हजारीबाग में कवि गोष्ठि और परिचर्चा

राष्ट्रीय कवि संगम के रामगढ़ जिला के सदस्यों द्वारा हजारीबाग में कवि गोष्ठि और परिचर्चा

राष्ट्रीय कवि संगम ,झारखंड के महासचिव श्री सरोज झा ,रामगढ़ जिला के संयोजक श्री राज रामगढ़ी ,रामगढ़ जिला के अध्यक्ष श्री राकेश नाजुक की उपस्थिति मे राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, हजारीबाग में राष्ट्रीय कवि संगम की हजारीबाग की गोष्ठी सह परिचर्चा का आयोजन किया गया ! इस गोष्ठि में रामगढ़ जिला के वरिष्ठ कथाकार श्री चंद्रिका ठाकुर देशदीप की गरिमायी उपस्थिति से माहौल बहुत सुंदर बन गया !

इस अवसर पर हजारीबाग के शशि बाला जी को उनकी पुस्तक के लिए सम्मानित किया गया,,गोष्ठी में काब्य पाठ करने वालो में पूनम त्रिवेदी, शम्पा बाला, अनिता महतो, अमित मिश्रा आदि शामिल थे, राकेश नाजुक ने अपने गीत से सबको मोहित किया वही श्री देशदीप ,श्री राज रामगढ़ी ने अपनी रचनाओ से सबका मन जीत लिया, सरोज झा ने अपनी रूहानी गजलों से सबको मोहित कर दिया ,,,गोष्ठि के बाद सर्वाम्मति से मोना बग्गा जी को को हजारीबाग जिला अध्यक्ष और अनंत ज्ञान को जिला महासचिव चुना गया !
इस अवसर पर महाविद्यालय के व्याख्याता डॉ मनोज कुमार ने भी अपने विचार रखे ,!

विष्णुगढ़ में हुआ कवि सम्मेलन : राकेश नाजुक हुए सम्मानित

उत्सव : मांडू विधायक जयप्रकाश भाई पटेल जी का जन्मदिन का अवसर
*********
विष्णुगढ़ के प्लस टू इंटर कॉलेज में कवियत्री और समाजसेविका श्रीमती अनिता महतो जी के द्वारा काव्यवर्षा नाम से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया ! ये काव्यवर्षा मांडू के विधायक श्री जयप्रकाश भाई पटेल जी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर किया गया ! आयोजन में बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता ,मूक नाटक, नृत्य प्रतियोगिता के साथ साथ कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया !

आयोजन समिति के सदस्यों ने विधायक जी का स्वागत बुके देकर और माला पहनाकर किया ! इस शुभअवसर पर रामगढ़ जिला के उभरते गीतकार राकेश नाजुक ने अपने गीतों से दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया,,राकेश के गीत ख्वाब है प्रीत है गीत संगीत है को लोग साथ साथ पढ़ रहे थे ! राकेश नाजुक ने विधायक जी की माँ के सम्मान में एक मुक्तक * माँ की आंखों में जब भी उतरता हूँ मैं ,,खौफ से एक पल भी न डरता हूँ मैं * पढ़कर सबका मन जीत लिया ,,कार्यक्रम का समापन विधायक जी के हाथों केक काटकर हुआ ! साथ ही सभी कवियों के साथ साथ राकेश नाजुक जी को विधायक जी ने मोमेंटो और उपहार देकर सम्मानित किया !

बाहर से आए कवियों में अनन्त महेंद्र,अजय धुनि,रेणु मिश्रा,अशोक गुप्ता ,पुष्कर राज,अनंत ज्ञान, नितेश सागर,रविन्द्र रवि ने भी अपनी रचनाओ से शमा बांधा,सभी ने अनिता महतो जी के द्वारा उठाए गए इस कदम की खूब प्रंशसा की !

