कात्यायनी – ६

: : कात्यायनी : :
-: माता के षष्ठम रूप के उपासना का मन्त्र :-
चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दूलवर वाहना,

कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानव घातिनि.

माँ दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है.  उस दिन साधक का मन ‘आज्ञा’ चक्र में स्थित होता है.  योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है.  यह दुर्गा देवताओं के और ऋषियों के कार्यों को सिद्ध करने लिए महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुई महर्षि ने उन्हें अपनी कन्या के स्वरूप पालन पोषण किया साक्षात दुर्गा स्वरूप इस छठी देवी का नाम कात्यायनी पड़ गया.

यह दानवों और असुरों तथा पापी जीवधारियों का नाश करने वाली देवी भी कहलाती है.  वैदिक युग में यह ऋषिमुनियों को कष्ट देने वाले प्राणघातक दानवों को अपने तेज से ही नष्ट कर देती थी.  सांसारिक स्वरूप में यह शेर यानी सिंह पर सवार चार भुजाओं वाली सुसज्जित आभा मंडल युक्त देवी कहलाती है.  इसके बाएं हाथ में कमल और तलवार दाहिने हाथ में स्वस्तिक और आशीर्वाद की मुद्रा अंकित है.

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