हजारीबाग में कवि गोष्ठि और परिचर्चा

राष्ट्रीय कवि संगम के रामगढ़ जिला के सदस्यों द्वारा हजारीबाग में कवि गोष्ठि और परिचर्चा

राष्ट्रीय कवि संगम ,झारखंड के महासचिव श्री सरोज झा ,रामगढ़ जिला के संयोजक श्री राज रामगढ़ी ,रामगढ़ जिला के अध्यक्ष श्री राकेश नाजुक की उपस्थिति मे राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, हजारीबाग में राष्ट्रीय कवि संगम की हजारीबाग की गोष्ठी सह परिचर्चा का आयोजन किया गया ! इस गोष्ठि में रामगढ़ जिला के वरिष्ठ कथाकार श्री चंद्रिका ठाकुर देशदीप की गरिमायी उपस्थिति से माहौल बहुत सुंदर बन गया !

इस अवसर पर हजारीबाग के शशि बाला जी को उनकी पुस्तक के लिए सम्मानित किया गया,,गोष्ठी में काब्य पाठ करने वालो में पूनम त्रिवेदी, शम्पा बाला, अनिता महतो, अमित मिश्रा आदि शामिल थे, राकेश नाजुक ने अपने गीत से सबको मोहित किया वही श्री देशदीप ,श्री राज रामगढ़ी ने अपनी रचनाओ से सबका मन जीत लिया, सरोज झा ने अपनी रूहानी गजलों से सबको मोहित कर दिया ,,,गोष्ठि के बाद सर्वाम्मति से मोना बग्गा जी को को हजारीबाग जिला अध्यक्ष और अनंत ज्ञान को जिला महासचिव चुना गया !
इस अवसर पर महाविद्यालय के व्याख्याता डॉ मनोज कुमार ने भी अपने विचार रखे ,!

विष्णुगढ़ में हुआ कवि सम्मेलन : राकेश नाजुक हुए सम्मानित

उत्सव : मांडू विधायक जयप्रकाश भाई पटेल जी का जन्मदिन का अवसर
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विष्णुगढ़ के प्लस टू इंटर कॉलेज में कवियत्री और समाजसेविका श्रीमती अनिता महतो जी के द्वारा काव्यवर्षा नाम से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया ! ये काव्यवर्षा मांडू के विधायक श्री जयप्रकाश भाई पटेल जी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर किया गया ! आयोजन में बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता ,मूक नाटक, नृत्य प्रतियोगिता के साथ साथ कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया !

आयोजन समिति के सदस्यों ने विधायक जी का स्वागत बुके देकर और माला पहनाकर किया ! इस शुभअवसर पर रामगढ़ जिला के उभरते गीतकार राकेश नाजुक ने अपने गीतों से दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया,,राकेश के गीत ख्वाब है प्रीत है गीत संगीत है को लोग साथ साथ पढ़ रहे थे ! राकेश नाजुक ने विधायक जी की माँ के सम्मान में एक मुक्तक * माँ की आंखों में जब भी उतरता हूँ मैं ,,खौफ से एक पल भी न डरता हूँ मैं * पढ़कर सबका मन जीत लिया ,,कार्यक्रम का समापन विधायक जी के हाथों केक काटकर हुआ ! साथ ही सभी कवियों के साथ साथ राकेश नाजुक जी को विधायक जी ने मोमेंटो और उपहार देकर सम्मानित किया !

बाहर से आए कवियों में अनन्त महेंद्र,अजय धुनि,रेणु मिश्रा,अशोक गुप्ता ,पुष्कर राज,अनंत ज्ञान, नितेश सागर,रविन्द्र रवि ने भी अपनी रचनाओ से शमा बांधा,सभी ने अनिता महतो जी के द्वारा उठाए गए इस कदम की खूब प्रंशसा की !

देश मना रहा वूमन डे

वाह रे दुनिया तेरी कहानी
मेरा दुख और मेरी जवानी
रो-रो कर जगती मे राते
यही हकीकत हे जग जाने।

वाह रे दुनिया पोस्ट बनाया
नारी को शक्ति दिखलाया
कह गए झूठ अपनेपन की
और न जाने कितने सपने दिखलाया।

अब भी मै अभियान बनी हूँ,
अब भी झूठी शान बनी हूँ,
तुमने हर वक्त जो कुचला है,
उस पल से अंजान रही हूँ.

वाह रे दुनिया तेरी कहानी,
तुमने ये त्योहार मनाया,
तुमने खबर हजार बनाया
कभी मे लुटि बीच सड़कों में,
तो कभी अपनो ने धमकाया.

