गम न करें – ५

गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें.

लोग आप पर इसीलिए तो नाराज होते हैं कि आप इल्म, सलाहियत, एखलाक या माल में उनसे बढ़ गए हैं, वो आपको माफ़ कर ही नहीं सकते जब तक आपकी सलाहियतें ख़तम न हो जाएँ, और अल्लाह (भगवान) की दी हुई नेमतें आप से छीन न जाएँ. आप सारी अच्छाईयों से खाली न हो जाएँ. आप बेकार और सिफर होकर न रह जाएँ. यही वो चाहते हैं. लिहाजा आपको उनकी बेजा नुक्ता-चीनी और जहिलाना बातों को बर्दाश्त करना होगा.

आप पहाड़ के तरह जम जाईये, ऐसी चट्टान बन जाईये जो अपनी जगह जमी रहती है. जिस पर ओले पड़ते हैं और टूट कर बिखर जाते हैं. अगर आपने लोगों की नुक्ता-चीनी को अहमियत दे दी तो आपकी जिंदगी को गमगीन करने का उनकी मुंह मांगी मुराद पूरी हो जायगी, लिहाजा बेहतर तौर पर दरगुजर कीजिये, इनसे बचिए और इनकी बातों में न आईये. इनकी फजूल बुराइयों से आपका दर्जा बुलंद होगा.

आप किस किस के मुंह को बंद करेंगे. आप उनको उनके हाल पर छोड़ देंगे तो आप नुक्ता-चीनी से बच सकते हैं. यही नहीं आप अपने नेक कामों और भलाईयों में और बढ़ोतरी कर दें अपनी खामियों गलतियों को दूर कर उनकी जुबान में ताला डाल सकते हैं. हाँ अगर आप ये चाहेंगे कि दुनिया के नजदीक तमाम ऐब से बरी हो जाएँ और तमाम लोगों में मकबूल हो जाएं तो ये नामुमकिन है, इसलिए गम न करें-खुश रहें.

जारी….