स्वच्छता का जन-गण-मन

swakshata

|| स्वच्छता का “जन-गण-मन” ||

गन्दगी से मुक्त हो रही है देखो यह धरा,

जा रहे शौचालयों में छोटा हो या हो बड़ा,

अब हस्त साबुनों से साफ़ कर रहा,

तब स्वास्थ्य और समृद्धि उनके घर रहा,

स्वच्छता का हो रहा निवास जब,

गन्दगी की हो रही निकास तब,

स्वच्छता में ही छिपा विकास है,

तोड़ मत बहुत बड़ी ये आश है,

देश के समस्त गाँव-घर-गली,

स्वच्छता की राह पे है चल पड़ी,

स्वच्छता सुखी का देखो नाम है,

मिल गयी तो इसमें चारो धाम है,

स्वच्छता का हो रहा निवास जब,

बसता है भगवान् और वहीं पे रब,

स्वच्छता से बढ़ रही है शान अब,

हो रहा है देश भी महान तब,

सब जनों में आ रही है जागृति,

अब देश की बदल रही है आकृति,

: राजेश कुमार पाठक
प्रखण्ड सांख्यिकी पर्यवेक्षक
सदर प्रखण्ड – गिरिडीह.