कस्तूरबा श्री विद्या निकेतन ढोरी में प्राचार्या की विदाई

कस्तूरबा श्री विद्या निकेतन ढोरी में प्रधानाचार्या ममता श्रीवास्तव के विदाई समारोह का आयोजन बुधवार को किया गया। इस आयोजन का शुभारंभ विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति की कार्यकारी अध्यक्षा डॉ. शकुंतला कुमार ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

श्रीमती कुमार ने कहा कि प्रधानाचार्या इस विद्यालय में 1991 से 2018 तक बहनों को अनुशासन और रचनात्मक तथा सृजनात्मक ज्ञान प्रदान करती रही। इनके मार्ग दर्शन में विद्यालय दिन दूनी रात चैगुनी विकास किया।

प्रभारी प्रधानाचार्या ने कहा कि विद्यालय की एक-एक ईट प्रधानाचार्या की कौशल तथा प्रबंधन की गाथा गाता है। विद्यालय के बहनों ने स्वागत गीत, नृत्य, विदाई गीत इत्यादि सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

विद्यालय की प्रभारी श्रीमती पुष्पा जी ने प्रधानाचार्या ममता श्रीवास्तव के सम्पूर्ण कार्यकाल का वृत्त प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम को संपन्न कराने में आचार्या विभा सिंह, अनुपमा, अलका, सुनीता, शैलबाला , रीता , अनिल झा तथा समस्त आचार्य एवं कर्मचारी बंधु का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

कैंडल मार्च – सामाजिक संवेदना एवं शांतिपूर्ण विरोध का पर्याय

आज मंदसौर में दिव्या के साथ हुई दुर्घटना और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और दिव्या के जल्दी स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना के साथ फुसरो बाजार में बरनवाल महिला समिति के द्वारा शांति पूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया जो ब्लाक परिसर स्थित बजरंगबली मंदिर से शुरू होकर भूत बंगला बजरंगबली मंदिर तक गया और वहां से वापस बाजार का भ्रमण करते हुए बजरंगबली मंदिर, बेरमो थाना में आकर समाप्त हुआ। जिसमें दो सौ से ऊपर महिलाओं की सहभागिता हुई। और यह एक अत्यंत सफल कार्यक्रम हुआ। और इसमें हमारे वार्ड पार्षद श्री नीरज पाठक जी भी साथ में थे और व्यवसाई संघ के सचिव प्रत्याशी ओमप्रकाशजी उर्फ राजा साथ चल रहे थे।

बेटियों के समर्थन में और उनके शोषण के विरुध्द शांति पूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन तथा जमकर नारेबाजी की गई, बेटी बचाओ, देश बचाओ, मंदसौर के अपराधियों को फांसी दो, फांसी दो. इस कैंडल मार्च में लड़कियों एवं महिलाओं ने भरी संख्या में भाग लिया. मौके पर कई सम्मानित महिलाओं एवं बच्चियों ने अपने-अपने विचार प्रकट किये, प्रियंका ने कहा – “हमें हर हाल में ऐसी बातों का सामना करना होगा और अपनी आवाज को समाज में उठाना होगा”

हमें प्रशासन के द्वारा भी पूरा सहयोग मिला। बेरमो थाना से एक पीसीआर वैन और सारे लोग हमारे साथ चल रहे थे। इस कार्यक्रम से समाज की सभी क्षेत्र के लोगों ने इस संदेश को जाना और इस घटना से वाकिफ़ हुए। मैं महिला समिति की सदस्यों का विशेषकर बरनवाल महिला समिति की नेत्री त्रय : श्रीमती मंजुरानी बरनवाल, श्रीमती अर्चना बरनवाल और श्रीमती पुष्प बरनवाल (सभी बरनवाल महिला समिति, फुसरो) और विशेष सहयोगी के रूप में बरनवाल समाज फुसरो के चमकते सितारे श्री विनय कुमार बरनवाल जी एवं श्री प्रदीप भारती जी को विशेष आभार व्यक्त करता हूँ। साथ ही बरनवाल युवक संघ, फुसरो की स्थानीय इकाई के सदस्यों को भी, जिन्होंने इस सफल कार्यक्रम का आयोजन किया बहुत-बहुत बधाई देता हूं। धन्यवाद देता हूं। – नीरज बरनवाल, आम्रपाली स्टूडियो, मेन रोड फुसरो.

