शायरी

बस यूँ ही! – ०२

राम-रहीम, गीता न कुरान लिखूंगा, मैं “सागर” अपनी कलम से सिर्फ हुन्दुस्तान लिखूंगा | दरिया ने गजब का शौक पाल रखा है, कश्ती डुबोकर खुद को मौन रखा है | ऐ कश्ती कहीं और चल, इस “सागर” का कोई किनारा नहीं | झील और तुम्हारी इन झील सी आँखों में …

शायरी
1

फूल

-: फूल :- हुस्न मालिक तमाम फूलों का, इश्क भी है गुलाम फूलों का | एक तबस्सुम से बाँध लेती है, देखिये इन्तेजाम फूलों का | कब्र पे रखिये या के डोली पे, मुस्कुराना है काम फूलों का| हमने खुशबू चुरा के जुल्फों से, ले लिया इन्तेकाम फूलों का| जिंदगी …

शायरी

बस यूँ ही! – ०१

आज-कल-परसों, बीत गए बरसों | आप के वादों का हिसाब नहीं || कितनी मुश्किल में हाय मेरा दिल है | और फुरसत में थे जनाब नहीं || ये तनहाइयाँ, ये यादों के मेले | कभी भीड़ में, कभी हम अकेले || नींद आई नहीं, फिर भी सोया रहा | मैं …

शायरी

प्यार की शुरुआत

| | प्यार की शुरुआत | | है अगर हिम्मत तो जाकर बात कर, वर्ना बस एक फूल से शुरुआत कर. झुक गई नजरें अगर तो जान ले, हाँ है उसकी और न सवालात कर. है यकीं वो मान जायेगी मगर, ‘राज’ की ये बात है मुलाकात कर. – शैलेश …

शायरी

अर्ज किया है

चंद शेर… न जाने क्या धुंध बगल-ए-गिरेबां में छाता जाता है | शक के कोहरे में हर शख्स धुंधला नज़र आता है || उसके आंसू भी न किसी ने पोछे होंगे, हुस्न जब रो रहा होगा | कसीदे भींग गए होंगे, सहर तब हो रहा होगा || ये तो शाख …