गम न करें – ३

गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें.

माजी (भूतकाल) में जीना इसके गमो और हादसों को याद करते रहना, और इन पर रंज गम करते रहना, बेवकूफी और हिमाकत है. इससे वर्तमान जिंदगी कमजोर और दुखदायी हो जायगी. माजी के फाइल को लपेट कर रख देना चाहिए. इसे खोला न जाना चाहिए. इसे किसी दरबा में डाल कर बंद कर दिया जाये, क्योंकि जो गुजर गया, वह गुजर गया न उसकी याद उसको लौटा देगी, न कोई रंज वा गम वा फिकर उसे लौटा सकती है. माजी परस्ती के सूरज में गमजदा मत रहिये, जो छूट गया उसके परछाईंयो से पीछा छुड़ाईये, क्योंकि आप दरिया को असल की तरफ, बच्चे को माँ के पेट में, दूध को थन में, आंसू को आँख में वापस नहीं ला सकते. माजी का रोना रोने वालों के बारे में बुजुर्गों का कहना है कि, तुम मुर्दों को कब्रों से मत निकालो. हमारी मुश्किल यह है के हम वर्तमान को छोड़ कर अतीत, और भूतकाल से चिपके हुए हैं. लोग पीछे की तरफ नहीं देखते, हवा आगे को चलती है, पानी आगे को बहता है, कारवां आगे चलता है, यही जिंदगी का कानून है, आप इसकी खिलाफत न करें.

भगवान अल्लाह कहता है, मैंने तुझे जो दिया उसे ले और शुक्र अदा करने वालों में होजा. आपका आज का दिन, रंज व गम, घबराहट और बिना कपट, हसद, जलन से खाली गुजरे. अपने दिल के तख्ती पर एक ही शब्द लिख लें, आज, आज, आज, आज आपको अच्छी और गरम रोटी मिल गयी है तो कल की ठंडी और रुखी सूखी रोटी या आईंदा की रोटी से आपको कोई नुकसान नहीं होगा. जब आज आप ठंडा और मीठा पानी पी लिए तो क्यों गम करें, कल के खारे और गरम पानी पर या आईंदा के सड़े और गरम पानी पर, अगर फौलादी अज्म और इरादे के मालिक हैं तो अपने आप को इस नजरिये के आदि बना लें के मैं बस आज ही जिन्दा रहूँगा. तब आप दिन का हर लम्हा अपने आप को बनाने संवारने, अपनी सलाहियतों को और अपने काम को आगे बढाने के लिए इस्तेमाल करेंगे. इस वक्त आप कहेंगे, आज मैं अपनी जुबान की एखलाकी दुरुस्तगी करूंगा. कोई गलत बात न बोलूँगा, अपनी जुबान से किसी को तकलीफ न पंहुचाउंगा, आज अपने घर की साफ सफाई व तरतीब करूंगा. अपनी चाल, हरकत, बातचीत में तवाज्जुन करूंगा. आज अपने रब का इबादत करूंगा. ग्रन्थ पढूंगा, चुंके सिर्फ आज ही जीवन है इसलिए अपने दिल में भलाई का पौधा लगाऊंगा. बुराई, हसद, जलन, गरूर जैसी सारी बुराईयों के जड़ों को काट दूंगा. सिर्फ आज ही जीना है इसलिए सब को फायदा लाभ पहुंचाऊँगा.

जारी….