जिस प्रकार मोमबत्ती जलती जाती है, पिघलती जाती है और अपना प्रकाश पुंज बिखेरती जाती है, मानो एक प्रतीक हो अँधेरे से लड़ने के हौसले का, जैसा अँधेरा हमारे समाज के बीच रह रहे विकृत मानसिकता वालों के मन में भरा है जो आये दिन हमें ऐसी घटनाओं के समाचारों से दो चार होना पड़ता है, उस अँधेरे को दूर करने के लिए हमारी संवेदनाये मोमबत्ती के सामान जलती हैं. हम समाज के सामने आगे आकर अपना विरोध प्रदर्शित करते हैं, कम से कम इससे तो नहीं चूकते, यह अच्छी बात है.

हम उन हर बातों को जिन्हें हम अपनी व्यस्तता के कारण नजरअंदाज कर जाते हैं उसपर भी कभी वैचारिक मंथन के लिए ऐसे ही सामाजिक समितियों को आगे आना होगा और खास कर युवा वर्ग को जो क्या सोचते हैं आज के सामाजिक परिवेश में क्या बदलाव लाना चाहते हैं. उन्हें सोशल मीडिया पर बिताये गए समय और उर्जा का सही प्रयोग करना होगा. सामाजिक गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना होगा, तभी समाज को सही दिशा दिया जा सकेगा. हम क्यों नहीं खुली चर्चा में भाग लें? हम क्यों नहीं ऐसे बैठक और सभाओं का आयोजन करें जिससे कि सभी अपनी बातों को रख सकें और समाज और देश हित की बात कर एक निर्णायक भूमिका निभाएं.

निःशुल्क साइंस एवं मैथ क्लासेज के बच्चों ने जैक बोर्ड में लहराया परचम

अर्चना सिंह द्वारा चलाए जा रहे निशुल्क साइंस मैथ क्लासेज मैं दसवीं के जैक बोर्ड के बच्चों ने अपना परचम लहराया निशुल्क शिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में सबसे बड़ा योगदान श्री उपेंद्र पांडे जी का रहा जिन्होंने आज के इस व्यवसायीकरण के दौर में निशुल्क शिक्षा देकर समाज के गरीब तबके के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा काम किया है इस संबंध में श्री उपेंद्र पांडे जी का कहना है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती बशर्ते उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन मिले.

math science class मे मुख्य रूप से सोनू कुमार ने क्रमशः मैथ में 95% साइंस में 73 प्रतिशत अमित ने मैथ में 88 प्रतिशत साइंस में 59 प्रतिशत आरती ने मैथ में 55% साइंस में 59 प्रतिशत नंबर लाया यह सभी विद्यार्थी बहुत कमजोर तबके से आते हैं.

उनके अभिभावकों ने श्री उपेंद्र पांडे जी के प्रति अपना आभार जताया इस कार्यक्रम को चलाने में अब तक श्री योगेश तिवारी श्री अरुणेश और श्री सुजीत ठाकुर का बहुत सराहनीय योगदान रहा इन सभी ने विशेष रूप से श्री उपेंद्र पांडे जी को धन्यवाद दिया और कहा कि यह कार्यक्रम आगे भी इसी तरह जारी रहना चाहिए

भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएँ

संवत 2075 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के प्रारंभ पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ. जानिए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जो आज के दिन से सम्बंधित हैं. ब्रह्म पुराण के मतानुसार चैत्र प्रतिपदा से ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी. इस कारण आज के दिन को सृष्टि दिवस भी कहा जाता है. शुक्ल प्रतिपदा का दिन चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस होता है. प्रतिपदा तिथि से पौराणिक व ऐतिहासिक दोनों प्रकार की कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं जिस कारण इसका महत्त्व और भी अधिक हो जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने बाली के अत्याचारी शासन से वानर प्रजा को मुक्ति दिलाई थी. इसलिए प्रजा ने घर-घर में उत्सव मनाकर ध्वज (गुड़ी) फहराए थे, तब से यह परम्परा चली आ रही है और फलस्वरूप आज के दिन को गुड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है.

