राष्ट्र भक्ति और हम

शीर्षक के माध्यम से अपनी बात कहने की आजादी चाहता हूँ। राष्ट्र और राष्ट्र भक्ति को हम में से हर एक के जीवन में प्रथम स्थान प्राप्त है, इसमें कोई संदेह नहीं है। पर इसे प्रर्दशित करने के अपने-अपने तरीके हैं। जिस तरह एक सैनिक सीमा पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपनी राष्ट्र भक्ति प्रर्दशित करता है ठीक उसी तरह एक कवि अपनी कविताओं के माध्यम से, लेखक अपने लेखों के माध्यम से, कलाकार, साहित्यकार व इन जैसे ही सभी अपनी-अपनी विधाओं के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपनी सच्ची कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

इनमें से किसी के बारे यह आकलन किया जाना कि कौन अपने देश के लिए ज्यादा वफादार अथवा समर्पित है, कौन नहीं, सर्वथा अनुचित है। कौन राष्ट्र भक्ति की दौड़ का स्वर्ण पदक विजेता है, इसके निर्णय की कौन से सर्वमान्य सिद्धांत है, पता नहीं। हमारे देश की भी अजीब विडंबना है। बहुत कम ही ऐसे मौके आते हैं जब एक सही विषय के पक्ष में अथवा सही विषय के लिए लोग आंदोलन करते हैं। समय समय पर कुछ स्व्यंभू कबिलाई किस्म के नेता उभरते हैं और हमारी सोच और विचार की सांझी विरासत के साथ जम कर खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं। इनके आयोजित तमाशे में कुछ भीड़ भी होती है जो इनके अनुसार समर्थक होते हैं। इन्हीं तथाकथित समर्थकों की भीड़ इनके आयोजन की सफलता अथवा असफलता की कहानी बयां करती है।

यह बात जब मैंने अपने एक मुसलमान दोस्त से पूछी तो उसने बेबाकी से अपनी बात कही। उसने कहा कि बंटवारे के समय जब हम में से हर एक के पास यह विकल्प मौजूद था कि हम कहां जाएं, हमने इसी माटी में दफ़न होने का विकल्प चुना। वह भी इसलिए कि हमें अपने भाईयों पर जो हिन्दू थे, खुद से ज्यादा भरोसा था। मुझे उसके कथन में सच्चाई की झलक दिखाई दी। लोग चाहे जितना जोर लगा दें, चंद फिरकापरस्त लोगों की नापाक कोशिश हमारे विश्वास की डोर टूटने नहीं देगी।

फुसरो ओवरब्रिज पर हो सकता था बड़ा हादसा, पलटा ट्रक

राकेश मिश्रा की स्पेशल रिपोर्ट :

बीते देर रात निर्मल महतो चौक से होते हुए डुमरी की ओर जाने के क्रम के 2mm टी.एम.टी. से लदा एक अशोक लीलैंड ट्रक (नंबर RJ-19-GF-2087) जैसे ही ओवरब्रिज पर चढ़ा और चढ़ते ही मुड़ा, वह पलट गया और सरिया के कुछ छल्ले हाई मास्ट लाइट के पास जा गिरे, ट्रक तो लटक गया पर नीचे भीड़ नहीं थी इसलिए बस एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया.

समाचार लिखे जाने तक दामोदर नदी हिंदुस्तान पुल से लेकर पूरे नया रोड और उधर ओवरब्रिज पार चपरी तक भयंकर जाम की स्थिति बनी है प्रशासन की मुस्तैदी बनी है और एम्बुलेंस को रास्ता दिया जा रहा है. क्रेन की सहायता से एक-एक कर सरिया के छल्लों को नीचे किया जा रहा है, ट्रक को हटाने की कवायद जारी है, पर ट्राफिक खुलने कुछ वक्त लग सकता है.

हो सकता था बड़ा हादसा. फुसरो का यह इलाका काफी भीड़-भाड़ वाला होता है, प्रायः ही यहाँ से बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ और भारी वाहनों का आवागमन बदस्तूर जारी रहता है, ऐसे में कभी भी इस प्रकार का हादसा हो सकता है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है. चढ़ाई पर तेजी से बिना अपना पिकअप खोये चढ़ने के क्रम में और तेजी में मुड़ने के कारण हुआ यह हादसा.

शुरू से ही इस ओवरब्रिज की इंजीनियरिंग को लेकर सवाल उठते रहे हैं, कि इसकी ड्रापिंग सही नहीं है. पर हमारे कंस्ट्रक्शन करने वाली कंपनी को इससे क्या मतलब जैसे-तैसे मार्च तक कोटा पूरा करना था इसलिए आनन फानन में ओवरब्रिज पूरा कर डाला. भीड़-भाड़ होने से बड़ी गाड़ियों की रफ्तार काम ही रहती है तो अब तक आसानी से काम चलता आया. पर इन दिनों इस मार्ग पर आवाजाही बढ़ी है. यह सड़क N.H.-2 G.T. Road से जुड़ी रहने के कारण इस पर अवागमन बहुत ही ज्यादा है.