सोच की आजादी

हमारा सम्पूर्ण जीवन हमारे विचारों के द्वारा नियंत्रित होता है | हमारे जैसे विचार होते हैं , हमारी जैसी सोच होती है ; हमारी जैसी चिंतन धारा होती है ; वैसी ही हमारी प्रवृति होती है | जैसी प्रवृति होगी व्यवहार ठीक उसी के अनुकूल होगा ;व्यवहार के अनुरूप ही हमारे जीवन का निर्माण होता है | निष्कर्षतः मनुष्य का समग्र जीवन उसकी सोच व विचारधाराओं के गीर्द ही घूमती है | अब देखने की जरूरत यह है कि व्यक्ति की विचारधारा कैसी है ? यदि व्यक्ति सकारात्मक विचारों का स्वामी है तो उसके जीवन में पवित्रता स्थाई रूप से रहेगी | विचारधार दूषित है तो जीवन भी दूषित हो जाता है | नदी किनारे एक कुंभकार मिट्टी को आकार दे रहा था | वह मिट्टी से चिलम बना रहा था | अचानक उसके विचार बदले और उसने चिलम की जगह घड़ा बनाना शुरू कर दिया | पास बैठी कुम्हारिन ने पूछा मिट्टी का आकार क्यों बदल गया ? कुम्हार ने कहा कि बस यूँ ही मेरा विचार बदल गया | माटी ने तत्तक्षण कहा तुम्हारे विचार क्या बदले मेरा तो संसार ही बदल गया |

वस्तुतः किसी व्यक्ति के जीवन की ऊँचाई उसके नजरिये की ऊँचाई पर निर्भर करती है | यदि सोच स्वस्थ है तो व्यक्ति का जीवन मानवता का आदर्श बन जाता है और सोच यदि नकारात्मक है तो पूरी मानव जाति के लिए कलंक बन जाता है हम चाहें तो अच्छे नजरिये के बल पर अपने भीतर सकारात्मकता को प्रकट कर अपने जीवन में अहोभाव का अलग आनंद उत्पन्न कर अभिनव उल्लास की अभिव्यक्ति कर सकते हैं |

सोच तीन प्रकार की मानी गई है – भौतिक सोच व्यवहारिक सोच व  आध्यात्मिक सोच |

भौतिक सोच वाले व्यक्ति भोगवादी मनोवृति से ग्रसित होने के कारण इनके जीवन में दुखों का अम्बार लग जाता है | भौतिक सोच मनुष्य की चिंतनधारा को संकीर्ण बना देती है | ऐसे लोग स्वार्थी मनोवृति के धारक बन जाते हैं,

व्यावहारिक सोच में जीने वाले लोग इस बात के प्रति सजग रहते हैं कि उनके किसी बर्ताव से सामने वाला आहत न हो बल्कि विशेष रूप से प्रभावित हो |

सर्वश्रेष्ठ सोच अध्यात्मिक सोच को माना गया है | अध्यात्मिक सोच से प्रभावित व्यक्ति बुराई में भी अच्छाई ढूँढ लेता है | वह दूसरों पर दोषारोपण की जगह स्वयं को उस हालात में स्थापित कर सूक्ष्मता से विचार करता है | राम और रावण के अंतर का कारण क्या था राम अध्यात्मिक सोच से भरे थे , उनका त्यागमय और मार्यादित जीवन ही उन्हें ईश्वरत्व की महिमा से मंडित कर दिया | जबकि रावण की भौतिक सोच ही उसे संसार में घृणा का पात्र बना दिया | यह अतीत में राम और रावण की घटना ही नहीं आज भी एसा ही होता है |

सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति अपनी चिंतनधारा व प्रर्वृति के बल पर अपने जीवन का उत्कर्ष कर लेता है और जीवन को मंदिर बना लेता है |

प्रभावशाली व ऐतिहासिक व्यक्ति वही माना गया है जिसकी सोच स्वतंत्र रही है | जो किसी की थोपी गई विचारधारा को अपने जीवन का मार्ग नहीं बनाता बल्कि अपने जीवन की इमारत की भव्यता स्वयं गढ़ता है और अखंड विश्वास के साथ लक्ष्य को प्राप्त कर इतिहास रचता है | कहा भी गया है सुने सबकी, करें वही, जिसकी अनुमति आपकी आत्मा देती हो | आत्मा की आवाज सुन कर अपने जीवन को गति देनें वाला प्राणी कभी भी असफलता का न तो मुख देखता है न ही हताशा, निराशा व अवसाद का शिकार होता है , प्रारब्ध को ही अपने जीवन का श्रेष्ठ परिणाम समझ प्रफुल्लित मन से स्वीकार कर लेता है | हाँ , जीवन पथ संघर्ष व चुनौतियों भरे अवश्य होंगे किन्तु आजाद चिंतन वाले व्यक्ति कभी विचलित नहीं होते | स्वतंत्र चिंतन, मनन मंथन ही श्रेष्ठ व सत्य मार्ग दिखलाने का कार्य करता है | स्वतंत्र व सम्यक चिंतन से जुड़ने की कोशिश हमारे जीवन में सार्थक उपलब्धियाँ अर्जित कराता है हमारे सफल संतुष्ट जीवन का मूलाधार हमारी सोच की धुरी पर केन्द्रित है |

