गम न करें – १२

गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें.

ऐ! इन्सान, भूख के बाद शिकमशेरी (पेट भर खाना) है, प्यास के बाद शैराबी है, जागने के बाद नींद है, बीमारी के बाद सेहत है. गुमकर्दा मंजिल पायगा, मुशक्कत उठाने वाला आसानी हासिल करेगा, अँधेरे छंट जायेंगे, रात को बशारत दो सुबह की, जो इसको पहाड़ों की तरफ धकेल देंगे.

गमजादा को बसारत दो, रौशनी की तरह तेजी से आने वाले आसानी की. रस्सी लम्बी पे लम्बी होती जाती है, तो याद रखिये जल्द ही टूट जाएगी. आंसू के साथ मुस्कराहट है, खौफ के बाद अमन, घबराहट के बाद शुकून, मायुशकुन सूरतेहाल के गिरफ्तार, सिर्फ तंगी, इबरत और बदबख्ती का अहसास करते हैं.

इनकी नजर कमरे की दीवारों और दरवाजों तक होती है. इसकी आगे इनकी रसाई नहीं. काश! वो पर्दे के पीछे भी देखते. आप तंगदिल न हों. हालात हमेशा एक जैसे नहीं रहती. जमाना उलटता पलटता रहता है. गर्दिशे दौरां जारी रहती है. मुसीबत के बाद ख़ुशी है, तंगी के बाद आसानी है. लिहाजा गम न करें खुश रहें.