सोचा था मैं साथ चलूंगी,
हक अपना अब बांट चलूंगी,
पर तुमने कुछ और दिखाया,
क्यो हकीकत को झुठलाया?

नारी का सम्मान करो,
उनके हक की पहचान करो
न बातो से कुछ होना है,
अब सभी को एकजुट होना है।

अब न कोई सवाल उठेगा….
न इंसाफ का दरवाजा पिटेगा….
जो कुचलने हमें आगे आये….
उसे नारी शक्ति का रुप दिखेगा…. ”

पूरा भारत पोस्ट घुमाया
आखिर क्यों नारी को
अच्छी “बहु” नहीं बताया.

अब आगे सोचने का काम आप सभी का है,
महिला दिवस के अवसर पर सभी को बधाई।

राष्ट्रीय कवि संगम धनबाद जिला इकाई द्वारा राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन

दिनांक 21 जनवरी 2018 को आई.एस.एम. धनबाद में राष्ट्रीय कवि संगम धनबाद जिला इकाई द्वारा राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें झारखंड के कुल 108 कवि गणों ने भाग लिया. राष्ट्रीय कवि संगम प्रायः ही ऐसे आयोजनों द्वारा राष्ट्र जागरण का पावन कार्य करता है. युवा और विशेष कर नवोदित कवियों की काव्य शक्ति के बल प्रदान कर उनको संयोजित करने का यह कार्य वास्तविकता में एक सराहनीय कार्य है. इसी क्रम में एक और कड़ी जोड़ते हुए विगत 21 जनवरी को धनबाद में एक और आयोजन किया गया.

इस कवि सम्मलेन में बोकारो जिला इकाई के सम्मानित कवियो ने भी भाग लिया. आयोजन की समाप्ति पर विभिन्न कवियों को उनकी प्रस्तुति एवं रचनाओं के लिए सम्मानित भी किया गया. सम्मेलन में हास्य , श्रृंगार, और वीर रस की कविताओं के साथ साथ देश भक्ति, समाजिक, शिक्षा, बेटी बचाओ और जनजागरण जैसे महत्वपूर्ण और गंभीर मुद्दों पर आधारित कविताओं का पाठ विभिन्न कवियों द्वारा किया गया. राष्ट्रीय कवि संगम झारखण्ड इकाई के प्रांतीय सचिव राजेश पाठक की प्रस्तुति “घर न चाहिए न कोई द्वार चाहिए, देश को ऊंचाईयों का ज्वार चाहिए” कविता को काफी सराहना मिली.

राष्ट्रीय कवि संगम बोकारो जिला इकाई के अध्यक्ष डॉ. श्याम कुमार भारती की “टूटे रिश्तों में जान बाकी हो अगर, प्यार से सींच कर अब हरा कीजिये” आपसी, पारिवारिक और सामाजिक संबंधों पर आधारित कविता काफी सराही गई. बताते चलें कि डॉ. श्याम कुमार भारती राष्ट्रीय कवि संगम के बोकारो इकाई में अध्यक्ष पद पर रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के क्रम को आगे बढाते हुए अपने आस-पास के क्षेत्रों में नवीन कवियों को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य भी कर रहे हैं. फुसरो से इस कवि सम्मलेन में भाग लेने वाले अन्य कवियों में सुनील सिंह, नरेन्द्र प्रताप सिंह, विद्या भूषण मिश्रा एवं टी. डी. नायक प्रमुख थे.

फुसरो में होगा अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का आयोजन

कवि सम्मलेन के बारे में बताते आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ.श्याम कुंवर भारती (दायें) और महासचिव नितेश सागर
कवि सम्मलेन के बारे में बताते आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ.श्याम कुंवर भारती (दायें) और महासचिव नितेश सागर

दिनांक ०९.१२.२०१७ को संध्या ५ बजे से बेरमो प्रखण्ड के बहुउद्देशीय भवन में राष्ट्रीय कवि संगम बोकारो जिला इकाई और महिला कल्याण समिति ढोरी के सौजन्य से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा. राष्ट्र जागरण को लेकर आज की पीढी को नई चुनौती से अवगत कराने का उद्देश्य है, कई राज्यों से कुल १४ कवियों द्वारा काव्यपाठ किया जायेगा.

उपरोक्त जानकारी देते हुए आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ.श्याम कुंवर भारती और महासचिव नितेश सागर ने कहा कि इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में भोपाल के विजय गिरी, कानपुर की अनीता वर्मा, पंजाब के दिनेश देवगगढ़िया, दिल्ली से पंकज झा, रामगढ़ के राकेश नाजुक, सरोज कान्त झा, धनबाद के मुकेश आनंद, बसंत जोशी, राहुल कुमार, पटना से समीर परिमल, रांची से सीमा तिवारी सहित कुल १४ कवि और कवयित्री भाग लेंगे.