कुछ नया करने का साहस और जुनून आजाद ख्याल की टोलियों में पाए जाने वाले कुछ चुनिंदे लोगों में ही होते हैं , ऐसे लोग न आग से खेलने में घबराते हैं न ही झुलस जाने के परिणाम की चिंता करते हैं | निश्कर्षतः ऐसे व्यक्ति जमाने की परवाह किए बिना एक ऐसी लकीर खींच डालते हैं जिसे भावी पीढ़ी मिटा तो नहीं पाती बल्कि उस पथ की अनुगामिनी अवश्य हो जाती है | ऐसे ही विरले लोग खुले आसमान में ऊँची उड़ान तय करते हैं , सपनों में मनचाहा रंग भरते हैं और धरती को एक चमत्कार भेंट स्वरूप सौंप देते हैं | हमारी धरती के जितने भी आविष्कर्ता हुए जिनकी खोजों की बदौलत मानव सम्यता ने सुई से लेकर चाँद तक के सफर की यात्रा तय की है , निःसंदेह उनके मन की उड़ान , आसमान को छूने के लिए फड़फडाते पंखों ने कभी विश्राम नहीं लिया होगा , ऐसे ही आजाद लोग दुनिया की तस्वीर बदलने का ज़ज्बा रखते हैं |

अंततः विलक्षण व्यक्ति सत चिंतन व स्वतंत्र सोंच की बुनियाद पर ही अपने जीवन के साथ संसार में भी व्यापक परिवर्तन का निमित माना गया है | कहते हैं कि सोच तेरी बदली तो नजारा बदल गया, किश्ती ने बदला रूप तो किनारा बदल गया |

ओम प्रकाश यादव

 

 

 

 

 

लेखक डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल
झुमरीतिलैया, कोडरमा, के प्राचार्य हैं.

अथ यू.पी.-बिहार उपचुनाव कथा भाषा टीका

मैं घोषित राष्ट्रवादी हूँ। और भाजपा मेरी आशाओं के केंद्र में है जिसका फिलहाल मेरे पास कोई विकल्प उपलब्ध नही है। समान नागरिक संहिता, धारा 370 का निर्मूलन, राम मंदिर निर्माण, हिंदुत्व के पक्ष में खड़े होने का दमखम, छद्म पंथनिरपेक्षता के नाटक से दूरी, लम्बी अवधि की राष्ट्रहित की योजनाओं पर चिंतन और उनका कार्यान्वयन, सुरक्षित सीमाएं, देश के दुश्मनों को मुँहतोड़ जवाब एवं जबरन देश में घुस आये घुसपैठियों की वापसी का प्रयास आदि आदि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें देर-सबेर भाजपा द्वारा ही अंजाम तक पहुंचाना मुमकिन है। शेष से तो उम्मीद करना ही व्यर्थ है।

अतः गोरखपुर में भाजपा की हार से आहत तो हूँ परन्तु विक्षिप्त नही हूँ कि संगठन को अनाप-शनाप बकूँ। यहाँ जातिवादिता ने हिंदुओं को दो फांड़ में बांट दिया है। अन्यथा शेष सब यथावत है। नेतृत्व अवश्य मंथन कर रहा होगा। मुझे उन पर विश्वास है। अपनी आप जानें। मेरा उत्साह और धैर्य यथावत है।उस पर रत्ती भर भी फ़र्क़ नही पड़ा है। 2019 के बड़े युद्ध सेे पहले सम्भवतः यह झटका भी जरूरी ही था। हम फिर लड़ेंगे और जीतेंगे।

