मन्तव्य

महिला विकास एवं सशक्तिकरण

|| महिला विकास एवं सशक्तिकरण || भारत में वैदिक काल से ही यह सर्वस्वीकृत रहा है कि स्त्री पृथ्वी पर नैतिकता, मानवता और सभ्यता के विकास का अपरिमित रही है और तभी से उसे माता, पत्नी और बहन के रूप में आदरणीय माना गया है. “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता …

Right to Vote NOT Right to be elected.
मन्तव्य

चुनने का हक! चुने जाने का नहीं : क्यों?

मेरा मानना है कि जब किसी व्यक्ति में नेतृत्वकर्ता को चुनने की क्षमता विकसित है, ऐसा मान लिया जाता है, तो उसमें नेतृत्व करने की क्षमता से इंकार नहीं किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में जब कोई व्यक्ति को ‘मत देने का संवैधनिक अधिकार’ प्राप्त हो जाता है ठीक …

मन्तव्य

विकास योजना बनाम विकास प्रशासन : एक विश्लेषण

सरकार द्वारा जिन विकास योजनाओं को मूर्त रूप दिया जाता है उन सारी योजनाओं के निर्माण की रूपरेखा तय किये जाने से लेकर उनको पूर्ण होने तक में वित्तीय अनुशासन (FISCAL DISCIPLINE) का ख़याल रखा जाना परमावश्यक है. जितना यह आवश्यक है कि कोई भी विकास योजना निर्धारित समय सीमा …

father in descendant out modal
मन्तव्य

नौकरियों में आरक्षण का फादर इन डिसेंडेंट आऊट मॉडल : एक विकल्प

नौकरियों में आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से कमजोर तबकों के साथ-साथ अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के समूहों को समुन्नत एवं सुदृढ़ करना रहा है. परन्तु भारत में वर्तमान आरक्षण प्रणाली से आरक्षण प्राप्त परिवार अधिक समुन्नत एवं सुदृढ़ हो जाते हैं तो वहीँ दूसरी ओर कई ऐसा परिवार …

मन्तव्य
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खरी-खोटी : भाग-१

वास्तविकता यही है कि राजनीति नैतिकता विहीन हो गयी है. मानता हूँ कि राजनीति में कठोर दलीय अनुशासन राजनीतिक तानेबाने को एकसूत्र में बांधे रखने के लिए जरूरी है पर उस राजनीति में भी कम-से-कम आंतरिक लोकतंत्र हो जो उसी राजनीति के शीर्षस्थ निर्णायकों के अहंवाद पर अंकुश रख सके …