क्षणिकाएं : ०५

|| ये क्या हो रहा सरकार है? || कली-कली बहार है, पायल की झंकार कहीं धनुष की टंकार है, मनुज का निज संहार ये

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यह समर आज अंतिम होगा

यह समर आज अंतिम होगा ………………………………. यह समर आज अंतिम होगा मत सोच कि यह मद्धिम होगा मिट जाएगा अब सब अंतर हर भय

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आओ एक दीप जला जाओ!

आओ एक दीप जला जाओ ………………………………. तुम बनो आज अब उद्दीपक तुम हो तो जल पाए दीपक तुम हो तो दूर अंधेरा हो जगमग

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हिन्दुस्तान (झेलम तट, राजबाग – 07 जून 1969)

|| हिंदुस्तान || (झेलम तट स्थित राजबाग से 07 जून 1969 को) कितना महान प्यारा हिन्दुस्तान है | नागराज कि ऊँचाई देशाभिमान है ||

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वाह रे कैसी है सरकार

| | वाह रे कैसी है सरकार | | रोज उखड़ती पटरी है पर बुलेट ट्रेन तैयार, वाह रे कैसी है सरकार, डीजल-पेट्रोल लेने

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क्षणिकाएं : ०४

|| भगवान || भगवन इस संसार के कण-कण में तुम व्याप्त हो. सर्वव्यापी, अंतर्गामी, फिर भी पहुँच के पार हो. मैं वियोगी, प्रेमाभाव में

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क्षणिकाएं : ०३

|| कर्मयोगी || दु:सह्य वेदना, असाध्यप्राय कार्य, श्याह लक्ष्य, निष्फल चेष्टा. शून्य प्रतिफल, व्यथा तेरे अंतर्मन की. हे! प्राण प्रतिष्ठित, किंचित न हो व्यथित,

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क्षणिकाएं : ०२

|| वसुंधरा || सरस बरस रे मेघ तू, के रसहीन धरा हुई. न ओज है, न तेज है, असुध वसुंधरा हुई. कहाँ गई, मृदा

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क्षणिकाएं : ०१

|| यौवन || आरूढ़ रश्मि रथ पे, नवजीवन की किरण. प्रफुल्लित मन मृदुल, तृप्त अनावृत यौवन. उच्छृल नदी प्रतिविम्बित, समृद्ध रवि रक्त कण. समीर

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अंतर्मन (१९६०)

|| अंतर्मन || अंतर्मन का सोया विषाद, क्यों चिल्लाता है बार-बार. भगवान बोल, होता कैसा? जिस बेटे का लुट गया प्यार. माँ-बाप हेतु बालक

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