भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएँ

संवत 2075 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के प्रारंभ पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ. जानिए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जो आज के दिन से सम्बंधित हैं. ब्रह्म पुराण के मतानुसार चैत्र प्रतिपदा से ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी. इस कारण आज के दिन को सृष्टि दिवस भी कहा जाता है. शुक्ल प्रतिपदा का दिन चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस होता है. प्रतिपदा तिथि से पौराणिक व ऐतिहासिक दोनों प्रकार की कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं जिस कारण इसका महत्त्व और भी अधिक हो जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने बाली के अत्याचारी शासन से वानर प्रजा को मुक्ति दिलाई थी. इसलिए प्रजा ने घर-घर में उत्सव मनाकर ध्वज (गुड़ी) फहराए थे, तब से यह परम्परा चली आ रही है और फलस्वरूप आज के दिन को गुड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है.

नववर्ष के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले इस त्यौहार को भारतीय संस्कृति के अनुरूप विभिन्न प्रांतों में स्थानीय परम्पराओं का पालन कर मनाया जाता है. आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में ‘गुड़ी पड़वा’ को ‘उगाड़ी’ नाम से मनाया जाता है. कश्मीरी हिन्दू इस दिन को ‘नवरेह’ के रूप में मनाते हैं. मणिपुर में यह दिन ‘सजिबु नोंगमा पानबा’ या ‘मेइतेई चेइराओबा’ कहलाता है. महाराष्ट्र में घर के आंगन में गुड़ी खड़ी करने की प्रथा प्रचलित है. इसीलिए इस दिन को गुड़ी पड़वा नाम दिया गया. ऐसा माना जाता है कि यह वंदनवार घर में सुख, समृद्धि और खुशियां लाता है. इस दिन ख़ास कर महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में भारतीय व्यंजनों में पुराण पोली अथवा श्रीखंड का बनना वर्ष पर्यन्त सबसे मीठा बोलने और अच्छा व्यवहार करने की प्रेरणा देता है.

इसे नव संवत्सर भी कहते हैं इस विक्रम संवत की शुरुआत 57 ईसवी पूर्व में हुई. इसको शुरू करने वाले सम्राट विक्रमादित्य थे, इसीलिए उनके नाम पर ही इस संवत का नाम रखा गया है. इसके बाद 78 ईसवी में शक संवत का आरम्भ हुआ. इस हिन्दू नव वर्ष के पहले दिन प्रातः काल में उदित होते सूर्य को अर्घ्य देकर ईश्वर से सुख, शांति,समृद्धि और आरोग्यता की कामना की जाती है.

चैत्र नवरात्र का प्ररम्भ भी आज के ही दिन से होता है, नवरात्र के प्रथम दिवस पर माँ शैलपुत्री, द्वितीय दिवस पर माँ ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिवस पर माँ चंद्रघंटा, चतुर्थ दिवस पर माँ कुष्मांडा, पंचम दिवस पर माँ स्कंदमाता, षष्ठम दिवस पर माँ कात्यायनी, सप्तम दिवस पर माँ कालरात्री, अष्टम दिवस पर माँ महागौरी तथा इसी प्रकार नौवें दिन पूजन-हवन आदि के बाद कन्या भोजन कराया जाता है और माँ नवदुर्गा की पूजा अर्चना के साथ नवरात्र का समापन होता है और इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाती है जो श्रीराम के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है.

नववर्ष के प्रारंभ के साथ ही चैती छठ का आगमन हो जाता है, घरों में साफ सफाई का विशेष महत्व होता है. एवं प्रत्यक्ष एवं साक्षात् देव भगवान सूर्य की उपासना की जाती है. इस वर्ष चैती छठ व्रत की महत्वपूर्ण तिथियाँ इस प्रकार हैं :
21-03-2018 : नहाय खाय
22-03-2018 : खरना
23-03-2018 : संध्या अर्घ्य
24-03-2018 : प्रातः अर्घ्य

इस वर्ष दिनांक 25-03-2018 को ही अष्टमी एवं नवमी तिथि पर रही है. जिस कारण, जिन्हें व्रत करना है वे कन्या भोजन 25 को ही करावें परन्तु अपने अष्टमी व्रत का पारण दिनांक 26-03-2018 को ही करें.

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