शायरी

प्यार की शुरुआत

| | प्यार की शुरुआत | | है अगर हिम्मत तो जाकर बात कर, वर्ना बस एक फूल से शुरुआत कर. झुक गई नजरें अगर तो जान ले, हाँ है उसकी और न सवालात कर. है यकीं वो मान जायेगी मगर, ‘राज’ की ये बात है मुलाकात कर. – शैलेश …

शायरी

अर्ज किया है

चंद शेर… न जाने क्या धुंध बगल-ए-गिरेबां में छाता जाता है | शक के कोहरे में हर शख्स धुंधला नज़र आता है || उसके आंसू भी न किसी ने पोछे होंगे, हुस्न जब रो रहा होगा | कसीदे भींग गए होंगे, सहर तब हो रहा होगा || ये तो शाख …