गम न करें – ८

गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें.

खाली न बैठें, दुनिया में खाली बैठने वाले वह लोग होते हैं, जो अफावाहवाज होते हैं, क्योंकि इनके जेहन व दिमाग बंटे होते हैं. आदमी का बेकार बैठना निहायत ही खतरनाक है. इसका जेहन शैतान के रहने का जगह बन जायगा. वो बेनकेल के ऊँट के मानिंद इधर-उधर भटकेगा. जब आप काम से खाली बैठेंगे तो गम व फ़िक्र उलझने आकर रहेगी. भूतकाल, वर्तमान, भविष्य काल की फाइलें खुल जाएंगी और आप मुश्किल में पड़ जायेंगे.

मेरी आप सबों को राय है कि बेकारी के बदले अच्छे काम शुरू कर दें. बेकार रहना अपने आप को जिन्दा दरगोर करना है. आराम तलबी गफलत का नाम है. लिहाजा जब खाली हों तो अपने खुदा की इबादत (पूजा) करें. किताबों का मुताला (अध्ययन) करें. कुछ लिखें, या ऑफिस/घर की साफ-सफाई करें. दूसरों का कोई काम कर दें. काम के चाकू से फुर्सत को काट दें. दुनिया के हकीम/डॉक्टर इसके बदले पचास फीसदी ख़ुशी की गारंटी देते हैं.

किसानों, मजदूरों और कामगारों को देखें के वो किस तरह चिड़ियों की तरह गाते और खुश रहते हैं. जबकि आप बिस्तर पर पड़े आंसू पोछते रहते हैं. क्योंकि बेकारी ने आपको डस लिया है. इसलिए खालीपन से बहार निकलें गम न करें खुश रहें.

जारी….