नववर्ष के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले इस त्यौहार को भारतीय संस्कृति के अनुरूप विभिन्न प्रांतों में स्थानीय परम्पराओं का पालन कर मनाया जाता है. आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में ‘गुड़ी पड़वा’ को ‘उगाड़ी’ नाम से मनाया जाता है. कश्मीरी हिन्दू इस दिन को ‘नवरेह’ के रूप में मनाते हैं. मणिपुर में यह दिन ‘सजिबु नोंगमा पानबा’ या ‘मेइतेई चेइराओबा’ कहलाता है. महाराष्ट्र में घर के आंगन में गुड़ी खड़ी करने की प्रथा प्रचलित है. इसीलिए इस दिन को गुड़ी पड़वा नाम दिया गया. ऐसा माना जाता है कि यह वंदनवार घर में सुख, समृद्धि और खुशियां लाता है. इस दिन ख़ास कर महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में भारतीय व्यंजनों में पुराण पोली अथवा श्रीखंड का बनना वर्ष पर्यन्त सबसे मीठा बोलने और अच्छा व्यवहार करने की प्रेरणा देता है.

इसे नव संवत्सर भी कहते हैं इस विक्रम संवत की शुरुआत 57 ईसवी पूर्व में हुई. इसको शुरू करने वाले सम्राट विक्रमादित्य थे, इसीलिए उनके नाम पर ही इस संवत का नाम रखा गया है. इसके बाद 78 ईसवी में शक संवत का आरम्भ हुआ. इस हिन्दू नव वर्ष के पहले दिन प्रातः काल में उदित होते सूर्य को अर्घ्य देकर ईश्वर से सुख, शांति,समृद्धि और आरोग्यता की कामना की जाती है.

चैत्र नवरात्र का प्ररम्भ भी आज के ही दिन से होता है, नवरात्र के प्रथम दिवस पर माँ शैलपुत्री, द्वितीय दिवस पर माँ ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिवस पर माँ चंद्रघंटा, चतुर्थ दिवस पर माँ कुष्मांडा, पंचम दिवस पर माँ स्कंदमाता, षष्ठम दिवस पर माँ कात्यायनी, सप्तम दिवस पर माँ कालरात्री, अष्टम दिवस पर माँ महागौरी तथा इसी प्रकार नौवें दिन पूजन-हवन आदि के बाद कन्या भोजन कराया जाता है और माँ नवदुर्गा की पूजा अर्चना के साथ नवरात्र का समापन होता है और इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाती है जो श्रीराम के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है.

नववर्ष के प्रारंभ के साथ ही चैती छठ का आगमन हो जाता है, घरों में साफ सफाई का विशेष महत्व होता है. एवं प्रत्यक्ष एवं साक्षात् देव भगवान सूर्य की उपासना की जाती है. इस वर्ष चैती छठ व्रत की महत्वपूर्ण तिथियाँ इस प्रकार हैं :
21-03-2018 : नहाय खाय
22-03-2018 : खरना
23-03-2018 : संध्या अर्घ्य
24-03-2018 : प्रातः अर्घ्य

इस वर्ष दिनांक 25-03-2018 को ही अष्टमी एवं नवमी तिथि पर रही है. जिस कारण, जिन्हें व्रत करना है वे कन्या भोजन 25 को ही करावें परन्तु अपने अष्टमी व्रत का पारण दिनांक 26-03-2018 को ही करें.

हाई टेक होली

पर्व त्योहारों को सामूहिक रूप से उल्लास पूर्वक मनाने की हमारी परंपरा रही है। इन दिनों हम अपने सगे-संबंधियों, पड़ोसियों से मिलने उपहार-मिठाई लेकर उनके घर जाया करते थे। छोटे-बड़े के बीच चरण-स्पर्श आशीर्वाद होता, बाकी लोग गले मिलकर बधाईयाँ देते। इस प्रकार सब आनंदित होते! जिनसे वो मिल न पाते, तो मन में दुख होता था। बाद में, मिलने पर शिकायतें हुआ करती थी। सबसे एक साथ जुड़े रहने का कोई साधन भी तो नहीं होता था! 😔 लोग पत्र और greeting cards का सहारा लेते थे।

फिर आया टेलीफोन!
दूर रहने वाले अपनों से सीधा या उनके पड़ोसी के सहयोग से बातें कर पाना संभव हुआ। अपनों से बात कर मन को शांति मिलती; भले इसके लिए पैसे लगते हों और कुछ समय भी लगता था। पर मिलने वाली खुशी अनमोल होती थी।

फिर मोबाइल का आगमन हुआ!
हर घर और फिर हर हाथ में “मोबाइल” आने पर मानों जैसे भौगोलिक दूरियाँ ही समाप्त होने को आईं! बातें करना महँगा होने के कारण सीमित बातें ही होती, पर होतीं जरूर थीं। हमारी खुशियाँ और बढ़ गईं। हम ये ध्यान देते कि किसी अपने से बात करना रह तो नहीं गया!

