गम न करें – १०

गम करना बेमानी है. करना है तो जतन करें, जिससे ग़मज़दा लोगों की जिंदगी से गम के बादल दूर हों, और वह भी आपकी जमात में शामिल हो खुश रहना सीख ले.

किसी शायर ने खूब कहा है कि “दुनिया में कितना गम है, मेरा गम कितना कम है, औरों का गम देखा तो, मैं अपना गम भूल गया.”

मतलब साफ़ है, गम तो है पर उससे कहीं ज्यादा खुश रहने के बहाने मौजूद है, जरुरत उसको पहचानने भर की है. जब सभी को पता है कि गम से कुछ हासिल नहीं हो सका है किसी को अब तक तारीख़ में तो भला हमें कैसे हासिल हो सकता है.

हम अक्सर ही दूसरों की ख़ुशी का कारण पता करने लग जाते हैं, बजाय इसके कि आप उसकी ख़ुशी में दिल से शामिल हो सकें. आप दूसरों के दुःख में शामिल होते हैं, पर उसमे आप ख़ुशी का अनुभव नहीं कर पाते हैं.

कहा भी गया है चिंता से चतुराई घटे, दुःख से घटे शरीर…

आप तय कर लें, गम करना है कि गम के कारणों को ढूंढ कर उसको ख़ुशी तब्दील करने का जरिया तलाशना है. सबसे बड़ी बात होती है कोशिश, जिसने की नहीं वो गम कर सकता है, वरना कोशिश करने वालों का तो कुदरत भी साथ देती है. हालात जैसे भी हों उसपर तंज कसना और उसका रोना-रोना बहुत आम बात है, ख़ुशी तो इस बात में है कि आप गमगीन भी हैं इस बात का पता औरों को लगता तक नहीं, और आप उसके सामने से गुजर जाते है.

हर हाल में खुश रहना आपको आपके बुरे हाल से निकलने में मददगार होता है बजाय इसके कि आप झख मारते फिरें. अपना रोना कभी न रोयें, इससे लोग आपके गम को कम तो कर नहीं पाएंगे उलटे आपसे और कन्नी काटने लगेंगे. जितना हो सके सरलता से पेश आयें. ऐसा भी नहीं कि डींगे ही मारने लगें.

हमें संतुलित व्यवहार को तरजीह देनी चाहिए. एक मुकम्मल इंसान बनने के रास्ते में मुश्किलें तो आयेंगी, पर उन मुश्किलों को पार करने के लिए ख़ुशी की राह अपनाएं, गम का नहीं. गम नहीं करने से सीधा मतलब है बेकार की चिंता, ऐसा बिलकुल न समझें की चिंतन जरुरी नहीं या सोच जरुरी नहीं, पर गम? उसका इससे कोई सम्बन्ध नहीं होना चाहिए, तभी आप चिंतन-मनन-सोच-विचार आदि कर भी पाएंगे.

इसलिए गम न करें, सोचें और शुक्र अदा करें, कि देने वाले ने जो भी आपको दिया है, क्या उतना भी किसी के पास है भी क्या?

जारी….

गम न करें – ०९

नक्काल न बनें. दूसरों की नक़ल न कीजिये, अपनी शख्सियत को कम न कीजिये, बहुत से लोग हमेश अजाब के शिकार रहते हैं, क्योंकि वो चाहते हैं कि अपनी हरकात, अपनी चाल, आवाज और बात हर चीज में दूसरों की ऐसी नक़ल  करें कि उन्हीं के जैसे होकर रह जाएं, इनकी अपनी पहचान ख़तम हो जाय. तकल्लुफ, जलन, हसद वगैरह इनके रोग हो जाते हैं.

पहला इंसान आदम अलैहिस्सलाम से लेकर आज तक इस बात पर कोई मतभेद नहीं कि शकल व सूरत में दो आदमी बराबर नहीं होते. तब वो अपने अखलाक व सलाहियतों में कैसे बराबर हो सकते हैं? आप अपनी जगह बिलकुल अलग चीज हैं. तारीख में कोई आप जैसा नहीं. न दुनिया में कोई आपका हमशकल है लिहाजा दूसरों की नक़ल क्यों करें.

