गम न करें – २२

गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें.

खुश रहने का एक असूल। खुश रहने का एक असूल यह भी है कि, दूनियाँ को बस इतनी अहमियत दें, जितनी अहमियत की वह हकदार है। इसको इसकी सही दर्जा पर रखें। वह बहुत सी चीजों से जुदा करती है, हादसों को लाती है, गमो की बारिश करती है। जो ऐसी हो, उसका ज्यादा एहतमाम क्यो। इसकी फौतशुदा (ख़त्म होने वाली चीज़) पर रंज क्यों। इसका साफ भी गंदला। इसकी चमक भी पुरफरेब। इसके वादे, सेहरा का शराब। जो इसमे पैदा हूवा मर जाएगा।

इसके सरदार से हसद (जलन) किया जाता है। जो एहसान करने वाला होता है उसे धमकियां दी जाती है। इसके आशिक के हाथ धोखा और फरेब के सिवा कुछ नहीं आता। भाइयों हम ऐसी बस्ती में रहते हैं जहां जुदाई का खबर देने वाला कौआ कांय-कांय करता रहता है, हम दुनियाँ पर रोते हैं, हलाके दुनियाँ में कौन से लोग हैं जो जुदा नहीं होते। वह जब्बार और बडे-बडे लोग कहाँ गये जिन्होने बडे बडे खजाने जमा किये थे। न वह बचे, न उनके खजाने। मिटे नामियों के निशां कैसे कैसे। ज़मीं खा गयी आसमां कैसे-कैसे।

इसलिए, गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें, खुश रहें.

जारी