फिर सोशल मीडिया के समय आया। फेसबुक और ट्विटर पर अपनी बात एकसाथ सब लोगों तक पहुँचाने लगें। one-to-one बातचीत में कमी आई। WhatsApp messenger और इन जैसे कुछ और साधन के आने पर लोग एक-दूसरे से अब तथा कथित “online connected” रहने लगे! इसका लाभ मोबाइल कंपनियों को अधिक होने लगा।

Jio के आने पर हमें और सुविधा उपलब्ध हुई। डाटा सस्ता हुआ और बात करने के अलग से पैसे लगने बंद हो गए। इसके लाभ कुछ सीमित लोगों को ही हुआ। अधिकांश लोग आपस में हमेशा बतियाते रहते या आॅनलाईन वीडियो देखा करते। इसी में पूरा समय निकल जाता है।

अब किसी के पास समय नहीं है किसी अपने से मिलने की!!! 😟 साधन है पर इच्छा नहीं, किसी अपने से बात करने की!!! आम दिनों की तो छोड़ ही दीजिए, सुख-दुख, पर्व त्योहारों में भी एक एकाकीपन अपने पैर पसार रहा है। हमारे अपनों का दायरा, अब हमारे दिल में छोटा होता जा रहा है। अब हम उत्सव सबके साथ नहीं, अकेले ही मनाते हैं।

प्रार्थना है कि ये आपके जीवन का सत्य न हो।

होली की आनंदमयी अनेकानेक शुभकामनाएँ!

क्यों न माने बुरा होली में

होली मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत त्योहार हुआ करता था। सुबह से तेल चुपड़ कर हम निकल जाते पर असली होली खेलती थी हमारे यहाँ की औरतें। जब वे घर से पुआ तल कर बाहर निकलती तो मुहल्ले में बवाल ही मच जाता था। उनकी टोली हर घर जाती, महिलाओं को खदेड़ निकालती। हम बच्चें अपनी-अपनी माँओं के मदद के लिये तैयार, दौड़ कर चापाकल से उनके लिये बाल्टियां भरते थे।

हँसी-ठिठोली होती थी पर क्या मजाल जो कोई पुरुष इन महिला ब्रिगेड को छेड़ देता। उन्हें भी तो मालूम था, एक बोलेंगे तो पलट कर चार सुनायेंगी ये औरतें। खुल कर होली खेलती इन औरतों को देख कर मुझे आजादी महसूस होती थी इस खूबसूरत त्योहार में।

हम कहते थे “बुरा ना मानो होली है” और उन लोगों से भी जाकर गले मिलते थे जो साल भर हमारे दुश्मन रहे। सारे मुहल्ले वाले मिलकर जबरदस्ती गले मिलवा देते थे बाकी दिन कचड़े फेंकने को लेकर लड़ने वाले पड़ोसियों को। दुनिया में कौन सा त्यौहार यह करवाने की ताकत रखता था??

पर फिर देखी बदलते जमाने की होली। मेरे छोटे से शहर में भी हर घर जाने वाली वह टोली खत्म हो गयी। कुछ मुहल्लों में बची है, पर बदलते जमाने ने उसके अस्तित्व को खतरे में ला दिया है।

बड़े शहरों की होली से तो नफरत सा है। बड़ी होली खेलते हैं दिल्ली के लोग, पर बालकनी से। कल मेरी दोस्त को छत से लड़को ने पानी का गुब्बारा फेंक कर मार और वह दर्द से कराह उठी। उन्होंने कहा बुरा ना मानो होली है पर मैंने बिल्कुल बुरा माना और उनके घर के सामने खड़े होकर पूरी खड़ी-खोटी सुनायी।