एक बात और पढिये, बोलिये और गुनिये भी, एक मशहूर किस्सा है। एक बार किसी राज्य के राजा ने एक भिखारिन से शादी कर ली। राजा भिखारिन से अत्यंत प्रेम करता था। उसने उसके लिए दासियों की फौज खड़ी कर दी। खाने के लिए रोज 56 पकवान परोसे जाने लगे। सोने के लिए शाही बिछौना लगाया गया। गद्देदार पलँग। हर सुख सुविधा।

लेकिन कुछ दिनों में रानी साहिबा बीमार पड़ने लगी। शरीर से दुबली होने लगी। धीरे धीरे रानी साहिबा ऐसी बीमार पड़ी की बिस्तर पकड़ लिया। राजा ने चिंतित होकर एक से बढ़कर एक वैद्य बुलाए, लेकिन रानी की तबियत ठीक न हो सकी। थक हारकर राजा ने एलान कर दिया जो रानी को ठीक करेगा, उसे मुँह मांगा पुरुस्कार दिया जाएगा। एलान सुनते ही एक बूढ़ा राजा के पास इलाज हेतु पहुंचा। पूरी बात सुनने के बाद बूढ़े ने कहा- महाराज रानी साहिबा का शाही बिछौना हटाकर जमीन पर चटाई लगाई जाए। दासियों को तुरन्त हटा दिया जाए। रानी साहिबा को बासी और बचा खुचा खाना दिया जाए। 7 दिनों बाद में फिर आऊँगा। राजा को बूढ़े की बात सुन बड़ा अचरज़ हुआ। किंतु वैसा ही किआ गया।  7 दिनों के अंदर ही रानी साहिबा टनटनाट होकर , पूर्ण स्वस्थ्य हो गई।

मित्रो फूलपुर, गोरखपुर में भी यही हुआ। योगी ने ताबड़तोड़ काम शुरु किए। भृष्टाचार कम कर दिया। बोर्ड परीक्षा की नकल रोक दी। 80 % सड़को के गड्ढे भर दिए। 14 सालो बाद मोहर्रम बिना हिंसा के बना। होली बिना डर के साये में धूमधाम से मनी। दिवाली पर पहली बार अयोध्या जगमगाया। जंगलराज से मुक्ति मिली। अपराधी बिलो में छुप गए। कैराना में हिन्दू वापसी हुई। योगी जी ने सिर्फ 1 साल में बहुत कुछ दे दिया।बस यही योगी जी आपने गलती कर दी। जिस जनता को 14 साल से भृष्टाचार की आदत पड़ी हो। बच्चों को नकल से पास कराकर भविष्य बनाने की आदत हो। सड़क के गड्डो पर उछलने की आदत लगी हो। जिन्हें मोहर्रम पर हिंसा में अपने घर जलवाने, दुकान तुड़वाने में चैन मिलता हो। डर के साए में दुर्गा विसर्जन, होली की आदत हो। दिवाली पर 14 सालो से सूनी अयोध्या देखने की आदत पड़ी हो। और सबसे बढ़कर योगी जी जिन लोगो को जातियों में बंटकर खुद का, धर्म का, देश का बंटाधार करने की चुल पड़ गई हो। वे लोग तो आपके कामो के बाद बीमार पड़ेंगे ही। नतीजा वोट डालने घरों से ही न निकले। और जो निकले वो अपनी ही बर्बादी की बटन दबा आए। अतः योगी जी राजनीति का लंबा अनुभव होने के नाते, आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है, ये राजनीति है। धीरे धीरे बदलाव लाइये। यहां हिन्दुओ को एकदम से ‘घी’ हजम नही होता। उड़ेल दिया फूलपुर, गोरखपुर में। बाकी हम राष्ट्रवादी हमेशा की तरह आपके साथ है।

देश मना रहा वूमन डे

वाह रे दुनिया तेरी कहानी
मेरा दुख और मेरी जवानी
रो-रो कर जगती मे राते
यही हकीकत हे जग जाने।

वाह रे दुनिया पोस्ट बनाया
नारी को शक्ति दिखलाया
कह गए झूठ अपनेपन की
और न जाने कितने सपने दिखलाया।

अब भी मै अभियान बनी हूँ,
अब भी झूठी शान बनी हूँ,
तुमने हर वक्त जो कुचला है,
उस पल से अंजान रही हूँ.

