क्षणिकाएं : ०५

|| ये क्या हो रहा सरकार है? || कली-कली बहार है, पायल की झंकार कहीं धनुष की टंकार है, मनुज का निज संहार ये

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दिल टूट के गिरा यूँ!

|| दिल टूट के गिरा यूँ ||   दिल टूट के गिरा यूँ, मिट्टी का हो खिलौना | फूलों से भी था नाजुक, काँटा

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बस यूँ ही! – ०१

आज-कल-परसों, बीत गए बरसों | आप के वादों का हिसाब नहीं || कितनी मुश्किल में हाय मेरा दिल है | और फुरसत में थे

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क्षणिकाएं : ०४

|| भगवान || भगवन इस संसार के कण-कण में तुम व्याप्त हो. सर्वव्यापी, अंतर्गामी, फिर भी पहुँच के पार हो. मैं वियोगी, प्रेमाभाव में

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क्षणिकाएं : ०३

|| कर्मयोगी || दु:सह्य वेदना, असाध्यप्राय कार्य, श्याह लक्ष्य, निष्फल चेष्टा. शून्य प्रतिफल, व्यथा तेरे अंतर्मन की. हे! प्राण प्रतिष्ठित, किंचित न हो व्यथित,

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क्षणिकाएं : ०२

|| वसुंधरा || सरस बरस रे मेघ तू, के रसहीन धरा हुई. न ओज है, न तेज है, असुध वसुंधरा हुई. कहाँ गई, मृदा

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क्षणिकाएं : ०१

|| यौवन || आरूढ़ रश्मि रथ पे, नवजीवन की किरण. प्रफुल्लित मन मृदुल, तृप्त अनावृत यौवन. उच्छृल नदी प्रतिविम्बित, समृद्ध रवि रक्त कण. समीर

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मैडम आंगनबाड़ी के मस्टराईन सेवा में इनकर लागल रहीला

मैडम आंगनबाड़ी के मस्टराईन सेवा में इनकर लागल रहीला म्यूजिक मंच की प्रस्तुति, मैडम आंगनबाड़ी के मस्टराईन भोजपुरी के सदाबहार गीतों पर फिल्माए गए

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माय धन खा के सधाय दिहलू आज समियाना हिलाय दिहलू

माय धन खा के सधाय दिहलू आज समियाना हिलाय दिहलू माय धन खा के सधाय दिहलू, भोजपुरी ठिठोली, रवि कुमार एवं साथी अभिनीत, भोजपुरी

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ढीला बा पाटी ढीला बा पावा काहे तबाह कैले बानि रावा

ढीला बा पाटी ढीला बा पावा काहे तबाह कैले बानि रावा ढीला बा पाटी ढीला बा पावा, भोजपुरी ठिठोली, रवि कुमार एवं साथी अभिनीत,

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