फुसरो दुर्गा-मण्डप में माता की झांकी
नवरात्री
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प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी,
तृतीयं चन्द्रघंटेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्,
पंचमं स्क्न्दमातेति 
षष्ठं कात्यायनीति च,
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्,
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः

|| आप सभी को विजयादशमी  की शुभकामनायें ||

आप सभी को टीम phusro.in की तरफ से दशहरा की हार्दिक शुभकामनायें, माँ आप सबकी मनोकामनाओं को पूरा करें. आज के दिन मेले का सपरिवार आनंद उठाएं, हाँ सावधानी का ख़याल रखें, प्रशासन का सहयोग करें ताकि शांतिपूर्ण तरीके से मेला संपन्न हो सके, बच्चों की जेब में नाम व पते की पर्ची रखना न भूले. कम उम्र के बच्चों को ऊँचे झूले इत्यादि से दूर रखें. किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर तुरंत मेले में स्थित जन-सूचना केंद्र से संपर्क करें. अफवाहों से बचें. बिना सोचे समझे किसी भी बात पर यकीन करने से पहले तथ्य की पुष्टि करें.

शुभ – दशहरा

प्रस्तुत है ऐसे विशेष लोगों के लिए जो फुसरो से दूर रह रहे हैं और उन्हें अपने घर की याद आ रही है, तो इस दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर वो भी माता के दर्शन करें, और पुण्य के भागी बने.

फुसरो दुर्गा-मण्डप में माता की झांकी

श्री श्री दुर्गा पूजा समिति फुसरो में हर वर्ष की तरह आयोजित दुर्गा पूजा में, माता की झांकी दिखाई गयी. जिसे हजारीबाग के कलाकारों ने मिलकर पूरा किया. यहाँ पहले भी अलग-अलग थीम पर माता की झांकी दिखाई जाती रही है, विगत कुछ वर्षो पहले इसे बंद कर दिया गया था यह बताते हुए की स्थापित मूर्ती की हिलाना नहीं चाहिए. पर विद्वानों ने यह कह इसका खंडन किया की शोभा के रूप में प्रदर्शित मूर्ती और प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ती में बहुत अंतर होता है. झांकी शोभा से सम्बन्ध रखती है तो उस मूर्ती के हिलने-डुलने से कोई परेशानी नहीं. क्योकि पाठ-पूजा तो प्रतिपदा से ही शुरू हो जाती है, जब की मूर्ती तब तक निर्माणाधीन ही होती है. इसलिए झांकी की परम्परा पुनर्स्थापित हो गयी.


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  • Raj Kumar Pathak

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