जैसे आप हैं वैसे ही रहें. आप की अपनी आवाज चाल-ढाल में तब्दीली की जरुरत नहीं. आपका अपना अंदाज, अपना मजा, अपना रंग हैं, हम आपको इसी रंग ढंग में देखना चाहते है. क्योंकि यह आपके लिए कुदरती है, इसी पर हम आपको जानते हैं. लिहाजा आप नक्काल न बने.

जारी….

गम न करें – ८

खाली न बैठें, दुनिया में खाली बैठने वाले वह लोग होते हैं, जो अफावाहवाज होते हैं, क्योंकि इनके जेहन व दिमाग बंटे होते हैं. आदमी का बेकार बैठना निहायत ही खतरनाक है. इसका जेहन शैतान के रहने का जगह बन जायगा. वो बेनकेल के ऊँट के मानिंद इधर-उधर भटकेगा. जब आप काम से खाली बैठेंगे तो गम व फ़िक्र उलझने आकर रहेगी. भूतकाल, वर्तमान, भविष्य काल की फाइलें खुल जाएंगी और आप मुश्किल में पड़ जायेंगे.

मेरी आप सबों को राय है कि बेकारी के बदले अच्छे काम शुरू कर दें. बेकार रहना अपने आप को जिन्दा दरगोर करना है. आराम तलबी गफलत का नाम है. लिहाजा जब खाली हों तो अपने खुदा की इबादत (पूजा) करें. किताबों का मुताला (अध्ययन) करें. कुछ लिखें, या ऑफिस/घर की साफ-सफाई करें. दूसरों का कोई काम कर दें. काम के चाकू से फुर्सत को काट दें. दुनिया के हकीम/डॉक्टर इसके बदले पचास फीसदी ख़ुशी की गारंटी देते हैं.

किसानों, मजदूरों और कामगारों को देखें के वो किस तरह चिड़ियों की तरह गाते और खुश रहते हैं. जबकि आप बिस्तर पर पड़े आंसू पोछते रहते हैं. क्योंकि बेकारी ने आपको डस लिया है. इसलिए खालीपन से बहार निकलें गम न करें खुश रहें.

जारी….

गम न करें – ७

खैर, भलाई और नेकी का नतीजा अच्छा होता है, लोगों पर अहसान करने वाला सबसे पहले खुद इस अहसान से फायदा उठता है. इसके दिल और जमीर को शुकून का अहसास होता है. लिहाजा जब कोई रंज व गम की बात पेश आये तो दूसरों के साथ कोई नेकी कर दें, कोई अहसान कर दें, आपको शुकून व इत्मीनान हासिल होगा.

किसी मोहताज को दें, किसी मजलूम की मदद करें, किसी को मुसीबत से निकाल दें, किसी भूखे को खिला दें, किसी मरीज से मिलने जाएँ, ख़ुशी और खुश्बख्ती आप पर छा जाएगी. भलाई का काम एक खुशबू के मानिंद हैं. इसके लाने वाला, बेचने वाला, खरीददार सब इससे फायदा उठाते हैं.

एक तवायफ ने प्यास से मर रहे कुत्ते को पानी का एक घूँट पिला दिया और जन्नत की हक़दार बन गयी. लिहाजा ऐसे लोग जिन्हें बदबख्ती, बदनसीबी, बेचैनी और खौफ ने जकड़ रखा है उसे नेकी और भलाई के बाग़ के तरफ आना चाहिए. दूसरों की मदद, अहसान और भलाई करना चाहिए. इससे उसके खुद का गम ख़ुशी में बदल जायगा, और यक़ीनन खुशनसीबी प्राप्त होगी. इसलिए खुश रहें गम न करें.

जारी….

गम न करें – ६

किसी के शुक्रिये का इन्तेजार न करें, अल्लाह (भगवान) ने बन्दों को अपनी इबादत (पूजा) के लिए पैदा किया. इन्हें रोजी दी. इसका शुक्र अदा करें. लेकिन अक्सर लोगों ने इबादत (पूजा) की तो दूसरों कि की. शुक्र किया तो दूसरों का, मतलब ये है कि इंकार, ज्यादती, बेवफाई, इंसानी फितरत पर ग़ालिब है. लिहाजा आपको बिलकुल हैरानी न हो. लोग आपके अहसान को फरामोश कर दे, भलाई का इंकार कर दे, अच्छे बर्ताव को भूल जाय, बल्कि आपसे दुश्मनी शुरू कर दे. और अहसान के बदले अदावत और हसद रखे. दुनिया का खुला दफ्तर सामने है. इसे पढ़िए.

