गम न करें – १४

गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें.

दायें बाएं देखिये हर तरफ मुसीबत जदा दिखाई देंगे. हर घर में हंगामा बरपा है. हर रुखसार पर आंसू है. हर वादी में मातम है. आप देखेंगे मुसीबत जदा आप तनहा नहीं. दूसरों के मुसीबत के मुकाबले में आपकी मुसीबत कम है. कितने ही मरीज हैं जो सालो साल से बिस्तर पर करवटें बदल रहे हैं. दर्द से कराहते रहते हैं. कितने जेलों में बंद हैं. सालों से इन्होने सूरज की रौशनी नहीं देखीं. कितनी औरतें हैं जिनके जिगर के टुकड़े नौजवानी में ही छीन लिए गए. कितने हैं जो परेशान हैं, कर्जदार हैं, मुसीबत में हैं. आप इनके जरिये तसल्ली हासिल करें. और अपने आप को मुसीबत का सामना करने का ऐसा आदी बनायें जैसे ऊंट सेहरा में चलने का आदी हो जाता है. जिंदगी के सफ़र में तवाज्जन (संतुलन) बरक़रार रखिये. अपने इर्द-गिर्द और पहले के लोगों के नमूने सामने रखिये, और इनके बीच अपना मुआज्जना (अंदाज) लगाईये तो पता चलेगा, आप इनसे बहुत ज्यादा बेहतर हैं.

आपको हल्का सा झटका लगा है. इस पर अल्लाह (भगवान) का शुक्र अदा करें. जो उसने ले लिया उसपर शबाब की उम्मीद रखिये. और अपने माहौल के लोगों को देख कर तसल्ली हासिल कीजिये. इस सिलसिले में आखिरी नबी हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम अच्छी मिसाल हैं, के आपके सर पर ऊंट का ओझरी रखा गया, कदम जख्मी हुए, चेहरे पर चोटें आयीं, घाटी में बंद किया गया, दरख्तों के पत्ते खाने पड़े, अपना प्यारा शहर मक्का छोड़ना पड़ा, आपका बेटा और अक्सर बेटियां आपके जिंदगी में ही इंतकाल कर गयीं. हजरत मूसा अल्लैहिस्सल्लाम को तकलीफ दी गयी, हजरत ईसा अल्लैहिस्सल्लाम को सूली पर लटकाया गया. श्रीराम जी को बनवास जाना पड़ा, सीता जी को अग्नि परीक्षा देनी पड़ी. इसीलिए ऋषियों ने इस संसार को दुखालय कहा है. दूसरों के मुकाबले हमारा गम कितना कम हैं, फिर भी हम गमगीन हैं?

जारी….