गम न करें – ०९

गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें.

नक्काल न बनें. दूसरों की नक़ल न कीजिये, अपनी शख्सियत को कम न कीजिये, बहुत से लोग हमेश अजाब के शिकार रहते हैं, क्योंकि वो चाहते हैं कि अपनी हरकात, अपनी चाल, आवाज और बात हर चीज में दूसरों की ऐसी नक़ल  करें कि उन्हीं के जैसे होकर रह जाएं, इनकी अपनी पहचान ख़तम हो जाय. तकल्लुफ, जलन, हसद वगैरह इनके रोग हो जाते हैं.

पहला इंसान आदम अलैहिस्सलाम से लेकर आज तक इस बात पर कोई मतभेद नहीं कि शकल व सूरत में दो आदमी बराबर नहीं होते. तब वो अपने अखलाक व सलाहियतों में कैसे बराबर हो सकते हैं? आप अपनी जगह बिलकुल अलग चीज हैं. तारीख में कोई आप जैसा नहीं. न दुनिया में कोई आपका हमशकल है लिहाजा दूसरों की नक़ल क्यों करें.

जैसे आप हैं वैसे ही रहें. आप की अपनी आवाज चाल-ढाल में तब्दीली की जरुरत नहीं. आपका अपना अंदाज, अपना मजा, अपना रंग हैं, हम आपको इसी रंग ढंग में देखना चाहते है. क्योंकि यह आपके लिए कुदरती है, इसी पर हम आपको जानते हैं. लिहाजा आप नक्काल न बने.

जारी….