राष्ट्रीय पोषण मिशन चरणबद्ध तरीके से कुपोषण से लड़ेगा : वीरेन्द्र कुमार, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री

राष्ट्रीय पोषण मिशन चरणबद्ध तरीके से कुपोषण से लड़ेगा : वीरेन्द्र कुमार, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री

गिरिडीह सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय के द्वारा झारखण्ड में बाल पोषण मिशन एवं झारखण्ड सहित देश के अन्य राज्यों में बच्चों एवं किशोरियों  में कुपोषण की स्थिति की समीक्षा पर पूछे गये अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री, श्री वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि केन्द्र सरकार ने बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण संकेतकों में सुधार हेतु 9046.17 करोड़ रूपये की कुल लागत पर राष्ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) की स्थापना की अनुमति प्रदान की है।

मंत्री श्री कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण मिशन चरणबद्ध तरीके से वर्ष  2017-18 में 315 जिले, वर्ष  2018-19 में 235 जिले और वर्ष  2019-20 में बाकि/शेष जिले में शुरुआत करेगा। वर्ष 2017-18 में शामिल किये गये 315 जिलों में से 18 जिले झारखण्ड राज्य के हैं। राष्ट्रीय पोषण मिशन के पास समय-समय पर समीक्षा करने हेतू सुदृढ़ तंत्र है। देश में बच्चों तथा किशोरियों में कुपोषण की स्थिति स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा समय-समय पर कराये जाने वाले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में शामिल है। उन्होंने बताया कि-बच्चों में कुपोषण (5 वर्ष) राष्ट्रीय स्तर एनएफएचएस-4 के अनुसार 35.7 प्रतिशत एवं एनएफएचएस-3 के अनुसार 42.5 प्रतिशत है। बच्चों में कुपोषण (5 वर्ष) झारखण्ड एनएफएचएस-4 के अनुसार 47.8 प्रतिशत एवं एनएफएचएस-3 के अनुसार 56.5 प्रतिशत हैं। किशोरियों  बीएमआई (15-49 वर्ष की आयु वर्ग वाली महिलाएॅ) राष्ट्रीय स्तर एनएफएचएस-4 के अनुसार 22.9 प्रतिशत एवं एनएफएचएस-3 के अनुसार 35.5 प्रतिशत है। किशोरियां बीएमआई (15-49 वर्ष की आयु वर्ग वाली महिलायें) झारखण्ड एनएफएचएस-4 के अनुसार 31.5 प्रतिशत एवं एनएफएचएस-3 के अनुसार 42.9 प्रतिशत है। रक्ताल्पता राष्ट्रीय स्तर एनएफएचएस-4 के अनुसार 53 प्रतिशत एवं एनएफएचएस-3 के अनुसार 55.3 प्रतिशत है। साथ ही रक्ताल्पता झारखण्ड एनएफएचएस-4 के अनुसार 65.2 प्रतिशत एवं एनएफएचएस-3 के अनुसार 69.5 प्रतिशत है।

उन्होंने बताया कि मंत्रालय देश में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए प्रत्यक्ष लक्षित हस्तक्षेपों के रूप में अम्ब्रेला आईसीडीएस स्कीम के अन्तर्गत कई स्कीम और कार्यक्रम जैसे आंगनबाड़ी सेवायें, किशोरियों के लिए स्कीम और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना क्रियान्वित कर रहा है। हाल ही में, सरकार की विभिन्न स्कीमों के पोषण संबंधी मुद्दों को माॅनिटर करने और परामर्श देने के लिए एक सर्वोच्च निकाय के रूप में राष्ट्रीय पोषण मिशन की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त मंत्रालय का खाद्य एवं पोषण बोर्ड (एफएनबी) अपनी 43 क्षेत्रीय यूनिटों के साथ प्रदर्शनी, ओडियो-विज्युअल विज्ञान और प्रिंट मीडिया, संतुलित आहार के उपभोग को बढ़ावा देने के लिए व्याख्यान, स्थानीय उपलब्ध खाद्य पदार्थो का इस्तेमाल करते हुए कम लागत वाली पौष्टिक रैसिपी का प्रदर्शन करने के अलावा रोजाना के आहार में फलों एवं सब्जियों को शामिल करना एवं क्षेत्रिय पदाधिकारियों का प्रशिक्षण और बुनियादी स्तर के कार्यक्रर्ताओं के लिए खाद्य संरक्षण में प्रशिक्षण तथा पोषण संबंधी कार्यक्रमोें का आयोजन आदि के माध्यम से राज्यों/संस्थानों के सहयोग से पोषण संबंधी जागरूकता सृजन करने में कार्यरत हैं। परिणाम स्वरूप राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार देश में कुपोषण के स्तर में कमी आई है।

उपरोक्त जानकारी हमें गिरिडीह संसद श्री रविन्द्र कुमार पाण्डेय जी के निजी सचिव श्री मृत्युंजय कुमार पाण्डेय द्वारा प्राप्त हुई.