रस्ते में दो बच्चे अपनी बालकनी से बाल्टी भर पानी उड़ेलने की कोशिश कर रहे थे। उनसे ज्यादा तो बड़ा बाल्टी ही था मानो। मुझे डर लगा की पानी तो पानी पर बाल्टी ही ना गिरा दे किसी के सिर पर। पूरी दिल्ली ही आते-जाते लोगो पर निशाना साधने में लगी है बिना यह सोचे कि अचानक हुये इस हमले से किसी बाइक का बैलेंस बिगड़ सकता है, किसी को चोट आ सकती है, किसी के आंखों में रंग जा सकता है। पर वे सब यही बोलेंगे बुरा ना मानो होली है।

मथुरा की होली में यही कहते हुये लोगों को विदेशी महिलाओ को जबरदस्ती छुते देखा था। वे परेशान थी, चिल्ला-चिल्ला कर मना कर रही थी।

कितनी दयनीय है आपलोगों की होली। आप होली के दिन अपने पड़ोसियों का दरवाजा खटखटाने, उनके साथ दही बड़ा बांटने की ना हिम्मत रखते हैं ना तमीज। आपको तो मालूम भी नहीं है कि बगल के घर में अकेले रह रहे बुजुर्ग दम्पति के चरणों मे आज अबीर डालने वाला कोई नहीं है। पर आप आती-जाती लड़कियों को छेड़ेंगे, किसी को चोट पहुँचा कर होली मनायेंगे, तबले की थाप पर अपने पड़ोसियों के साथ झूमेंगे नहीं ना ही उन विदेशियों को अपने जश्न में शामिल करेंगे, पर पूरी कोशिश रहेगी होली के बहाने गोरी चमड़ी पर हाथ डालने की।

आखिर कब और क्यों आ गयी हमारे यहाँ ऐसी सैडिस्टिक प्लेजर वाली होली कि, लड़कियों को घर से निकलने में डर लगने लगा उस दिन?? हमारी होली ऐसी तो कतई नहीं थी। ऐसी होली बुरा मानने वाली ही है।

यह दुनिया का सबसे रंग-बिरंगा खूबसूरत त्योहार है, जिसे ‘ कोल्डप्ले अपने एल्बम में दिखाता है, जिसकी फ़ोटो अगले दिन हर विदेशी अखबार में आती है और उस त्योहार का वास्तविक स्वरूप बिगाड़ कर अगर आप सोचेंगे कि हम बुरा नहीं मानेंगे तो आप बेवकूफ हैं। हमारा कुछ बहुत अपना था जो खो रहा है। हमें बुरा लगता है। दुःख होता है।

खेलिये पर थोड़ा खुले दिल से, बिना किसी नीचता के। तभी आपको हक हैं कहने का, “बुरा ना मानो होली है।”

होली की सबको शुभकामनायें। 

फुसरो में संत रैदास की जयंति मनायी गयी

फुसरो पुराना बीडीओ आफिस के राजा बंगला स्थित विवाह मंडप में बुधवार को अखिल भारतीय रविदास महासंघ के तत्वधान में गुरू रैदास की जयंति समारोह मनायी गयी। इस दौरान बेरमो प्रखंड मुख्यालय से गाजे बाजे के साथ विशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस में सैकडों महिला-पुरूष व बच्चों ने भाग लिया। समारोह की शुरूआत रैदास के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष गोवर्धन रविदास व संचालन सुधीर राम ने किया । यहां मुख्य अतिथि फुसरो नगर परिषद अध्यक्ष नीलकंठ रविदास ने कहा कि संत रैदास सिर्फ जाति-समाज के नहीं बल्कि मानव जगत के कल्याण की बातें समाज को बतायी। उन्होने अपने समय के ब्राहमणों को तर्क में पराजित कर संत की उपाधी प्राप्त की थी। इनके ज्ञान प्राप्त कर मीरा बाई कृश्ण की परम भक्त हो गयी। वक्ता ने कहा कि संत रैदास व बाबा भीमराव अंबेदकर के विचारों से ही समाज व देश का कल्याण है। मौके पर बालदेव रविदास, गोपाल रविदास, फुलचंद रविदास, हिरालाल रविदास, निर्मल रविदास, सुरज पासवान, राजेश राम, आदि मौजूद थे।