वाह रे दुनिया तेरी कहानी,
तुमने ये त्योहार मनाया,
तुमने खबर हजार बनाया
कभी मे लुटि बीच सड़कों में,
तो कभी अपनो ने धमकाया.

सोचा था मैं साथ चलूंगी,
हक अपना अब बांट चलूंगी,
पर तुमने कुछ और दिखाया,
क्यो हकीकत को झुठलाया?

नारी का सम्मान करो,
उनके हक की पहचान करो
न बातो से कुछ होना है,
अब सभी को एकजुट होना है।

अब न कोई सवाल उठेगा….
न इंसाफ का दरवाजा पिटेगा….
जो कुचलने हमें आगे आये….
उसे नारी शक्ति का रुप दिखेगा…. ”

पूरा भारत पोस्ट घुमाया
आखिर क्यों नारी को
अच्छी “बहु” नहीं बताया.

अब आगे सोचने का काम आप सभी का है,
महिला दिवस के अवसर पर सभी को बधाई।

गम न करें – १७

बे-मौके सब शरीफ

मतलब यह नहीं कि यह सीधे तौर पर आपके बारे में हैं. मतलब यह है कि यह उन सभी के बारे में है जो मौके पर शरीफ बनने का ढोंग रचते हैं और समय आने पर दूसरों को आगे कर खुद उनका समर्थन अथवा उनके साथ अथवा उनके पीछे चलने को तुरंत तैयार हो जाते हैं. इसलिए बे-मौके सब शरीफ से हमारा तात्पर्य यह है कि मौका आने पर अपनी शराफत दिखाने से कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता, पर यह कि सिर्फ ख़बरों में आने के लिए या कि सिर्फ दिखावे के लिए.

आप कथनी और करनी में जितना कम अंतर रख पाते हैं उतने ही आप चरित्रवान होते हैं, यह नहीं कि आप चरित्रवान तो हों पर अवसर आने पर आप खिसक लें. यहाँ मेरा यह सब लिखना आप में से बहुतों को खल रहा होगा पर क्या करें तारीफ बनती भी होगी तो आप इसे मेरा दंभ न समझ ले इसलिए यह साफ करना जरुरी है कि मै इस लेख के माध्यम से आप सब को कुंठित नहीं करना चाहता हूँ. मेरा उद्देश्य बस इतना है कि हम अपने चरित्र के स्तर को उस ऊँचाई तक ले जा सकें जहाँ हम सचमुच ही अपने कथनी और करनी अंतर नहीं कर सकें अर्थात जैसा भी हम सोचें अथवा कहें उसपर चल भी सकें.

थोड़ी देर के लिए यह लेख आपको गप्पबाजी लग सकती है पर आप जरा ध्यान देकर इन बातों को सोचेंगे तो यही पाएंगे कि हम में से कितने ही अवसर आने पर किसी जन-कल्याणकारी कार्यों के लिए समय निकल पाते हैं? अधिकतर का उत्तर यही होगा कि अपने काम से फुर्सत मिले तभी ना. सही भी है, पर यह तभी संभव हो पाता है जब आप समय निकालना चाहें. क्या आप अपने परिवार के लिए समय नहीं निकाल पाते, क्या आप अपने किसी निजी कार्य के लिए समय नहीं निकाल पाते यदि आपका उत्तर हाँ है तो समस्या यह है कि समय आपको निकालना होता है इससे पहले कि समय आपको निकाल दे.

महत्वपूर्ण यह नहीं कि आप किन बातों अथवा कार्यों के लिए समय निकाल पाते हैं अपितु यह कि आप किन बातों अथवा कार्यों के लिए स्वयं को अनुकूल पाते हैं. यदि नहीं तो फिर आप चाहें कि उक्त कार्यों के लिए भी आप समय निकालें. क्योंकि यह आपके ही हाथों में होता है पूर्णरुपेण. आप टालमटोल के शिकार महसूस होते हैं यदि आप चाह कर भी समय प्रबंधन नहीं कर पाते और इसका ठीकरा दूसरों के सर फोड़ने को उद्दत रहते हैं.

