निरंतर विधुत आपूर्ति के लिए प्रयास तेज

केंद्र सरकार द्वारा प्रयोजित पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत शेष बचे सभी गाँव व टोला मे यथा शीघ्र विधुतीकरण किया जायेगा और विधुतीकरण किये गये स्थानों पर पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत विधुतीकरण का बोर्ड लगना तथा संबधित क्षेत्र के सांसद से उदघाट्न व शिलान्यास अनिवार्य रुप से सुनिश्चित कराने के लिए विधुतीकरण करने वाली ऐंजेसी को निर्देश दिया जायेगा.

सातों दिन चौबीस घंटे विधुत आपूर्ति  हो इसके लिए सरकार कृत संकल्प है, इसलिए विधुत की पर्याप्त आपूर्ति के लिए गिरिडीह संसदीय क्षेत्र सहित झारखंड के सभी स्थानों पर लगाये गये ट्रांसफर्मरों की क्षमता वृद्धि के लिए उच्च क्षमता का ट्रांसफर्मर लगाया जायेगा.

खराब पड़े सोलर लाइट को मरम्मत कराने के लिए सरकार विचार करेगी, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के मामले का यथाशीघ्र निपटारा कर पावर ग्रिड के द्वारा बनाये जा रहे ग्रिड और उप-केन्द्रों के निमार्ण में गति लायी जाएगी, पावर प्लांट का निर्माण के लिए पावर फाईनेंस कॉरपोरेशन से ऋण लेकर प्लांट निमार्ण मे विलंब करने वालों पर कठोर कारवाई किया जायेगा.

उपरोक्त अश्वासन ऊर्जा पर संसद की स्थाई समिति के अध्यक्ष डॉ. कम्बम हरि बाबू ने विगत बुधवार को समिति की बैठक मे समिति के वरिष्ठ सदस्य सह गिरिडीह सांसद रवींन्द्र कुमार पाण्डेय की माँग पर जवाब देते हुए कहा- उन्होंने यह भी कहा की बंद पड़े डीवीसी की पुरानी इकाइयों को चालू कराने और डीवीसी को कोयला की कमी दूर करने हेतू प्रयास किया जा रहा है, जबकि  बैठक मे उपरोक्त माँग करते हुए सांसद रवींन्द्र कुमार पाण्डेय का कहना था कि, सभी स्थानों पर आबादी और विधुत के उपभोक्ताओं मे भारी वृद्धि हुई है, इसलिए सभी ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि होना चाहिए, पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना केन्द्र प्रयोजित अति महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, लेकिन उक्त योजना का बोर्ड नही लगा कर संवेदक मनमानी कर रहे है तथा विपक्ष के लोग श्रेय लुटना चाहते है.

खराब पड़ें सोलर लाइट के मरम्मत का प्रावधान नही होने के कारण केन्द्र सरकार के द्वारा 75% राशि अनुदान देने के बावजूद भी जनप्रतिनिधियों की रुचि सोलर लाईट लगाने मे नही है, पावर ग्रिड के कार्य मे शिथिलता के कारण ससमय विधुतीकरण के लिए सरकार के द्वारा निर्धारित लक्ष्य प्रभावित हो रहा है, पावर फाईनेंस कॉरपोरेशन से ऋण लेने के लंबे समय बाद भी अनेक निजी संस्थानों के द्वारा नया पावर प्लांट नही लगा कर ऋण की राशि का अन्य मद मे उपयोग किया जा रहा है.

कोयला की कमी के कारण डीवीसी के अनेक प्रतिष्ठानों मे क्षमता से कम उत्पादन किया जा रहा है, तथा बंद पुरानी इकाइयों को चालू करने मे बाधा उत्पन्न हो रहा है, बैठक मे मुख्य रुप से समिति के दर्जनों सदस्य सह सांसद के अलावा ऊर्जा सचिव, अपर सचिव, पावर फाईनेंस कॉरपोरेशन, आर.ई.सी, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के चेयरमैन और ऊर्जा मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे|­

निष्कर्ष :

कुल मिलकर कहा जा सकता है कि प्रयास सभी क्षेत्रों में होने से ही सफलता की आशा की जा सकती है. न सिर्फ ट्रांसफ़ॉर्मरों की क्षमता बल्कि विद्युत उपभोक्ताओं को इसके बचत के प्रति जागरूक बना कर भी इसके उत्पादन और वितरण पर समुचित और सकरात्मक प्रभाव डाला जा सकता है, सिर्फ ठेकेदारों और डीवीसी और नयी योजनाओं के क्रियान्वयन के भरोसे रहना और यह आशा करना कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह संभव हो सकेगा दूर का ढोल ही जान पड़ता है.

चाहे जो भी हो प्रयास करते रहने से ही सफलता मिलेगी, यही सत्य है. और इन सब बातों की जिम्मेवारी हमें भी लेनी होगी, कि हम बिल देते हैं इसका यह मतलब नहीं कि हम बिजली का दुरुपयोग करें. 

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