संत गुरु रविदास जी

रैदास नाम से विख्यात संत रविदास का जन्म सन् 1388 (इनका जन्म कुछ विद्वान 1398 में हुआ भी बताते हैं) को बनारस में हुआ था। रैदास कबीर के समकालीन हैं। रैदास की ख्याति से प्रभावित होकर सिकंदर लोदी ने इन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा था। मध्ययुगीन साधकों में रैदास का विशिष्ट स्थान है। कबीर की तरह रैदास भी संत कोटि के प्रमुख कवियों में विशिष्ट स्थान रखते हैं। कबीर ने ‘संतन में रविदास’ कहकर इन्हें मान्यता दी है। मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा जैसे दिखावों में रैदास का बिल्कुल भी विश्वास न था। वह व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं और आपसी भाईचारे को ही सच्चा धर्म मानते थे। रैदास ने अपनी काव्य-रचनाओं में सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्दों का भी मिश्रण है। रैदास को उपमा और रूपक अलंकार विशेष प्रिय रहे हैं। सीधे-सादे पदों में संत कवि ने हृदय के भाव बड़ी स़फाई से प्रकट किए हैं। इनका आत्मनिवेदन, दैन्य भाव और सहज भक्ति पाठक के हृदय को उद्वेलित करते हैं। रैदास के चालीस पद सिखों के पवित्र धर्मग्रंथ ‘गुरुग्रंथ साहब’ में भी सम्मिलित हैं। कहते हैं मीरा के गुरु रैदास ही थे।

 

रैदास के पद :
अब कैसे छूटे राम रट लागी।
प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी, जाकी अँग-अँग बास समानी॥
प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा॥
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती॥
प्रभु जी, तुम मोती, हम धागा जैसे सोनहिं मिलत सोहागा॥

रैदास के दोहे :
जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।

रैदास कनक और कंगन माहि जिमि अंतर कछु नाहिं।
तैसे ही अंतर नहीं हिन्दुअन तुरकन माहि।।

हिंदू तुरक नहीं कछु भेदा सभी मह एक रक्त और मासा।
दोऊ एकऊ दूजा नाहीं, पेख्यो सोइ रैदासा।।

रैदास की साखियाँ :
हरि सा हीरा छाड़ि कै, करै आन की आस ।
ते नर जमपुर जाहिँगे, सत भाषै रैदास ।। १ ।।

अंतरगति रार्चैँ नहीं, बाहर कथैं उदास ।
ते नर जम पुर जाहिँगे, सत भाषै रैदास ।। २ ।।

रैदास कहें जाके ह्रदै, रहै रैन दिन राम ।
सो भगता भगवंत सम, क्रोध न ब्यापै काम ।। ३

सी.सी.एल. बी. एंड. के. द्वारा निगमित सामाजिक दायित्व के अंतर्गत प्रशिक्षणोपरांत सिलाई मशीन का वितरण

दिनांक 10-01-2018 दिन बुधवार को सी.सी.एल. बी.एण्ड के. द्वारा निगमित सामाजिक दायित्व के अंतर्गत संचालित कौशल विकास केंद्र गांधीनगर में चल रहे एक मासिक सिलाई पशिक्षण के समापन समारोह में प्रशिक्षुओं को  सिलाई मशीन तथा प्रमाण पत्र वितरण किया गया.

आयोजित सम्मापन समारोह में सभी 20 लाभुकों को एक-एक सिलाई मशीन तथा एक-एक प्रशिक्षण प्रमाण पत्र का वितरण, सी सी एल, बी. एंड के. प्रक्षेत्र के द्वारा किया गया. प्रशिक्षित सभी महिलाओं में से 10 महिलायें बैदकारो पूर्वी पंचायत तथा 10 महिलायें बैदकारो पश्चिमी पंचायत से थी.

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में एस. पी. सारंगी, S.O (P&P) उपस्थित थे तथा संचालन सी.सी.एल. बी.एण्ड के. प्रक्षेत्र के सी.एस.आर. अधिकारी निखिल अखौरी ने किया. अन्य गणमान्य लोगों में प्रतुल कुमार, वरीय प्रबंधक(P), एस. प्रजापति, A.T.O, B&K Area, ललन सिंह, मुखिया, बैदकारो पूर्वी, जितेंद सिंह, मुखिया, बैदकारो पश्चिमी, शशि कांत सिंह, आस्था पुनर्वास केंद्र, बजरंगी, संजय, मोनू, चंदन, दिलीप कुमार आदि उपस्थित थे.