वह तमाम का तमाम इस बात का किस्सा है जिसने बेटे को पाला पोसा, खिलाया पिलाया, तालीम और तरबियत दी, इसे सुलाने के लिए खुद जागा, इसे खिलाने के लिए खुद भूखा रहा. इसके आराम के लिए खुद थका, मगर जब यह बेटा जवान हो गया तो बाप के लिए कटखना कुत्ता साबित हुआ. बेईजती, नफरत, नाफ़रमानी, किसी चीज़ में भी तो कसर नहीं छोड़ी. एक अजाब बन कर रह गया. लिहाजा वह लोग जिनके अहसान कमजर्फों ने भुला दिए हों. वह परेशान न हो. वो ऐसी हस्ती के इनाम के मुस्तहक (हक़दार) बनेंगे जिसके खजाने कभी खाली नहीं होते.

हमारा मतलब यह नहीं है कि अहसान करना छोड़ दें बल्कि यह है कि नेकी कर दरिया में डाल के आदी हो जाएँ. भलाई का काम करें सिर्फ अल्लाह (भगवान) के वास्ते. ऐसा करेंगे तो हर हाल में कामयाब होंगे. आप अहसान करने वाले होंगे. आपक हाथ ऊँचा होगा. जो निचले हाथ से बेहतर होता है. आप परेशान न हों अगर किसी कमजर्फ को कलम दे दें जो इससे आप ही की बुराई लिखने लगे या अगर किसी जाहिल को डंडा थमा दें तो वह आप ही का सर फोड़ देगा. आदमी का फितरत यही है. जब यही सलूक इसका भगवान के साथ है तो हम और आप क्या हैं. इसलिए गम न करें खुश रहें.

मिश्र के मशहूर आलिम (ज्ञानी) और लेखक सैफ अली तन्ताबी एक जगह बड़ी कीमती बात कहते हैं,
फरमाते हैं:

“जो लोग हमें नहीं जानते उनकी नजर में हम आम हैं,
जो हमसे हसद रखते हैं उनकी नजर में हम मगरूर हैं,
जो हमें समझते हैं उनकी नजर में हम अच्छे हैं,
जो हमसे मुहब्बत करते हैं उनकी नजर में हम ख़ास हैं,
जो हमसे दुश्मनी रखते हैं उनकी नजर में हम बुरे हैं,
हर शख्स का अपना एक अलग नजरिया और देखने का तरीका है.
लिहाजा दूसरों के नजर में अच्छा बनने के पीछे अपने आपको मत थकायिए.
अल्लाह (भगवान) आपसे राजी हो जाय यही आपके लिए काफी है.
लोगों को राजी करना ऐसा मकसद है जो कभी पूरा नहीं हो सकता.
अल्लाह (भगवान) को राजी करना ऐसा मकसद है जिसको छोड़ा नहीं जा सकता.
तो जो चीज़ मिल नहीं सकती उसे छोड़ कर वह चीज़ पकडिये जिसे छोड़ा नहीं जा सकता.”

जारी….

गम न करें – ५

लोग आप पर इसीलिए तो नाराज होते हैं कि आप इल्म, सलाहियत, एखलाक या माल में उनसे बढ़ गए हैं, वो आपको माफ़ कर ही नहीं सकते जब तक आपकी सलाहियतें ख़तम न हो जाएँ, और अल्लाह (भगवान) की दी हुई नेमतें आप से छीन न जाएँ. आप सारी अच्छाईयों से खाली न हो जाएँ. आप बेकार और सिफर होकर न रह जाएँ. यही वो चाहते हैं. लिहाजा आपको उनकी बेजा नुक्ता-चीनी और जहिलाना बातों को बर्दाश्त करना होगा.