आईये इस उधेड़बुन से निकालें जीवन बहुत खुबसूरत है, इसका आनंद लीजिये, नहीं समझ आ रहा हो तो किसी मनोवैज्ञानिक से जरुर मिलें, आप पागल नहीं हैं पर इस स्थिति में अधिक देर रहना आपको जल्द ही उस श्रेणी में ला खड़ा कर सकता है, इसलिए कि कही और अधिक देर न हो जाये, अपने आपको, अपने लिए कुछ ऐसा करें जिससे आपके मन, आत्मा और चित्त को प्रसन्नता होती हो, साथ ही दूसरों की प्रसन्नता का कारण हो ऐसे कृत्यों में स्वयं को उलझाएँ.

इसलिए गम न करें खुश रहें.

गम न करें – १६

दुनिया में आगर आप मोहताज या गमगीन हों या मर्ज लाहक हो जाए या आपका कोई हक मार ले या कोई जुल्म आप पर हो, तो आप हमेशा रहने वाली जगह जन्नत को याद कर लें. जब आप ऐसा करने लगेंगे और जन्नत को पाने के लिए नेक काम करने लगेंगे तो आपका नुकसान फायदे में बदल जायगा. मुसीबतें अतियात साबित होंगी.

सबसे अकलमन्द वही है जो आखरत के लिए काम करे, क्योंकि आखरत ही बेहतर और बाक़ी रहने वाली है. मख्लुकात (प्राणियों) में सबसे अहमक वो है जो दुनिया को अपना घर और आरामगाह और उम्मीदों का मरकज समझते हैं. इसीलिए जब मुसीबत पड़ती है तो बहुत घबरा जाते हैं. क्योंकि वो दुनिया की जिंदगी को ही सब कुछ समझ बैठे हैं. दुनिया की जिंदगी मुख्त्सर है. मरने के बाद की जिंदगी हमेशा और कायम रहने वाली है.

चिन्तन – ०३

सुप्रभात, आज का दिन मंगलमय हो एवं उमंग, सार्थक चिंतन, हर्षोल्लास में व्यतीत हो।

देश की आजादी सही मायने में तभी चरितार्थ हो सकती है जब देश मे लिंग भेद के नाम पर वर्गीकरण न हो, महिलाओं, बच्चों के अधिकारों की रक्षा हो व सम्मान मिले, शिक्षा व आजादी मिले। जीवन की दिशा तय करने का अधिकार मिले, अपने रुचि के मुताबिक अपने कैरियर को संवारने का मौका मिले, आजाद भारत में किसी भी महिला/बच्चों को अपना कैरियर चुनने का अधिकार भारतीय संविधान के मूल में वर्णित है जिस पर सारगर्भित अमल की जा सके। जीवन में महिलाएं / बच्चे इतना सक्षम बनें की अपनी जिंदगी की जरूरतों को खुद पूरा कर सकें, परजीवी प्रवृति त्यागकर आत्मनिर्भर, स्वाबलंबन की ओर उन्मुख हों।

महिलाएं/बच्चे इसके लिये माता-पिता, परिवार पर आश्रित न रहें, बल्कि अपना खुद का अस्तित्व बनायें। किसी के ऊपर आश्रित रहने से जरूरतें पूरी होती हैं, सपने नहीं। जीवन का आत्मस्वाभिमान सपनों को पंख दिये जाने में निहित है। खुद के सपनों को साकार बनाने के लिये पतंग की डोर अपने हाथों में रखनी जरूरी है। 21 वी सदी में महिलाओं, बच्चों को पितृसत्तात्मक व्यवस्था से निकलकर खुद आत्मनिर्भरता की ओर उन्मुख होने पर बल दिये जाने की जरूरत है, ताकि भारत उन्नति के बहुआयामी आयाम को छू पायें।

जिस देश की महिलाएं, बहनें, पत्नियाँ, माँ, बच्चे ताकतवर होंगे, वह देश समृद्धता की ओर उन्मुख होगा, अतुल्यता की ओर बढ़ेगा। देश के संविधान में लिंग भेद के नाम पर असमानता को दूर किये जाने पर बल, भातृत्व भावना को प्रबल किये जाने पर जोर, विश्व बंधुत्व की भावना पर बल आदि को तवज्जो दिये जाने की जरूरत है। किसी देश की संविधान से वहाँ के नागरिकजनों को मार्गदर्शन प्राप्त होता है।  जय हिंद, जय भारत।

