, उसी समुदाय को बोल रही जिसके शहर ब्याह कर लाई गई थी , उसी को बोल रही हूं जिसने मेरा पहचान मुझसे छीना है,उसी को बोल रही हूं जिसने मेरा अस्तित्व मुझसे छीन लिया है। उसी को बोल रही हूं जिसने मुझसे मेरा प्राण छीन लिया है। उसी को बोल रही हूं जिसने मुझसे मेरे भाई बहन, मां , बाप, बेटे बेटी, खुशीया सब कुछ छीन लिया है। उसी को बोल रही हूं जिसने मेरा अस्तित्व मुझसे छीन लिया है। उसी को बोल रही हूं जिसने मुझसे मेरा दुनिया छीन लिया है।उसी को बोल रही हूं जिसने मेरी हत्या को आत्महत्या बोल कर रानीगंज मारवाड़ी समुदाय को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिसने पूरे समाज को कलंकित किया है, समाज पर प्रश्न चिन्ह खड़ा किया है।

जी हां, मै पुष्पा भालोटिया बोल रही हूं, वही पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या हुई है, आत्महत्या नहीं, में उनसे बोल रही हूं जो रानीगंज मारवाड़ी समाज में किसी की मां है, किसी की बेटी है, किसी की बहन है, किसी की पत्नी है, आपके बीच में, आपके सामने, आपके पास एक मां को, एक बेटी को , एक बहन को और एक पत्नी को गोली मार दिया जाता है, गोली मार कर जला दिया जाता है, इस क्रूर हत्या को आत्म हत्या घोषित करने का प्रयास किया जाता है। लेकिन आप एक मां, एक बेटी, एक बहन एक पत्नी की इस हत्या को देख कर, सुन कर, समझ कर सिर्फ इसलिए ख़ामोश रहती हो के आपके समुदाय पर कोई सवाल नही उठे, कोई कलंक ना लगे, कोई आलोचना नहीं हो, कोई कारवाई नहीं हो। रानीगंज के मारवाड़ी समाज की मां, बहन, बेटी, पत्नी से पूछना चाहती हूं के क्या मेरे हत्या के साथ आपके अंतरात्मा का भी हत्या हो चुका है? मेरे हत्या के साथ रानीगंज के मारवाड़ी समाज की नारीवादी सोच का भी हत्या हो चुका है? मेरे हत्या के साथ रानीगंज मारवाड़ी नारी की विचारों का भी हत्या हो चुका है? मेरे हत्या के साथ मारवाड़ी समुदाय की औरतों की आजादी की भी हत्या हो चुकी है? अगर नहीं तो आपकी ख़ामोशी का कारण क्या है?

जी हां, मै पुष्पा भालोटिया बोल रही हूं , वही पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या हुई है, आत्महत्या नहीं, मै रानीगंज के मारवाड़ी समाज के सभी मां , बेटी, बहन, पत्नी को बता देना चाहती हूं के मेरी हत्या पर आप ख़ामोश है, आपका समाज ख़ामोश है, आपका समाजिक और राजनीतिक नेतृत्व ख़ामोश है लेकिन मेरे हत्या पर देश से आवाज़ उठने लगी है, सड़कों पर आवाज़ उठने वाली है, संसद तक आवाज़ उठाने की मुहिम चल रही है। आपकी ख़ामोशी ने मानवता को ललकारा है, मेरी आत्मा ने अत्याचार के विरुद्ध लड़ने वाले योद्धाओं को पुकारा है , न्याय के पुजारियों को आवाज़ दी है जो आपके मोहल्ले और शहर के सड़कों से संसद तक न्याय का ध्वज लेकर मुखर होकर वीरतापूर्वक संघर्ष करने की दिशा में अग्रसर है। और यह सब सिर्फ इसलिए के मेरी हत्या के बाद मेरे समुदाय की किसी मां, बेटी, बहन या पत्नी की हत्या करने से पहले हत्यारों पर ऐसा भय हो जो उसे सपने में भी भयभीत करती रहे, यह सन्देश मै सपना द्वारा अपने समुदाय वालों को दे रही हूं। अब आप चिंता ना करें, मेरी हत्या पर आपकी उदासीनता ने क्रांतिकारी आंदोलनकारियों तक मेरा संदेश पहुंचा चुकी हुई और वह ऐसे योद्धा है जो मेरे घर वालों को न्याय दिलाने तक संघर्ष करते रहेंगे।

जी हां, मै पुष्पा भालोटिया बोल रही हूं, वही पुष्पा भालोटिया जिसकी हत्या हुई है, आत्महत्या नहीं। मै अपने समुदाय की मां, बेटी, बहन और पत्नी को बोल रही हूं की मैं अपने हत्या के बाद भी अपने समुदाय की मां, बेटी, बहन, पत्नी के लिए आवाज़ उठाने के लिए समाज के ऐसे लोगों को आवाज़ दी है जो धर्म, जाती और समुदाय से ऊपर उठकर आवाज़ लगाते हुए संघर्ष करने जा रहे हैं और आप?

 : अग्रेसित- रोहित मित्तल, फुसरो