बैदकारो पूर्वी एवं पश्चिमी पंचायत से सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं के नामों की सूची.

  1. ज्योति सिंह.
  2. रीना देवी.
  3. पूनम देवी.
  4. काजल कुमारी.
  5. बसंती देवी.
  6. माधवी दास.
  7. मीना देवी.
  8. उर्मिला देवी.
  9. दीपू कुमारी.
  10. ज्योति कुमारी.
  1. प्रीती कुमारी.
  2. लाखिया कुमारी.
  3. पुष्पांजली देवी.
  4. योगिता देवी.
  5. सुनीता देवी.
  6. रेणु सिन्हा.
  7. निशा देवी.
  8. सुनीता देवी.
  9. रानी कुमारी.
  10. सुमन देवी.

सहकर्मियों में परस्पर निकटता से बढ़ता है आपसी सौहार्द : अनपति देवी स्कूल वनभोज कार्यक्रम पर बोले सचिव

दिनांक 6 जनवरी 2018 को अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर फुसरो में विद्यालय समिति द्वारा पूरे विद्यालय परिवार के साथ विद्यालय परिसर में ही वनभोज का आयोजन किया गया. सभी ने स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद लिया और विभिन्न विषयों एवं विद्यालय में और भी बेहतर सेवाएं प्रदान करने और विद्यार्थियों के विकास पर चर्चा हुई.

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए विद्यालय समिति के सचिव कृष्ण कुमार चांडक ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से जहाँ एक ओर समाज में प्रेम-भाव का उत्कृष्ट सन्देश जाता है वही दूसरी ओर सहकर्मियों में परस्पर निकटता से आपसी सौहार्द भी बढ़ता है. आचार्यों एवं कर्मचारियों के मध्य म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता का आयोजन भी हुआ, जिसमे आचार्यगणों की ओर से रंजू झा प्रथम, द्वितीय रीना सिंह तथा तृतीय स्थान पर सविता सिंह रहीं. कर्मचारियों में शांति देवी प्रथम, मालती देवी द्वितीय तथा चानो देवी तृतीय रहीं.

इसमे यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी सत्र में LKG व UKG  में सिर्फ बहनों के लिए नामांकन शुल्क निःशुल्क रखा जायगा. आगे यह सूचना भी दी गयी कि ठंढ अधिक बढ़ जाने के कारण जिला शिक्षा पदाधिकारी बोकारो के ज्ञापांक 75 दिनांक 05-01-2018 के आलोक में आगामी सोमवार से विद्यालय का पठन-पाठन कार्य पूर्वाह्न 9 बजे से अपराह्न 3 बजे तक होगा.

इस अवसर पर मुख्य रूप से समिति के सचिव कृष्ण कुमार चांडक, सह सचिव जवाहर यादव, उपाध्यक्ष विरेन्द्र जैन, रोहित मित्तल, दयानंद वर्णवाल, प्रेम कुमार सोनी, विद्यालय के प्राचार्य अशोक कुमार सिंह सहित आचार्य सुनील चंद्र झा, कामदेव सिंह, नवल किशोर सिंह, जगदीश महतो, उमाशंकर सिंह, उपेंद्र सिंह, राम कुमार पाठक, सविता सिंह, रंजू झा, इंदिरा सिंह, निभा सिंहा, किशोर कुमार , जीतेन्द्र चौधरी, राकेश सिंह, प्रियमला, कविता, प्रभुनाथ मिश्रा, साधन चंद्र धर, शिवनंदन, सुरेश, मालती, शांति सहित पूरा विद्यालय परिवार उपस्थित थे.

