बच्चों में मोबाइल का बढ़ता उपयोग एवं इसके दुष्परिणाम – डॉ. प्रभाकर कुमार

आज का समय भौतिकवादी, आपसी प्रतिस्पर्धा का, सामाजिक चकाचौंध की एवं सूचना प्रौद्योगिकी का बढ़ना व सहज रूप से मिलना, इंटरनेट सर्वसुलभ होना और कम पैसों में 4G की सुविधा मिल पाना है। बच्चों में अनुकरण करने की प्रवृति अत्यधिक होती है, बच्चे अपने घरों एवं माता पिता के व्यवहारों का अनुकरण कर रहे हैं। आज के माता पिता की शिक्षा व संस्कार ही मर्यादित नहीं रह गए हैं तो हम बच्चों को कितना संस्कारवान बना सकते हैं। बच्चों में मोबाइल की लत घर के संस्कारों से आ रहे हैं। साथ ही घर के वातावरण से जब बच्चे स्कूल या महाविद्यालय जा रहे हैं तो अपने संगी साथियों का प्रभाव एवं उनसे यह उपकरण के प्रयोगों को सीख रहे हैं। कुछ बच्चे घर में माता पिता की नजर से बचकर उनकी मोबाइल पर हाथ साफ कर रहे हैं। बच्चों का बाल मन ऐसा होता है कि वह जल्द ही गुमराह होते या गलत चीजों की आदत जल्द सीखते हैं। मोबाइल की माता पिता की लत बच्चों में स्थानांतरित होना, घर में बच्चों को खेल खेल में मोबाइल हाथ मे दिया जाना, कहीं न कहीं प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी ही कर जाता है।

मोबाइल प्रयुक्त करने की आदत आज के समय अपने उच्चतम स्तर पर है। आजकल बच्चों की शारीरीक अवस्था में बदलाव के चलते तथा बच्चों में यौन जानकारी के प्रति उत्सुकता के कारण भी बच्चे मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग कर रहे हैं। पोर्न साइट पर आसानी से जा रहे हैं, नशे सेवन के लिये एडवांस तरीकों को बच्चे मोबाइल इंटरनेट के सहारे आसानी से सीख पा रहे हैं । बच्चों में आज महंगे एंड्रॉयड मोबाइल सेट अपने पास रखने का क्रेज बढ़ा है। माता पिता से जिद करके वह महंगे मोबाइल की खरीद कर रहे हैं। हालांकि बच्चों का बिना मोबाइल फ़ोन के भी काम हो सकता है। पर आज के समय में बच्चों की जिज्ञासा मोबाइल फोन की ओर उन्मुख है।

दुष्परिणाम- समय से पहले परिपक्व हो रहे हैं, आसानी से इंटरनेट का उपयोग, सारी वर्जनाओं को पार कर पोर्न साइट व यौन सामग्री की खोज में समय व्यतीत करना, पढ़ाई में मन न लगा पाना, एकाग्रता की कमी, आंखों की समस्या, शारीरिक गतिविधि का अभाव, बच्चों का बौद्धिक विकास गलत रास्ते की ओर उन्मुख, समाजीकरण की प्रक्रिया अवरुद्ध, बच्चे एकांत की तलाश करते है ताकि मोबाइल पर अनावश्यक चीजों की सर्फिंग कर पाएं, माता पिता से झूठ बोलने की आदत मे वृद्धि, गलत संगति, समय का दुरुपयोग करना आदि। बच्चों में मोबाइल की आदत- जब बच्चे को मोबाइल की आदत लग जाती है और मोबाइल की सुविधा मिल नही पाती तो चोरी, दूसरे की मोबाइल लेना, इसी में हत्या कर देना। बच्चों में id (“इड” एक मनोवैज्ञानिक शब्दावली, जिसका अर्थ है “दिमाग का वह हिस्सा जिसमें सहज ही आवेग और प्राथमिक प्रक्रियाएं प्रकट होती हैं”. “id”: is a PSYCHOANALYSIS term which means “the part of the mind in which innate instinctive impulses and primary processes are manifest.”) अर्थात बच्चे सिर्फ व सिर्फ अपनी आवश्यकता की पूर्ति चाहते हैं उन्हें वास्तविकता से कोई लेना देना नही होता है। इस लिये बाल मन कोई घृणित कार्य करके भी आवश्यकता की पूर्ति कर जाता है।

डॉ. प्रभाकर कुमार

डॉ.प्रभाकर कुमार,  मनोवैज्ञानिक, प्राध्यापक, कृष्ण बल्लभ महाविद्यालय, कथारा सह सदस्य बाल कल्याण समिति, बोकारो

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