कविता

हिन्दुस्तान (झेलम तट, राजबाग – 07 जून 1969)

|| हिंदुस्तान || (झेलम तट स्थित राजबाग से 07 जून 1969 को) कितना महान प्यारा हिन्दुस्तान है | नागराज कि ऊँचाई देशाभिमान है || कश्मीर भारत वर्ष का शाश्वत ईमान है | इस पर न्योछावर तन-मन अनमोल प्राण है || पावन पवित्र नदियाँ उपवन हरे भरे हैं | भारत के …

कविता

अंतर्मन (१९६०)

|| अंतर्मन || अंतर्मन का सोया विषाद, क्यों चिल्लाता है बार-बार. भगवान बोल, होता कैसा? जिस बेटे का लुट गया प्यार. माँ-बाप हेतु बालक रोता, भगवान स्वर्ग में सोता है. दुःख जलनिधि में लगता गोता, शैशव धरती पर सोता है. चिंतित जीवन, धूमिल प्रभात, समता पर भीषण वज्रपात. रहता है …

कविता
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मित्रों का अलबम

|| मित्रों का अलबम || जीवन के बने अनेक चित्र, कुछ नए-पुराने कुछ विचित्र. मेरे अनेक मुंहलगे मित्र, दिल की खूँटी पर टंगे मित्र. कुछ भूल गए थे वे विचित्र, कुछ लगते है अबतक सचित्र. मिलता लेकर अरमान मित्र, झिलमिल होती पहचान मित्र. जीवन यौवन जंजाल मित्र, ‘भूदेव’ हुआ कंगाल …

नाटक

नाटक : भाग – २

दृश्य-दूसरा (नवल और प्रकाश आपस में बातचीत करते आ रहे हैं) नवल – प्रकाश! हमलोग चार हैं. मैं, तुम विमल और कमल. हमलोगों ने एक साथ विद्याध्ययन किये. सम्प्रति हमलोगों की हालत बिलकुल दयनीय है. पारिवारिक दिक्कतें जल प्रवाह कि भांति हमलोगों की ओर बढती आ रही हैं. हमलोगों के …

नाटक
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नाटक [ दृश्य – ०१ ]

नाटक [ दृश्य-०१ ] पर्दा उठता है. मकान विमल का (फूस का घर है, घर कि दीवारें चिकनी मिट्टी से पुती हैं. सर्वत्र स्वच्छता है. गन्दगी का कहीं नामो निशान नहीं. इसी घर में विमल एक दूसरी चटाई पर बैठा कुछ सोच रहा है. तभी कमल का प्रवेश कर रहा …