गम न करें – १५

कुछ लोग होते हैं, जिनके जेहन में, बिस्तर पर लेटे हुए आलमी जंग (world war) होती रहती है. इन्हें सुगर व ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी हो जाती है. वाकयात से वो झुलसते रहते हैं. कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई इन्हें गुस्सा आया, बारिश क्या हुई वो दहाड़ने लगे, करेंसी की कीमत कम हुई वो परेशान हो गए. इस तरह वो हमेशा मलाल व कलक की हालत में रहते हैं. हर आवाज को अपने ही खिलाफ समझते हैं. मेरा मशवरा है कि सारे जहाँ का दर्द लेकर मत फिरिए, हादसात जमीन में हो, आपके आंतो में न हो, बाज लोगों का दिल स्पंज होता है. जो हर तरह की गपबाजियों, अफवाहों को पीता रहता है. छोटी-छोटी बातों पर परेशान, मामूली ख़ुशी पर दिल बहार निकल जाता है. ऐसा दिल जिसका होता है उसकी शख्सियत ख़तम हो जाती है.

अहले हक की यह कैफियत होती है, इबरतें व नसीहतें इनके इमान में बढ़ोत्तरी करती हैं. हादसात और ट्रेजडियों के सामने तो एक बहादुर दिल ही ठहर सकता है. जो गैरतमंद व खुद्दार है वो अल्लाह के मदद व करम के मुश्तहक हैं. आप नेक काम करते रहिये, आपको कभी परेशान होने की जरुरत नहीं, क्योंकि अल्लाह आपके साथ है.

राष्ट्रीय कवि संगम धनबाद जिला इकाई द्वारा राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन

दिनांक 21 जनवरी 2018 को आई.एस.एम. धनबाद में राष्ट्रीय कवि संगम धनबाद जिला इकाई द्वारा राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें झारखंड के कुल 108 कवि गणों ने भाग लिया. राष्ट्रीय कवि संगम प्रायः ही ऐसे आयोजनों द्वारा राष्ट्र जागरण का पावन कार्य करता है. युवा और विशेष कर नवोदित कवियों की काव्य शक्ति के बल प्रदान कर उनको संयोजित करने का यह कार्य वास्तविकता में एक सराहनीय कार्य है. इसी क्रम में एक और कड़ी जोड़ते हुए विगत 21 जनवरी को धनबाद में एक और आयोजन किया गया.

इस कवि सम्मलेन में बोकारो जिला इकाई के सम्मानित कवियो ने भी भाग लिया. आयोजन की समाप्ति पर विभिन्न कवियों को उनकी प्रस्तुति एवं रचनाओं के लिए सम्मानित भी किया गया. सम्मेलन में हास्य , श्रृंगार, और वीर रस की कविताओं के साथ साथ देश भक्ति, समाजिक, शिक्षा, बेटी बचाओ और जनजागरण जैसे महत्वपूर्ण और गंभीर मुद्दों पर आधारित कविताओं का पाठ विभिन्न कवियों द्वारा किया गया. राष्ट्रीय कवि संगम झारखण्ड इकाई के प्रांतीय सचिव राजेश पाठक की प्रस्तुति “घर न चाहिए न कोई द्वार चाहिए, देश को ऊंचाईयों का ज्वार चाहिए” कविता को काफी सराहना मिली.

राष्ट्रीय कवि संगम बोकारो जिला इकाई के अध्यक्ष डॉ. श्याम कुमार भारती की “टूटे रिश्तों में जान बाकी हो अगर, प्यार से सींच कर अब हरा कीजिये” आपसी, पारिवारिक और सामाजिक संबंधों पर आधारित कविता काफी सराही गई. बताते चलें कि डॉ. श्याम कुमार भारती राष्ट्रीय कवि संगम के बोकारो इकाई में अध्यक्ष पद पर रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के क्रम को आगे बढाते हुए अपने आस-पास के क्षेत्रों में नवीन कवियों को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य भी कर रहे हैं. फुसरो से इस कवि सम्मलेन में भाग लेने वाले अन्य कवियों में सुनील सिंह, नरेन्द्र प्रताप सिंह, विद्या भूषण मिश्रा एवं टी. डी. नायक प्रमुख थे.