आप पहाड़ के तरह जम जाईये, ऐसी चट्टान बन जाईये जो अपनी जगह जमी रहती है. जिस पर ओले पड़ते हैं और टूट कर बिखर जाते हैं. अगर आपने लोगों की नुक्ता-चीनी को अहमियत दे दी तो आपकी जिंदगी को गमगीन करने का उनकी मुंह मांगी मुराद पूरी हो जायगी, लिहाजा बेहतर तौर पर दरगुजर कीजिये, इनसे बचिए और इनकी बातों में न आईये. इनकी फजूल बुराइयों से आपका दर्जा बुलंद होगा.

आप किस किस के मुंह को बंद करेंगे. आप उनको उनके हाल पर छोड़ देंगे तो आप नुक्ता-चीनी से बच सकते हैं. यही नहीं आप अपने नेक कामों और भलाईयों में और बढ़ोतरी कर दें अपनी खामियों गलतियों को दूर कर उनकी जुबान में ताला डाल सकते हैं. हाँ अगर आप ये चाहेंगे कि दुनिया के नजदीक तमाम ऐब से बरी हो जाएँ और तमाम लोगों में मकबूल हो जाएं तो ये नामुमकिन है, इसलिए गम न करें-खुश रहें.

जारी….

गम न करें – ४

अल्लाह (भगवान) का हुकुम होकर रहेगा, मुस्तकबिल (भविष्य) के बारे में अंदाजे ना लगायें. होने वाला अपने वक्त पर ही होगा, जल्दी क्यों चाहते हैं? फल को पकने दें, पकने से पहले क्यों तोड़ना चाहते हैं? कल एक मफकुद (खोया हुआ) सच है. खोया हुआ नापेद. जिसका अभी वजूद है, न मजा, न रंग तो हम इसकी परेशानियों, हादसों, वाकियात, आरजूओं में सोच सोच कर अपने आप को हलकान क्यों करें. जब के अभी हमें मालूम नहीं के वह आयेगा भी या नहीं, और मुस्सरत (ख़ुशी) भरा होगा या नहीं? अहम यह है के वह अभी गैब की दुनिया में है. वजूदे दुनिया में नहीं आया. तो हम पहले से इसे पाने की कोशिश क्यों करें, जब मुमकिन है हम इस तक पहुंचे या न पहुंचे.

भविष्य के बारे में झूठी लड़ाई लड़ना, गैब की किताब खोलकर इसकी ख्याली परेशानियों पर कराहना ऐसी बात है मानो साया से कुश्ती लड़ना हो. बहुत से लोग दुनिया के भविष्य को अँधेरा, भूख, प्यास, बीमारीयों और मुसीबत से भरा समझते हैं. यह सब शैतानी धोखा है. जब के अल्लाह (भगवान) अपना मगफिरत और फजल का वादा करता है. कितने लोग हैं जो ये सोच कर रो रहे हैं कि कल वह भूखा रहेगा, एक साल बाद बीमार हो जायगा, सौ साल बाद दुनिया ही ख़त्म हो जायगी. हालाँकि जब उम्र दुसरे के अख्तियार में है तो फिर अनहोनी के बारे में क्यों सोचें. इसलिए गम न करें, खुश रहें.

कुछ बेवकूफ अल्लाह (भगवान) को भी बुरा भला कह देते हैं, जो खालिक है, ब्रह्मा है, जो मालिक है तमाम आलम का, जो पालनहार है, सबको रोजी देता है. जिसके सिवा कोई पूजनीय नहीं फिर हम और आप जो गुनाहगार हैं, गलतियाँ करते रहते हैं, की क्या हैसियत. हमें तो लोगों का बेवजह बुराई और ताना का सामना करना ही पड़ेगा. हमें बर्बाद करने के मंसूबे बनेंगे. जान बूझ कर हमारी बुराई की जायगी. जब तक आप दे रहे हैं, बना रहे हैं, तरक्की कर रहे हैं. लोग आप पर तनकीद (दूध का दूध पानी का पानी) से न चूकेंगे, जब तक आप जमीन में न समा जाएँ या आसमान पर चढ़ जाएँ, यहाँ तक इनकी नजरों से दूर हो जाएँ. जब तक आप इनके बीच हैं आपको अजीयत (तकलीफ) पहुँचती रहेगी, आंसू निकलेंगे, नींद उड़ेगी जो जमीन पर बैठा हुआ है वह नहीं गिरता, इसलिए गम न करें, खुश रहें.

