गम न करें – ७

गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें.

खैर, भलाई और नेकी का नतीजा अच्छा होता है, लोगों पर अहसान करने वाला सबसे पहले खुद इस अहसान से फायदा उठता है. इसके दिल और जमीर को शुकून का अहसास होता है. लिहाजा जब कोई रंज व गम की बात पेश आये तो दूसरों के साथ कोई नेकी कर दें, कोई अहसान कर दें, आपको शुकून व इत्मीनान हासिल होगा.

किसी मोहताज को दें, किसी मजलूम की मदद करें, किसी को मुसीबत से निकाल दें, किसी भूखे को खिला दें, किसी मरीज से मिलने जाएँ, ख़ुशी और खुश्बख्ती आप पर छा जाएगी. भलाई का काम एक खुशबू के मानिंद हैं. इसके लाने वाला, बेचने वाला, खरीददार सब इससे फायदा उठाते हैं.

एक तवायफ ने प्यास से मर रहे कुत्ते को पानी का एक घूँट पिला दिया और जन्नत की हक़दार बन गयी. लिहाजा ऐसे लोग जिन्हें बदबख्ती, बदनसीबी, बेचैनी और खौफ ने जकड़ रखा है उसे नेकी और भलाई के बाग़ के तरफ आना चाहिए. दूसरों की मदद, अहसान और भलाई करना चाहिए. इससे उसके खुद का गम ख़ुशी में बदल जायगा, और यक़ीनन खुशनसीबी प्राप्त होगी. इसलिए खुश रहें गम न करें.

जारी….