इस कवि सम्मलेन को इस क्षेत्र के लिए एक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर की संस्था राष्ट्रीय कवि संगम से जुड़े कवियों का इसमें अभूतपूर्व योगदान रहने वाला है. इससे पूर्व भी कई बार विभिन्न संस्थाओं द्वारा इस क्षेत्र की जनता ने कवि सम्मेल्लन का लाभ उठाया है पर इस कवि सम्मलेन की सबसे विशेष बात यह है की युवाओं में राष्ट्र के प्रति सम्मान और प्रेरणा भरने का प्रयास और उद्देश्य के साथ इसका आयोजन किया जा रहा है.

फुसरो ई-पत्रिका अखिल भारतीय कवि सम्मलेन के आयोजकों को इस आदर्श प्रयास के लिए शुभकामना देती है और आशा करती है कि यह आयोजन पूरे कोयलांचल में एक मिसाल कायम करे.

क्षणिकाएं : ०६

उनसे कहा तो, अच्छा नहीं होगा

आज हवाओं का रुख मेरी तरफ है,

सूरज की किरणें भी मेरी तरफ हैं.

आज जुल्फों के साये मेरी तरफ हैं,

आँचल की ओट भी मेरी तरफ है.

नहीं है तो सिर्फ, वो खुशबू नहीं है,

वो तेज, वो झीनापन नहीं है,

मैं हूँ इनका ये हैं मेरे,

भले ही लगे हो,

जितने भी पहरे,

मैं जानता हूँ

वो न हो सकेंगे मेरे,

हों भले किसी और के गिरेबां में,

उनके हाथों के घेरे,

मगर प्यार की हद में,

मुझे है रहना,

पड़े दर्द चाहे

कोई भी सहना,

रुक जाओ हवाओं,

ये उनसे न कहना,

राज की बात है,

राज ही रखना,

उनसे कहा तो, अच्छा नहीं होगा.

: नीरज पाठक

क्षणिकाएं : ०५

|| ये क्या हो रहा सरकार है? ||

कली-कली बहार है,
पायल की झंकार
कहीं धनुष की टंकार है,
मनुज का निज संहार
ये कैसी ललकार है?
गम का अम्बार,
कहीं ख़ुशी का भंडार है|

मौत के आगोश में,
आसमां खामोश है|
दिल में गुबार
और नजर में खुमार है|
कुछ तो बोलिए
ये क्या हो रहा सरकार है?

मस्ती है लुत्फ़ में,
जमती है मुफ्त में|
गजब की ये दोस्ती,
निबह जाये तो यार है|
पर ‘हाँ’ मिल जाये,
तो ही बेड़ा पार है|

शादी में बर्बादी है,
ये जीवन की समाधी है|
क्योंकि फ़िक्र है हमें,
आज कितनी आबादी है|

भलाई है कमाई में,
नहीं धन कि गंवाई में
परेशान हो क्या?
इतने टैक्स की भरपाई में|

नींद नहीं आती, इतने मच्छर हैं काटते,
सब के सब चोर, और कोतवाल को हैं डांटते|
क्या ख़ास, क्या आम,
सबके तलवे रहो चाटते|
‘लूट’ की बन्दर बाँट है,
आओ मिलजुल कर बांटते|

मन कचरे की पेटी,
इसका नहीं है भान|
स्वांग नहीं तो क्या?
ये सफाई अभियान|

लगी है होड़ डिग्री में जीतिए,
मिले गर डिग्री, नौकरी तो दीजिए|
अरे आफत है समाधान,
आप ही कीजिए|

सड़ी हुई व्यवस्था में,
दुर्गन्ध की भरमार है,
क्या-क्या मैं तुम्हें बताऊँ,
किसको क्या दरकार है|
अरे अब भी तो बोलिए
ये क्या हो रहा सरकार है|

: रचना :-
: रविन्द्र कुमार ‘रवि’ :
शिक्षक, कवि एवं संगीतज्ञ
नया रोड, फुसरो.