जारी …..

गम न करें – ३

माजी (भूतकाल) में जीना इसके गमो और हादसों को याद करते रहना, और इन पर रंज गम करते रहना, बेवकूफी और हिमाकत है. इससे वर्तमान जिंदगी कमजोर और दुखदायी हो जायगी. माजी के फाइल को लपेट कर रख देना चाहिए. इसे खोला न जाना चाहिए. इसे किसी दरबा में डाल कर बंद कर दिया जाये, क्योंकि जो गुजर गया, वह गुजर गया न उसकी याद उसको लौटा देगी, न कोई रंज वा गम वा फिकर उसे लौटा सकती है. माजी परस्ती के सूरज में गमजदा मत रहिये, जो छूट गया उसके परछाईंयो से पीछा छुड़ाईये, क्योंकि आप दरिया को असल की तरफ, बच्चे को माँ के पेट में, दूध को थन में, आंसू को आँख में वापस नहीं ला सकते. माजी का रोना रोने वालों के बारे में बुजुर्गों का कहना है कि, तुम मुर्दों को कब्रों से मत निकालो. हमारी मुश्किल यह है के हम वर्तमान को छोड़ कर अतीत, और भूतकाल से चिपके हुए हैं. लोग पीछे की तरफ नहीं देखते, हवा आगे को चलती है, पानी आगे को बहता है, कारवां आगे चलता है, यही जिंदगी का कानून है, आप इसकी खिलाफत न करें.

भगवान अल्लाह कहता है, मैंने तुझे जो दिया उसे ले और शुक्र अदा करने वालों में होजा. आपका आज का दिन, रंज व गम, घबराहट और बिना कपट, हसद, जलन से खाली गुजरे. अपने दिल के तख्ती पर एक ही शब्द लिख लें, आज, आज, आज, आज आपको अच्छी और गरम रोटी मिल गयी है तो कल की ठंडी और रुखी सूखी रोटी या आईंदा की रोटी से आपको कोई नुकसान नहीं होगा. जब आज आप ठंडा और मीठा पानी पी लिए तो क्यों गम करें, कल के खारे और गरम पानी पर या आईंदा के सड़े और गरम पानी पर, अगर फौलादी अज्म और इरादे के मालिक हैं तो अपने आप को इस नजरिये के आदि बना लें के मैं बस आज ही जिन्दा रहूँगा. तब आप दिन का हर लम्हा अपने आप को बनाने संवारने, अपनी सलाहियतों को और अपने काम को आगे बढाने के लिए इस्तेमाल करेंगे. इस वक्त आप कहेंगे, आज मैं अपनी जुबान की एखलाकी दुरुस्तगी करूंगा. कोई गलत बात न बोलूँगा, अपनी जुबान से किसी को तकलीफ न पंहुचाउंगा, आज अपने घर की साफ सफाई व तरतीब करूंगा. अपनी चाल, हरकत, बातचीत में तवाज्जुन करूंगा. आज अपने रब का इबादत करूंगा. ग्रन्थ पढूंगा, चुंके सिर्फ आज ही जीवन है इसलिए अपने दिल में भलाई का पौधा लगाऊंगा. बुराई, हसद, जलन, गरूर जैसी सारी बुराईयों के जड़ों को काट दूंगा. सिर्फ आज ही जीना है इसलिए सब को फायदा लाभ पहुंचाऊँगा.

जारी….

गम न करें – २

एक राज की बात हम सब को जान लेनी चाहिए, जिस प्राणी का जनम मनुष्य में हो गया मर्द या औरत, वह अमर है. सबसे पहले हम सब को यह जान लेना चाहिए कि हमारा भगवान, अल्लाह एक है. उसने पहला इनसान जो दुनिया में बनाया, उसको लोग आदम के नाम से जानते हैं. आदम अलैहिस्सलाम पहला इनसान और भगवान का धरती पर पहला दूत है. आदम अलैहिस्सलाम के बांया पसली से औरत को बनाया गया जिसको लोग हौआ के नाम से जानते हैं. इसिलिये मर्द का बाएं तरफ का एक पसली कम है.

