कविता

यह समर आज अंतिम होगा

यह समर आज अंतिम होगा ………………………………. यह समर आज अंतिम होगा मत सोच कि यह मद्धिम होगा मिट जाएगा अब सब अंतर हर भय होगा अब छू-मंतर हर दिशा आज संवाद करे हर क्षण हर पल अनुनाद भरे बिछड़े का होगा आज मिलन बिन ब्याही बने नहीं दुल्हन अब नहीं …

कविता

आओ एक दीप जला जाओ!

आओ एक दीप जला जाओ ………………………………. तुम बनो आज अब उद्दीपक तुम हो तो जल पाए दीपक तुम हो तो दूर अंधेरा हो जगमग प्रकाश से डेरा हो मैं तुझे ही दीपक मान रहा तू सदा जले यह ठान रहा तुझमें घी बाती भरता हूँ अब हो बयार ना डरता …

शायरी

बस यूँ ही! – ०२

राम-रहीम, गीता न कुरान लिखूंगा, मैं “सागर” अपनी कलम से सिर्फ हुन्दुस्तान लिखूंगा | दरिया ने गजब का शौक पाल रखा है, कश्ती डुबोकर खुद को मौन रखा है | ऐ कश्ती कहीं और चल, इस “सागर” का कोई किनारा नहीं | झील और तुम्हारी इन झील सी आँखों में …

शायरी
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फूल

-: फूल :- हुस्न मालिक तमाम फूलों का, इश्क भी है गुलाम फूलों का | एक तबस्सुम से बाँध लेती है, देखिये इन्तेजाम फूलों का | कब्र पे रखिये या के डोली पे, मुस्कुराना है काम फूलों का| हमने खुशबू चुरा के जुल्फों से, ले लिया इन्तेकाम फूलों का| जिंदगी …

कविता

हिन्दुस्तान (झेलम तट, राजबाग – 07 जून 1969)

|| हिंदुस्तान || (झेलम तट स्थित राजबाग से 07 जून 1969 को) कितना महान प्यारा हिन्दुस्तान है | नागराज कि ऊँचाई देशाभिमान है || कश्मीर भारत वर्ष का शाश्वत ईमान है | इस पर न्योछावर तन-मन अनमोल प्राण है || पावन पवित्र नदियाँ उपवन हरे भरे हैं | भारत के …

गीत

दिल टूट के गिरा यूँ!

|| दिल टूट के गिरा यूँ ||   दिल टूट के गिरा यूँ, मिट्टी का हो खिलौना | फूलों से भी था नाजुक, काँटा बना बिछौना ||   क्यों अपने हुए पराये, गम ये बड़ा सताए | वो तो हँस रहे हैं, मुझको ही क्यों रुलाये || थम जा ऐ! …

शायरी

बस यूँ ही! – ०१

आज-कल-परसों, बीत गए बरसों | आप के वादों का हिसाब नहीं || कितनी मुश्किल में हाय मेरा दिल है | और फुरसत में थे जनाब नहीं || ये तनहाइयाँ, ये यादों के मेले | कभी भीड़ में, कभी हम अकेले || नींद आई नहीं, फिर भी सोया रहा | मैं …

अछूत, राजेश पाठक की कहानी
कहानी
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अछूत – ०३

इसके पहले की कहानी पढ़ें: नजर में असर होता है. नजर टेढ़ी हो, तो उसके अलग और सीधी हो, तो अलग मायने निकल आते हैं. आपकी टेढ़ी नजरें मुझे भले अछूत मानती हों, पर नजरें सीधी कर दें, तो वहीं मेरा सौम्य चेहरा बरबस आपको अपना ही पुत्र मान लेने …

अछूत, राजेश पाठक की कहानी
कहानी
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अछूत – ०२

इससे पहले की कहानी पढ़ें यह कितना आश्चर्य भरा है कि गंदगी तो सभी पैदा करनेवाले होते हैं, पर कुछ ही होते हैं, जो उस पैदा की गयी गंदगी को स्वयं साफ करते हैं और बहुसंख्यक ऐसे होते हैं, जो उन मजबूर लोगों की तलाश में जुट जाते हैं, जो …

अछूत, राजेश पाठक की कहानी
कहानी
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अछूत – ०१

गाँव के कुछ लोग रमेश के पिता के बारे में जानने के इच्छुक रहते थे, उन्हें पता था कि जब से वे गाँव के स्कूल से स्थानांतरित हो, दूर शहर के स्कूल में चले गए हैं, तब से ही गाँव के स्कूलों में शिक्षा की स्थिति उतनी अच्छी नहीं रह …