यह समर आज अंतिम होगा

यह समर आज अंतिम होगा
……………………………….
यह समर आज अंतिम होगा

मत सोच कि यह मद्धिम होगा

मिट जाएगा अब सब अंतर

हर भय होगा अब छू-मंतर

हर दिशा आज संवाद करे

हर क्षण हर पल अनुनाद भरे

बिछड़े का होगा आज मिलन

बिन ब्याही बने नहीं दुल्हन

अब नहीं हो रही है हानि

सब दूर हो रही मनमानी

अब हुआ तिरोहित सब शोषण,

हर गांव-गली है अब रोशन

अब हो अमीर या हो गरीब

इक दूजे के होते करीब

जो भ्रष्ट बने सत्ताधारी, सिंहासन अब उनका डोले

जो बन बैठे थे मूक मगर, अब वे भी अपना मुंह खोले

अब अच्छे लोग चुने जाते

वो सबकी आज सुने जाते

अब सब मिलकर सब बाँट रहे

गहरी नींदे, ना खाट रहे

तौलें भी, अब ना बाट रहे

सबकी अब अच्छी ठाट रहे

अब कोई न बंदरबांट करे

सब अपनी-अपनी घाट रहे,

जो सोते आज बिना रोटी उनके घर आज सने आटा

दुःख दर्द भी अब इक दूजे का है मिलकर के सबने बाँटा।

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राजेश पाठक
प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक
गिरिडीह सदर प्रखंड

आओ एक दीप जला जाओ!

आओ एक दीप जला जाओ
……………………………….
तुम बनो आज अब उद्दीपक

तुम हो तो जल पाए दीपक

तुम हो तो दूर अंधेरा हो

जगमग प्रकाश से डेरा हो

मैं तुझे ही दीपक मान रहा

तू सदा जले यह ठान रहा

तुझमें घी बाती भरता हूँ

अब हो बयार ना डरता हूँ

तुम मंद – मंद ही जला करो

जलते – जलते भी भला करो

पर कभी – कभी मन डोल रहा

अंदर – अंदर ही बोल रहा

क्यों जले दीप ना हो प्रकाश

क्यों ज़िंदा पर ना चले सांस

यह सब वायु का दोष रहा

जो त्याज्य रहा सब पोस रहा

पहले वायु को शुद्ध करो

हो सके तो उससे युद्ध करो

जब शुद्ध पवन हो जाता है

सब अंधकार खो जाता है

दीपक की आयु बढ जाती

गिरती लौ भी तब चढ जाती

हो अंधकार जितना भी घोर

तब काली रात भी लगे भोर

दीपक की यही कहानी है

यह कर्ण -दधिचि -दानी है

खुद जलकर भी ना जलता है

औरों की तरह ना छलता है

अब हो अमीर या हो गरीब

दीपक -प्रकाश सबके करीब

यह सबके साथ करे प्रीति

है इक समान इसकी ज्योति

यह हर घर जगमग करता है

इसके मन ठग ना रहता है

आओ एक दीप जला जाओ

भारत की शान बढा जाओ.

……………………………….
राजेश कुमार पाठक

प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक
सदर प्रखंड, गिरिडीह.

हिन्दुस्तान (झेलम तट, राजबाग – 07 जून 1969)

|| हिंदुस्तान ||
(झेलम तट स्थित राजबाग से 07 जून 1969 को)

कितना महान प्यारा हिन्दुस्तान है |
नागराज कि ऊँचाई देशाभिमान है ||

कश्मीर भारत वर्ष का शाश्वत ईमान है |
इस पर न्योछावर तन-मन अनमोल प्राण है ||

पावन पवित्र नदियाँ उपवन हरे भरे हैं |
भारत के स्वर्ग में आकर अभी खड़े हैं ||

इस पर नजर दुश्मन की लगने नहीं देंगे |
हो तोप अथवा बन्दूक दगने नहीं देंगे ||

कहती कथा रामायण जीवित पुराण है |
या वेद ज्ञान उपनिषद मुरली की तान है ||

संसार कि संवेदना का कोष है भारत |
सत्य अहिंसा का उद्घोष है भारत ||

संतरी यहाँ हजारों कर्मठ जवान हैं |
मोती उगाने वाले कर्मठ किसान हैं ||

बहती विमल गंगा गीता प्रमाण है |
कर्म कि कुशलता का भारत प्रमाण है ||

लिप्सा नहीं है इसको विस्तारवाद की |
राह इसकी एक है समाजवाद की ||

युद्ध से नफरत इसे है सत्य मानिये |
ललकार पर तैयार है यह सत्य जानिए ||

डरता नही धमकियों से काल है भारत |
लड़ता नही किसी से कमाल है भारत ||

‘भूदेव’ का सदा से बस एक ध्यान है |

कितना महान प्यारा हिन्दुस्तान है ||

: पं. हरिश्चन्द्र पाठक ‘भूदेव’,
पूर्व आचार्य राम रतन उच्च विद्यालाय, ढोरी