गम न करें – १९

गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें.

मायूसी- कल्व और रूह को सबसे ज्यादा तुरसुरु (बदमिजाज) बनाती है. लिहाजा अगर हँसना मुस्कुराना चाहते हो तो, मायूसी से लड़िये. फरहत आपको व तमाम लोगों को मिली है. कामयाबी का दरवाजा भी सबके लिए खुला है. अगर आप ये ख्याल करने लगेंगे के हम छोटे-छोटे कामों के लिए पैदा हुए हैं तो जिंदगी में छोटे ही काम कर सकते हैं.

जब आप ये समझें कि हम भी बड़े कामों के लिए बने हैं तो आप में इतनी हिम्मत पैदा हो जायगी जिससे सारी रुकावटें और अड़चने ख़तम हो जायगी. आप अपने बुलंद मकसद और वसी मैदान को पा लेंगे. जिंदगी में इसका तजुर्बा बराबर होता रहता है. मसलन, जो शख्स 100 मीटर दौड़ में हिस्सा लेगा, 100 मीटर दौड़ कर थक जायगा. मगर जो 500 मीटर या 1000 मीटर दौड़ में हिस्सा लेगा वो 1000 मीटर दौड़ कर थकेगा.

लिहाजा अपना मकसद मुत्तैयन कीजिये. बुलंदी मुश्किल से हासिल होती है. बड़ा मकसद ये है, जितना मुमकिन हो लोगों के लिए खैर, भलाई व खूबी का सरचश्मा बनें. ऐसे सूरज बन जाएँ, जिससे रौशनी, मुहब्बत और खैर का उजियारा फैले.

आज जिस तरह का माहौल है, हर तरफ नफरत ही नफरत है. इन्सान समझ नहीं पा रहा है.

लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में.
यहाँ पर सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है.

हमें जहाँ रहना है, जहाँ हमारे बच्चों को रहना है, उस जगह को प्यार, मुहब्बत, भाईचारगी, भलाई, खैर की जगह बनायें. आज की तारीख में इससे बड़ा मकसद-ए-जिंदगी कोई नहीं.