आदम अलैहिस्सलाम के रीढ़ से दुनिया में आने वाले तमाम इनसान के आत्मा (रूह) को भगवान ने पैदा किया और रूहों के रहने की एक दुनिया बनायी जिसे परमलोक (आलमे अरवाह) के नाम से जाना जाता है. माँ के पेट में आने से पहले हम सब परमलोक में थे. 6 जिंदगी अल्लाह ने तमाम मनुष्य को दिया. एक जिंदगी परमलोक दूसरी जिंदगी माँ का पेट, तीसरी जिंदगी दुनिया का पेट जहाँ अभी हम सब हैं. दो जिंदगी हम सब ने गुजार दिया, तीसरा जिंदगी हम सब गुजार रहे है. यह तीनो जगह मनुष्य जिन्दा है, तीन जिंदगी अभी बाकी है.

तीसरी जिंदगी दुनिया के पेट में हम सब गुजार रहे हैं. यहाँ पर अपने मुकद्दर का जीवन जीने के बाद हम सभी को यह दुनिया छोड़ देना होगा. अब चौथी जिंदगी आरंभ हुई. दुनिया छोड़ने के बाद तमाम आत्मा जिस लोक में रहेगी उसे परलोक (आलमे बरजख) कहते हैं. आलमे बरजख  में तमाम रूहें क़यामत (महाप्रलय) तक रहेगी, उसके बाद पांचवीं जिंदगी की शुरुआत होगी, पहला इनसान आदम अलैहिस्सलाम से लेकर आखिरी इनसान सब के सब क़यामत में फिर से जिन्दा किये जायेंगे. वह क़यामत का एक दिन पचास हजार वर्षों का होगा. वहां पर हिसाब किताब किया जायगा, तीसरी जिंदगी का.

पांच सवालों का जवाब हर मनुष्य को देना होगा. पहला जीवन कहाँ गुजारा? दूसरा जीवन कैसे गुजारा? तीसरा माल कैसे कमाया? चौथा माल कहाँ खर्च किया? पांचवा अपनी अकल किस काम में लगायी? यह सवाल जवाब के बाद छठी जिंदगी जो मिलेगी वह कर्म के हिसाब से स्वर्ग या नरक की होगी.

जारी…

गम न करें – १

गम न करें.
सोचें और शुक्र अदा करें.

मतलब यह है कि जब आप अल्लाह भगवान की नेमतों को याद करेंगे, तो आपको हर कदम नेमत ही नेमत दिखाई देगी. अगर आप इन नेमतों को गिनना चाहें तो भी गिन नहीं पाएंगे. जिस्मानी सेहत, मुल्क में अमन, शुकून, खाना, कपड़ा, पानी, हवा यानी पूरी दुनिया आपके पास है, आप जिंदगी के मालिक है, और आपको एहसास भी नहीं कि जिस मालिक ने, जाहिरी (दिखाई देने वाला) और छिपी हुई नेमतें तुम पर उड़ेल दी है.

क्या यह आसान बात है कि आप अपने पैरों पर चल फिर रहे हैं, जब कि कितने पाँव काट दिए गए, आप अपनी पिण्डलियों के बल खड़े हैं, जबकि कितनी पिण्डलियाँ टूटी हुई हैं. क्या आप इसके हकदार हैं? कि आप आराम की नींद सोयें, जबकि दुनिया के हालात ने कितनो कि नींदें उड़ा रक्खी है.

हम पेट भर खा लेते हैं. खूब सैराब होकर  पीते हैं, जब कि कितने हैं, जिन्हें खाना नहीं मिलता, बीमारीयों ने उन्हें खाने-पीने से रोक रक्खा है. कान के बारे में सोचें, आपकी सुनने कि सलाहियत दुरुस्त है. आँख के बारे में सोचें, आप अंधे नहीं हैं. अपनी अकल के बारे में सोचें, आप अकल वाले हैं. आप पर जूनून या दीवानगी तारी नहीं होता, आप को गरम रोटी, ठंडा पानी, मीठी नींद और शुकून हासिल है, फिर भी परेशान व गमगीन हैं. आप के गमगीन रहने कि दो-चार वजहें हैं, और खुश रहने के हजारों वजहें अल्लाह भगवान ने अता की हैं, इसलिए गम न करें और खुदा का शुक्र अदा करें.

जारी…