आज का विचार मंथन : रविन्द्र कुमार “रवि”

मित्रों!इस लेख से पहले, मै यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ, कि मैं किसी की भी भावनाओं को ग्रसित कर, उसे आहत करने का उद्देश्य नही रखता । मै सिर्फ एक साहित्यकार के धर्म का निर्वहन करने का लघु-प्रयास कर रहा हूँ । अपने इस लेख के माध्यम से आज के डरे, सहमे, भीरू महापुरुषों को आइना दिखाने की कोशिश मात्र है ।

विगत कुछ दिनों से ये ड्रामा ज़ोर शोर से चल रहा है, धर्म-निरपेक्षता व धर्मांधता का —सुपर हिट, थ्री डी ड्रामा, जिसे देखने के लिए, एक ख़ास प्रकार के राजनैतिक चश्मे की आवश्यकता पड़ती है । मुम्बई-प्रवास के दौरान, जब मै संघर्ष के दौर से गुजर रहा था,मेरे मुस्लिम-मित्र, जो मेरे शुभ चिंतक थें, वहाँ के कुछ खास इलाकों मे ले जाने से बचते थें और सतर्क भी करते रहते थें । थोड़ा होशियार रहना भाई!यह मिनी पाकिस्तान है,यहाँ बहुत खतरा है,यहाँ कट्टर-पंथियो का झुंड है,कोई पुछे तो,मुस्लिम नाम बताना ।
बेचारे मित्र थें, मेरी सुरक्षा की चिंता स्वाभाविक थी ।

कलकत्ता-प्रवास के दौरान भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही । अब समझ मे नही आता ,जब तथाकथित इन मिनी पाकिस्तान वालों का इतना ही ख़ौफ़ था ,तो तब किसी हिन्दू ने अपने डर का इतने ज़ोर शोर से प्रचार, प्रसार क्यों नहीं किया, ना किसी ने टी0वी0 पर बैठ कर डिबेट की,ना किसी तथाकथित बुद्धिजीवी ने अवार्ड लौटाया और ना ही किसी राज नेता को कोई दर्द हुआ । कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा पर भी किसी को कभी तरस नही आयी । देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों में ऐसे अनेक घटनाएं होती रही हैं, जहाँ अपने हीं देश मे डर के साए मे लोग जीते आ रहे थें । तब किसी मीडिया, राजनेता, या इन प्रबुद्ध जनों की तंद्रा भंग नही हुई । है ना कमाल की बात?

मित्रों! हर तबके मे कुछ प्रबुद्ध वर्ग हैं, बस! उन्हें पहचाने और राष्ट्र तथा समाज के हित मे अपनी सोच को समृद्ध करते हुए, इन राजनैतिक, देश, समाज द्रोही षड्यंत्रकारियों के सता-लोलुप्तता के फन को कुचल कर इस राष्ट्र को सुरक्षित रखने मे अपना बहुमूल्य योगदान दें,क्योंकि यह देश हम सब का है ।

जय हिंद ।