रुक्मिणी देवी पब्लिक स्कूल में वार्षिक क्रीड़ा महोत्सव संपन्न

रुक्मिणी देवी पब्लिक स्कूल, फुसरो द्वारा करगली मैदान में आयोजित पांच दिवसीय ‘वार्षिक क्रीड़ा महोत्सव’ संपन्न हुआ। सर्वप्रथम विद्यालय के निदेशक श्री रंजीत भारती जी ने मुख्य अतिथि श्री नीलकंठ रविदास जी (फुसरो नगर परिषद् अध्यक्ष) को गुलदस्ता एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने विभिन्न प्रकार के खेल को प्रस्तुत किया। खेल के आधार पर ओवरआॅल चैम्पियन ‘पैन्सी हाउस’ रही, जिसके हाउस कैप्टन एवं हाउस टीचर को मुख्य अतिथी श्री नीलकंठ जी ने ट्राॅफी प्रदान किया साथ ही संयुक्त रुप से दूसरे स्थान पर रोज हाउस एवं सनफ्लावर हाउस रहे तथा तृतीय स्थान पर डाहलिया हाउस के हाउस कैप्टन एवं हाउस टीचर को ट्राॅफी प्रदान किया।

इस अवसर पर श्री नीलकंठ रविदास ने कहा कि खेल बच्चों के संपूर्ण शारीरिक विकास के लिए अतिआवश्यक है। उन्होनें ये भी कहा कि खेल हमारे बौद्विक विकास में सहायक है। उन्होनें कहा कि पढाई के साथ-साथ खेलकूद का भी महत्व है। इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक श्री रंजीत भारती ने पैन्सी हाउस के विजेता खिलाडियों को बधाई देते हुए कहा कि इसी तरह नित्य परिश्रम से हम कठिन से कठिन लक्ष्य को हासिल कर सकते है। उन्होनें द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे छात्रों को और मेहनत करने की सलाह दी और कहा कि मेहनत ही सफलता की कुँजी है। बिना मेहनत के कुछ भी संभव नहीं है। श्री भारती ने विशिष्ट तौर पर करगली ग्राउंड के प्रभारी श्री ए. एल. चक्रवर्ती जी को घन्यवाद किया।

दिनांक 26.12.2017 से 30.12.2017 तक विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन हुआ, जिसमें मुख्य रुप से ग्रुप ‘द’ वर्ग के बालक वर्ग के कबड्डी प्रतियोगिता में पैन्सी हाउस विजेता, एवं डालहिया हाउस उपविजेता रहा। इसी प्रकार बालिका वर्ग के कबड्डी प्रतियोगिता में सनफ्लावर हाउस विजेता, एवं रोज हाउस उपविजेता रहा। बालक वर्ग के कैरमबोर्ड प्रतियोगिता में पैन्सी हाउस विजेता, एवं रोज हाउस उपविजेता रहा। इसी प्रकार बालिका वर्ग के कैरमबोर्ड प्रतियोगिता में पैन्सी हाउस विजेता, एवं सनफ्लावर हाउस उपविजेता रहा। ग्रुप ‘स’ वर्ग के बालक वर्ग के कबड्डी प्रतियोगिता में पैन्सी हाउस विजेता रहा। इसी प्रकार बालिका वर्ग के कबड्डी प्रतियोगिता में डाहलिया हाउस विजेता, एवं सनफ्लावर हाउस उपविजेता रहा। बालक वर्ग के कैरमबोर्ड प्रतियोगिता में डाहलिया हाउस विजेता, एवं पैन्सी हाउस उपविजेता रहा। इसी प्रकार बालिका वर्ग के कैरमबोर्ड प्रतियोगिता में डाहलिया हाउस विजेता, एवं रोज हाउस उपविजेता रहा।

सभी खेलों को विद्यालय के शारिरिक शिक्षक श्री बृजेन्द्र कुमार कंठ की देख-रेख में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक/शिक्षिका वर्षा कुमारी, सरस्वति सिंह, उषा ठाकुर, लक्ष्मी देवी, राधा दत्ता, लता चक्रवर्ती, आशा इग्नासूस, ज्योति सिन्हा, ब्यूटी सिंह, आनंद किशोर, अर्चना कुमारी, बिंदीया सेन गुप्ता, निलू सिंह, पुर्णिमा पाण्डेय, संध्या कुमारी, निधी पाण्डेय, गुरुचरण महतो, प्रतिभा सिन्हा, बाला राम, दिलीप कुमार तिवारी, संजय पाण्डेय, रविन्दर कुमार राम, मनोज कुमार, दिलचन्द महतो, नारायण ठाकुर, अभय ठाकुर आदि उपस्थित रहे।

छाया / सूत्र : राजेश ‘बेरमो आवाज’